सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों के सामने एक परिचित बाधा है
सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहन में बदलाव को अक्सर कार को आधुनिक बनाने की दौड़ के रूप में बताया जाता है, लेकिन दिए गए स्रोत में एक अधिक विशिष्ट बाधा की ओर इशारा किया गया है: लेगसी इंटीग्रेशन। स्रोत की व्याख्या में, SBD Automotive के कंसल्टिंग डायरेक्टर Alex Oyler कहते हैं कि SDVs पर पुराने और नए सिस्टम को मिलाने की तुलना में शुरुआत से नया करना आसान है। यह टिप्पणी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के प्रयासों के साथ कई उद्योगों में देखे गए तनाव को दर्शाती है, और ऑटोमोटिव क्षेत्र में विशेष रूप से प्रासंगिक लगती है, जहां लंबे उत्पाद चक्र और गहराई से जमे हुए सिस्टम साफ बदलाव को कठिन बना देते हैं।
कैंडिडेट मेटाडेटा कहता है कि Oyler बताते हैं कि अलग-अलग निर्माता SDV space race में कहां खड़े हैं। इस संक्षिप्त रूप में भी प्रतिस्पर्धी तस्वीर साफ है। कुछ ऑटोमेकर नई आर्किटेक्चर के आसपास निर्माण कर सकते हैं या अधिक निर्णायक प्लेटफॉर्म बदलाव कर सकते हैं, इसलिए वे तेज़ी से आगे बढ़ने की स्थिति में हैं। दूसरों को मौजूदा हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर स्टैक्स और संगठनात्मक आदतों को लगातार अपडेट होने वाले, सॉफ्टवेयर-प्रधान वाहनों की नई महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ना पड़ता है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि SDVs सिर्फ़ अधिक कोड वाली कारें नहीं हैं। वे वाहन विकास, इंटीग्रेशन और लाइफसाइकिल प्रबंधन के लिए एक अलग दृष्टिकोण का संकेत देती हैं। जो निर्माता बड़ी मात्रा में पुराने सिस्टम को बनाए रखते हुए इस मॉडल की ओर बढ़ना चाहता है, उसके लिए कम लेगसी बाधाओं वाली या साफ शुरुआत की रणनीति वाली कंपनी की तुलना में काम अधिक कठिन है।
“शुरुआत से” काम करना कठिनाई की रेखा कैसे बदल देता है
स्रोत शीर्षक केंद्रीय तर्क को सीधे बताता है: शुरुआत से बनाना पुराने और नए को मिलाने से आसान है। व्यावहारिक रूप से इसका मतलब है कि SDV परिवर्तन में सबसे कठिन हिस्सा जरूरी नहीं कि भविष्य की आर्किटेक्चर तय करना हो, बल्कि उस आर्किटेक्चर को मौजूदा उत्पाद लाइनों, सप्लायर संबंधों और आंतरिक प्रक्रियाओं में पिरोना है।
ऑटोमेकर शायद ही कभी खाली स्लेट पर काम करते हैं। उनके मौजूदा वाहन प्रोग्राम वर्षों के इंजीनियरिंग निर्णयों, नियामक कार्य, लागत लक्ष्यों और प्लेटफॉर्म पुन: उपयोग को दर्शाते हैं। जब कोई कंपनी ऐसे माहौल में software-defined महत्वाकांक्षाएं जोड़ती है, तो वह सिर्फ़ नई क्षमता नहीं जोड़ रही होती। वह पहले से मौजूद जटिलता का सामना भी कर रही होती है। एक clean-sheet प्रोग्राम शुरुआत से नए मॉडल के अनुसार अनुकूलित हो सकता है। लेगसी-भारी निर्माता को समझौते करने पड़ते हैं।
स्रोत अंश यह भी कहता है कि Oyler बताते हैं कि अलग-अलग निर्माता SDV दौड़ में कहां हैं। यह भाषा उद्योग की समान गति के बजाय असमान प्रगति का संकेत देती है। दूसरे शब्दों में, यह दौड़ सिर्फ़ इस बात की नहीं है कि कौन software-defined क्षमता चाहता है। यह इस बात की भी है कि कौन पुराने और नए सिस्टम के बीच इंटीग्रेशन ओवरहेड से धीमे हुए बिना उसे लागू करने में संरचनात्मक रूप से सक्षम है।
SDV दौड़ एक संगठनात्मक दौड़ भी है
क्योंकि दिया गया स्रोत एक पॉडकास्ट फीचर है, कोई विस्तृत तकनीकी लेख नहीं, इसलिए वह विशिष्ट कंपनी रणनीतियों की सूची नहीं देता। लेकिन उसका फ्रेमिंग फिर भी उपयोगी है। SDVs में दौड़ सिर्फ़ अंतिम उपयोगकर्ता फीचर्स की प्रतिस्पर्धा नहीं है। यह आर्किटेक्चर, विकास प्रवाह और मॉडल वर्षों के बीच इंजीनियरिंग फैसलों को संरेखित करने की क्षमता की प्रतिस्पर्धा है।
