पहला पोसाइडन अब दूसरी भूमिका में है

अमेरिकी नौसेना के पहले P-8A पोसाइडन ने एक नई जिम्मेदारी संभाली है, जो एक विमान की लंबी सेवा-आयु जितनी ही बेड़े के बदलाव के बारे में भी बहुत कुछ बताती है। अब तक बना पहला पोसाइडन, जिसे अभी भी T-1 के नाम से जाना जाता है, अब कैलिफ़ोर्निया के Point Mugu स्थित Air Test and Evaluation Squadron 30, यानी VX-30, को सौंपा गया है। इसका नया काम प्रशांत क्षेत्र में मिसाइल परीक्षणों और अन्य रेंज गतिविधियों को समर्थन देना है, जिससे स्क्वॉड्रन को मदद मिलेगी, क्योंकि उसके बचे हुए P-3 Orion विमानों को संभालना लगातार कठिन होता जा रहा है।

यह कदम नौसेना को ऐसे मिशन-समूह के लिए अधिक आधुनिक प्लेटफ़ॉर्म देता है, जो उपलब्धता, दायरे और विश्वसनीयता पर निर्भर करता है। यह यह भी स्पष्ट करता है कि P-3 बेड़े की सेवा-आयु कितनी कम बची है। स्रोत रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना सेवा में अब केवल कुछ ही P-3 विमान बचे हैं, और उन्हें चलाना तथा बनाए रखना लगातार कठिन होता जा रहा है। उस संदर्भ में, एक पोसाइडन को VX-30 में स्थानांतरित करना केवल किसी प्रोटोटाइप विमान को लेकर जिज्ञासा नहीं है। यह परीक्षण और मूल्यांकन कार्यों का समर्थन करने वाले इस स्क्वॉड्रन को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जो सैन्य की कुछ सबसे महत्वपूर्ण रेंजों में काम करता है।

VX-30 क्यों महत्वपूर्ण है

Bloodhounds के नाम से जाना जाने वाला VX-30, Naval Base Ventura County के हिस्से Naval Air Station Point Mugu से संचालित होता है, जो दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के तट पर स्थित है। यह स्थान स्क्वॉड्रन को Point Mugu Sea Range तक सीधी पहुंच देता है, जो नौसेना, अमेरिकी सैन्य की अन्य शाखाओं और रक्षा ठेकेदारों द्वारा मिसाइल परीक्षणों और अन्य मूल्यांकन मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक बड़ा अपतटीय परीक्षण क्षेत्र है।

उन रेंजों को सुरक्षित रखना और परीक्षणों का समर्थन करना एक विशेषीकृत काम है। स्क्वॉड्रन के विमान मुख्य रूप से अग्रिम पंक्ति की गश्त या युद्ध-तैनाती के लिए नहीं होते। वे विकास, सत्यापन और परिचालन परीक्षण का समर्थन करते हैं, और जरूरत पड़ने पर अन्य रेंज परिसरों में भी तैनात किए जा सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि VX-30 के विमान अक्सर प्रशांत क्षेत्र के अन्य स्थानों, हवाई के आसपास, और फ़्लोरिडा के पास अटलांटिक परीक्षण क्षेत्रों में भी काम करते हैं। इससे यह इकाई हथियारों और प्रणालियों के व्यापक कार्य के लिए एक सक्षमकारी शक्ति बन जाती है।

चूंकि ये मिशन बार-बार और भौगोलिक रूप से फैले हुए होते हैं, वे विमान तत्परता पर दबाव डालते हैं। पुराने एयरफ़्रेम वास्तविक सीमाएं ला सकते हैं, खासकर जब रखरखाव कठिन हो जाए और स्पेयर पार्ट्स दुर्लभ हों। इसलिए VX-30 के भीतर प्लेटफ़ॉर्म परिवर्तन का परिचालन प्रभाव कैलिफ़ोर्निया से कहीं आगे तक जाता है।

