एक छोटी आकाशगंगा ब्रह्मांड विज्ञान के सबसे पुराने प्रश्नों में से एक के लिए एक बड़ा संकेत दे रही है

प्रारंभिक ब्रह्मांड का अध्ययन कर रहे खगोलविदों का कहना है कि उन्हें एक असामान्य रूप से स्पष्ट उदाहरण मिला है, जिसमें एक आकाशगंगा ने ब्रह्मांड को अपारदर्शी से पारदर्शी बनाने में मदद की। MXDFz4.4 नामक इस पिंड को उस रूप में देखा जा रहा है जैसा यह बिग बैंग के लगभग 1.4 अरब वर्ष बाद था, जब ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा अभी भी शोधकर्ताओं के अनुसार हाइड्रोजन गैस की एक धुंध से उभर रहा था। उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार, हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इस आकाशगंगा से आयनीकरण करने वाला प्रकाश पकड़ा, एक ऐसा निष्कर्ष जो वैज्ञानिकों की उस समझ को अधिक स्पष्ट कर सकता है कि ब्रह्मांड ने पुनआयनीकरण के युग से कैसे गुज़रना शुरू किया।

यह युग ब्रह्मांडीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक है। बिग बैंग के बाद, पदार्थ इतना ठंडा हो गया कि तटस्थ हाइड्रोजन बन सका, और उस गैस ने अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे अधिकांश पराबैंगनी प्रकाश को अवशोषित कर लिया। परिणामस्वरूप ब्रह्मांड अभी उन प्रकार के विकिरणों के लिए पूरी तरह पारदर्शी नहीं था, जो गर्म युवा तारों से निकलते हैं। समय के साथ यह स्थिति बदली। प्रारंभिक स्रोतों से आने वाले विकिरण ने हाइड्रोजन परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन अलग करना शुरू किया, गैस को आयनित किया और प्रकाश को विशाल दूरियों तक अधिक स्वतंत्र रूप से यात्रा करने दी।

लंबे समय से अनसुलझा प्रश्न यह रहा है कि इस परिवर्तन को किसने संचालित किया और उन्होंने इसे कितनी दक्षता से किया। MXDFz4.4 अकेले इस पूरी समस्या का उत्तर नहीं देता, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट इसे अपने तरह की पहली ऐसी आकाशगंगा के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसे उस प्रारंभिक युग के इतना निकट देखा गया, जबकि वह अभी भी वही विकिरण दिखा रही थी जो आसपास के हाइड्रोजन को साफ कर सकता है।

यह पता लगाना क्यों महत्वपूर्ण है

MXDFz4.4 का केंद्रीय महत्व केवल यह नहीं है कि यह पुरानी है। महत्वपूर्ण यह है कि हबल इससे आयनीकरण करने वाला प्रकाश पकड़ सका। स्रोत पाठ में वर्णित ढांचे के अनुसार, प्रारंभिक ब्रह्मांड के हाइड्रोजन-समृद्ध वातावरण ने उस प्रकाश को बहुत हद तक रोक देना चाहिए था। फिर भी खगोलविदों ने इसके प्रमाण देखे, जिससे संकेत मिलता है कि कम से कम कुछ आकाशगंगाएँ पर्याप्त तीव्र विकिरण पैदा कर रही थीं, और अपने आसपास की गैस में इतनी खुली नलिकाएँ बना रही थीं कि वह ऊर्जा अंतरगैलेक्टिक अंतरिक्ष में निकल सके।

रिपोर्ट कहती है कि इस प्रकार का प्रकाश रिसते हुए जिस आकाशगंगा को पहले सबसे शुरुआती रूप में देखा गया था, वह बिग बैंग के 1.6 अरब वर्ष बाद के ब्रह्मांडीय समय पर दिखाई गई थी। MXDFz4.4 उस अवलोकनात्मक सीमा को और पीछे, 1.4 अरब वर्ष तक ले जाता है। ब्रह्मांडीय दृष्टि से यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाहर निकलते आयनीकरण करने वाले विकिरण के प्रत्यक्ष प्रमाण को उस युग के और करीब लाता है जब पुनआयनीकरण अभी भी सक्रिय रूप से ब्रह्मांड को बदल रहा था।

शोधकर्ताओं को यह भी लगता है कि MXDFz4.4 अद्वितीय नहीं है। स्रोत के अनुसार खगोलविदों का मानना है कि यह बहुतों में से केवल एक है, जो यह संकेत देता है कि छोटे, तीव्र रूप से तारा-निर्माण करने वाले आकाशगंगीय तंत्र पुनआयनीकरण में पहले सोचे गए से अधिक सामान्य योगदानकर्ता रहे होंगे। यदि ऐसा है, तो यह नया अवलोकन केवल एक रिकॉर्ड बनाने वाला निष्कर्ष नहीं, बल्कि आगे क्या खोजना है, उसके लिए एक खाका भी है।

