कृत्रिम जीवविज्ञान की एक उपलब्धि, लेकिन महत्वपूर्ण सीमाओं के साथ
मिसौरी विश्वविद्यालय की केट एडामाला के नेतृत्व वाली एक शोध टीम ने अब तक के सबसे सक्षम कृत्रिम कोशिका तंत्रों में से एक तैयार किया है, जिसे गैर-जीवित घटकों से जोड़ा गया है। SpudCell नाम का यह प्रोटोटाइप 36 जीनों से बना है और कोशिकाओं से जुड़े कुछ मूल कार्य कर सकता है, जिनमें अपने डीएनए की प्रतिलिपि बनाना और एक आदिम तरीके से विभाजित होना शामिल है। यह कृत्रिम जीवविज्ञान के लिए एक उल्लेखनीय कदम है, यह ऐसा क्षेत्र है जो जीवन को समझने के लिए सरलीकृत जैविक प्रणालियाँ बनाकर काम करता है, जिनके कार्यों का अध्ययन और नियंत्रण किया जा सकता है।
लेकिन यह परिणाम अभी शून्य से बनाया गया एक जीवित कोशिका नहीं है। उपलब्ध स्रोत सामग्री के आधार पर, SpudCell अभी भी बाहरी सहायता पर काफी निर्भर है, केवल अपूर्ण रूप से काम करता है, और लगभग पाँच विभाजनों के बाद काम करना बंद कर देता है। दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसी अभियांत्रिक प्रणाली है जो कई मूल कोशिकीय व्यवहारों की नकल करती है, लेकिन अभी उस सीमा तक नहीं पहुंची है जिसे अधिकांश जीवविज्ञानी स्वायत्त जीवन मानेंगे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कृत्रिम जीवविज्ञान का इतिहास ऐसी सुर्खियों से भरा रहा है जो विज्ञान से आगे निकल जाती हैं। SpudCell इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह यह प्रश्न सुलझा देता है कि क्या वैज्ञानिक अब जीवन बना सकते हैं, बल्कि इसलिए कि यह रासायनिक संयोजन और जैविक कार्य के बीच की दूरी को उस तरह कम करता है जैसा पहले की प्रणालियाँ नहीं कर पाई थीं।
SpudCell वास्तव में क्या करता है
यह परियोजना एक bottom-up दृष्टिकोण अपनाती है। पहले की न्यूनतम कोशिकाएँ बनाने की कोशिशें अक्सर पहले से जीवित बैक्टीरिया से शुरू होती थीं और यह देखने के लिए जीन हटाती थीं कि मूल जीवित रहने को बनाए रखते हुए जीनोम कितना छोटा किया जा सकता है। 2016 की एक प्रमुख कोशिश में एक बैक्टीरिया को 901 जीनों से घटाकर 493 जीनों तक लाया गया था। एडामाला की टीम ने विपरीत दिशा में काम किया। किसी मौजूदा कोशिका को काट-छांटने के बजाय, शोधकर्ताओं ने एक बहुत छोटे टूलकिट से शुरुआत की और केवल 36 जीनों के आसपास एक प्रणाली तैयार की।
इनमें से अधिकतर जीन E. coli से आते हैं। स्रोत सामग्री में बैक्टीरियोफेज़, यानी बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस, तथा जेलीफ़िश से प्राप्त एक फ्लोरोसेंट प्रोटीन का भी उल्लेख है, जो कोशिकाओं को दिखाई देने योग्य बनाने में मदद करता है। इस तरह बना ढांचा इस अर्थ में कृत्रिम है कि इसे प्रयोगशाला में जोड़कर एक नई कार्यात्मक प्रणाली बनाया गया है। यह उस मजबूत अर्थ में कृत्रिम नहीं है कि इसे पूरी तरह नए जैविक भागों से बनाया गया हो, जिनका मौजूदा जीवों से कोई संबंध न हो।
फिर भी यह उपलब्धि बड़ी है। उपलब्ध स्रोत SpudCell को गैर-जीवित घटकों से बना ऐसा पहला कृत्रिम कोशिका तंत्र बताते हैं जो एक पूर्ण कोशिका चक्र पूरा कर सकता है। इसका मतलब है कि यह प्रणाली आनुवंशिक पदार्थ की प्रतिलिपि बनाने और फिर विभाजित होने की प्रक्रिया से गुजर सकती है, जो पारंपरिक जीवित कोशिकाओं के बाहर दोहराना बेहद कठिन रहा है।
वैज्ञानिक इसे जीवन कहने में सावधानी क्यों बरतते हैं
सावधानी का सबसे मजबूत कारण यह है कि SpudCell जीवित जीवों की तरह स्वयं को बनाए नहीं रखता। इसे अपने प्रयोगात्मक वातावरण से व्यापक सहायता चाहिए, और यह अपने कार्यों को केवल सीमित, नाज़ुक ढंग से निभाता है। एक ऐसी कोशिका जो केवल कुछ पीढ़ियों तक और वह भी कड़े रूप से समर्थित प्रयोगशाला स्थितियों में काम करती है, उस कोशिका से बहुत अलग है जो अनिश्चितकाल तक स्वयं को बनाए रख सके, अपने परिवेश पर मज़बूती से प्रतिक्रिया दे सके, और अपने आप वंशानुगत विविधता उत्पन्न कर सके।
