एक नए विश्लेषण के अनुसार इतिहास की सबसे जटिल पाठ्य पहेलियों में से एक भौतिक समस्या भी हो सकती है: Voynich Manuscript बनने के कुछ समय बाद गलत क्रम में बांधी गई हो सकती है।
Digital Medievalist में प्रकाशित प्रस्ताव पांडुलिपि की अज्ञात लिपि को पढ़ने का दावा नहीं करता। इसके बजाय यह मध्ययुगीन कोडेक्स के निर्माण से जुड़े एक बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण प्रश्न पर ध्यान देता है। यदि पत्ते और खंड बाइंडिंग के दौरान बदल दिए गए थे, तो पाठक और शोधकर्ता ऐसे दस्तावेज़ की व्याख्या कर रहे होंगे जिसका पाठ और चित्र उसके निर्माताओं के इच्छित क्रम में नहीं हैं।
एक सदी पुरानी पहेली और संरचनात्मक समस्या
Voynich Manuscript 15वीं सदी के प्रारंभ में कार्बन-डेट की गई चर्मपत्र कोडेक्स है। इसके 240 पृष्ठों पर लगभग 38,000 शब्द एक अनोखी लिपि में लिखे हैं, जिसे आमतौर पर Voynichese कहा जाता है। पाठ के साथ पौधों, लोगों और ज्योतिषीय प्रतीकों के चित्र हैं। कोड-भेदकों, भाषाविदों और मध्ययुगीन विद्वानों के एक सदी से अधिक प्रयासों के बावजूद इस बात पर सहमति नहीं बनी कि इसमें क्या लिखा है, यह कोई cipher है या नहीं, अथवा यह किस प्रकार का कार्य था।
इसे Beinecke Cipher manuscript भी कहा जाता है। इसे पुस्तक-विक्रेता Wilhelm Voynich ने 1912 में खरीदा था और 1969 से Yale University की rare book library में रखा गया है। इसकी विचित्र लिपि ने स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचा, लेकिन नया काम वस्तु स्वयं—उसकी लिखावट, मुड़े हुए चर्मपत्र पत्तों और अलग-अलग पृष्ठों पर फैले चित्रों के संबंध—पर ध्यान केंद्रित करता है।
Medieval Academy of America की executive director और अध्ययन की सह-लेखिका Lisa Fagin Davis ने यह जांचते समय ऐसे पैटर्न देखे जो दस्तावेज़ की नकल करने वाले कई लिपिकारों के क्रम से मेल नहीं खाते थे। रिपोर्ट के अनुसार लिखावट का क्रम ऐसा बदलता दिखता है जिसे सुसंगत अनुक्रम से समझाना कठिन है। कुछ चित्र एक पृष्ठ पर समाप्त होकर कई पत्तों के बाद दूसरे पृष्ठ पर फिर शुरू होते दिखाई देते हैं।
क्रम क्यों मायने रखता है
मध्ययुगीन पांडुलिपियां मुड़े हुए चर्मपत्रों से बनाई जाती थीं, जिन्हें bifolia कहा जाता है। इन्हें समूहों में रखा जाता, फिर सिलकर बांधा जाता था। इस प्रक्रिया की गलती केवल कुछ पृष्ठों को गलत क्रम में नहीं रखती; यह किसी चित्र को उसके अगले हिस्से से अलग कर सकती है, किसी खंड को संबंधित पाठ से दूर कर सकती है और तार्किक क्रम को अव्यवस्थित बना सकती है।
यह संभावना Voynich Manuscript के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि शोधकर्ताओं ने लंबे समय से चित्रों और लेखन की व्यवस्था से अर्थ निकालने की कोशिश की है। किसी वनस्पति चित्र, आरेख या आकृति वाले पृष्ठ की व्याख्या उसके पड़ोसी पृष्ठों के आधार पर बदल सकती है। यदि वर्तमान क्रम मूल नहीं है, तो निकटता और खंड-क्रम पर आधारित निष्कर्ष कम विश्वसनीय हो जाते हैं।

Davis और University of Malta के information systems researcher तथा सह-लेखक Colin Layfield का सुझाव है कि बाद के किसी binder ने ऐसी पांडुलिपि को गलत तरीके से बांधा हो जिसे वह पढ़ नहीं सकता था। यह व्यावहारिक समस्या से मेल खाता है: अपरिचित रचना को दोबारा बांधने वाला व्यक्ति सही क्रम की पुष्टि के लिए पढ़े जा सकने वाले शीर्षकों, पृष्ठ संख्याओं या सामान्य पाठ्य निरंतरता पर भरोसा नहीं कर सकता था।
संकेत, समाधान नहीं
यह निष्कर्ष Voynichese की भाषा तय नहीं करता और न ही साबित करता है कि पाठ में कोई पारंपरिक संदेश छिपा है। इसका अर्थ यह भी नहीं कि पांडुलिपि की हर असामान्य विशेषता दोबारा बाइंडिंग के कारण है। दस्तावेज़ अभी भी अपठित है और उसकी लिपि व चित्रों की व्याख्या बाकी है।
फिर भी अध्ययन एक सीमित और जांच योग्य दिशा देता है। विद्वान बचे हुए पत्तों की भौतिक संरचना देख सकते हैं, लिखावट के पैटर्न की तुलना कर सकते हैं और वैकल्पिक क्रमों के मॉडल बना सकते हैं। इससे पता चल सकता है कि चित्र, पाठ और लिपिकार की गतिविधि किस क्रम में अधिक सुसंगत बैठती है।
जिस पांडुलिपि को अक्सर मुख्यतः cryptographic puzzle माना गया है, उसके लिए यह तर्क याद दिलाता है कि भौतिक इतिहास व्याख्या को प्रभावित कर सकता है। किसी रहस्यमय पाठ का अर्थ तय करने से पहले शोधकर्ताओं को यह स्थापित करना पड़ सकता है कि उसके पृष्ठ किस क्रम में पढ़े जाने थे।
आगे क्या होगा
सुधारा हुआ या बेहतर समर्थित पुनर्निर्माण पांडुलिपि को अपने-आप पढ़ने योग्य नहीं बनाएगा। हालांकि यह भविष्य के भाषाई और computational analysis को अधिक विश्वसनीय शुरुआती बिंदु दे सकता है। यदि चित्रों और शब्दों के क्रम में बाधा आई थी, तो उनके संभावित संबंध बहाल करने से वर्तमान क्रम में छिपे पैटर्न सामने आ सकते हैं।
इसलिए नया अध्ययन किसी एक नाटकीय सफलता के बजाय मध्ययुगीन वस्तु के सावधान पुनर्निर्माण की ओर प्रश्न को ले जाता है। इसका केंद्रीय दावा सीमित लेकिन महत्वपूर्ण हो सकता है: Voynich Manuscript का रहस्य केवल उसकी अपठित लिपि में नहीं, बल्कि बाद के पाठकों को मिले क्रम में भी हो सकता है।
यह लेख Live Science की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
Originally published on livescience.com