आकार में छोटी, उत्पादन में तीव्र आकाशगंगा

दिए गए पाठ का एक उल्लेखनीय विवरण MXDFz4.4 के आकार और उसकी गतिविधि के बीच का अंतर है। आकाशगंगा को आकाशगंगा मंदाकिनी से लगभग सौ गुना छोटी बताया गया है, फिर भी यह नए तारों का निर्माण लगभग दस गुना तेज़ी से कर रही है। यह संयोजन एक ऐसे वातावरण की ओर इशारा करता है जो युवा, गर्म, विशाल तारों से भरा हुआ है और जो बड़ी मात्रा में पराबैंगनी विकिरण पैदा कर सकता है।

वे तारे पुनआयनीकरण की कहानी के केंद्र में हैं। विशाल तारे हाइड्रोजन को आयनित करने के लिए आवश्यक ऊर्जावान प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, लेकिन उनका जीवन अल्पकालिक होता है और वे हिंसक रूप से समाप्त होते हैं। स्रोत पाठ के अनुसार टीम का मानना है कि MXDFz4.4 के आयनीकरण करने वाले पराबैंगनी प्रकाश का आधा से लेकर पूरा भाग तक अंतरिक्ष में निकल सकता है। यह भी कहा गया है कि अल्पायु विशाल तारों के सुपरनोवा विस्फोट आसपास की गैस में छेद कर सकते हैं, जिससे और अधिक विकिरण बाहर की ओर बह सकता है।

यह चित्र महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक अमूर्त सांख्यिकीय योगदान के बजाय एक ठोस भौतिक तंत्र प्रस्तुत करता है। MXDFz4.4 जैसी आकाशगंगा एक साथ दो प्रभावों को जोड़कर अपने पड़ोस को साफ कर सकती है: तीव्र पराबैंगनी प्रकाश का निरंतर उत्पादन, और उस गैस की बार-बार होने वाली संरचनात्मक बाधा जो अन्यथा उस विकिरण को फँसा लेती। इस अर्थ में, आकाशगंगा केवल चमकीली नहीं है। वह गतिशील रूप से स्वयं को अधिक पारदर्शी बना रही है।

कई वेधशालाओं ने कैसे योगदान दिया

यह खोज एक से अधिक दूरबीनों पर निर्भर थी। हबल ने निर्णायक भूमिका निभाई क्योंकि आकाशगंगा का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने के लिए 12 अरब वर्षों से अधिक समय से यात्रा कर रहा है और ब्रह्मांड के विस्तार के कारण पराबैंगनी से खिंचकर उन दृश्य तरंगदैर्घ्यों में बदल गया है जिन्हें हबल पहचान सकता है। तरंगदैर्घ्य का यह परिवर्तन ब्रह्मांडीय विस्तार का एक मानक परिणाम है, लेकिन यहाँ यह एक व्यावहारिक अवलोकनात्मक लाभ बन जाता है: जो विकिरण कभी पराबैंगनी में उत्सर्जित हुआ था, वह अब ऐसे रूप में पहुँचता है जिसे पृथ्वी की कक्षा में स्थित वेधशाला पकड़ सकती है।

दिए गए लेख के अनुसार, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का उपयोग तब आकाशगंगा के द्रव्यमान का अनुमान लगाने और उसके इतिहास का पुनर्निर्माण करने के लिए किया गया, जबकि चिली में स्थित वेरी लार्ज टेलीस्कोप ने उसकी सटीक स्थिति निर्धारित करने में मदद की। यह बहु-वेधशाला दृष्टिकोण उस तरह को दर्शाता है, जिस तरह आज अग्रणी खगोल विज्ञान काम करता है। किसी एक उपकरण से ज़रूरी सभी उत्तर मिलना आवश्यक नहीं है। इसके बजाय शोधकर्ता विभिन्न दूरबीनों की क्षमताओं को जोड़ते हैं: पहुँच योग्य तरंगदैर्घ्यों में मुख्य पहचान के लिए हबल, भौतिक विशेषताओं के निर्धारण के लिए वेब, और स्थिति की पुष्टि के लिए ज़मीनी सुविधाएँ।

