चूहे के शोध से अल्ज़ाइमर का नया लक्ष्य सामने आया
Cold Spring Harbor Laboratory के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अल्ज़ाइमर रोग के खिलाफ एक नई संभावित रणनीति पहचानी है: PTP1B नामक प्रोटीन को रोकना। रोग के एक चूहे मॉडल में, इस प्रोटीन को बाधित करने से सीखने और याददाश्त में सुधार हुआ और ऐसा लगा कि इससे मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को amyloid-beta प्लाक जमाव साफ़ करने में मदद मिली। 30 अप्रैल को प्रकाशित यह काम एक ऐसे क्षेत्र में एक नया उम्मीदवार जोड़ता है जो अब भी ऐसे उपचारों की तलाश में है जो व्यापक और अधिक टिकाऊ लाभ दे सकें।
अल्ज़ाइमर शोध लंबे समय से amyloid-beta पर केंद्रित रहा है, वह peptide जो मस्तिष्क में plaques के रूप में जमा हो सकता है और जिसे बीमारी को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाने वाला माना जाता है। इस जमाव को लक्ष्य करने वाली वर्तमान therapies ने काफ़ी रुचि आकर्षित की है, लेकिन कई मरीजों के लिए उनके लाभ सीमित ही रहे हैं। नए अध्ययन का महत्व यह है कि यह केवल plaque पर हमला करने का एक और तरीका नहीं सुझाता। इसके बजाय, यह एक regulatory protein की ओर इशारा करता है जो यह तय करने में मदद कर सकता है कि मस्तिष्क बीमारी की प्रक्रिया पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
टीम ने क्या पाया
यह अध्ययन Professor Nicholas Tonks और सहयोगियों Yuxin Cen तथा Steven Ribeiro Alves से आया है। उनका केंद्रीय निष्कर्ष यह है कि PTP1B को रोकने से अल्ज़ाइमर-जैसी पैथोलॉजी वाले चूहों में सीखने और याददाश्त में सुधार हुआ। स्रोत पाठ कहता है कि टीम ने यह भी पाया कि PTP1B, SYK नामक एक अन्य प्रोटीन के साथ संपर्क करता है, जो microglia, यानी मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाओं, को नियंत्रित करने में मदद करता है।
Microglia मस्तिष्क में महत्वपूर्ण सफाई का काम करती हैं, जिसमें अतिरिक्त amyloid-beta जैसी मलबे को हटाना शामिल है। शोधकर्ताओं के अनुसार, बीमारी के दौरान ये कोशिकाएँ थक सकती हैं और अपनी प्रभावशीलता खो सकती हैं। Cen ने कहा कि परिणाम दिखाते हैं कि PTP1B को रोकने से microglial function बेहतर हो सकता है, जिससे amyloid-beta plaques को अधिक अच्छे से हटाया जा सके। यही संयोजन इस खोज को खास तौर पर दिलचस्प बनाता है: वही हस्तक्षेप चूहों में बेहतर संज्ञानात्मक प्रदर्शन और मस्तिष्क की देखभाल करने वाली कोशिकाओं में बेहतर plaque-clearing व्यवहार, दोनों से जुड़ा था।
PTP1B क्यों अलग दिखता है
PTP1B कोई ऐसा नया प्रोटीन लक्ष्य नहीं है जिसे सिर्फ़ dementia के संदर्भ में खोजा गया हो। Tonks ने इसे 1988 में पहली बार खोजा था, और स्रोत बताता है कि इसे दशकों से स्वास्थ्य और बीमारी के संदर्भ में अध्ययन किया गया है। यह इतिहास महत्वपूर्ण है, क्योंकि PTP1B को diabetes और obesity सहित metabolic disorders के लिए भी एक therapeutic target माना जाता है।
यह overlap अल्ज़ाइमर निष्कर्षों को और वज़न देता है। स्रोत स्पष्ट रूप से बताता है कि obesity और type 2 diabetes, अल्ज़ाइमर रोग के मान्यता प्राप्त risk factors हैं। यदि PTP1B metabolic disease और plaque clearance तथा memory से जुड़े brain mechanisms, दोनों से संबंधित है, तो यह एक ऐसे integrated treatment avenue का प्रतिनिधित्व कर सकता है जो केवल dementia के एक ही पहलू पर केंद्रित targets से अधिक व्यापक हो।
इसका मतलब यह नहीं कि यह कोई तैयार therapy है। इसका अर्थ बस यह है कि यह target neurodegeneration और metabolism के एक रणनीतिक रूप से दिलचस्प intersection पर स्थित है, जिन दो क्षेत्रों को शोधकर्ता अब increasingly अलग नहीं, बल्कि जुड़े हुए मानते हैं।
एक बहु-आयामी उपचार विचार
