एक रणनीतिक गैस अब ऑटो उद्योग की चिंता बन रही है

ईरान में जारी संघर्ष से जुड़ी संभावित हीलियम कमी ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए एक जोखिम कारक के रूप में उभर रही है, जिसके सेमीकंडक्टर उत्पादन और advanced driver assistance systems के रोलआउट पर संभावित प्रभाव हो सकते हैं। यह मुद्दा Automotive News की उस कवरेज में सामने आया जिसमें Shift podcast पर Stephan Keese, Roland Berger North America के वरिष्ठ साझेदार, का साक्षात्कार शामिल था। उनका तर्क था कि हीलियम आपूर्ति में कसावट ऑटो निर्माताओं को internal combustion engine वाहनों की ओर और धकेल सकती है।

यह एक चौंकाने वाला दावा है क्योंकि हीलियम आम तौर पर मुख्यधारा के ऑटो कवरेज में चर्चा का विषय नहीं होता। फिर भी, सेमीकंडक्टर निर्माण में इसकी एक विशेष भूमिका है, और सेमीकंडक्टर आधुनिक वाहनों के लिए अनिवार्य हैं। जब अपस्ट्रीम औद्योगिक गैस सीमित हो जाती है, तो उसके प्रभाव रसायन आपूर्ति श्रृंखला से कहीं आगे तक फैल सकते हैं। इस मामले में चिंता यह है कि कम chip output उन components को प्रभावित करेगा जिनकी ज़रूरत increasingly software-heavy और sensor-rich vehicle platforms को होती है।

स्रोत सामग्री संक्षिप्त है, लेकिन यह उद्योग की एक महत्वपूर्ण कमजोरी की ओर इशारा करती है। पिछले कई वर्षों में ऑटो निर्माताओं ने देखा है कि chip supply disruptions उत्पादन योजना को कैसे बदल सकते हैं, vehicle feature sets को घटा सकते हैं और product mix decisions को प्रभावित कर सकते हैं। हीलियम का दबाव इसी तरह के तनाव का एक अलग कारण होगा: semiconductor manufacturing के upstream में एक materials bottleneck, जो बाद में vehicle assembly और equipment decisions तक पहुँचता है।

ADAS विशेष रूप से क्यों प्रभावित है

Keese की चेतावनी ADAS, यानी advanced driver assistance systems, पर केंद्रित है। ये features electronics, computing hardware और sensors के बढ़ते stack पर निर्भर करते हैं। भले ही दी गई स्रोत सामग्री में विशिष्ट functions का उल्लेख नहीं है, इस श्रेणी में वे technologies शामिल हैं जो अधिक बुनियादी vehicle configurations की तुलना में electronic complexity बढ़ाती हैं। यदि semiconductor supply कड़ा होता है, तो उन products को बड़े पैमाने पर बनाना कठिन या प्राथमिकता देने में महंगा हो सकता है जिनकी dependence electronic content पर सबसे अधिक है।

यही कारण है कि यह चेतावनी सिर्फ एक raw-material कहानी से आगे मायने रखती है। मौजूदा बाजार में ADAS, software-defined और electronically intensive vehicles की ओर उद्योग के बदलाव का सबसे स्पष्ट रूप बन चुका है। ऐसी आपूर्ति-सीमा जो उन features को खतरे में डालती है, केवल parts flow को नहीं रोकती। यह product roadmap की रणनीतिक दिशा पर दबाव बनाती है, कि निर्माता क्या लाभप्रद रूप से पेश कर सकते हैं और खरीदार क्या यथार्थ रूप से अपेक्षा कर सकते हैं।

यह सुझाव कि यह गतिशीलता automakers को internal combustion engine vehicles की ओर और धकेल सकती है, सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए। उपलब्ध स्रोत सामग्री इसे पुष्टि की गई प्रवृत्ति के बजाय एक संभावित परिणाम के रूप में प्रस्तुत करती है। फिर भी, तर्क सीधा है: यदि supply shortages सबसे अधिक electronics-demanding systems को हासिल करना कठिन बना देते हैं, तो निर्माता कम-से-कम निकट अवधि में उन vehicles या trims पर अधिक निर्भर हो सकते हैं जो इन bottlenecks के प्रति कम संवेदनशील हैं।