किफायती हमलावर हथियारों पर नया दांव
अमेरिकी नौसेना CoAspire की Rapidly Adaptable Affordable Cruise Missile-Extended Range, या RAACM-ER, के ज़मीन से दागे जाने वाले संस्करण के विकास में 70 मिलियन डॉलर लगा रही है। यह एक ऐसे कार्यक्रम के तहत है जो मुख्य रूप से मित्र देशों और साझेदार राष्ट्रों के लिए बनाया गया है। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, यह आवंटन नौसेना के Coalition Heterogenous Affordable Offensive Strike कार्यक्रम, यानी CHAOS, से जुड़े एक Other Transactional Agreement के माध्यम से आता है।
CHAOS के पीछे का मूल विचार सीधा है: मित्रतापूर्ण ज़मीनी बलों को कम लागत में, लंबी दूरी पर चलती जहाज़ों और ज़मीनी लक्ष्यों पर प्रहार करने का तरीका देना। यह प्रयास रक्षा की दो स्थायी समस्याओं के संगम पर खड़ा है। पहली है आधुनिक सटीक हथियारों की ऊँची लागत, खासकर तब जब योजनाकार अल्पकालिक अभियानों के बजाय लंबे संघर्ष के बारे में सोचने लगते हैं। दूसरी है उन क्षेत्रों में मित्र देशों की हमला क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता, जहाँ समुद्री खतरे, बिखरे हुए लक्ष्य और पहुँच संबंधी सीमाएँ सेनाओं को पारंपरिक वायु शक्ति और नौसैनिक लॉन्च प्लेटफ़ॉर्म से आगे सोचने के लिए मजबूर कर रही हैं।
RAACM-ER उसी जगह बैठने के लिए बनाई गई लगती है। इस मिसाइल का अनावरण 2026 की शुरुआत में हुआ था, और नई नौसेना-समर्थित पहल इसे अधिक ठोस प्रोटोटाइप चरण में ले जा रही है। CoAspire ने कहा कि काम में एक किफायती, ज़मीन से दागी जाने वाली, मध्यम-रेंज क्रूज़ मिसाइल प्रणाली का डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण और डिलीवरी शामिल होगी, जो स्थलीय और चलते हुए समुद्री लक्ष्यों दोनों पर हमला कर सके।
अनुबंध क्या संकेत देता है
स्रोत पाठ में इस आवंटन को Naval Aviation Systems Consortium की ओर से CMG Networks के साथ किया गया 70 मिलियन डॉलर का प्रोटोटाइप Other Transactional Agreement बताया गया है। OTAs का उपयोग अक्सर अमेरिकी सरकारी एजेंसियाँ तब करती हैं जब वे उन्नत शोध, प्रोटोटाइपिंग और विकास को पारंपरिक अधिग्रहण मार्ग की तुलना में तेज़ करना चाहती हैं। व्यवहार में इसका मतलब है कि नौसेना को इस अवधारणा में पर्याप्त संभावना दिख रही है, इसलिए वह अधिक पारंपरिक और अक्सर धीमी खरीद प्रक्रिया की प्रतीक्षा किए बिना काम तेज़ करना चाहती है।
इसका यह अर्थ नहीं है कि यह मिसाइल सीधे व्यापक तैनाती की ओर जा रही है। प्रोटोटाइप आवंटन अभी भी जोखिम कम करने के उपकरण हैं। लेकिन वे प्राथमिकताएँ ज़रूर उजागर करते हैं, और यहाँ प्राथमिकता उल्लेखनीय है: एक ऐसा हमला हथियार जो स्पष्ट रूप से किफ़ायत, विस्तारयोग्यता और गठबंधन उपयोग के लिए बनाया गया है।
स्रोत सामग्री में दिए गए CoAspire के अपने विवरण के अनुसार, इच्छित Foreign Military Sale ग्राहक वे मित्र देश और गठबंधन साझेदार हैं जिन्हें बड़े पैमाने पर बनाए जा सकने वाले प्रभावी समुद्री हमला हथियार की ज़रूरत है। यह शब्दावली महत्वपूर्ण है। नौसेना केवल किसी विशिष्ट, केवल अमेरिकी मिशन के लिए एक और मिसाइल परियोजना को वित्तपोषित नहीं कर रही। वह शुरुआत से ही निर्यात-योग्यता और बड़े पैमाने के उत्पादन को ध्यान में रखकर एक कार्यक्रम का समर्थन कर रही है।

