पदार्थों की खोज की एक समस्या का सामना भौतिकी-सचेत AI दृष्टिकोण से

तोहोकू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक ऐसी AI विधि विकसित की है जो पारंपरिक पूर्वानुमान तरीकों की तुलना में अधिक सटीकता के साथ हज़ारों पदार्थों की डाइइलेक्ट्रिक क्षमता की तेज़ी से स्क्रीनिंग कर सकती है। Physical Review X में प्रकाशित एक अध्ययन में टीम ने बताया कि इस विधि ने 8,000 से अधिक उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के दौरान 31 पहले से अज्ञात उच्च-डाइइलेक्ट्रिक ऑक्साइड पदार्थों की पहचान करने में मदद की।

यह प्रगति पदार्थ विज्ञान में लंबे समय से बनी एक बाधा को संबोधित करती है। यह अनुमान लगाना कि कोई पदार्थ विद्युत क्षेत्रों पर कैसे प्रतिक्रिया करेगा, गणनात्मक रूप से कठिन है, जबकि वही प्रतिक्रिया आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का केंद्रीय हिस्सा है। डाइइलेक्ट्रिक पदार्थ स्मार्टफोन और कंप्यूटर सहित उपकरणों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं, इसलिए संभावित उम्मीदवारों को खोजने के बेहतर उपकरणों का व्यावहारिक महत्व बहुत अधिक हो सकता है।

प्रत्यक्ष पूर्वानुमान कठिन क्यों है

जटिल भौतिक गुणों का AI प्रणालियों द्वारा विश्वसनीय पूर्वानुमान लगाना अक्सर कठिन होता है, खासकर जब उन्हें एक ही आउटपुट के रूप में देखा जाए। तोहोकू समूह ने इस प्रत्यक्ष शॉर्टकट से बचने का समाधान चुना। मॉडल से सीधे डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक का अनुमान लगाने के बजाय, शोधकर्ताओं ने समस्या को अधिक बुनियादी भौतिक मात्राओं के इर्द-गिर्द संरचित किया, जो अंतिम गुण में योगदान देती हैं।

स्रोत पाठ में वर्णित प्रणाली में, मॉडल अलग-अलग रूप से Born effective charges का अनुमान लगाता है, जो बताते हैं कि परमाणु विद्युत क्षेत्रों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं, और phonon properties का, जो किसी पदार्थ में परमाणु कंपन को पकड़ती हैं। इन घटकों को फिर एक भौतिक सूत्र के माध्यम से जोड़कर ionic dielectric tensor का पुनर्निर्माण किया जाता है।

यह डिज़ाइन पेपर के दावे का मूल है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि कार्यप्रवाह में भौतिकी को शामिल करने से AI उन तरीकों की तुलना में तेज़ और अधिक विश्वसनीय बनती है, जो क्रिस्टल संरचना से सीधे अंतिम डाइइलेक्ट्रिक व्यवहार तक छलांग लगाने की कोशिश करते हैं।