इस सहयोग के भीतर भी हबल की भूमिका उल्लेखनीय है। नई वेधशालाओं के प्रक्षेपण के वर्षों बाद भी, वह ऐसे परिणाम दे सकता है जो प्रारंभिक ब्रह्मांड में वैज्ञानिक प्रत्यक्ष रूप से क्या देख सकते हैं, उसकी समय-रेखा को बदल देते हैं। इस मामले में, उसने एक ऐसी आकाशगंगा की पहचान करने में मदद की जो संभवतः पुनआयनीकरण युग के केंद्र के पिछले पुष्ट उदाहरणों की तुलना में अधिक करीब है।

यह निष्कर्ष क्या स्थापित करता है और क्या नहीं

दिया गया स्रोत इस खोज को उस क्षण का अब तक का सबसे निकटतम दृश्य बताता है जब ब्रह्मांड साफ होना शुरू हुआ, लेकिन इसे इस दावे के रूप में नहीं समझना चाहिए कि किसी एक आकाशगंगा ने अकेले पुनआयनीकरण की समस्या हल कर दी। बल्कि, MXDFz4.4 इस बात का प्रमाण प्रस्तुत करती है कि अत्यधिक तारा-निर्माण और आयनीकरण करने वाले विकिरण के मजबूत पलायन वाली आकाशगंगाएँ इतनी जल्दी मौजूद थीं कि वे इस प्रक्रिया में ठोस योगदान दे सकें।

यह भेद महत्वपूर्ण है। पुनआयनीकरण एक विस्तारित अवधि में होने वाला वैश्विक परिवर्तन था, न कि किसी एक पिंड से शुरू हुई एक-बार की घटना। MXDFz4.4 का महत्व यह है कि यह एक अग्रणी व्याख्या को मजबूत करता है: कई ऊर्जावान, कॉम्पैक्ट आकाशगंगाएँ सामूहिक रूप से वह पराबैंगनी उत्पादन दे सकती थीं, जो अंतरगैलेक्टिक हाइड्रोजन की विशाल मात्रा को आयनित करने के लिए आवश्यक था।

स्रोत पाठ यह भी संकेत देता है कि खगोलविद अभी भी अवलोकनात्मक कमी से जूझ रहे हैं। यदि यह समय की शुरुआत के इतने करीब देखी गई पहली ऐसी आकाशगंगा है, तो प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भी सीमित हैं। यही कारण है कि हर खोज असमान रूप से उपयोगी हो जाती है, क्योंकि वह उन मॉडलों पर सीमाएँ लगाती है जो अन्यथा काफी हद तक अनुमान पर निर्भर रहते हैं। शोधकर्ता अनुकरण किए गए प्रारंभिक आकाशगंगाओं की तुलना वास्तविक गुणों से कर सकते हैं, जैसे आकार, तारा-निर्माण की तीव्रता, और आयनीकरण करने वाले प्रकाश का अनुमानित पलायन अंश।

ब्रह्मांड के प्रारंभिक इतिहास में एक स्पष्ट रास्ता

इस खोज को जो चीज़ प्रभावशाली बनाती है, वह यह है कि यह एक नाटकीय ब्रह्मांडीय प्रश्न को एक विशिष्ट, मापनीय पिंड से जोड़ती है। पुनआयनीकरण को अक्सर व्यापक सैद्धांतिक शब्दों में वर्णित किया जाता है, लेकिन MXDFz4.4 उस परिवर्तन को एक ठोस रूप देती है: गर्म तारों से भरी एक सघन आकाशगंगा, जो अपनी ही गैस में छेद कर रही है और ऊर्जावान प्रकाश को व्यापक ब्रह्मांड में रिसने दे रही है।

यह मामला बंद नहीं करता। हालांकि, यह प्रमाण-आधार को एक उपयोगी दिशा में आगे बढ़ाता है। बिग बैंग के 1.4 अरब वर्ष बाद आयनीकरण करने वाले विकिरण के ज्ञात अग्रभाग को पीछे धकेलकर, खगोलविदों को यह समझने के लिए एक निकटतर अवलोकनात्मक आधार मिलता है कि ब्रह्मांड की लंबी हाइड्रोजन धुंध कैसे छँटना शुरू हुई।

यदि MXDFz4.4 जैसी अतिरिक्त आकाशगंगाएँ मिलती हैं, तो तस्वीर तेज़ी से और स्पष्ट हो सकती है। वैज्ञानिक यह परख सकेंगे कि यह पिंड असाधारण है या प्रारंभिक प्रणालियों की एक व्यापक श्रेणी का प्रतिनिधि। फिलहाल, इस अवलोकन से संदेश अधिक केंद्रित है: युवा ब्रह्मांड की कम से कम कुछ छोटी आकाशगंगाएँ इतनी शक्तिशाली और इतनी छिद्रपूर्ण थीं कि उन्होंने ब्रह्मांड को पारदर्शी बनाने में मदद की।

यह लेख Universe Today की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on universetoday.com