अमेरिकी Food and Drug Administration की सलाहकार समितियों में रोगी और उपभोक्ता प्रतिनिधियों का उद्देश्य जटिल नियामक चर्चाओं में जनता का दृष्टिकोण लाना है। एक नई समीक्षा ने उनकी स्वतंत्रता पर सवाल उठाए हैं और पाया कि कई प्रतिनिधि ऐसे रोगी वकालत संगठनों से जुड़े थे जिन्हें दवा उद्योग से धन मिलता था।

Health Affairs Scholar में प्रकाशित अध्ययन ने 2013 से 2022 तक 12 FDA सलाहकार समितियों की लगभग 240 बैठकों की जांच की। लगभग 40% बैठकों में कम-से-कम एक ऐसा प्रतिनिधि था जिसका फार्मा-वित्तपोषित संगठन से सक्रिय संबंध था। दवा-समीक्षा की हर दस बैठकों में एक में प्रतिनिधि उस कंपनी द्वारा समर्थित संगठन से जुड़ा था जिसकी दवा की समीक्षा हो रही थी।

सलाहकार पैनल और सार्वजनिक प्रतिनिधित्व

FDA सलाहकार समितियां वैज्ञानिक, चिकित्सा और नीतिगत प्रश्नों पर बाहरी सलाह देती हैं। रोगी और उपभोक्ता प्रतिनिधियों का उद्देश्य प्रभावित लोगों के अनुभव और चिंताओं को चर्चा में शामिल करना है।

लेखक यह नहीं कहते कि वित्तीय संबंध अपने-आप पक्षपात साबित करते हैं। चिंता यह है कि इन संबंधों से उद्योग का प्रभाव पैदा हो सकता है, जिसे जनता और कभी-कभी FDA भी पहचान नहीं पाता।

प्रमुख लेखिका Genevieve Kanter ने कहा कि इन निष्कर्षों से यह जांचने की जरूरत पैदा होती है कि ऐसे संबंध समिति की चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं या नहीं।

समीक्षा में क्या मिला

शोधकर्ताओं ने एक दशक में 12 FDA समितियों की बैठकों की समीक्षा की। औसतन हर बैठक में एक रोगी और एक उपभोक्ता प्रतिनिधि शामिल था। त्वचा और आंखों से संबंधित पैनलों को छोड़कर हर समिति में कम-से-कम एक बैठक ऐसी थी जिसमें फार्मा-वित्तपोषित वकालत समूह से जुड़ा रोगी प्रतिनिधि था।

हृदय और गुर्दे की दवाओं वाली समितियों में ऐसे रोगी प्रतिनिधि वाली बैठकों का अनुपात सबसे अधिक, 52%, था।

  • तंत्रिका-तंत्र दवा समितियां: 89% बैठकें।
  • जठरांत्र दवा समितियां: 67% बैठकें।
  • हृदय और गुर्दे की दवा समितियां: 61% बैठकें।
  • गठिया दवा समितियां: 53% बैठकें।

ये आंकड़े शोधकर्ताओं द्वारा पहचाने गए संबंधों का वर्णन करते हैं; वे यह साबित नहीं करते कि किसी प्रतिनिधि ने वित्तदाता की ओर से काम किया या किसी निर्णय पर उद्योग का प्रभाव पड़ा।

व्यापक वित्तपोषण का संदर्भ

रोगी वकालत समूहों में उद्योग वित्तपोषण आम है। रिपोर्ट के अनुसार 68% रोगी वकालत संगठन और 83% बड़े रोगी संगठन दवा, चिकित्सा-उपकरण या जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों से दान प्राप्त करते हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि हितों के टकराव से बचना कठिन हो सकता है। संगठन कार्यक्रम, शोध और रोगी सेवाओं के लिए कंपनी धन पर निर्भर हो सकते हैं, जबकि उनके प्रतिनिधि स्वतंत्र रोगी दृष्टिकोण देने वाली नियामक प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं।

अध्ययन की चिंता वित्तपोषण जितनी ही पारदर्शिता और शासन से जुड़ी है। संबंधों का लगातार खुलासा न होने पर नियामकों और जनता के पास संभावित हितों का आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं रहती।

FDA प्रक्रिया पर प्रभाव

निष्कर्ष सलाहकार समिति के सदस्यों के चयन, जांच और खुलासे पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित करते हैं। प्रतिनिधि का व्यक्तिगत अनुभव और वकालत ज्ञान फिर भी मूल्यवान हो सकता है।

पारदर्शी खुलासा प्रभाव से जुड़े हर प्रश्न का समाधान नहीं करेगा, लेकिन इससे बिना ज्ञात उद्योग संबंधों वाले प्रतिनिधियों और उद्योग-वित्तपोषित संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच अंतर स्पष्ट होगा।

समीक्षा ने समिति की सिफारिशों या नियामक परिणामों का आकलन नहीं किया। इसका सीमित लेकिन महत्वपूर्ण निष्कर्ष है कि रोगी और उपभोक्ता भागीदारी से जुड़े वित्तीय संबंध अनुमान से अधिक सामान्य और हमेशा स्पष्ट नहीं हो सकते हैं।

दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर निर्णय लेते समय FDA के लिए जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है। रोगी दृष्टिकोण आवश्यक हैं, लेकिन उनके प्रतिनिधित्व से जुड़े संगठनात्मक संबंधों का स्पष्ट विवरण भी होना चाहिए।

यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।

Originally published on medicalxpress.com