स्रोत सामग्री में सबसे compelling implication एक multi-pronged approach का विचार है। अल्ज़ाइमर एक जटिल रोग है, और वर्तमान treatments की सीमाओं ने उस जटिलता को और स्पष्ट किया है। केवल amyloid-beta कम करने वाली therapies बेहतर विकल्पों की खोज को समाप्त नहीं कर पाई हैं। PTP1B खोज यह संभावना दिखाती है कि ऐसे बिंदु पर हस्तक्षेप किया जाए जो एक साथ कई संबंधित प्रक्रियाओं को प्रभावित करे।
उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में microglial function, plaque clearance, और चूहों के मॉडल में cognition शामिल हैं। इसी कारण शोधकर्ता PTP1B inhibition को केवल एक संकीर्ण biochemical trick से अधिक मानते हैं। यह मस्तिष्क को नुकसान प्रबंधित करने में मदद करने और साथ ही ऐसे protein को लक्षित करने का तरीका हो सकता है जो पहले से ही उन disorders में शामिल है जो अल्ज़ाइमर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
ऐसे क्षेत्र में, जहाँ प्रयोगशाला परिणाम से मरीज को लाभ मिलने तक का अनुवाद अक्सर निराशाजनक रहता है, इस तरह की mechanistic breadth मूल्यवान हो सकती है। यदि कोई therapy रोग के कई आयामों पर एक साथ काम करती है, तो उसके अर्थपूर्ण प्रभाव देने की संभावना बेहतर हो सकती है, बनिस्बत ऐसी therapy के जो केवल एक endpoint को लक्ष्य करे।
यह शोध अभी क्या साबित नहीं करता
स्रोत स्पष्ट है कि ये परिणाम चूहों से आए हैं, मानव मरीजों से नहीं। यह सीमा बेहद महत्वपूर्ण है। कई अल्ज़ाइमर निष्कर्ष जो पशु मॉडलों में आशाजनक दिखते हैं, clinical testing में आगे नहीं टिकते। वर्तमान रिपोर्ट PTP1B को एक शोध दिशा के रूप में समर्थन देती है, न कि एक मान्यताप्राप्त उपचार के रूप में।
यह भी साबित नहीं करती कि PTP1B को रोकना अकेले पर्याप्त होगा, या कि स्थापित बीमारी वाले लोगों में भी वही प्रभाव दिखाई देंगे। फिर भी, अध्ययन इस प्रोटीन की आगे जांच का मामला मज़बूत करता है क्योंकि यह संज्ञानात्मक सुधार और एक plausible cellular mechanism को साथ जोड़ता है, न कि केवल एक को दूसरे के बिना प्रस्तुत करता है।
यह परिणाम अभी क्यों मायने रखता है
इस काम का महत्व नवीनता और परिचय के संयोजन में है। अल्ज़ाइमर के संदर्भ में इसकी विशेष उपयोगिता नई है, लेकिन स्वयं target का वैज्ञानिक इतिहास लंबा है। यह ऐसे क्षेत्र में फर्क ला सकता है जहाँ पूरी तरह नई शुरुआत करना धीमा और जोखिम भरा है। एक ज्ञात protein जो metabolic disease और brain immune function, दोनों से संबंधित है, आगे के अध्ययन के लिए ऐसे target से अधिक व्यावहारिक रास्ता दे सकता है जिसके पीछे बहुत कम पूर्व शोध हो।
यह अध्ययन अल्ज़ाइमर विज्ञान में एक व्यापक बदलाव की भी ओर इशारा करता है। बीमारी को केवल plaque accumulation के नज़रिए से देखने के बजाय, शोधकर्ता increasingly इस पर ध्यान दे रहे हैं कि immune cells, systemic health, और brain resilience बीमारी के course को कैसे प्रभावित करते हैं। PTP1B इस व्यापक दृष्टिकोण में फिट बैठता है।
एक शोध संकेत, जिस पर नज़र रखनी चाहिए
कोई भी व्यक्ति चूहे के परिणाम को निकट-भविष्य की cure समझने की भूल न करे। फिर भी, रिपोर्ट किए गए निष्कर्ष इतने महत्वपूर्ण हैं कि वे अलग दिखते हैं। PTP1B को रोकने से अल्ज़ाइमर चूहे मॉडल में सीखने और याददाश्त में सुधार हुआ और microglia को हानिकारक plaque buildup साफ़ करने में मदद मिली। क्योंकि यह protein obesity और diabetes से भी जुड़ा है, जो दोनों अल्ज़ाइमर के ज्ञात risk factors हैं, यह काम एक ऐसी शोध दिशा खोलता है जो एक ही disease pathway से आगे जाती है।
फिलहाल, मुख्य विकास वैज्ञानिक है, नैदानिक नहीं: अल्ज़ाइमर शोध के पास अब एक नया target है, जिसके पीछे विश्वसनीय जैविक तर्क और चूहों में लाभ का प्रमाण है। एक ऐसे क्षेत्र में, जो क्रमिक प्रगति और उच्च failure rates से परिभाषित है, यह महत्वपूर्ण खबर है।
यह लेख Science Daily की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on sciencedaily.com


