टेक्नोसिग्नेचर के दो और संकेत पीछे हटे

बाह्यजीवी टेक्नोसिग्नेचरों की एक स्वीडन-नेतृत्व वाली खोज ने NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से किए गए अनुवर्ती प्रेक्षणों के बाद दो और डायसन स्फीयर उम्मीदवारों को खारिज कर दिया है, क्योंकि संदिग्ध अवरक्त संकेतों के लिए अधिक सामान्य व्याख्याएं सामने आईं।

यह कार्य प्रोजेक्ट हेफेस्टोस से आया है, जो उप्साला विश्वविद्यालय के नेतृत्व में एक पहल है और बड़े कृत्रिम ढांचों से आंशिक रूप से ढकी हो सकने वाली तारकीय रोशनी वाले तारों को देखकर उन्नत सभ्यताओं के संभावित प्रमाण खोज रही है। इस मामले में, वेब की इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी ने दो एम-बौने तारों को लक्षित किया था, जो संभावित उम्मीदवार के रूप में उभरे थे। उपलब्ध स्रोत पाठ के अनुसार, अब दोनों वस्तुओं को डायसन स्फीयर उम्मीदवारों की श्रेणी से हटा दिया गया है।

यह परिणाम उन लोगों को निराश कर सकता है जो एलियन तकनीक की खोज में किसी बड़ी सफलता की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन यह विज्ञान की दृष्टि से फिर भी महत्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि उम्मीदवारों की छंटाई व्यवहार में कैसे काम करती है और क्यों असाधारण व्याख्याओं के टिके रहने से पहले अधिक संवेदनशील अनुवर्ती प्रेक्षण आवश्यक होते हैं।

डायसन स्फीयर क्यों ध्यान खींचते हैं

डायसन स्फीयर काल्पनिक मेगास्ट्रक्चर हैं, जिन्हें ऊर्जा प्राप्त करने के लिए तारों के चारों ओर बनाया जाता है। अपने सबसे व्यापक रूप में, इन्हें अक्सर पदार्थ के ऐसे झुंड या खोल के रूप में कल्पित किया जाता है जो किसी तारे के विकिरण का बड़ा हिस्सा पकड़ लेते हैं। इन ढांचों की खोज करने वाले शोधकर्ता आम तौर पर एक अप्रत्यक्ष संकेत पर ध्यान देते हैं: अपशिष्ट ऊष्मा।

यदि कोई सभ्यता बड़े पैमाने पर तारकीय ऊर्जा एकत्र कर रही हो, तो उस ऊर्जा का कुछ हिस्सा संभवतः ऊष्मा के रूप में पुनः विकिरित होगा, खासकर अवरक्त में। इसी कारण अवरक्त अधिशेष उन प्रमुख टेक्नोसिग्नेचरों में से एक है, जिन्हें जांचकर्ता देखते हैं। ऐसा तारा जो ऑप्टिकल तरंगदैर्ध्य में असामान्य रूप से मंद लेकिन अवरक्त में अप्रत्याशित रूप से चमकीला दिखे, आगे अध्ययन के लिए उम्मीदवार बन सकता है।

प्रोजेक्ट हेफेस्टोस के पीछे यही मूल तर्क है। स्रोत सामग्री के अनुसार, टीम ने पहले यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Gaia मिशन और NASA के Wide-field Infrared Survey Explorer, या WISE, के डेटा का उपयोग करके पृथ्वी से लगभग 1,000 प्रकाश-वर्ष के भीतर लगभग दस लाख तारों का सर्वेक्षण किया। लक्ष्य था कम ऑप्टिकल फ्लक्स और बढ़े हुए अवरक्त उत्सर्जन के असामान्य संयोजन वाले तारों की पहचान करना।

वेब ने वास्तव में क्या पाया

नए वेब प्रेक्षणों ने तस्वीर बदल दी। तारों के चारों ओर मौजूद संरचनाओं से अतिरिक्त अवरक्त विकिरण की पुष्टि करने के बजाय, अनुवर्ती अध्ययन से पता चला कि ये संकेत आकाश में एम-बौने तारों के बेहद पास प्रक्षेपित पृष्ठभूमि आकाशगंगाओं के कारण थे।

स्रोत पाठ में लेखकों के हवाले से कहा गया है कि अवरक्त अधिशेष का स्रोत डायसोनियन मेगास्ट्रक्चर या तारों के पास स्थित अन्य विकिरण तंत्र नहीं हैं। इसके बजाय, यह उन आकाशगंगाओं से आता है जो प्रेक्षक के दृष्टिकोण से लक्ष्य तारों से लगभग एक आर्कसेकंड के भीतर स्थित हैं।

इनमें से एक पृष्ठभूमि आकाशगंगा का मध्य-अवरक्त स्पेक्ट्रम उस प्रकार से मेल खाता है जिसे खगोलविद Hot Dust Obscured Galaxy, या Hot DOG, कहते हैं। दूसरी को विस्तारित आकृति-विज्ञान, चमकीले गुच्छों और धूलयुक्त starburst galaxy से मेल खाते स्पेक्ट्रम वाली बताया गया है। दूसरे शब्दों में, जिन अवरक्त संकेतों ने शुरू में उम्मीदवार तारों को असामान्य दिखाया, उन्हें दूरस्थ आकाशगांकीय स्रोतों से समझाया जा सकता है, जो संयोग से लगभग उसी दिशा में संरेखित हो गए थे।

