Maastricht University Medical Center के शोध के अनुसार, रोज़ाना बिना नमक वाली, छिलके सहित भुनी मूंगफली खाने का संबंध बड़ी उम्र के वयस्कों के स्मृति-संबंधी कई मस्तिष्क क्षेत्रों में इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया से पाया गया।
Food & Function में प्रकाशित इस अध्ययन में 16 सप्ताह तक मूंगफली खाने से मस्तिष्क की इंसुलिन प्रतिक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने दाएं गोलार्ध के एक समूह में लाभकारी बदलाव की सूचना दी, जिसमें हिप्पोकैंपस, पैराहिप्पोकैंपल गायरस, लिंगुअल गायरस और पोस्टीरियर सिंगुलेट गायरस के हिस्से शामिल थे।
मस्तिष्क की इंसुलिन प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है
इंसुलिन को आम तौर पर रक्त शर्करा नियंत्रित करने में उसकी भूमिका के लिए जाना जाता है, लेकिन यह मस्तिष्क में एक संकेत देने वाले अणु के रूप में भी काम करता है। यह तंत्रिका कोशिकाओं के जीवित रहने, विकास और संचार में मदद करता है—ऐसी प्रक्रियाएं जो स्मृति और अन्य संज्ञानात्मक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क इंसुलिन के प्रति कम प्रतिक्रियाशील हो सकता है। इस कम प्रतिक्रिया का संबंध उम्र से जुड़ी संज्ञानात्मक गिरावट से जोड़ा गया है। इसलिए नए निष्कर्ष मस्तिष्क स्वास्थ्य से संबंधित एक जैविक संकेत पर केंद्रित हैं, न कि इस प्रत्यक्ष माप पर कि मूंगफली संज्ञानात्मक रोगों को रोकती है या नहीं।
“इंसुलिन हार्मोन मस्तिष्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां यह स्मृति और अन्य संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं में सहायता करता है,” अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और Maastricht University Medical Center में एसोसिएट प्रोफेसर Peter Joris ने एक बयान में कहा। शोधकर्ताओं ने कहा कि उनके परिणाम संकेत देते हैं कि क्षेत्रीय संवेदनशीलता में बढ़ोतरी मूंगफली सेवन से जुड़े संज्ञानात्मक लाभों में योगदान दे सकती है।
स्मृति-संबंधी क्षेत्रों में बदलाव दिखाई दिए
अध्ययन में नाक के जरिए इंसुलिन देने के बाद मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों में रक्त प्रवाह में इंसुलिन-प्रेरित बदलावों को मापा गया। पूरे मस्तिष्क के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने एक ऐसे समूह की पहचान की, जहां नियंत्रण अवधि की तुलना में मूंगफली हस्तक्षेप के बाद प्रतिक्रिया लाभकारी रूप से प्रभावित हुई।
इस समूह में हिप्पोकैंपस और पैराहिप्पोकैंपल गायरस शामिल थे, जो आम तौर पर स्मृति से जुड़े क्षेत्र हैं। इसके साथ लिंगुअल गायरस, थैलेमस और पोस्टीरियर सिंगुलेट गायरस भी शामिल थे। रिपोर्ट किया गया बदलाव क्षेत्र-विशिष्ट था; इसका अर्थ यह नहीं है कि मस्तिष्क के हर हिस्से ने अलग तरह से प्रतिक्रिया दी।

यह अंतर महत्वपूर्ण है। शोध यह स्थापित नहीं करता कि मूंगफली खाने से Alzheimer’s disease का इलाज होता है, संज्ञानात्मक गिरावट उलटती है या स्मृति में सुधार की गारंटी मिलती है। यह केवल एक निर्धारित आहार हस्तक्षेप के बाद मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों में इंसुलिन के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया में बदलाव की रिपोर्ट करता है।
आहार-आधारित हस्तक्षेप, लेकिन सीमाओं के साथ
खाद्य संबंधी अध्ययन उपयोगी संकेत दे सकते हैं, क्योंकि वे ऐसे हस्तक्षेपों की जांच करते हैं जिन्हें दैनिक जीवन में अपनाना व्यावहारिक होता है। लेकिन इस प्रकार के निष्कर्षों की व्याख्या अध्ययन की आबादी, अवधि और परिणामों के मापदंडों के संदर्भ में की जानी चाहिए।
इस अध्ययन में हस्तक्षेप 16 सप्ताह तक चला और इसमें बड़ी उम्र के वयस्कों ने बिना नमक वाली, छिलके सहित भुनी मूंगफली खाई। उपलब्ध स्रोत हर आयु वर्ग, मूंगफली की हर तैयारी या हर संज्ञानात्मक परिणाम पर इस निष्कर्ष को लागू करने का समर्थन नहीं करता। यह भी नहीं दिखाता कि मूंगफली को चिकित्सकीय देखभाल या व्यापक आहार संबंधी मार्गदर्शन का विकल्प बनाया जाना चाहिए।
फिर भी यह अध्ययन इस बात में रुचि बढ़ाता है कि आहार के पैटर्न और अलग-अलग खाद्य पदार्थ चयापचय संबंधी मार्गों के जरिए मस्तिष्क को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। इंसुलिन को केवल अग्न्याशय और रक्तसंचार से संबंधित हार्मोन मानने के बजाय, यह काम केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में उसकी संकेतकारी भूमिका को रेखांकित करता है।
इस परिणाम पर विचार करने वाले पाठकों के लिए सबसे स्पष्ट निष्कर्ष सीमित है: इस अध्ययन में मूंगफली की एक विशिष्ट तैयारी का लंबे समय तक रोज़ाना सेवन स्मृति में शामिल मस्तिष्क क्षेत्रों के एक समूह में इंसुलिन के प्रति अधिक अनुकूल प्रतिक्रिया से जुड़ा था। यह निर्धारित करने के लिए आगे शोध आवश्यक होगा कि यह प्रभाव कितने समय तक बना रहता है और क्या इससे संज्ञान में मापने योग्य बदलाव आते हैं।
आगे क्या होगा
पोषण और मस्तिष्क स्वास्थ्य पर शोध अक्सर ऐसे मध्यवर्ती मापों के जरिए आगे बढ़ता है। शारीरिक संकेत वैज्ञानिकों को संभावित तंत्रों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, इससे पहले कि बड़े अध्ययन लंबे समय में चिकित्सकीय परिणामों की जांच करें।
Maastricht के निष्कर्ष मस्तिष्क की इंसुलिन संवेदनशीलता को आगे अध्ययन योग्य एक तंत्र के रूप में सामने रखते हैं। वे यह भी रेखांकित करते हैं कि आहार संबंधी दावों को प्रमाणों के अनुरूप रखना क्यों जरूरी है: बायोमार्कर या इमेजिंग-संबंधी माप में आशाजनक बदलाव रोग-रोकथाम का प्रमाण नहीं होता।
फिलहाल, यह अध्ययन प्रमाण देता है कि आम तौर पर उपलब्ध एक खाद्य पदार्थ परीक्षण की गई परिस्थितियों में बड़ी उम्र के वयस्कों के मस्तिष्क की इंसुलिन-संबंधी प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण योगदान शायद वह सवाल है जो यह भविष्य के शोध के लिए उठाता है: क्या स्मृति-संबंधी मस्तिष्क क्षेत्रों में इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने से अंततः स्वस्थ संज्ञानात्मक उम्र बढ़ने में मदद मिल सकती है?
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
Originally published on medicalxpress.com



