तारकीय विस्फोटों के इतिहास में एक संभावित पहली घटना

जेलीफ़िश नेबुला के बगल में स्थित एक धुंधली वस्तु का अध्ययन कर रहे खगोलविदों का कहना है कि उन्होंने संभवतः सुपरनोवा अवशेषों की पहली पुष्टि की गई जोड़ी की पहचान की है, जो उन दो तारों से बनी थी जो कभी एक-दूसरे की परिक्रमा करते थे। यदि यह व्याख्या सही साबित होती है, तो यह खोज तारकीय मृत्यु की सूची में एक दुर्लभ नई श्रेणी जोड़ देगी: न केवल एक विस्फोटित तारा, बल्कि एक द्वितारा प्रणाली, जिसके दोनों सदस्य अलग-अलग सुपरनोवा में समाप्त हुए और पीछे पड़ोसी मलबा छोड़ गए।

प्रदान किए गए स्रोत पाठ में Nature Communications में 21 जुलाई को प्रकाशित बताई गई इस खोज का केंद्र आकाशगंगा के दो अवशेष हैं। एक है IC 443, यानी जेलीफ़िश नेबुला, जो पहले से ही आकाशगंगा के सबसे अधिक अध्ययन किए गए सुपरनोवा अवशेषों में से एक के रूप में प्रसिद्ध है। दूसरा, G189.6+3.3, अधिक मंद है और लंबे समय से अपने चमकीले पड़ोसी की छाया में रहा है। NASA के Fermi Gamma-ray Space Telescope के 16 वर्षों के डेटा का विश्लेषण करके और उसे कई तरंगदैर्घ्यों की टिप्पणियों के साथ मिलाकर, शोधकर्ताओं का तर्क है कि ये दोनों संरचनाएँ केवल संयोग से पास-पास नहीं हैं।

IC 443 पहले से ही इतना महत्वपूर्ण क्यों है

IC 443 अध्ययन का प्रमुख विषय रहा है क्योंकि यह उन शुरुआती सुपरनोवा अवशेषों में से एक है जिनमें प्रोटॉनों को तेज़ करने की पुष्टि हुई थी, जो कॉस्मिक किरणों के निर्माण में एक प्रमुख घटक है। कॉस्मिक किरणें लगातार पृथ्वी के वायुमंडल से टकराती हैं, लेकिन वे कहाँ और कैसे तेज़ होती हैं, इसका पता लगाना अब भी एक केंद्रीय खगोलभौतिकीय समस्या है। इसलिए, साझा उत्पत्ति के प्रश्नों से पहले ही, कोई भी पड़ोसी अवशेष जो इससे संबंधित उच्च-ऊर्जा व्यवहार दिखाए, वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प है।

यही बात G189.6+3.3 को उल्लेखनीय बनाती है। प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार, टीम शुरू में किसी द्वितीयक-उत्पत्ति वाले सुपरनोवा जोड़े के प्रमाण की तलाश नहीं कर रही थी। इसके बजाय, शोधकर्ता एक प्रसिद्ध अवशेष के बगल में बैठे उपेक्षित अवशेष को समझना चाहते थे। इसी प्रक्रिया में उन्हें दोनों संरचनाओं के बीच गहरे संबंध के संकेत मिले।

शोधकर्ताओं ने मंद संकेत को कैसे अलग किया

ऐसे मामलों में चुनौती एक कमजोर स्रोत को कहीं अधिक चमकीले परिवेश से अलग करना है। शोधकर्ताओं ने Fermi गामा-किरण डेटा के साथ-साथ X-ray, radio, ultraviolet और optical अवलोकनों का उपयोग करके G189.6+3.3 के मंद संकेत को अलग किया। यह बहु-तरंगदैर्घ्य दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है क्योंकि सुपरनोवा अवशेष हर तरंगदैर्घ्य पर एक ही भौतिकी नहीं दिखाते। रेडियो आवेशित कणों और संरचना को ट्रेस कर सकता है, X-ray गर्म आघातित पदार्थ को उजागर कर सकते हैं, और gamma rays अत्यधिक कण त्वरण की ओर संकेत कर सकते हैं।