Members of VX-30 pose in front of the squadron s new P-8A. USN
VX-30 के सदस्य स्क्वॉड्रन के नए P-8A के सामने खड़े हैं। USN

प्रोग्राम टेस्टबेड से ऑपरेशनल सपोर्ट एसेट तक

T-1 विमान ने पहली बार 2009 में उड़ान भरी थी और वर्षों तक पोसाइडन कार्यक्रम का ही समर्थन करता रहा। यही इतिहास इसके पुनः-नियोजन को उल्लेखनीय बनाता है। परीक्षण विमान अक्सर बहुत अधिक उपयोग किए जाते हैं, उन पर अत्यधिक उपकरण लगे होते हैं, या वे अनोखे ढंग से कॉन्फ़िगर किए जाते हैं, लेकिन अपनी मूल विकास भूमिका समाप्त होने के बाद भी वे मूल्य बनाए रख सकते हैं। इस मामले में, नौसेना शुरुआती P-8 को एक व्यावहारिक उपकरण में बदल रही है, जो चल रहे परीक्षण समर्थन मिशनों में काम आएगा।

रिपोर्ट यह भी कहती है कि VX-30 को दूसरा टेस्ट P-8A मिलने वाला है, जिसे अभी T-2 कहा जाता है। इन दोनों कदमों को मिलाकर देखें तो यह एक सोची-समझी योजना लगती है, न कि एक बार का स्थानांतरण। पिछले साल पहले ही बताया गया था कि स्क्वॉड्रन को लंबी दूरी की मिसाइल और अन्य परीक्षणों के समर्थन के लिए दो P-8A मिलने हैं। T-1 का आगमन अब उस परिवर्तन का पहला दृश्य चरण दिखता है।

यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि पोसाइडन Orion की तुलना में काफी नया है और पहले ही नौसेना का मानक समुद्री गश्ती विमान बन चुका है। इसे VX-30 में लाने से घटते P-3 भंडार के कारण पैदा हुए कुछ sustainment दबाव कम होंगे, और टेस्ट सपोर्ट नौसेना की व्यापक विमानन संरचना के अनुरूप होगा।

P-3 Orion का धीमा विदा होना

P-3 Orion की सेवा-आयु लंबी रही है, लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि अब अंतिम चरण कमी और रखरखाव के दबाव से परिभाषित हो रहा है। VX-30 परीक्षण मिशनों के लिए P-3 पर निर्भर रहा है, लेकिन वे विमान अब व्यावहारिक सेवा से बाहर होते जा रहे हैं। स्क्वॉड्रन की जरूरत कोई सैद्धांतिक बात नहीं है। वह नौसेना भर को प्रभावित करने वाली उन्हीं बेड़े-सम्बंधी वास्तविकताओं से जूझ रहा है: जैसे-जैसे पुराने विमान कम होते जाते हैं, उन्हें उड़ाते रहना और भी महंगा तथा कठिन हो जाता है।

यही दबाव Bloodhounds के भीतर अन्य बेड़े-परिवर्तनों का भी कारण बना है। स्क्वॉड्रन KC-130T परिवहन और टैंकर, साथ ही अनोखे NC-20G और NC-37B जेट्स का मिश्रण संचालित करता है। NC-37B को विशेष रूप से स्क्वॉड्रन के NP-3D Orion में से एक के स्थान पर लिया गया था, जो भारी रूप से संशोधित संस्करण है और “Billboard” उपनाम से जाना जाता है। एक P-8 को जोड़ना उसी बड़े आधुनिकीकरण पैटर्न से मेल खाता है।

इस तरह देखें तो T-1 का आना स्क्वॉड्रन की क्षमताओं के व्यवस्थित नवीनीकरण का एक हिस्सा है। नौसेना केवल पुराने एयरफ़्रेम को सीधे एक-के-बदले-एक नए विमान से नहीं बदल रही। वह ऐसी विशेष समर्थन बेड़ा संरचना को नए सिरे से गढ़ रही है, जो मौजूदा मिशन मांगों के लिए अधिक टिकाऊ और उपयुक्त प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित हो।

