एक रिकॉर्ड प्लेयर को फिर से सीक्वेंसर के रूप में सोचना

हर महत्वपूर्ण तकनीकी कहानी किसी प्रोडक्ट लॉन्च या स्टार्टअप फंडिंग राउंड से नहीं आती। कभी-कभी यह एक विचित्र प्रोटोटाइप से निकलती है, जो बताता है कि उपकरणों को नए सिरे से कैसे सोचा जा सकता है। लंदन के संगीतकार, मेकर और साउंड आर्टिस्ट ग्राहम डनिंग द्वारा बनाई गई टर्नटेबल-आधारित ड्रम मशीन ऐसा ही एक उदाहरण है, जिसे दिए गए उम्मीदवार में लंदन साउथ बैंक यूनिवर्सिटी में एक पीएचडी थीसिस का हिस्सा बताया गया है।

यह उपकरण रिकॉर्ड प्लेयर की सतह पर एक क्वांटाइज़्ड ग्रिड प्रोजेक्ट करके और भौतिक स्थान-निर्धारण के माध्यम से ध्वनि घटनाएं ट्रिगर करके उसे ड्रम सीक्वेंसर में बदल देता है। यह संगीत उपकरण, यांत्रिक डिजाइन और अकादमिक प्रयोग का असामान्य मिश्रण है। और यह ठीक उसी तरह का प्रोजेक्ट है जो दिखाता है कि सांस्कृतिक नवाचार अक्सर कैसे होता है: पहले बड़े पैमाने की उपयोगिता से नहीं, बल्कि एक खेलपूर्ण तकनीकी बाधा से।

सिस्टम कैसे काम करता है

प्रदान किए गए स्रोत पाठ के अनुसार, यह मशीन सीक्वेंसर की तरह काम करती है क्योंकि एक ग्रिड समय तय करता है और अलग-अलग पंक्तियां अलग-अलग ध्वनियों के अनुरूप होती हैं। लेकिन स्क्रीन-आधारित इंटरफेस या पैड्स के बजाय, नोट्स घुमती हुई डिस्क के ऊपर प्रोजेक्ट किए गए ग्रिड पर स्लॉट में बॉल बेयरिंग रखकर बनाए जाते हैं। डेक के ऊपर लगे सेंसर गुजरती हुई बॉल बेयरिंग्स को पहचानते हैं और ध्वनि घटनाएं ट्रिगर करते हैं।

इसका परिणाम सीक्वेंसिंग का शाब्दिक रूप है। लय अब सॉफ्टवेयर के पीछे अमूर्त नहीं रहती। वह दृश्य, यांत्रिक और स्थानिक बन जाती है। यही इस प्रोजेक्ट को, व्यावहारिकता पर विचार करने से पहले ही, वैचारिक ताकत देता है।

उम्मीदवार स्पष्ट करता है कि व्यावहारिकता वास्तव में मुद्दा नहीं है। वह मशीन को बेहद अव्यावहारिक बताता है, और यही उसकी अपील का हिस्सा है। कई प्रयोगात्मक वाद्य इसलिए मूल्यवान होते हैं क्योंकि वे प्रक्रिया, embodied अनुभव और सिस्टम व्यवहार को उन तरीकों से सामने लाते हैं, जो मानक उपकरण नहीं करते।

बाधा ही विचार है

प्रदान किया गया पाठ बताता है कि टर्नटेबल की घूर्णन गति के कारण डिजाइन केवल एक-बार लूप की अनुमति देता है। 33 1/3 RPM पर, चार बीट का चक्र 133.333 BPM का टेम्पो देता है। उसी सतह को दो बार तक बढ़ाने पर टेम्पो बहुत ऊपर चला जाएगा, एक चरम रेंज में। सामान्य उत्पाद डिजाइन में ऐसी सीमा एक दोष मानी जा सकती है। कलात्मक शोध में यही परिभाषित करने वाला आधार बन जाती है।

रचना को एक ही बार तक सीमित करके, यह मशीन घनत्व, ऑफसेट रिद्म और असामान्य टाइमिंग विकल्पों को प्रोत्साहित करती है। स्रोत पाठ नोट करता है कि हर बीट को आठवें नोट्स में विभाजित किया गया है, जिससे जटिल, थोड़ा असंतुलित पैटर्न संभव होते हैं। यह डिजाइन तर्क महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि भौतिक सीमा संगीत भाषा को केवल सीमित नहीं करती, बल्कि उसे आकार भी दे सकती है।

यही एक कारण है कि यह प्रोजेक्ट अपनी नवीनता से परे सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक महसूस होता है। यह सॉफ्टवेयर-अमूर्तता से भरे युग में स्पर्शनीय इंटरफेस के प्रति व्यापक आकर्षण को दर्शाता है। कलाकार और वाद्य-डिज़ाइनर बार-बार भौतिक प्रणालियों की ओर लौटते हैं क्योंकि घर्षण रचनात्मकता पैदा कर सकता है। जब सब कुछ सॉफ्टवेयर में अनंत रूप से संपादित किया जा सकता है, तब सावधानीपूर्वक स्थान-निर्धारण, घूर्णन और सेंसर टाइमिंग की मांग करने वाली मशीन एक अलग तरह की भागीदारी देती है।