तारों भरे आकाश में रंगों की शृंखला।
जेलीफ़िश नेबुला के पास जुड़वाँ सुपरनोवा का एक समग्र चित्र। खगोलविदों ने उन दो तारों द्वारा छोड़े गए सुपरनोवा अवशेषों की पहली ज्ञात जोड़ी खोजी है जो कभी एक-दूसरे की परिक्रमा करते थे। (छवि श्रेय: NASA Goddard Space Flight Center and M. Michailidis et al. 2026; orange, brown: radio, ESA/ Planck and MWISP; yellow: optical, DSS; red: infrared, NASA/WISE; violet: ultraviolet, NASA/Swift; teal: X-rays, SRG/eROSITA)

एक बार टीम ने अवशेष के उत्सर्जन को अलग किया, तो उन्हें एक असमान पैटर्न मिला। प्रदान किए गए स्रोत पाठ के अनुसार, G189.6+3.3 के उत्तरी आधे हिस्से में त्वरित प्रोटॉन हावी दिखे, जबकि दक्षिणी आधे हिस्से में इलेक्ट्रॉन हावी थे। यह असमानता केवल दृश्य जिज्ञासा नहीं है। यह स्थानीय परिवेश, चुंबकीय क्षेत्रों, शॉक स्थितियों, और विस्फोट तरंग के आसपास के पदार्थ से गुजरने के इतिहास के संकेत रख सकती है।

मुख्य दावे के लिए अधिक महत्वपूर्ण यह है कि शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि G189.6+3.3 और IC 443 के बीच स्थानिक संबंध संयोग नहीं होने की संभावना है। उनकी व्याख्या यह है कि ये दोनों अवशेष उन तारों के अवशेष हो सकते हैं जो कभी गुरुत्वाकर्षण से बंधी द्वितारा प्रणाली का हिस्सा थे और लाखों वर्षों तक साथ रहे, फिर अलग-अलग विस्फोटों में मरे।

द्वितारा-सुपरनोवा अवशेष इतना असामान्य क्यों है

द्वितारा तारे आकाशगंगा में आम हैं, और बहुत से भारी तारे साथी के साथ जन्म लेते हैं। ब्रह्मांडीय समयमान पर सुपरनोवा भी असामान्य नहीं हैं। जो दुर्लभ है, वह यह साक्ष्य मिलना है कि एक ही द्वितारा प्रणाली के दो तारे दोनों विस्फोटित हुए और ऐसे अवशेष छोड़ गए जिन्हें अभी भी एक जोड़ी के रूप में पहचाना जा सकता है। समय के साथ सुपरनोवा मलबा फैल जाता है, अंतरतारकीय गैस से क्रिया करता है, और साफ़-साफ़ ट्रेस करना कठिन हो जाता है। अवशेष स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग दरों से भी विकसित हो सकते हैं।

इसका मतलब है कि खगोलविदों के पास अक्सर पूरी श्रृंखला के बजाय कहानी के टुकड़े रह जाते हैं। इसलिए एक पुष्टि किया गया द्वितारा-उत्पत्ति अवशेष-जोड़ा मूल्यवान होगा, क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रयोगशाला प्रदान करेगा जहाँ एक साझा मूल परिवेश वाले दो तारकीय विस्फोटों की तुलना की जा सकती है, भले वे अलग-अलग विकसित हुए हों। यह यह समझने का भी नया तरीका देगा कि साथी तारे द्रव्यमान ह्रास, समय, और सुपरनोवा से पहले की अंतिम स्थितियों को कैसे प्रभावित करते हैं।

