बुध की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक के लिए नया मॉडल

बुध सूर्य के सबसे नज़दीक का ग्रह है, फिर भी इसके ध्रुवों पर स्थायी छाया वाले गड्ढों में पानी की मोटी बर्फ जमा है। नई सिमुलेशन अब संकेत देती है कि उस बर्फ का बड़ा हिस्सा लगभग 100 मिलियन वर्ष पहले हुई एक बड़ी टक्कर में आया हो सकता है।

दिए गए स्रोत-पाठ के अनुसार, यह काम Johns Hopkins Applied Physics Laboratory की Parvathy Prem और उनके सहयोगियों का है। उनके मॉडल का सुझाव है कि एक बड़ा, अपेक्षाकृत धीमी गति वाला impactor बुध से टकराया, Hokusai crater बनाया, और थोड़े समय के लिए ग्रह के चारों ओर पानी से समृद्ध लेकिन पतला वायुमंडल छोड़ गया।

यह विचार अलग क्यों है

पहले के शोध में भी यह संभावना उठाई गई थी कि comet-like impactor ने बुध तक पानी पहुँचाया होगा। नया काम विवरणों में अलग है। छोटे लेकिन बहुत तेज़ पिंड के बजाय शोधकर्ताओं ने बड़ा, धीमा collision मॉडल किया और टक्कर से लेकर वायुमंडलीय विकास और ध्रुवीय trapping तक की प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन किया।

Prem ने स्रोत-पाठ में कहा कि टीम ने यह कल्पना की कि पूरी घटनाक्रम किस तरह घटा होगा, टक्कर के क्षण से लेकर vapor के पुनर्वितरण तक। ऐसा मॉडलिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मूल पहेली सिर्फ यह नहीं रही कि पानी बुध तक पहुँच सकता था या नहीं, बल्कि यह भी कि दिन के समय सतह का तापमान 430 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाने वाले इस संसार में वह बच कैसे सकता था।

सिमुलेशन क्या संकेत देते हैं

यह परिदृश्य एक बड़े बर्फीले और चट्टानी पिंड के बुध से टकराने और लगभग पूरी तरह vaporize हो जाने से शुरू होता है। उस घटना से पानी की भाप से समृद्ध एक पतला वायुमंडल बना होगा। स्रोत कहता है कि उस भाप का अधिकांश भाग जल्दी ही सौर विकिरण द्वारा हटा दिया जाता। लेकिन थोड़ा-सा, एक-पांचवें से कुछ अधिक, ध्रुवों की ओर जा सकता था और स्थायी छाया वाले क्षेत्रों में फँस सकता था, जहाँ कभी धूप नहीं पहुँचती।

वे cold traps ही कुंजी हैं। 2011 से 2015 तक बुध की परिक्रमा करने वाले NASA के Messenger spacecraft ने पुष्टि की थी कि कुछ ध्रुवीय गड्ढों में कई मीटर मोटी बर्फ जमा है। नया मॉडल एक ऐसा तंत्र प्रस्तुत करता है जो समझा सके कि पर्याप्त पानी कैसे पहुँचा और बेहद गर्म व सूखे ग्रह पर कैसे संरक्षित रहा।

एक Mercurian day में ग्रह का रूपांतरण

स्रोत-पाठ का सबसे चौंकाने वाला विवरण समय-सीमा है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि अपेक्षाकृत शुष्क, बर्फ-रहित सतह से बड़े ध्रुवीय जमाव वाली स्थिति में परिवर्तन एक Mercurian day के भीतर हो गया होगा। इसका मतलब यह नहीं कि बर्फ हर जगह हमेशा सुरक्षित थी, लेकिन इससे यह संकेत मिलता है कि delivery-and-trapping की निर्णायक घटना भूवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत अचानक हुई होगी।

यह काम यह भी दिखाता है कि हिंसक टक्करें ग्रहों की सतहों को ऐसे तरीकों से बदल सकती हैं जो घटना के बाद वायुमंडल के खत्म हो जाने पर भी लंबे समय तक दिखाई देते रहते हैं। इस मामले में, एक क्षणिक पानी-समृद्ध वायुमंडल ने स्थिर बर्फ भंडार छोड़ दिए होंगे जो लाखों वर्षों तक टिके रहे।

इससे क्या बदलता है

यह अध्ययन बुध के इतिहास से जुड़ी अनिश्चितता को पूरी तरह खत्म नहीं करता, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल को संकुचित करता है: क्या ग्रह की अप्रत्याशित बर्फ के लिए धीमी संचय प्रक्रिया चाहिए, या एक ही नाटकीय घटना से उसका स्पष्टीकरण हो सकता है? स्रोत-पाठ के आधार पर, नई सिमुलेशन बाद वाले पक्ष को मजबूत करती हैं।

इससे बुध के ध्रुव विरोधाभास कम और टक्कर के इतिहास, तापीय चरम स्थितियों और स्थायी छाया की अनोखी भौतिकी का रिकॉर्ड अधिक लगने लगते हैं। सूर्यप्रकाश से परिभाषित एक दुनिया में, सबसे अर्थपूर्ण स्थान शायद वे हैं जहाँ धूप कभी पहुँचती ही नहीं।

  • नई सिमुलेशन का कहना है कि बुध की ध्रुवीय बर्फ एक बड़ी टक्कर से आई हो सकती है।
  • यह घटना लगभग 100 मिलियन वर्ष पहले Hokusai crater बना सकती थी।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार पानी की भाप का थोड़ा-सा, एक-पांचवें से अधिक हिस्सा, ध्रुवीय cold traps तक पहुँच सकता था।
  • Messenger ने पहले स्थायी छाया वाले गड्ढों में मोटी बर्फ की पुष्टि की थी।

This article is based on reporting by New Scientist. Read the original article.

Originally published on newscientist.com