बर्फीले दानवों के भीतर पदार्थ का सिमुलेशन
यूरेनस और नेप्च्यून की गहराई में पदार्थ ऐसे तरीकों से व्यवहार कर सकता है जो ठोस, तरल या गैस की परिचित श्रेणियों में नहीं आते. कार्नेगी के वैज्ञानिकों Cong Liu और Ronald Cohen द्वारा किए गए नए कंप्यूटर सिमुलेशन से संकेत मिलता है कि कार्बन हाइड्राइड उन चरम दाब और तापमानों के तहत, जो बर्फीले दानव ग्रहों के भीतर माने जाते हैं, एक असामान्य अर्ध-एकआयामी सुपरआयनिक अवस्था बना सकता है.
Science Daily के अनुसार Nature Communications में प्रकाशित यह अध्ययन यूरेनस और नेप्च्यून के दिखाई देने वाले वायुमंडलों से बहुत नीचे की परिस्थितियों पर केंद्रित है. इन ग्रहों को अक्सर बर्फीले दानव कहा जाता है, लेकिन यह लेबल भ्रामक हो सकता है. उनके भीतर केवल जमी हुई सामग्री का भंडार नहीं होता. वे उच्च दाब वाले वातावरण हैं, जहां सामान्य यौगिक भी विचित्र रूप ले सकते हैं.
सुपरआयनिक का अर्थ
सुपरआयनिक पदार्थ में संरचना का एक हिस्सा ठोस की तरह व्यवहार करता है, जबकि दूसरा हिस्सा तरल जैसा. उपलब्ध स्रोत के अनुसार, एक पूर्वानुमित अवस्था में हाइड्रोजन परमाणु एक कठोर कार्बन ढांचे के भीतर सर्पिल रूप में गति करते हैं. यह मिश्रित व्यवहार यूरेनस, नेप्च्यून और समान ग्रहों के भीतर ऊष्मा और बिजली के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है.
अर्ध-एकआयामी शब्द सिमुलेशन में देखे गए गति पैटर्न की ओर इशारा करता है. सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से चलने के बजाय, हाइड्रोजन का व्यवहार कार्बन संरचना के भीतर सर्पिल पथों तक सीमित रहता है. इस तरह की आंतरिक व्यवस्था रोजमर्रा की रसायनिकी से बहुत दूर है, लेकिन संभव है कि यही वह भौतिकी हो जो ग्रहों के भीतर हावी रहती है.
यूरेनस और नेप्च्यून को समझाना कठिन क्यों है
यूरेनस और नेप्च्यून लंबे समय से ग्रह-विज्ञानियों के लिए पहेली रहे हैं, जिनमें असामान्य चुंबकीय क्षेत्र और जटिल आंतरिक ऊष्मा व्यवहार शामिल हैं. Science Daily के स्रोत पाठ के अनुसार, यह सिम्युलेटेड सुपरआयनिक संरचना इन दूरस्थ दुनियाओं के भीतर ऊष्मा और बिजली के प्रवाह को फिर से परिभाषित कर सकती है, और उनके रहस्यमय चुंबकीय क्षेत्रों को समझने में मदद कर सकती है.
ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्र ग्रह के भीतर गतिशील विद्युत चालक पदार्थ से उत्पन्न होते हैं. यदि गहरे पदार्थों की चालकता, श्यानता या ऊष्मा-संचरण गुण पहले के अनुमानों से अलग हैं, तो इन क्षेत्रों के मॉडल संशोधित करने पड़ सकते हैं. इसलिए सुपरआयनिक कार्बन हाइड्राइड अवस्था केवल रसायनिकी की जिज्ञासा नहीं होगी. यह ग्रह मॉडल की मूल संरचना को प्रभावित कर सकती है.
एक्सोप्लैनेट का व्यापक संदर्भ
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपलब्ध पाठ के अनुसार 6,000 से अधिक एक्सोप्लैनेट खोजे जा चुके हैं. इनमें से कई पृथ्वी जैसे नहीं हैं, और कुछ यूरेनस तथा नेप्च्यून के भीतर पाई जाने वाली परिस्थितियों के समान या उससे भी अधिक चरम हो सकते हैं. असामान्य आंतरिक अवस्थाओं को समझना वैज्ञानिकों को सीमित अवलोकन डेटा से ग्रह के द्रव्यमान, त्रिज्या, चुंबकीय व्यवहार और ऊष्मीय विकास की व्याख्या करने में मदद करता है.