वर्गीकरण से परे परिणाम क्यों महत्वपूर्ण है

यह केवल एक ब्रह्मांडीय “पहले” को नाम देने की बात नहीं है। यह परिणाम शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद कर सकता है कि सुपरनोवा अवशेष उच्च-ऊर्जा कणों का निर्माण और वितरण कैसे करते हैं, शॉक फ्रंट आसपास के पदार्थ से कैसे संपर्क करते हैं, और द्वितारा विकास भारी तारों की मृत्यु को कैसे आकार देता है। यदि एक मूल तारकीय जोड़ी से बने दो अवशेषों का साथ-साथ अध्ययन किया जा सकता है, तो खगोलविदों को आम तौर पर अनुपलब्ध एक नियंत्रित तुलना मिलती है।

सुपरनोवा के खंडों का लेबलयुक्त आरेख
हाइड्रोजन गैस के एक घने बादल ने खगोलविदों को ऐसे संकेत उजागर करने में मदद की कि दो पड़ोसी सुपरनोवा अवशेषों की उत्पत्ति समान हो सकती है।

यह काम लंबे समय तक चलने वाले आकाश सर्वेक्षणों के महत्व को भी रेखांकित करता है। Fermi टेलीस्कोप के 16-वर्षीय डेटासेट ने एक ऐसा संकेत अलग करना संभव बनाया जो एक चमकीले और अधिक प्रसिद्ध अवशेष के बगल में दबा हुआ था। ऐसी खोजें अक्सर केवल किसी नए उपकरण से नहीं, बल्कि लगातार अवलोकन और डेटासेट्स के बेहतर विश्लेषण की संयुक्त शक्ति से सामने आती हैं।

यह याद दिलाता है कि परिचित क्षेत्र भी आश्चर्य रख सकते हैं

इस दावे का एक उल्लेखनीय पहलू यह है कि यह ऐसे क्षेत्र में उभरता है जिसे खगोलविद पहले से अच्छी तरह जानते हैं। IC 443 कोई अनजान वस्तु नहीं है। फिर भी, अपने ठीक बगल में एक पहली-प्रकार की प्रणाली मौजूद हो सकती थी, जो अनुपस्थिति से नहीं बल्कि विपरीतता से छिपी हुई थी। खगोलशास्त्र में, चमकीली वस्तुएँ कभी-कभी उजागर करने के बजाय छिपा देती हैं, खासकर जब पास की संरचनाएँ मंद, विस्तृत, या पृष्ठभूमि उत्सर्जन से अलग करने में कठिन हों।

यह खोज इस बात की उपयोगी याद दिलाती है कि आकाश सिर्फ इसलिए समाप्त नहीं हो जाता क्योंकि प्रमुख स्थलों के नाम और लंबे प्रकाशन इतिहास हैं। प्रसिद्ध अवशेषों के आसपास भी, पहचानने के लिए नई संरचना और अनुमान लगाने के लिए नए संबंध बचे रह सकते हैं।

आगे क्या

द्वितारा-अवशेष व्याख्या संभवतः आगे के काम को आमंत्रित करेगी, जिसमें दोनों अवशेषों की ज्यामिति, आयु, और आसपास के अंतरतारकीय माध्यम का अधिक विस्तृत मॉडलिंग शामिल होगा। केंद्रीय प्रश्न यह है कि क्या वैकल्पिक व्याख्याओं को इतनी मजबूती से खारिज किया जा सकता है कि सगे-सुपरनोवा का मामला टिकाऊ बन जाए। खगोलभौतिकी में, पहले तभी मायने रखते हैं जब वे टूटने के प्रयासों से बच निकलें।

फिलहाल, अध्ययन एक असामान्य रूप से आकर्षक संभावना प्रस्तुत करता है: साथ जन्मे और बंधे हुए दो तारे अलग-अलग प्रलय में अपने जीवन समाप्त कर सकते हैं, पीछे ऐसी सन्निकट चोटें छोड़ते हुए जिन्हें आधुनिक उपकरण अभी भी पढ़ सकते हैं। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह मिल्की वे के एक प्रसिद्ध कोने को उस द्वितारा साझेदारी का सबसे स्पष्ट ज्ञात रिकॉर्ड बना देगा जो दोहरी विनाश तक साथ चली थी।

यह लेख Live Science की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on livescience.com