नए काउंटी-स्तरीय शोध के अनुसार, अमेरिका–मेक्सिको सीमा से लगी काउंटियों में क्रॉनिक किडनी डिजीज से होने वाली मृत्यु-दर गैर-सीमावर्ती काउंटियों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है। शोध में नेफ्रोलॉजिस्ट तक कम पहुंच और अधिक मृत्यु-दर के बीच लगातार संबंध भी पाया गया।
ASN Kidney Week 2026 में प्रस्तुत किए जाने वाले इस विश्लेषण से यह स्थापित नहीं होता कि किडनी विशेषज्ञों की कमी मौतों का कारण बनती है। हालांकि, यह बढ़ती भौगोलिक स्वास्थ्य असमानता का दस्तावेजीकरण करता है और दिखाता है कि कई चिकित्सीय, आर्थिक और स्वास्थ्य-सेवा तक पहुंच से जुड़ी स्थितियों को ध्यान में रखने के बाद भी विशेषज्ञों की उपलब्धता मृत्यु-दर से जुड़ी रहती है।
सीमा क्षेत्र में तेज वृद्धि
शोधकर्ताओं ने 1999 से 2022 तक अमेरिका के Centers for Disease Control and Prevention के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अमेरिका–मेक्सिको सीमा से लगी काउंटियों में इस अवधि के दौरान क्रॉनिक किडनी डिजीज से होने वाली मृत्यु-दर प्रति 100,000 लोगों पर 48.2 से बढ़कर 81.4 हो गई। शोधकर्ताओं ने वार्षिक वृद्धि लगभग 2.7% आंकी।
गैर-सीमावर्ती काउंटियों के तुलना समूह में मृत्यु-दर प्रति 100,000 लोगों पर 35.1 से बढ़कर 54.4 हो गई, जो लगभग 1.3% की वार्षिक वृद्धि है। दोनों समूहों में मृत्यु-दर बिगड़ी, लेकिन सीमावर्ती काउंटियों में दर्ज गति लगभग दोगुनी थी।
ये आंकड़े यह नहीं बताते कि रुझान अलग क्यों है। हालांकि, वे उस असमानता का मापनीय स्तर दिखाते हैं जिसके बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उन समुदायों में विकसित हो रही है जहां अक्सर हिस्पैनिक आबादी अधिक होती है और चिकित्सा सुविधाएं सीमित होती हैं।
विशेषज्ञों तक पहुंच सबसे कम कहां है
अध्ययन में स्थानीय नेफ्रोलॉजी कार्यबल की भी जांच की गई। नेफ्रोलॉजिस्ट की सबसे कम संख्या वाली काउंटियों में क्रॉनिक किडनी डिजीज से होने वाली मृत्यु-दर सबसे अधिक उपलब्धता वाली काउंटियों की तुलना में काफी अधिक थी: प्रति 100,000 लोगों पर 91.4 मौतें बनाम 52.8।
मधुमेह, मोटापा, गरीबी, बीमा-रहित स्थिति, ग्रामीणता, अस्पताल तक पहुंच और जनसांख्यिकीय कारकों के लिए समायोजन करने के बाद, प्रति 100,000 लोगों पर एक नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी क्रॉनिक किडनी डिजीज से होने वाली मृत्यु-दर में लगभग 7% अधिकता से जुड़ी थी।
यह संबंध महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कारण-परिणाम का प्रमाण नहीं समझना चाहिए। काउंटी-स्तरीय विश्लेषण अलग-अलग स्थानों के बीच के पैटर्न बताते हैं, व्यक्तिगत मरीजों के उपचार इतिहास नहीं। कम विशेषज्ञों वाले क्षेत्रों में अन्य ऐसी बाधाएं भी हो सकती हैं जिन्हें उपलब्ध आंकड़ों में पूरी तरह दर्ज करना कठिन है, जैसे यात्रा की दूरी, प्राथमिक देखभाल की उपलब्धता, बीमा की निरंतरता, भाषा संबंधी पहुंच या निदान में देरी।
पहुंच क्यों मायने रख सकती है
नेफ्रोलॉजिस्ट किडनी की बीमारी के विशेषज्ञ होते हैं। वे किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट और मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों से जुड़ी जटिलताओं के प्रबंधन पर काम करते हैं। शोध यह ठीक-ठीक नहीं बताता कि कार्यबल की उपलब्धता अलग-अलग काउंटियों में परिणामों को कैसे प्रभावित करती है, लेकिन यह स्वास्थ्य-प्रणाली योजनाकारों के लिए एक ठोस सवाल उठाता है: क्या किडनी रोग का सबसे अधिक बोझ झेलने वाले समुदायों में विशेषज्ञ देखभाल तक पर्याप्त पहुंच भी है?
