दूसरी पृथ्वी खोजने में सबसे कठिन हिस्सा दूरी नहीं, बल्कि चमक है
खगोलविदों को पृथ्वी-जैसे ग्रह खोजने के लिए केवल बड़े दूरबीनों की ही नहीं, बल्कि उन तारों की चकाचौंध भरी रोशनी को दबाने के तरीकों की भी जरूरत होती है जिनकी परिक्रमा वे ग्रह करते हैं। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, NASA के प्रस्तावित Habitable Worlds Observatory को सीधे मंद एक्सोप्लैनेट की छवि लेने के लिए आने वाली तारों की रोशनी को दस अरब गुना तक कम करना होगा। यह ऑप्टिकल चुनौती का स्तर है।
इस प्रयास के केंद्र में जो तकनीक है, वह एक ऑप्टिकल वॉर्टेक्स फेज मास्क है, जो दूरबीन के फोकल बिंदु पर रखा गया एक छोटा लेकिन अत्यंत सटीक घटक है। इसका काम आने वाली तारों की रोशनी को इस तरह नियंत्रित करना है कि वह विनाशकारी व्यतिकरण के जरिए प्रभावी रूप से स्वयं को रद्द कर दे। जो बचता है, उसे फिर अवरुद्ध किया जा सकता है, जिससे ऑफ-एक्सिस ग्रह से आने वाली कहीं अधिक फीकी रोशनी डिटेक्टर तक पहुंच सके।
मास्क कैसे काम करता है
स्रोत पाठ इस समस्या की तुलना किलोमीटरों दूर से किसी लाइटहाउस के बगल में जुगनू को देखने की कोशिश से करता है। पृथ्वी-जैसे संसारों की सीधे छवि लेने की कोशिश में खगोलविदों के सामने यही चमक अनुपात होता है। चाहे दूरबीन का दर्पण कितना भी परिपूर्ण क्यों न हो, विवर्तन की भौतिकी तारों की रोशनी को वलयाकार Airy पैटर्न में फैला देती है। वे वलय पास के किसी एक्सोप्लैनेट से आने वाले संकेत को फिर भी दबा सकते हैं।
वॉर्टेक्स मास्क अपने केंद्र के चारों ओर लगातार बढ़ते हुए सावधानीपूर्वक अभियांत्रित फेज विलंब को जोड़कर इस समस्या का समाधान करता है, जैसे किसी पेंच का उठता हुआ धागा। जब केंद्रित तारों की रोशनी उस संरचना से गुजरती है, तो वेवफ्रंट इस तरह बदल जाता है कि आगे चलकर रोशनी एक-दूसरे को रद्द कर देती है। ग्रह की रोशनी, जो थोड़ा अलग कोण से आती है, केंद्र से चूक जाती है और इस प्रक्रिया से बच जाती है।
यह केवल एक चतुर चाल नहीं है। यह खगोल विज्ञान की उस भविष्य की शैली को संभव बनाने वाली तकनीकों में से एक है जो सांख्यिकीय पहचान से आगे बढ़कर संभावित रूप से रहने योग्य ग्रहों को सीधे देखने की दिशा में जाती है। ट्रांजिट और रेडियल-वेलोसिटी विधियों ने पहले ही एक्सोप्लैनेट विज्ञान को बदल दिया है, लेकिन वे आम तौर पर ग्रहों का अनुमान उनके प्रभावों से लगाती हैं। सीधे इमेजिंग से खगोलविद दुनिया को संकेतों की तरह नहीं, बल्कि दृश्यों की तरह देख सकेंगे।
यहां सामग्री विज्ञान भी क्यों महत्वपूर्ण है
स्रोत पाठ में वर्णित तकनीक का सबसे आशाजनक संस्करण लिक्विड क्रिस्टल पॉलिमर की एक पतली परत का उपयोग करता है। इसके आणविक शृंखलाओं की दिशा को इतनी सटीकता से नियंत्रित किया जा सकता है कि ध्रुवण के आधार पर प्रकाश को अलग तरह से आकार दिया जा सके। क्योंकि यह जो विलंब पैदा करता है वह भौतिक रसायन-शास्त्र से संकीर्ण रूप से जुड़ा होने के बजाय ज्यामितीय होता है, इसलिए यह तरंगदैर्घ्य की व्यापक सीमा में काम कर सकता है।
यह ब्रॉडबैंड व्यवहार महत्वपूर्ण है। जीवन के संकेत खोजने के लिए बनाई गई दूरबीन एक ही रंग की रोशनी पर निर्भर नहीं रह सकती। उसे ऐसा स्पेक्ट्रम देखना होगा जो वायुमंडलीय संरचना प्रकट करने के लिए पर्याप्त समृद्ध हो। दूसरे शब्दों में, जिस यंत्र का उपयोग तारों की रोशनी दबाने के लिए होता है, उसे उस जानकारी को भी सुरक्षित रखना होगा जो यह पूछने के लिए चाहिए कि क्या किसी दूरस्थ दुनिया में रहने योग्य स्थिति से जुड़े गैसें या विशेषताएं हैं।
एक छोटा घटक, लेकिन बड़े प्रभावों वाला
वॉर्टेक्स मास्क को इतना प्रभावशाली बनाने वाली बात उसका आकार और उसकी रणनीतिक महत्ता के बीच का अंतर है। यह एक बहुत बड़े वेधशाला-परिकल्पना के भीतर एक मामूली तत्व है, लेकिन इस तरह की starlight-suppression तकनीक के बिना मिशन का लक्ष्य बहुत कठिन हो जाता है। दूरबीन फिर भी तारों और अन्य कई खगोलीय लक्ष्यों को देख सकती है, लेकिन पृथ्वी-जैसे ग्रहों की सीधे छवि लेने की विशिष्ट महत्वाकांक्षा प्रभावित होगी।
अंतरिक्ष विज्ञान अक्सर इसी तरह आगे बढ़ता है: केवल विशाल रॉकेटों या प्रमुख वेधशालाओं के जरिए नहीं, बल्कि ऐसे सटीक घटकों के जरिए जो किसी संकीर्ण रूप से परिभाषित भौतिक समस्या का समाधान करते हैं। एक अकेली ऑप्टिकल बाधा खगोलविदों और अवलोकन की एक पूरी नई श्रेणी के बीच खड़ी हो सकती है।
यदि Habitable Worlds Observatory सफल होता है, तो वैज्ञानिक लाभ अपार होगा। दूरस्थ चट्टानी ग्रहों की सीधे ली गई छवियां, वायुमंडलीय स्पेक्ट्रोस्कोपी के साथ मिलकर, Solar System के बाहर जीवन की खोज को नए सिरे से आकार दे सकती हैं। ऑप्टिकल वॉर्टेक्स फेज मास्क पूरी कहानी नहीं है, लेकिन यह इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरणों में से एक है कि अब एक्सोप्लैनेट खोज उतनी ही प्रकाश के सूक्ष्म नियंत्रण पर निर्भर करती है जितनी उसे इकट्ठा करने वाली दूरबीन की कच्ची शक्ति पर।
यह लेख Universe Today की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on universetoday.com




