ब्राज़ील के एक पौधे पर अध्ययन एक व्यापक एंटीवायरल रणनीति की ओर इशारा करता है

ब्राज़ील के अटलांटिक फ़ॉरेस्ट में काम कर रहे शोधकर्ताओं ने एक ऐसा पौध-यौगिक पहचाना है जो कोविड-19 को एक से अधिक वायरल कमजोर बिंदुओं के जरिए निष्प्रभावी करता हुआ दिखता है, एक ऐसा निष्कर्ष जो महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि कई एंटीवायरल केवल एक ही लक्ष्य पर काम करते हैं। यह काम Copaifera lucens Dwyer पर केंद्रित है, जो माटा अटलांटिका में पाई जाने वाली एक वृक्ष प्रजाति है, यह वर्षावन-जैव क्षेत्र ब्राज़ील के पूर्वी तट के साथ फैला हुआ है और देश की जैव विविधता में बड़ा योगदान देता है।

प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार, जीवविज्ञानियों, इम्यूनोलॉजिस्टों और औषधि रसायनज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि पेड़ की पत्तियों के अर्क में गैलोयलक्विनिक अम्ल मौजूद हैं, जो शोधकर्ताओं के अनुसार बहु-लक्ष्यीय क्रिया-प्रणाली के जरिए SARS-CoV-2 को निष्क्रिय कर सकते हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा उपचार जो वायरस के कई घटकों में एक साथ बाधा डालता है, उत्परिवर्तन के जरिए वायरस के लिए उससे बच निकलना अधिक कठिन बना सकता है।

यह तंत्र क्यों अलग नजर आता है

इस परियोजना का समन्वय साओ पाउलो विश्वविद्यालय के रिबेराओ प्रेटो स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़ के जाइरो केनुप बास्तोस ने किया। स्रोत सामग्री में बास्तोस ने इस खोज की तुलना कई मौजूदा एंटीवायरल दवाओं की सीमाओं से की, जो केवल एक वायरल प्रोटीन को लक्ष्य बनाती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापक तंत्र वायरस के विकसित होने पर प्रतिरोध के उभरने की संभावना को कम कर सकता है।

शोध दल ने रिपोर्ट किया कि 3,4,5-ट्राइ-गैलॉयलक्विनिक अम्ल नामक एक विन्यास ने कोरोनावायरस स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन से मजबूत बाइंडिंग एफिनिटी दिखाई। यह वही संरचना है जिसका उपयोग वायरस मानव कोशिकाओं से चिपकने के लिए करता है। स्रोत पाठ में यह भी कहा गया है कि यौगिकों का मूल्यांकन प्लाक रिडक्शन न्यूट्रलाइज़ेशन असेज़ से किया गया, जिसे वहां एंटीवायरल क्षमता मापने की स्वर्ण-मानक विधि बताया गया है।

व्यावहारिक रूप से, यह निष्कर्ष सुझाता है कि पौधे से प्राप्त ये अणु उस मशीनरी में बाधा डाल सकते हैं जिसका वायरस कोशिकाओं में प्रवेश के लिए उपयोग करता है, और प्रतिकृति के लिए आवश्यक अन्य एंजाइमों में भी। यदि आगे के काम में यह सही साबित होता है, तो यह खोज केवल कोविड-19 के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे एंटीवायरलों की व्यापक खोज के लिए भी उल्लेखनीय होगी जो वेरिएंट बदलने पर भी उपयोगी बने रह सकें।