यही वह तरह की अस्पष्टता है जो टेक्नोसिग्नेचर कार्य को इतना कठिन बनाती है। अवरक्त असामान्यताएं आकर्षक हो सकती हैं, लेकिन ब्रह्मांड में धूल-समृद्ध, ऊष्मा-दीप्त विकिरण के अनेक प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं। उच्च-रिज़ॉल्यूशन अनुवर्ती अध्ययन के बिना, इनमें से कुछ स्रोत कहीं अधिक असाधारण चीज़ का रूप धर सकते हैं।

विफलता नहीं, पद्धति का सबक

उम्मीदवारों का खारिज होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि खोज ही गलत दिशा में है। यह इस बात का प्रमाण है कि छनाई प्रक्रिया काम कर रही है। प्रोजेक्ट हेफेस्टोस अब व्यापक सर्वेक्षण पद्धतियों से अधिक संकुचित और अधिक भेद करने वाले प्रेक्षण अभियानों की ओर बढ़ता दिख रहा है, जिसमें वेब का उपयोग करके यह परखा जा रहा है कि उम्मीदवार संकेत अधिक विस्तार से देखने पर टिकते हैं या नहीं।

यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि टेक्नोसिग्नेचर विज्ञान अक्सर झूठे सकारात्मक परिणामों को हटाने की प्रक्रिया से आगे बढ़ता है। एक मजबूत खोज को पृष्ठभूमि आकाशगंगाओं, धूल, यंत्रगत सीमाओं और सामान्य खगोलीय प्रक्रियाओं से होने वाले संदूषण से बचना होता है। हर खारिज किया गया उम्मीदवार भविष्य की खोजों के मानदंडों को परिष्कृत करता है और यह स्पष्ट करता है कि किस प्रकार के संकेत शोधकर्ताओं को गुमराह करने की सबसे अधिक संभावना रखते हैं।

स्रोत पाठ चुनौती के पैमाने को भी रेखांकित करता है। उप्साला विश्वविद्यालय में खगोलभौतिकी के वरिष्ठ व्याख्याता और प्रोजेक्ट हेफेस्टोस टीम के सदस्य Andreas Korn ने कहा कि वेब कार्य ने पहले के दस लाख-तारा सर्वेक्षण से पहचाने गए तारों पर अनुवर्ती अध्ययन किया। इसका अर्थ है कि शोधकर्ता बहुत बड़े डेटासेट से अत्यंत सूक्ष्म संभावनाएं निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जहां झूठे सकारात्मक का छोटा-सा भी अनुपात अंततः प्राकृतिक व्याख्याओं वाले कई रोचक संकेत पैदा कर सकता है।

शून्य परिणाम फिर भी क्यों मायने रखता है

लोकप्रिय संस्कृति में, एलियन मेगास्ट्रक्चर की खोज को अक्सर एक द्विआधारी प्रश्न के रूप में प्रस्तुत किया जाता है: या तो कोई सनसनीखेज खोज सामने आती है या फिर कुछ उपयोगी नहीं होता। वास्तविक विज्ञान इससे कम नाटकीय और अधिक संचयी होता है। इन वेब प्रेक्षणों का मूल्य इस बात में है कि वे संभावित व्याख्या की सीमाओं को कैसे अधिक स्पष्ट करते हैं।

यह दिखाकर कि दोनों उम्मीदवार वास्तव में पृष्ठभूमि आकाशगंगाओं के साथ भ्रमित हो गए थे, अध्ययन भविष्य के टेक्नोसिग्नेचर सर्वेक्षणों के लिए एक ठोस चेतावनी देता है। आसपास के तारों के पास दिखाई देने वाला अवरक्त अधिशेष विशेष रूप से सावधानीपूर्वक जांच की मांग कर सकता है, ताकि पीछे मौजूद निकट प्रक्षेपित साथियों की पहचान हो सके। यह एक प्रेक्षणीय सबक है, और ऐसे सबक इस क्षेत्र को बेहतर बनाते हैं।

यह परिणाम सुर्खियां बटोरने वाली छवियों से परे वेब की भूमिका को भी उजागर करता है। इसकी इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपिक क्षमताएं उन स्रोतों को अलग कर सकती हैं जिन्हें व्यापक सर्वेक्षण साफ़ तौर पर अलग नहीं कर पाते, जिससे खगोलविद यह तय कर सकते हैं कि कोई विचित्र संकेत रुचि की वस्तु से जुड़ा है या दृष्टि-रेखा के किसी और स्रोत से।

खोज जारी है

यहां कोई डायसन स्फीयर नहीं मिला, और स्रोत पाठ स्पष्ट करता है कि नवीनतम खोज भी खाली हाथ रही। फिर भी, व्यापक प्रयास जारी है। बड़े तारकीय समूहों के सर्वेक्षण, जिनके बाद वेब जैसे उपकरणों से लक्षित प्रेक्षण किए जाते हैं, यह जांचने के सबसे व्यवस्थित तरीकों में से एक बने हुए हैं कि क्या असामान्य अवरक्त संकेत करीबी जांच में टिक सकते हैं।

फिलहाल, ये दोनों संकेत खगोलशास्त्र की एक परिचित श्रेणी में शामिल हो जाते हैं: प्राकृतिक व्याख्याओं वाली रोचक असामान्यताएं। यह उन्नत सभ्यता के प्रमाण की खोज जितना रोमांचक नहीं हो सकता, लेकिन विश्वसनीय खोजें इसी तरह बनती हैं। टेक्नोसिग्नेचर विज्ञान में, किसी भी संभावित सफलता तक का रास्ता उन अनेक तरीकों को सावधानी से हटाने से होकर गुजरता है जिनसे ब्रह्मांड कृत्रिम हुए बिना भी अजीब दिख सकता है।

यह लेख Universe Today की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on universetoday.com