शैक्षणिक शोध और संगीत तकनीक का संगम

यह प्रोजेक्ट संस्थागत रूप से भी दिलचस्प जगह पर है। इसे Mechanical Techno: Extended Turntable as Live Assemblage शीर्षक वाली पीएचडी थीसिस का हिस्सा बताया गया है। अकादमिक फ्रेमिंग और लाइव म्यूजिक उपकरण का यह मेल संदेह जगा सकता है, लेकिन यह भी दिखाता है कि विश्वविद्यालय कभी-कभी ऐसे टूल कॉन्सेप्ट्स के इनक्यूबेटर की तरह काम करते हैं जिन्हें व्यावसायिक स्टूडियो कभी प्राथमिकता नहीं देते।

प्रयोगात्मक संगीत तकनीक अक्सर बिल्कुल इसी क्षेत्र में फलती-फूलती है: आधा वाद्य, आधा तर्क। टर्नटेबल सीक्वेंसर सिर्फ बीट्स बनाने का उपकरण नहीं है। यह इंटरफेस डिजाइन, भौतिकता, और डिजिटल संगीत संस्कृति में एनालॉग सोच की निरंतरता पर एक कथन है। इसकी प्रासंगिकता इस बात में है कि यह उन सवालों को फिर से खोलता है जिन्हें मुख्यधारा के प्रोडक्शन टूल्स पहले ही सुलझा हुआ मान लेते हैं।

स्रोत पाठ असेंबलेज थ्योरी से संबंध का संकेत देता है, लेकिन यहाँ उसे इतनी दूर तक नहीं पढ़ना चाहिए। फिर भी, दृश्य डिजाइन के स्तर पर भी, यह मशीन कई प्रणालियों को एक प्रदर्शन वस्तु में जोड़ती है: टर्नटेबल मैकेनिक्स, प्रोजेक्ट की गई नोटेशन, चलती धातु की वस्तुएं, और सेंसर-ट्रिगर्ड ध्वनि।

ऐसे प्रोजेक्ट क्यों मायने रखते हैं

इस डिवाइस को एक चतुर विचित्रता मानकर खारिज करना आसान होगा। लेकिन संस्कृति और तकनीक उन प्रयोगों से आगे बढ़ती हैं जो प्रभावशाली दिखने से पहले अतिरेक लगते हैं। कई विचार जो बाद में मुख्यधारा बन जाते हैं, शुरुआत में बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए proof of concept होते हैं। भले ही वे सीधे उत्पादों में न बदलें, वे इस शब्दावली का विस्तार करते हैं कि डिजाइनर और कलाकार क्या संभव मानते हैं।

यहां सबसे मजबूत सीख यह नहीं है कि टर्नटेबल ड्रम मशीनों की जगह ले लेंगे। वे नहीं लेंगे। बात यह है कि रिद्म प्रोग्रामिंग को यांत्रिक, नाटकीय और दृश्यमान कारण-परिणाम वाला बनाया जा सकता है, जिस तरह सॉफ्टवेयर शायद ही कभी कर पाता है। यह मशीन सीक्वेंसिंग को प्रदर्शन में और बाधा को तमाशे में बदल देती है।

यह व्यापक सांस्कृतिक अर्थ में महत्वपूर्ण है क्योंकि उपकरण कलात्मक व्यवहार को आकार देते हैं। घूमती सतहों और बॉल बेयरिंग्स से बना सीक्वेंसर मानक वर्कफ्लो को नए खोल में दोहराने भर का काम नहीं करता। यह दोहराव, समय और अंतःक्रिया के बारे में अलग तरह से सोचने के लिए प्रेरित करता है। यही प्रयोगात्मक वाद्यों का उद्देश्य है।

एक ऐसा उत्पाद जिसकी किसी को जरूरत नहीं, फिर भी अच्छा विचार

प्रदान किए गए लेख का हास्यपूर्ण ढंग कहानी का हिस्सा है, लेकिन उसके नीचे एक गंभीर डिजाइन अंतर्दृष्टि है। टर्नटेबल ड्रम मशीन एक अव्यावहारिक वाद्य है जिसकी आंतरिक तर्कशृंखला बहुत सख्त है। यह एक परिचित प्लेबैक डिवाइस को रचना प्रणाली में बदल देती है और याद दिलाती है कि संगीत तकनीक में नवाचार हमेशा दक्षता के बारे में नहीं होता। कभी-कभी यह प्रक्रिया को इतना अजीब बना देने के बारे में होता है कि वह फिर से सृजनशील हो जाए।

  • ग्राहम डनिंग का उपकरण बॉल बेयरिंग्स और सेंसर का उपयोग करके टर्नटेबल को एक-बार ड्रम सीक्वेंसर में बदलता है।
  • यह प्रोजेक्ट लंदन साउथ बैंक यूनिवर्सिटी में mechanical techno और live assemblage पर केंद्रित पीएचडी का हिस्सा है।
  • इसका मूल्य व्यावहारिकता से कम और इस बात से अधिक है कि संगीत इंटरफेस कैसे काम कर सकते हैं, इसे फिर से सोचना।

यह लेख Gizmodo की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें