सूजन अवसाद की बहस के केंद्र के और करीब आती है
University of Bristol के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक पायलट clinical trial से psychiatry में लंबे समय से चले आ रहे एक सवाल के समर्थन में नया सबूत जुड़ रहा है: क्या अवसाद के कुछ रूप केवल मस्तिष्क रसायन में बदलाव से ही नहीं, बल्कि immune activity से भी संचालित हो रहे हैं। JAMA Psychiatry में प्रकाशित इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने tocilizumab का परीक्षण किया, जो एक anti-inflammatory दवा है और rheumatoid arthritis जैसे immune disorders में पहले से उपयोग की जाती है, उन लोगों में जिन्हें मध्यम से गंभीर अवसाद था और जिन पर standard antidepressant treatment का असर नहीं हुआ था।
अध्ययन छोटा था, इसमें 30 प्रतिभागी शामिल थे, और लेखकों ने इसे practice बदल देने वाले परिणाम के बजाय प्रारंभिक-चरण का सबूत बताया है। फिर भी, संकेत उल्लेखनीय था। saltwater placebo की तुलना में tocilizumab ने depressive symptoms कम करने के साथ-साथ fatigue, anxiety, और quality of life में भी सुधार किया। एक ऐसे क्षेत्र में जहां काफी संख्या में मरीज conventional drugs से बेहतर नहीं होते, ऐसा प्रारंभिक परिणाम भी ध्यान खींचने के लिए काफी है।
शोधकर्ताओं ने IL-6 को क्यों लक्षित किया
इस परीक्षण के पीछे वैज्ञानिक तर्क अवसाद और सूजन के बीच बढ़ते संबंधों पर आधारित है। वर्तमान antidepressants serotonin, norepinephrine, और dopamine जैसे neurotransmitters पर केंद्रित हैं। लेकिन अवसाद से पीड़ित लगभग एक-तिहाई लोग इन उपचारों से बेहतर नहीं होते, और शोधकर्ता पारंपरिक मॉडल से आगे जैविक व्याख्याएँ तलाशने लगे हैं।
सबसे मजबूत वैकल्पिक परिकल्पनाओं में से एक inflammatory signaling पर केंद्रित है, विशेष रूप से cytokine interleukin-6, यानी IL-6 पर। टीम द्वारा उद्धृत पिछले शोध से पता चलता है कि अवसाद वाले लगभग एक-तिहाई लोगों के रक्त में सूजन के संकेत मिलते हैं। अन्य अध्ययनों ने, IL-6 सहित, inflammatory proteins के ऊँचे स्तरों को depressive illness से जोड़ा है। Bristol समूह Mendelian randomization के पहले के काम की ओर भी संकेत करता है, जो बताता है कि IL-6 pathway बीमारी के साथ केवल सह-अस्तित्व में नहीं, बल्कि संभवतः causal भूमिका निभा सकता है।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चिकित्सीय लक्ष्य को अधिक स्पष्ट बनाता है। Tocilizumab IL-6 receptor को अवरुद्ध करके काम करता है, यानी यह सीधे उन pathways में से एक को लक्षित करता है जिनके बारे में शोधकर्ताओं को increasingly शक है कि वे अवसाद के कम-से-कम एक उपसमूह में शामिल हैं। यदि यह जैविक मॉडल बड़े परीक्षणों में सही साबित होता है, तो अवसाद को अंततः एक ही विकार के बजाय अलग-अलग अंतर्निहित तंत्रों वाली स्थितियों के परिवार के रूप में देखा जा सकता है।
पायलट परीक्षण ने क्या दिखाया
प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पाया कि tocilizumab केवल mood scores में बदलाव से अधिक कर सकता है। प्रतिभागियों में fatigue और anxiety में भी सुधार देखा गया, ये दो ऐसे लक्षण हैं जो अक्सर अवसाद को विशेष रूप से disabling बनाते हैं और हमेशा पहली पंक्ति की दवाओं से दूर नहीं होते। quality of life में भी वृद्धि हुई, जिससे संकेत मिलता है कि यदि लाभ की पुष्टि होती है, तो यह narrow symptom measures से आगे भी जा सकता है।
क्योंकि परीक्षण में केवल 30 लोग शामिल थे, अध्ययन यह स्थापित नहीं कर सकता कि प्रभाव वास्तव में कितना बड़ा है, वह कितने समय तक टिक सकता है, या किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ होने की संभावना है। इसके बजाय, यह परिणाम एक proof-of-concept के रूप में काम करता है: इस बात का संकेत कि immune-targeting intervention उन लोगों में भी depression symptoms को प्रभावित कर सकता है जिन्होंने पहले ही standard therapy विफल कर दी है।
यह proof-of-concept अपने आप में महत्वपूर्ण है। Psychiatry वर्षों से treatment-resistant depression के लिए बेहतर विकल्प खोज रही है, जिनमें ketamine-based medicines, neuromodulation, और psychedelic-assisted approaches शामिल हैं। immunotherapy का रास्ता एक अलग दिशा का प्रतिनिधित्व करेगा, जो acute brain signaling से कम और systemic biology से अधिक जुड़ा होगा।
अगर निष्कर्ष सही साबित हों तो क्या बदल सकता है
यदि बड़े अध्ययन पायलट निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं, तो सबसे बड़ा बदलाव patient stratification में हो सकता है। प्रदान किया गया स्रोत पाठ बार-बार इस बात पर जोर देता है कि सभी अवसाद inflammatory नहीं दिखते। इसका मतलब है कि भविष्य का उपचार उस उपसमूह की पहचान पर निर्भर हो सकता है जिसके लक्षण overactive immune system से जुड़े हैं। व्यवहार में, यह blood-based biomarkers और अन्य inflammation measures को psychiatric care में अधिक केंद्रीय भूमिका दे सकता है।
यह चिकित्सकों और मरीजों के लिए एक वैचारिक बदलाव भी होगा। अवसाद को अभी भी अक्सर केवल brain disorder के रूप में चर्चा की जाती है, जबकि उभरते प्रमाण बताते हैं कि कुछ लोगों के लिए प्रासंगिक जीवविज्ञान पूरे शरीर में फैला हो सकता है। एक immune signature psychological या social explanations को प्रतिस्थापित नहीं करेगा, लेकिन यह समझाने में मदद कर सकता है कि क्यों कुछ मरीज serotonin-focused drugs पर खराब प्रतिक्रिया देते हैं और क्यों कुछ में भारी थकान तथा व्यापक शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं।
- परीक्षण में एक नई experimental compound के बजाय एक मौजूदा anti-inflammatory दवा का परीक्षण किया गया।
- प्रतिभागियों में मध्यम से गंभीर अवसाद था, जिस पर standard antidepressants का असर नहीं हुआ था।
- अध्ययन ने अवसाद, चिंता, थकान, और quality of life में संभावित लाभ रिपोर्ट किए।
- छोटे नमूने के कारण निष्कर्षों को प्रारंभिक माना जाना चाहिए।
निकट-अवधि का निष्कर्ष
यह परीक्षण यह नहीं दिखाता कि tocilizumab नियमित अवसाद उपचार बनने के लिए तैयार है। यह दिखाता है कि inflammation hypothesis को लगातार विश्वसनीय clinical support मिल रही है और IL-6 pathway को एक गौण मुद्दे के रूप में खारिज करना कठिन होता जा रहा है। कठिन-उपचार अवसाद वाले मरीजों के लिए, पायलट स्तर पर भी यह महत्वपूर्ण खबर है। यह संकेत देती है कि अगली बड़ी प्रगति मौजूदा antidepressant logic में बदलाव से नहीं, बल्कि इस पहचान से आ सकती है कि मरीज के अवसाद का कौन-सा biological subtype है और उसी के अनुसार उपचार चुना जाए।
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on medicalxpress.com