एक्सोप्लैनेट के लिए शोधकर्ता सीधे भीतर की जांच नहीं कर सकते. वे ऐसे मॉडलों पर निर्भर रहते हैं जो देखे गए गुणों को संभावित संरचना और आंतरिक अवस्थाओं से जोड़ते हैं. यदि कार्बन, हाइड्रोजन, पानी, मीथेन और अमोनिया दबाव के तहत अप्रत्याशित संरचनाएं बनाते हैं, तो केवल सरल संरचनात्मक लेबलों पर आधारित ग्रह वर्गीकरण कम पूर्ण हो जाते हैं.
गर्म बर्फ साधारण बर्फ नहीं होती
यूरेनस और नेप्च्यून के भीतर ऐसे स्तर होने माने जाते हैं जिन्हें कभी-कभी गर्म बर्फ कहा जाता है. ये क्षेत्र बाहरी हाइड्रोजन-हीलियम वायुमंडलों के नीचे और ठोस कोर के ऊपर स्थित होते हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि इनमें पानी, मीथेन और अमोनिया जैसे यौगिक शामिल हैं, लेकिन अत्यधिक दाब और तापमान के तहत ये अणु अपरिचित अवस्थाओं में बदल सकते हैं.
कार्बन हाइड्राइड सिमुलेशन बर्फीले दानवों के भीतर मौजूद वास्तविक पदार्थों की व्यापक खोज का हिस्सा है. यह सुझाव देता है कि कार्बन और हाइड्रोजन, जो ग्रह-रसायनिकी के केंद्रीय घटक हैं, ऐसी संरचना में व्यवस्थित हो सकते हैं जिसकी विशेषताओं का सामान्य अनुमान नहीं लगाया जा सकता.
पहले सिमुलेशन, फिर साक्ष्य
समर्थित निष्कर्ष संगणकीय है. शोधकर्ताओं ने उस अवस्था का पूर्वानुमान लगाने के लिए उन्नत सिमुलेशन का उपयोग किया; उपलब्ध स्रोत में यह नहीं बताया गया है कि इसे भौतिक रूप से प्रयोगशाला में बनाया गया. यह अंतर महत्वपूर्ण है. सिमुलेशन सिद्धांत को दिशा दे सकते हैं और संभावित अवस्थाओं की पहचान कर सकते हैं, लेकिन समान दाब और तापमान पर प्रयोगात्मक पुष्टि मामले को मजबूत करेगी.
फिर भी, प्रथम-सिद्धांत सिमुलेशन उन वातावरणों के अध्ययन का प्रमुख उपकरण हैं जिन्हें दोहराना बेहद कठिन है. वे वैज्ञानिकों को यह परखने देते हैं कि जब प्रत्यक्ष मापन अभी संभव न हो, तब परमाणु कैसे व्यवस्थित और गतिशील हो सकते हैं. ग्रह-विज्ञान में ऐसा सैद्धांतिक काम अक्सर यह तय करता है कि आगे कौन से प्रयोग और मिशन क्या खोजेंगे.
दूरस्थ दुनियाओं पर एक गहरी दृष्टि
संभावित सुपरआयनिक कार्बन हाइड्राइड अवस्था शोधकर्ताओं को बर्फीले दानव मॉडलों के लिए एक नया संभावित घटक देती है. यह यूरेनस और नेप्च्यून के भीतर ऊष्मा और बिजली के व्यवहार को समझाने में मदद कर सकती है, और समान आंतरिक परिस्थितियों वाले दूरस्थ ग्रहों की व्याख्या को बेहतर बना सकती है.
यह खोज बर्फीले दानवों के रहस्यों का अंतिम उत्तर नहीं है. यह एक अधिक सटीक प्रश्न है: यदि नेप्च्यून जैसी परिस्थितियों में हाइड्रोजन एक कठोर कार्बन ढांचे से होकर चल सकता है, तो उसके ऊपर स्थित ग्रह में क्या बदलाव आता है? जिन दुनियाओं का अध्ययन केवल दूर से किया जा सकता है, उनके लिए ऐसी पदार्थ-संबंधी समझ बादलों के नीचे क्या है, यह जानने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
यह लेख Science Daily की रिपोर्टिंग पर आधारित है. मूल लेख पढ़ें.
Originally published on sciencedaily.com