University of Texas Rio Grande Valley School of Medicine की संबंधित लेखिका Sofia Yamada ने परिणामों को सीमा क्षेत्र में बढ़ती किडनी-स्वास्थ्य असमानता का प्रमाण बताया। विश्लेषण में पाया गया कि कई स्वास्थ्य, सामाजिक-आर्थिक और पहुंच-संबंधी कारकों के लिए समायोजन करने के बाद भी कार्यबल और मृत्यु-दर के बीच संबंध बना रहा।
यह निरंतरता अधिक गहन जांच की आवश्यकता को मजबूत करती है, जबकि यह संभावना खुली रहती है कि कई परस्पर जुड़ी स्थितियां इस पैटर्न को बढ़ावा दे रही हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज पर चिकित्सीय जोखिम, निदान और उपचार तक पहुंच, वहनीयता, भौगोलिक स्थिति और स्थानीय स्वास्थ्य-प्रणालियों की व्यापक क्षमता का प्रभाव पड़ता है।
सहकर्मी-समीक्षित प्रकाशन से पहले प्रस्तुत किए गए निष्कर्ष
यह कार्य ASN Kidney Week 2026 में प्रस्तुत किया जाएगा, इसलिए यह पूर्ण सहकर्मी-समीक्षित जर्नल रिपोर्ट के बजाय प्रारंभिक सम्मेलन शोध है। सम्मेलन प्रस्तुतियां निष्कर्षों की शुरुआती झलक दे सकती हैं, लेकिन शोधकर्ता जब पूर्ण विश्लेषण पूरा करते हैं और प्रकाशन के लिए प्रयास करते हैं, तो विधियां और निष्कर्ष बदल सकते हैं।
फिर भी, रिपोर्ट किए गए परिणाम चेतावनी संकेत के रूप में उपयोगी हैं। वे दिखाते हैं कि सीमावर्ती और गैर-सीमावर्ती दोनों काउंटियों में मृत्यु-दर बढ़ी है, लेकिन तेज वृद्धि सीमा क्षेत्र में हुई। साथ ही, नेफ्रोलॉजिस्ट की कम संख्या काफी अधिक मृत्यु-बोझ से जुड़ी है।
आगे क्या होगा
तत्काल नीतिगत सवाल केवल यह नहीं है कि किसी काउंटी में कितने नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। सवाल यह है कि क्या किडनी रोग के जोखिम वाले लोगों को समय पर जांच, निदान, विशेषज्ञ सलाह और निरंतर उपचार मिल सकता है। अध्ययन किसी एक हस्तक्षेप की सिफारिश नहीं कर सकता, लेकिन यह जांचने के लिए आंकड़े उपलब्ध कराता है कि कार्यबल में निवेश और पहुंच से जुड़े अन्य उपाय अधिक बोझ वाले क्षेत्रों में परिणाम बदल सकते हैं या नहीं।
आगे के काम में मरीज-स्तरीय रिकॉर्ड, रेफरल के पैटर्न, यात्रा का बोझ और पूरे सीमा क्षेत्र में किडनी देखभाल की उपलब्धता की जांच की जानी चाहिए। इससे विशेषज्ञों की कमी की भूमिका को गरीबी, बीमा कवरेज, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच और अन्य संरचनात्मक बाधाओं के प्रभावों से अलग करने में मदद मिल सकती है।
मुख्य बिंदु
- 1999 से 2022 के बीच सीमावर्ती काउंटियों में क्रॉनिक किडनी डिजीज से होने वाली मृत्यु-दर प्रति 100,000 लोगों पर 48.2 से बढ़कर 81.4 हो गई।
- सीमावर्ती काउंटियों में वार्षिक वृद्धि लगभग 2.7% थी, जबकि गैर-सीमावर्ती काउंटियों में यह 1.3% रही।
- नेफ्रोलॉजिस्ट की सबसे कम संख्या वाली काउंटियों में सबसे अधिक उपलब्धता वाली काउंटियों की तुलना में मृत्यु-दर अधिक थी।
- अध्ययन में संबंध की रिपोर्ट दी गई है; यह प्रमाण नहीं है कि विशेषज्ञों की कमी सीधे तौर पर मृत्यु-दर का कारण बनती है।
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
Originally published on medicalxpress.com