स्रोत पाठ इस मानक को स्पष्ट रूप से सामने रखता है। एडामाला कहती हैं कि वह प्रणाली को तब जीवित मानकर संतुष्ट होंगी यदि वह अनिश्चितकाल तक प्रतिकृति बना सके और डार्विनीय विकास में सक्षम हो। SpudCell अभी इनमें से किसी भी परीक्षण पर खरा नहीं उतरता। शोधकर्ताओं ने एक लाभकारी उत्परिवर्तन डालकर और यह देखकर चयन का एक रूप दिखाया कि वे कोशिकाएँ बेहतर प्रदर्शन करती हैं, लेकिन वह उत्परिवर्तन स्वतः नहीं आया था, उसे जानबूझकर जोड़ा गया था। यह एक महत्वपूर्ण proof of concept है, लेकिन खुले-ended विकास से अभी दूर है।

इसी वजह से इस प्रणाली को एक प्रोटोटाइप न्यूनतम कोशिका कहा जा सकता है, न कि एक तैयार कृत्रिम जीव। यह शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद करती है कि जीवन-जैसे व्यवहार के लिए कौन-से कार्य अनिवार्य हैं, लेकिन अभी यह अपने आप में एक पूर्ण जीवित इकाई नहीं है।
यह परिणाम फिर भी क्यों मायने रखता है
कृत्रिम जीवविज्ञान के लिए SpudCell का महत्व नियंत्रण और समझ में है। प्राकृतिक कोशिकाएँ बेहद शक्तिशाली होती हैं, लेकिन अभियांत्रिकी की दृष्टि से वे जटिल भी होती हैं। उनमें अरबों वर्षों के विकास के दौरान परत-दर-परत जुड़े कई परस्पर क्रियाशील तंत्र होते हैं। कुछ दर्जन जीनों वाला एक सादा मंच यह समझने के लिए अधिक स्पष्ट आधार बन सकता है कि प्रतिकृति, विभाजन, चयापचय और वंशागति किस तरह साथ काम करते हैं।
ऐसी सरलीकृत प्रणाली अंततः व्यावहारिक और मूल-विज्ञान, दोनों तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में मदद कर सकती है। व्यावहारिक रूप से, शोधकर्ता न्यूनतम कृत्रिम कोशिकाओं को नए जैविक सर्किट, आणविक विनिर्माण, या सावधानी से सीमित चिकित्सीय उपकरणों के परीक्षण मंच के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। मूल विज्ञान के स्तर पर, SpudCell जैसी कोशिशें जीवविज्ञान के सबसे गहरे प्रश्नों में से एक को सीधे छूती हैं: किसी चीज़ को जीवन जैसा व्यवहार करने के लिए न्यूनतम मशीनरी क्या है?
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे खुला किया जा रहा है। स्रोत सामग्री के अनुसार, एडामाला टीम SpudCell परियोजना को ओपन-सोर्स बनाने की योजना बना रही है ताकि अन्य शोधकर्ता इसे आगे बढ़ा सकें। ऐसे क्षेत्र में जहाँ प्रगति अक्सर नाज़ुक प्रयोगात्मक प्रणालियों पर कई समूहों के बार-बार सुधार करने से होती है, यह निर्णय अकेले किसी एक शोधपत्र की तुलना में सुधार को तेज़ कर सकता है।
आगे की बाधाएँ
एक आशाजनक प्रोटोटाइप से वास्तव में स्वायत्त कृत्रिम जीव तक पहुँचने का रास्ता कठिन है। उपलब्ध सामग्री कम-से-कम तीन बाधाओं की ओर इशारा करती है। पहला, SpudCell को अधिक विश्वसनीय बनना होगा, ताकि वह कुछ विभाजनों से आगे भी जीवित रह सके। दूसरा, उसे कम बाहरी सहायता के साथ प्रतिकृति बनानी होगी, यानी प्रतिकृति और रखरखाव के लिए आवश्यक अधिक मशीनरी को भीतर ही समाहित करना होगा। तीसरा, उसे वास्तविक डार्विनीय विकास का रास्ता चाहिए होगा, जहाँ विविधता उत्पन्न हो और चयन शोधकर्ताओं के अनुकूल बदलावों को मैन्युअल रूप से जोड़ने के बिना काम करे।
ये केवल अंतिम चमक-धमक वाले सुधार नहीं हैं। ये जीवित प्रणालियों के मूल गुण हैं। उस सीमा को पार करने के लिए शायद न केवल आनुवंशिकी में, बल्कि झिल्लियों, ऊर्जा उपयोग, आणविक त्रुटि-सुधार, और आंतरिक संगठन को साथ मिलाकर अभियांत्रित करने में भी प्रगति चाहिए होगी।
फिर भी, मौजूदा काम इस क्षेत्र को उस भविष्य के करीब ले जाता है जहाँ शोधकर्ता कहीं अधिक सटीकता और समझ के साथ कोशिकाएँ डिज़ाइन कर सकेंगे। सबसे जिम्मेदार व्याख्या न तो इस उपलब्धि को खारिज करना है और न ही इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना। SpudCell शून्य से जीवन नहीं है। लेकिन यह एक गंभीर और संभावित रूप से ऐतिहासिक प्रदर्शन है कि जीवन के अधिक मूल व्यवहार पहले की तुलना में चुनिंदा कुछ भागों के छोटे सेट से अधिक हद तक पुनर्निर्मित किए जा सकते हैं।
- SpudCell 36 जीनों का उपयोग करता है और डीएनए की प्रतिलिपि बनाकर आदिम तरीके से विभाजित हो सकता है।
- यह प्रणाली अभी भी बाहरी सहायता पर बहुत निर्भर है और लगभग पाँच विभाजनों के बाद विफल हो जाती है।
- शोधकर्ता परियोजना को ओपन-सोर्स बना रहे हैं ताकि अधिक स्वायत्त कृत्रिम कोशिकाओं की दिशा में आगे विकास तेज़ हो सके।
यह लेख New Scientist की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on newscientist.com



