सस्ते हाइड्रोजन उत्पादन का एक रास्ता आकार ले सकता है
हाइड्रोजन को लंबे समय से उन उद्योगों और उपयोगों के लिए एक आशाजनक ऊर्जा वाहक के रूप में देखा जाता रहा है, जिन्हें सीधे बिजली से बदलना कठिन है। लेकिन इस तकनीक की केंद्रीय आर्थिक बाधाओं में से एक स्वच्छ तरीके से, बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन बनाने की लागत है। नवीकरणीय बिजली से संचालित जल इलेक्ट्रोलिसिस यह कर सकता है, लेकिन ऐसी प्रणालियां अक्सर अच्छे प्रदर्शन और टिकाऊपन के लिए महंगी प्लैटिनम-समूह धातुओं पर निर्भर रहती हैं।
सेंट लुईस स्थित Washington University में Gang Wu के नेतृत्व वाली एक शोध टीम का कहना है कि उसने एक संभावित विकल्प दिखाया है: anion-exchange membrane water electrolyzer में उपयोग के लिए दो phosphides से बना एक प्लैटिनम-मुक्त उत्प्रेरक। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, यह उत्प्रेरक उद्योग-मानक परिस्थितियों में 1,000 घंटे तक चला और जब इसे nickel iron anode के साथ जोड़ा गया तो इसने एक state-of-the-art तुलना कैथोड और एक platinum-group-metal benchmark, दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया।
Journal of the American Chemical Society में प्रकाशित यह अध्ययन स्वच्छ हाइड्रोजन क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर इशारा करता है: प्रदर्शन से समझौता किए बिना दुर्लभ और महंगी उत्प्रेरक सामग्रियों पर निर्भरता घटाना। अगर यह संतुलन बेहतर हो सके, तो नवीकरणीय हाइड्रोजन उत्पादन की अर्थव्यवस्था ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक फीडस्टॉक और भविष्य के परिवहन उपयोगों के लिए अधिक आकर्षक बन सकती है।
प्लैटिनम-समूह धातुएं इतनी बड़ी बाधा क्यों हैं
इलेक्ट्रोलाइजर बिजली का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करते हैं। सिद्धांत रूप में यह प्रक्रिया सरल है। व्यवहार में, उच्च दक्षता और लंबा संचालन जीवन पाने के लिए ऐसी उत्प्रेरक सामग्रियों की जरूरत होती है जो प्रतिक्रिया को तेज करें और साथ ही कठोर विद्युत-रासायनिक परिस्थितियों को झेल सकें।
यहीं पर ऐतिहासिक रूप से प्लैटिनम-समूह धातुओं को बढ़त मिली है। वे बहुत प्रभावी हैं, लेकिन महंगी भी हैं। उनकी कीमत इलेक्ट्रोलाइजर प्रणालियों की पूंजीगत लागत बढ़ा सकती है और तकनीक को आर्थिक रूप से बड़े पैमाने पर फैलने से सीमित कर सकती है। स्वच्छ हाइड्रोजन समर्थकों के लिए, इन सामग्रियों को बदलना या कम करना, तैनाती की बाधाओं को घटाने का सबसे सीधा तरीका है।
Washington University की टीम ने anion-exchange membrane water electrolyzers, यानी AEMWEs, पर ध्यान केंद्रित किया। यह वास्तुकला आकर्षक है क्योंकि यह कुछ अन्य इलेक्ट्रोलाइजर डिजाइनों की तुलना में कम लागत वाली सामग्री के साथ उच्च प्रदर्शन का रास्ता देती है। लेकिन सफलता अब भी ऐसे उत्प्रेरक खोजने पर निर्भर करती है जो सक्रिय और टिकाऊ, दोनों हों।
शोधकर्ताओं ने क्या बनाया
टीम ने स्रोत पाठ में वर्णित एक heterostructure उत्प्रेरक बनाया, जो दो phosphides से बना था। दोनों सामग्रियों को एक composite में जोड़कर शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजन निष्कर्षण प्रक्रिया में उत्प्रेरक गतिविधि बढ़ाने का दावा किया। Wu ने इसके पीछे की प्रेरणा को व्यावहारिक शब्दों में बताया: सूर्य, हवा या पानी से आने वाली नवीकरणीय बिजली का उपयोग पानी से हाइड्रोजन अलग करने में किया जा सकता है, जिससे ऊर्जा एक ऐसे ईंधन में संग्रहीत होती है जिसे बाद में कई अनुप्रयोगों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह भंडारण पहलू केंद्रीय है। हाइड्रोजन सिर्फ एक ईंधन नहीं, बल्कि समय और उपयोग-क्षेत्रों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा को स्थानांतरित करने का तरीका है। अतिरिक्त नवीकरणीय उत्पादन को हाइड्रोजन में बदला जा सकता है, जो फिर रसायन निर्माण, औद्योगिक ऊष्मा, या कुछ परिस्थितियों में बिजली उत्पादन और परिवहन के लिए काम आ सकता है।
