नॉर्वे ने फ्रांस की विकसित होती प्रतिरोध-नीति को अपना लिया है

नॉर्वे फ्रांस के उभरते परमाणु संरक्षण ढांचे के साथ जुड़ने वाला नौवां यूरोपीय देश बन गया है। यह कदम रूस को लेकर बढ़ती चिंता और यूरोप के अंतिम सुरक्षा-गारंटर के रूप में अमेरिका की दीर्घकालिक विश्वसनीयता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है।

यह घोषणा नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की पेरिस यात्रा के बाद आई, जहां अन्य भागीदार यूरोपीय देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। यह ढांचा फ्रांस द्वारा वर्णित “फॉरवर्ड डेटेरेंस” का हिस्सा है, जो यूरोपीय सुरक्षा में फ्रांस के परमाणु शस्त्रागार की भूमिका को परिभाषित करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

फ्रांस की परमाणु नीति में बड़ा बदलाव

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मार्च में एक परमाणु पनडुब्बी के सामने खड़े होकर इस नई नीति को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया, जिससे इस कदम के प्रतीकात्मक और गंभीर, दोनों पहलू स्पष्ट हुए। उपलब्ध स्रोत पाठ के अनुसार, इस अवधारणा का अर्थ है कि यूरोपीय सहयोगियों पर पड़ने वाले अस्तित्वगत खतरों की स्थिति में, यदि अमेरिका अलग भी हो जाए, तो फ्रांसीसी परमाणु प्रतिक्रिया की संभावना बनी रह सकती है।

यह फ्रांसीसी परमाणु बलों की पुरानी समझ से एक महत्वपूर्ण विचलन है, जिन्हें मुख्यतः राष्ट्रीय उपकरण माना जाता था। नए ढांचे के तहत, फ्रांस प्रभावी रूप से यूरोप के लिए एक संरक्षणकारी शक्ति की तरह काम करेगा, जबकि निर्णय लेने और हथियार नियंत्रण की पूरी शक्ति पेरिस में ही रहेगी।

इसलिए यह व्यवस्था कोई साझा परमाणु कमांड संरचना नहीं है। यह फ्रांसीसी प्रतिरोध-क्षमता पर संप्रभुता को कमजोर नहीं करती। इसके बजाय, यह राजनीतिक आश्वासन को बाहर की ओर बढ़ाती है, जबकि केंद्रीकृत नियंत्रण बनाए रखती है। संभवतः यही संतुलन इस विचार को उन कई यूरोपीय सरकारों के लिए आकर्षक बनाता है जो परमाणु हथियारों की मेजबानी या संयुक्त नियंत्रण पर बहस किए बिना अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प चाहती हैं।

नॉर्वे की भूमिका सीमित है, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण

स्टोरे ने कहा कि नॉर्वे शांति काल में परमाणु हथियारों की मेजबानी नहीं करेगा। यह स्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संकेत देती है कि फ्रांसीसी ढांचे में भागीदारी का अर्थ अपने-आप किसी बेसिंग प्रतिबद्धता या NATO-शैली की न्यूक्लियर-शेयरिंग मॉडल से नहीं है। ओस्लो के लिए, यह कदम तत्काल परिचालन बदलाव से अधिक रणनीतिक संरेखण और परामर्श के बारे में प्रतीत होता है।

फिर भी, नॉर्वे का निर्णय वजन रखता है। देश आर्कटिक में रूस से सीमा साझा करता है और लंबे समय से NATO के उत्तरी मोर्चे का अहम हिस्सा रहा है। फ्रांसीसी दायरे में उसका प्रवेश बताता है कि भविष्य में अमेरिकी प्रतिबद्धता को लेकर चिंता अब केवल मध्य यूरोप तक सीमित नहीं है। यह अब उच्च उत्तरी क्षेत्रों की सोच को भी प्रभावित कर रही है।

यह निर्णय मैक्रों के उस प्रयास को भी विश्वसनीयता देता है जिसमें वे फ्रांस को यूरोप के भीतर अधिक केंद्रीय सैन्य और राजनीतिक आधार के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। ऐसे समय में जब अटलांटिक पार की धारणाओं की अधिक जांच हो रही है, अतिरिक्त देशों की सीमित सहमति भी एक अमूर्त सिद्धांत को अधिक ठोस रणनीतिक परियोजना में बदलने में मदद कर सकती है।

व्यवहार में इस ढांचे का अर्थ अभी भी अस्पष्ट है

स्रोत पाठ स्पष्ट करता है कि इस नई प्रतिरोध-आर्किटेक्चर का व्यावहारिक अर्थ अभी तय नहीं है। नॉर्वे अभी यह समझने की शुरुआती प्रक्रिया में है कि भागीदारी में क्या-क्या शामिल होगा, जबकि अन्य देश पहले से ही अधिक ठोस संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए, पोलैंड फ्रांसीसी परमाणु-सक्षम राफाल विमानों की अग्रिम तैनाती में संभावित भूमिका पर चर्चा कर रहा है। अंश के अनुसार, जर्मनी के सितंबर से ही पर्यवेक्षक भूमिका में फ्रांसीसी परमाणु अभ्यासों में भाग लेने की उम्मीद है। ये घटनाक्रम दिखाते हैं कि यह ढांचा तत्काल संधि-जैसी प्रतिबद्धताओं के बजाय अभ्यास, योजना-व्यवस्था और तत्परता के दृश्य प्रदर्शन के माध्यम से विकसित हो सकता है।

यह अस्पष्टता दोधारी है। एक ओर, यह देशों को शुरू में अधिकतम दायित्व लिए बिना शामिल होने की अनुमति देती है। दूसरी ओर, प्रतिरोध-क्षमता आंशिक रूप से स्पष्टता पर निर्भर करती है। यदि विरोधियों को यह स्पष्ट नहीं है कि राजनीतिक वादे सैन्य कार्रवाई में कैसे बदलते हैं, तो आश्वासन अधूरा रह सकता है।

फिर भी, प्रवृत्ति को नजरअंदाज करना कठिन होता जा रहा है। फ्रांस अपनी परमाणु स्थिति को स्पष्ट रूप से यूरोपीय शब्दों में पुनर्परिभाषित कर रहा है, और अधिक देश संकेत दे रहे हैं कि वे इसमें शामिल होना चाहते हैं। नॉर्वे का निर्णय यह तय नहीं करता कि “फॉरवर्ड डेटेरेंस” आखिर क्या बनेगा, लेकिन यह दिखाता है कि यह विचार अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर एक व्यापक, भले ही अभी भी ढीले ढांचे वाले, सुरक्षा तंत्र की ओर बढ़ रहा है।

यह लेख Defense News की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

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