इस डिज़ाइन में मित्र देश क्यों महत्वपूर्ण हैं
रणनीतिक कारण समझना आसान है। कई अमेरिकी मित्र देशों पर लंबी दूरी की तटीय रक्षा और एंटी-शिप हमला क्षमता को बेहतर बनाने का दबाव बढ़ रहा है, वह भी हर राउंड के लिए प्रीमियम कीमत चुकाए बिना। किसी संघर्ष में यदि वितरित समुद्री अभियानों के दौरान साझेदार ज़मीनी बल तट से दुश्मन जहाज़ों को धमकी दे सकें, तो प्रतिद्वंद्वी की योजना जटिल हो जाती है और उसे अधिक लॉन्च बिंदुओं का हिसाब रखना पड़ता है।
एक ज़मीन से दागी जाने वाली क्रूज़ मिसाइल लचीलापन भी देती है। इसे कुछ स्थिर-स्थान विकल्पों की तुलना में अधिक आसानी से फैलाया, स्थानांतरित और छिपाया जा सकता है, और यह हमला पैकेज पहुँचाने के लिए मानव-चालित विमानों या बड़े नौसैनिक युद्धपोतों पर निर्भरता कम करती है। छोटी सेनाओं के लिए, या सीमित बजट को फैलाने की कोशिश कर रहे सैन्य बलों के लिए, ऐसी कम लागत वाली क्रूज़ मिसाइल जो समुद्री और ज़मीनी दोनों लक्ष्यों पर वार कर सके, एक आकर्षक प्रस्ताव है।
नौसेना की भागीदारी से संकेत मिलता है कि यह केवल साझेदारों के शस्त्रागार बढ़ाने के बारे में नहीं है। यह बोझ साझा करने और व्यापक गठबंधन हमले की संरचना को आकार देने के बारे में भी है। यदि मित्र सेनाएँ पर्याप्त संख्या में अधिक किफ़ायती आक्रामक हथियार तैनात कर सकें, तो समग्र निरोधक तस्वीर बदल जाती है। यह खास तौर पर उन थिएटरों में प्रासंगिक है जहाँ समुद्री नियंत्रण कई बिखरी इकाइयों द्वारा लक्ष्यीकरण और engagement समस्या में योगदान देने पर निर्भर हो सकता है।
मिसाइल स्वयं
दी गई स्रोत सामग्री RAACM-ER को टर्बोजेट-चालित क्रूज़ मिसाइल बताती है, जिसका ट्रैपेज़ॉइडल शरीर व्यापक रूप में Lockheed Martin की AGM-158 Joint Air-to-Surface Standoff Missile परिवार की याद दिलाता है। इस तुलना को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए; पाठ स्वयं इसे समकक्ष क्षमता या डिज़ाइन वंशावली के दावे के बजाय केवल एक सामान्य दृश्य समानता के रूप में प्रस्तुत करता है। फिर भी, यह एक ऐसा रूप-कारक सुझाता है जो साधारण, निम्न-स्तरीय युद्धक्षेत्र रॉकेट के बजाय कुशल उड़ान और विस्तारित-रेंज हमले के लिए अनुकूल है।
दिखने से अधिक महत्वपूर्ण वह भूमिका है जिसे यह मिसाइल निभाने के लिए बनाई जा रही है। नौसेना-समर्थित संस्करण के बारे में उम्मीद है कि वह ज़मीन से दागी जाने वाली, मध्यम-रेंज और स्थिर या चलती हुई स्थलीय लक्ष्यों के साथ-साथ चलती हुई समुद्री लक्ष्यों पर भी हमला कर सकेगा। जहाज़ों पर वार करना उस सेट का अधिक तकनीकी रूप से मांग वाला हिस्सा है, क्योंकि समुद्री लक्ष्यों को भेदने के लिए आम तौर पर विश्वसनीय लक्ष्यीकरण, मार्गदर्शन और अंतिम चरण के व्यवहार का संयोजन चाहिए। कार्यक्रम द्वारा चलती हुई जहाज़ों पर ज़ोर यह दिखाता है कि नौसेना केवल एक शुद्ध भूमि-हमला निर्यात हथियार से अधिक ऑपरेशनल रूप से प्रासंगिक कुछ चाहती है।

साथ ही, किफ़ायत केंद्रीय बनी हुई है। यह शायद परियोजना की सबसे परिभाषित विशेषता है। पश्चिमी सेनाएँ वर्षों से शीर्ष-स्तरीय हथियारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और वास्तविक रूप से खरीदी जा सकने वाली मात्रा के बीच असंतुलन से जूझ रही हैं। एक ऐसी मिसाइल जो पर्याप्त अच्छी, अनुकूलनीय और बड़े पैमाने पर बनाने में आसान हो, कुछ स्थितियों में बेहद महंगे हथियारों के छोटे भंडार की तुलना में अधिक रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकती है।