स्रोत पाठ के अनुसार, जब phosphide उत्प्रेरक को nickel iron anode के साथ एकीकृत किया गया, तो परिणामी कैथोड ने विभिन्न सामग्रियों से बने state-of-the-art कैथोड और एक platinum-group-metal benchmark, दोनों से बेहतर प्रदर्शन किया। उतना ही महत्वपूर्ण, उसने उद्योग-मानक परिस्थितियों में 1,000 घंटे तक संचालन बनाए रखा।
1,000 घंटे का परिणाम क्यों मायने रखता है
इलेक्ट्रोलिसिस अनुसंधान में प्रदर्शन संबंधी सुर्खियां आम हैं, लेकिन टिकाऊपन अक्सर तय करता है कि कोई परिणाम व्यावसायिक रूप से अर्थपूर्ण है या नहीं। जो उत्प्रेरक थोड़े समय के लिए उत्कृष्ट आउटपुट दे लेकिन जल्दी खराब हो जाए, वह लागत की समस्या हल नहीं करेगा। व्यवहारिक तैनाती के लिए लंबी अवधि का संचालन एक आवश्यक हिस्सा है।
इसलिए स्रोत पाठ में दिया गया 1,000 घंटे का आंकड़ा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ऐसी परिस्थितियों में सहनशक्ति को दर्शाता है जो सिर्फ प्रयोगशाला अनुकूलन नहीं बल्कि औद्योगिक प्रासंगिकता को प्रतिबिंबित करती हैं। यह अपने-आप बड़े पैमाने पर तैनाती की तैयारी साबित नहीं करता, लेकिन यह जरूर मजबूत करता है कि प्लैटिनम-मुक्त प्रणालियां मौजूदा सामग्रियों के करीब पहुंच रही हैं।
यह परिणाम रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यदि गैर-मूल्यवान उत्प्रेरक मजबूत सक्रियता और संचालन स्थिरता, दोनों दे सकें, तो निर्माता सामग्रियों की आपूर्ति और प्लेटिनम-समूह धातुओं से जुड़े वस्तु मूल्य झटकों के प्रति अधिक लचीली प्रणालियां डिजाइन कर सकते हैं।
यह स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के लिए क्या अर्थ रख सकता है
सबसे बड़ा असर लागत पर होगा। इलेक्ट्रोलिसिस से बने हाइड्रोजन को अक्सर जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन के मुकाबले प्रतिस्पर्धी होने में कठिनाई हुई है, खासकर जब बिजली की कीमतें और पूंजी लागत अधिक हों। कम लागत वाले उत्प्रेरक पूरी समीकरण को हल नहीं करेंगे, लेकिन वे इलेक्ट्रोलाइजर तैनाती की शुरुआती लागत कम करने में मदद कर सकते हैं।
यह काम ऊर्जा-भंडारण की एक व्यापक पहेली में भी फिट बैठता है। नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि ने ऐसी तकनीकों की आवश्यकता बढ़ा दी है जो बिजली को लंबी अवधि तक संग्रहीत कर सकें और उन क्षेत्रों में मदद करें जहां सीधे विद्युतीकरण कठिन है। हाइड्रोजन एक विकल्प है क्योंकि यह संग्रहीत ऊर्जा और औद्योगिक इनपुट, दोनों का काम कर सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर हाइड्रोजन उपयोग-क्षेत्र रातोंरात आर्थिक या उचित हो जाएगा। बुनियादी ढांचा, परिवहन, रूपांतरण हानि, और बाजार संरचना अभी भी मायने रखते हैं। लेकिन ऐसी सामग्रीगत प्रगति जो तकनीक के स्थायी लागत केंद्रों में से एक पर प्रहार करती है, इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि इससे पूरे वर्ग की आधारभूत अर्थव्यवस्था सुधरती है।
अगली परीक्षा है इसका व्यावहारिक रूपांतरण
कई सामग्रीगत सफलताओं की तरह, बाकी प्रश्न यह है कि क्या यह परिणाम प्रकाशित अध्ययन से व्यावसायिक हार्डवेयर तक साफ-सुथरे ढंग से स्केल होता है। निर्माण की स्थिरता, 1,000 घंटे से आगे का जीवनकाल, सिस्टम एकीकरण, और वास्तविक दुनिया की लागत में कमी को सभी को साबित करना होगा।
फिर भी, यह अध्ययन इस तर्क को मजबूत करता है कि स्वच्छ हाइड्रोजन क्षेत्र को प्लैटिनम-समूह धातुओं पर निर्भरता को स्थायी बाधा मानने की जरूरत नहीं है। स्रोत पाठ द्वारा समर्थित मूल दावा पहले से ही महत्वपूर्ण है: anion-exchange membrane water electrolyzer में एक phosphide-आधारित, प्लैटिनम-मुक्त उत्प्रेरक ने कुशल हाइड्रोजन उत्पादन दिया और उद्योग-मानक परिस्थितियों में 1,000 घंटे तक चला।
यदि इस प्रदर्शन को दोहराया और बढ़ाया जा सके, तो यह प्रगति प्रयोगशाला से आगे भी मायने रखेगी। इससे संकेत मिलेगा कि नवीकरणीय हाइड्रोजन की सबसे कठिन इंजीनियरिंग और लागत संबंधी चुनौतियों में से एक अधिक संभालने योग्य हो रही है, और बड़े पैमाने पर, कम लागत वाले इलेक्ट्रोलिसिस को व्यावहारिक वास्तविकता के करीब ला रही है।
यह लेख Phys.org की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
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