यहीं पर “पुराने और नए” की समस्या केवल तकनीकी परेशानी से आगे बढ़ जाती है। यह चुनौती इस बात तक फैलती है कि टीमें कैसे संगठित हैं और प्रोग्राम कैसे क्रमबद्ध किए जाते हैं। यदि कोई कंपनी एक प्रोग्राम के लिए साफ नई पद्धति शुरू करती है, लेकिन कहीं और पुराने मान्यताओं के साथ संगतता बनाए रखनी पड़ती है, तो उसे एक ही समय में दो विकास तर्कों को संभालना पड़ सकता है। स्रोत का शीर्षक संकेत देता है कि यही सह-अस्तित्व कठिन मार्ग है।
इसके विपरीत, शुरुआत से काम करने से शुरुआत में ही नए मॉडल के आसपास वाहन को परिभाषित करने का मौका मिलता है। इससे सफलता की गारंटी नहीं मिलती, लेकिन रेट्रोफिटिंग का बोझ कम हो जाता है। यह उन समझौतों से बचना भी आसान बनाता है जो अलग-अलग युगों और इस बारे में अलग-अलग मान्यताओं के लिए बने सिस्टम को मिलाने से आते हैं कि सॉफ्टवेयर को कैसे तैनात या बनाए रखा जाना चाहिए।
उद्योग पर नज़र रखने वालों के लिए यह दृष्टि क्यों मायने रखती है
SDV चर्चा आसानी से अमूर्त हो सकती है। platform, architecture और software stack जैसे शब्द अक्सर ढीले तरीके से उपयोग किए जाते हैं, जिससे सार्वजनिक चर्चा बाधाओं के बजाय वादों पर केंद्रित हो जाती है। दिए गए स्रोत का मूल्य यह है कि यह मुद्दे को एक सरल तुलनात्मक कथन में समेट देता है। साफ शुरुआत आसान है। मिश्रित संक्रमण कठिन है।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समझाता है कि जो ऑटोमेकर एक ही मंज़िल की ओर बढ़ते दिखते हैं, वे अलग-अलग गति से क्यों आगे बढ़ते हैं। अंतर सिर्फ़ प्रयास या रणनीतिक मंशा का नहीं हो सकता। यह इस बात को भी दर्शा सकता है कि कंपनी को पुराने सिस्टम को कितना संरक्षित, अनुकूलित या पुल के जरिए जोड़ना पड़ता है, जबकि वह वाहन सॉफ्टवेयर के अगले मॉडल का निर्माण कर रही होती है।
स्रोत अंश में “space race” वाक्यांश भी दबाव का संकेत देता है। ऑटोमेकर यह काम आराम से नहीं कर रहे हैं। उनकी आपस में तुलना की जा रही है, और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर को आधुनिक बनाने की क्षमता अब इस बात का हिस्सा बन गई है कि बाज़ार तकनीकी नेतृत्व को कैसे मापता है। ऐसे माहौल में लेगसी इंटीग्रेशन से जुड़ी कोई भी संरचनात्मक कमी निष्पादन को धीमा कर सकती है।
ऑटोमोटिव बदलाव के अगले चरण के लिए एक उपयोगी दृष्टिकोण
स्रोत सामग्री छोटी है, लेकिन उसका मूल विचार अपने आप में पर्याप्त मजबूत है। सॉफ्टवेयर-डिफाइंड वाहनों की ओर बदलाव को अक्सर इस सवाल के रूप में देखा जाता है कि कंपनियां क्या बनाना चाहती हैं। Oyler का कथन ध्यान इस पर ले जाता है कि कंपनियों को पहले क्या सुलझाना होगा। अगर शुरुआत से बनाना पुराने और नए को मिलाने से आसान है, तो ऑटोमेकर की लेगसी प्रणालियों की स्थिति कोई गौण विवरण नहीं है। यह उन मुख्य कारकों में से एक है जो तय करते हैं कि वह कंपनी कितनी तेज़ी से बदल सकती है।
यह दृष्टिकोण यह भी बताता है कि SDV परिवर्तन पूरे उद्योग में एक जैसा क्यों नहीं दिखेगा। कुछ निर्माता साफ़ आर्किटेक्चरल रीसेट के ज़रिए आगे बढ़ सकते हैं। दूसरों को संक्रमण चरण में अधिक समय लग सकता है, क्योंकि वे निरंतरता बनाए रखते हुए भीतर से आधुनिकीकरण करने की कोशिश करेंगे। दोनों समूह खुद को एक ही दौड़ में बता सकते हैं, लेकिन वे जरूरी नहीं कि एक ही शुरुआती लाइन से शुरू कर रहे हों।
कार उद्योग के अगले चरण को समझने की कोशिश कर रहे पाठकों के लिए यही शायद स्रोत से सबसे उपयोगी निष्कर्ष है। भविष्य सिर्फ़ नई सॉफ्टवेयर महत्वाकांक्षाओं से नहीं बन रहा है। यह इस बात से भी आकार ले रहा है कि हर कंपनी को उस भविष्य में कितनी पुरानी बुनियादी संरचना साथ ले जानी है, और कल के वाहन तर्क और कल के तर्क के बीच के ओवरलैप को वह कितनी प्रभावी ढंग से संभालती है।
यह लेख Automotive News की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on autonews.com