अभी भी कई प्रश्न खुले हैं
स्रोत पाठ में कहा गया है कि CHAOS के तहत आगे जारी रखने के लिए नौसेना ने अन्य कंपनियों को भी चुना है या नहीं, यह सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं है। यह अनिश्चितता मायने रखती है, क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धी क्षेत्र कुछ हद तक अस्पष्ट रहता है। व्यापक चयन यह संकेत देता कि नौसेना कई अवधारणाओं पर दांव लगा रही है। एकमात्र प्रमुख चयन CoAspire के दृष्टिकोण पर अधिक शुरुआती विश्वास का संकेत दे सकता है। अभी उपलब्ध जानकारी केवल इतना ही समर्थन करती है कि RAACM-ER को नौसेना-समर्थित प्रोटोटाइप फंडिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा मिला है।
अन्य अज्ञात भी हैं। दिए गए सामग्री में घोषित रेंज, विस्तृत मार्गदर्शन संरचना, उत्पादन कार्यक्रम या नियोजित क्षेत्र-तैनाती समयरेखा नहीं दी गई है। यह भी नहीं बताया गया कि अंततः कौन से मित्र देश Foreign Military Sales के माध्यम से इस मिसाइल को प्राप्त कर सकते हैं, और न ही यह कि प्रणाली को साझेदार लक्ष्यीकरण नेटवर्क में कैसे एकीकृत किया जाएगा। प्रोटोटाइप चरण में ऐसे अंतर सामान्य हैं, लेकिन वे बताते हैं कि इस घोषणा को कैसे पढ़ा जाना चाहिए: एक महत्वपूर्ण कार्यक्रमात्मक कदम के रूप में, न कि अंतिम परिचालन मील के पत्थर के रूप में।
विस्तृत मिसाइल बाज़ार के लिए इसका क्या अर्थ है
इन सावधानियों के बावजूद, यह आवंटन स्पष्ट संकेत है कि माँग किस दिशा में जा रही है। सेनाएँ ऐसी आयुध सामग्री चाहती हैं जो केवल सटीक न हो, बल्कि बड़ी संख्या में खरीदी जा सके। वे ऐसे सिस्टम चाहती हैं जिन्हें गठबंधनों में साझा किया जा सके, अलग-अलग लॉन्च मोड के अनुसार ढाला जा सके, और स्थलीय तथा समुद्री दोनों लक्ष्यों के विरुद्ध उपयोग किया जा सके। और वे ऐसे अधिग्रहण रास्ते चाहती हैं जो विरासत खरीद मॉडलों से तेज़ हों।
CHAOS और RAACM-ER उसी प्रवृत्ति में बिल्कुल फिट बैठते हैं। नौसेना व्यावहारिक रूप से संकेत दे रही है कि साझेदारों के लिए किफ़ायती आक्रामक हमला क्षमता अब गौण खरीद मुद्दा नहीं रही। यह गठबंधन निरोध कैसे बनाया जाता है, उसका हिस्सा बन रही है। यदि CoAspire की मिसाइल डिज़ाइन और परीक्षण में अपेक्षा के अनुसार काम करती है, तो यह परियोजना भविष्य के निर्यात-उन्मुख सटीक हमले कार्यक्रमों के लिए एक खाका बन सकती है: कम लागत, स्केलेबल, बहु-मिशन और शुरू से ही मित्र देशों के अपनाने के लिए बनाई गई।
अभी सबसे ठोस तथ्य स्वयं फंडिंग का निर्णय है। नौसेना ने ऐसे कार्यक्रम के तहत ज़मीन से दागी जाने वाली RAACM-ER प्रोटोटाइप का समर्थन करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य मित्र देशों को सस्ते लंबी दूरी के हमले के विकल्पों से लैस करने में मदद करना है। एक रक्षा वातावरण में जो तेज़ी से मैगज़ीन गहराई, गठबंधन तत्परता और समुद्री निषेध द्वारा आकार ले रहा है, यह एक महत्वपूर्ण विकास है।
यह लेख twz.com की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on twz.com