Some of VX-30 s existing aircraft (from left to right: the NC-37B, a P-3C, and a KC-130T). Katie Archibald/USN
VX-30 के कुछ मौजूदा विमान (बाएं से दाएं: NC-37B, एक P-3C, और एक KC-130T). Katie Archibald/USN

मिशन में P-8 क्या जोड़ता है

स्रोत पाठ VX-30 सेवा के लिए विमान के सटीक कॉन्फ़िगरेशन का विवरण नहीं देता, इसलिए रिपोर्ट की गई भूमिका से आगे कोई दावा करना उचित नहीं होगा। लेकिन उद्देश्य स्पष्ट है: P-8A मिसाइल-परीक्षण गतिविधियों और रेंज संचालन का समर्थन करेगा, और स्क्वॉड्रन को अपने P-3 विमानों की बढ़ती सीमाओं से निपटने में मदद करेगा।

यह अपने-आप में महत्वपूर्ण है। रेंज-समर्थन मिशनों के लिए ऐसे भरोसेमंद विमान चाहिए जो बड़े क्षेत्र को कवर कर सकें और कई प्रतिभागियों वाले जटिल आयोजनों का समर्थन कर सकें। जैसे-जैसे नौसेना और उसके साझेदार प्रशांत क्षेत्र में बार-बार परीक्षण जारी रखते हैं, सेवा में पहले से परिचित और समुद्री गश्ती समुदाय से जुड़े विमान, घटती पुरानी प्रणालियों की तुलना में अधिक स्थिर आधार प्रदान करते हैं।

इसका प्रतीकात्मक अर्थ भी स्पष्ट है। अब तक बना पहला पोसाइडन गुमनामी में सेवानिवृत्त नहीं किया जा रहा। इसके बजाय, इसे भविष्य की प्रणालियों को सक्षम करने वाले काम में लगाया जा रहा है, मिसाइल मूल्यांकन से लेकर व्यापक परीक्षण-और-मूल्यांकन अभियानों तक। एक आधुनिकीकरण चक्र की शुरुआत में जन्मा विमान अब दूसरे चक्र को बनाए रखने में मदद कर रहा है।

छोटा बेड़ा कदम, बड़ा अर्थ

कागज़ पर देखें तो एक विमान का पुनः-नियोजन मामूली लग सकता है। लेकिन व्यवहार में, यह इस बात का संकेत है कि नौसेना पुराने बेड़ों के घटने के बीच विशेष समर्थन मिशनों को कैसे टिकाऊ बनाए रख रही है। VX-30 का मिशन ऐसे विमानों पर निर्भर करता है जो समय पर पहुंच सकें, उपलब्ध रह सकें, और फैले हुए रेंज परिसरों में काम कर सकें। T-1 का आगमन उस जरूरत को पूरा करता है, और साथ ही उस प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता भी घटाता है जो अपनी उपयोगी नौसेना-आयु के अंत के करीब है।

अगर T-2 भी आता है, तो स्क्वॉड्रन का संक्रमण और स्पष्ट होगा। अभी के लिए निष्कर्ष सीधा है: नौसेना का सबसे पुराना पोसाइडन प्रशांत हथियार परीक्षणों के पीछे के बुनियादी ढांचे का हिस्सा बन गया है। यह भूमिका अग्रिम पंक्ति की गश्ती मिशनों जितनी दिखाई नहीं देती, लेकिन नई प्रणालियों को सत्यापित और तैनात करने के तरीके में यह केंद्रीय है। उस अर्थ में, T-1 की दूसरी पारी एक फुटनोट नहीं है। यह उस मशीनरी का हिस्सा है, जो भविष्य की सैन्य क्षमताओं को विचार से वास्तविकता में बदलने में मदद करती है।

यह लेख twz.com की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

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