एक बड़े पैमाने का सार्वजनिक स्वास्थ्य परीक्षण दिखाता है कि खुजली को पीछे धकेला जा सकता है

इवर्मेक्टिन का उपयोग करने वाले एक व्यापक औषधि प्रशासन कार्यक्रम ने सोलोमन द्वीप और फिजी में खुजली तथा उससे जुड़े त्वचा संक्रमणों में तेज़ कमी लाई है, एक नए अध्ययन के अनुसार जिसे खुजली नियंत्रण के लिए दुनिया में पहली तरह का बताया गया है। मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के वर्ल्ड स्केबीज़ प्रोग्राम के नेतृत्व में किए गए और Nature Health में प्रकाशित इस शोध में पाया गया कि राष्ट्रीय स्तर के उपचार अभियानों से दोनों प्रशांत द्वीपीय देशों में रोग-भार में पर्याप्त और टिकाऊ गिरावट आई।

ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि खुजली को अक्सर उच्च-भार वाले क्षेत्रों में एक जमी-जमाई स्थिति के रूप में देखा जाता है, न कि ऐसी बीमारी के रूप में जिसे व्यवस्थित रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। अध्ययन इससे असहमत है। केवल मामले-दर-मामला उपचार पर निर्भर रहने के बजाय पूरे जनसंख्या समूहों में उपचार उपलब्ध कराकर, स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रसार को नाटकीय रूप से घटाने में सफलता पाई, और इम्पेटिगो, जो खुजली के बाद अक्सर होने वाला एक सामान्य जीवाणु त्वचा संक्रमण है, उसे भी कम किया।

यह हस्तक्षेप सोलोमन द्वीप और फिजी में स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं के मंत्रालयों द्वारा मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक पहल, वर्ल्ड स्केबीज़ प्रोग्राम, के समर्थन से किया गया, जिसमें UNSW सिडनी के किर्बी इंस्टिट्यूट के शोधकर्ता भी शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत 25 लाख से अधिक इवर्मेक्टिन की खुराकें उपलब्ध कराई गईं।

दोनों देशों में तेज़ गिरावट

सबसे मजबूत परिणाम सोलोमन द्वीप में मिला, जहां पूरे जनसंख्या समूह को व्यापक औषधि प्रशासन की दो वार्षिक चरणों की खुराक दी गई। अध्ययन के अनुसार, खुजली का प्रसार 23.2% से घटकर 3.9% रह गया। इसी अवधि में, इम्पेटिगो की दर 9.2% से घटकर 1.6% हो गई। यह ऐसे देश में बड़ा बदलाव है, जहां हस्तक्षेप से पहले लगभग हर चार में से एक व्यक्ति इससे प्रभावित था।

फिजी में एक राष्ट्रव्यापी उपचार दौर के बाद भी, हालांकि अपेक्षाकृत छोटे, फिर भी पर्याप्त लाभ मिले। खुजली का प्रसार 6.2% से घटकर 3.4% रह गया, यानी 12 महीनों में लगभग आधा हो गया। इसी अवधि में इम्पेटिगो 4.3% से घटकर 1.2% रह गया। अध्ययन के अनुसार ये सुधार दोनों देशों में सभी आयु वर्गों में देखे गए, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिन पर इस बीमारी का सबसे अधिक बोझ पड़ता है। इसमें यह भी पाया गया कि मध्यम से गंभीर खुजली में उल्लेखनीय कमी आई।

ये आंकड़े इस कार्यक्रम को केवल दो भाग लेने वाले देशों से आगे भी महत्व देते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी लंबे समय से इस बात से जूझते रहे हैं कि स्थानिक क्षेत्रों में खुजली को कैसे नियंत्रित किया जाए, खासकर जहां पुनःसंक्रमण आम है और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच असमान हो सकती है। प्रशांत क्षेत्र के नतीजे संकेत देते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और दोहराई गई कार्रवाई उस पैटर्न को बदल सकती है।

खुजली अब भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या क्यों बनी हुई है

खुजली परजीवी घुनों के कारण होती है और यह बहुत संक्रामक है। हालांकि इसे कभी-कभी मामूली त्वचा समस्या समझकर खारिज कर दिया जाता है, लेकिन इसका बोझ कहीं व्यापक हो सकता है। स्रोत पाठ में तीव्र खुजली और महत्वपूर्ण पीड़ा का वर्णन है, खासकर बच्चों और परिवारों के लिए। खुजली से जुड़ी खरोंच और त्वचा को होने वाला नुकसान द्वितीयक जीवाणु संक्रमण, जैसे इम्पेटिगो, में भी योगदान दे सकता है, इसलिए दोनों स्थितियों में आई गिरावट महत्वपूर्ण है।

यह संबंध समझाता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ता खुजली नियंत्रण को केवल त्वचा रोग विज्ञान का मुद्दा क्यों नहीं मानते। परजीवी को कम करने से टूटी हुई त्वचा और लगातार जलन से पैदा होने वाले संक्रमण भी घट सकते हैं। व्यावहारिक रूप से, इसका मतलब है कि एक सफल खुजली अभियान तत्काल लक्षणों को कम करने के साथ-साथ आगे होने वाली जटिलताओं को भी घटा सकता है।

अध्ययन के नतीजे इसलिए रोग-नियंत्रण और स्वास्थ्य-प्रणाली रणनीति, दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। मरीजों के खुद से आने का इंतजार करने के बजाय, मंत्रालयों ने जनसंख्या स्तर पर संक्रमण को दबाने के लिए व्यापक उपचार का उपयोग किया। यह कार्रवाई का एक अलग मॉडल है, और यह केवल क्लिनिक-दर-क्लिनिक उपचार पर नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, राजनीतिक समन्वय, आपूर्ति शृंखला और जनता की भागीदारी पर निर्भर करता है।

समन्वित राष्ट्रीय कार्रवाई का एक प्रमाण

मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉ. सुसाना लेक ने कहा कि ये निष्कर्ष दिखाते हैं कि खुजली को समन्वित राष्ट्रीय कार्रवाई के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। स्रोत रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि यह परिणाम पहली बार दिखाते हैं कि जब प्रभावी उपचार बड़े पैमाने पर दिया जाता है, तो इस बीमारी को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण इस काम के केंद्रीय नीतिगत निहितार्थ को दर्शाता है: यदि सरकारें व्यापक कवरेज की व्यवस्था कर सकें, तो खुजली को स्थानिक देशों में एक दीर्घकालिक, स्वीकार्य बोझ बने रहने की आवश्यकता नहीं है।

वर्ल्ड स्केबीज़ प्रोग्राम स्वयं 2019 में अनुसंधान साक्ष्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई में बदलने के लिए स्थापित किया गया था। यह अध्ययन उस मिशन का सीधा परीक्षण प्रतीत होता है। केवल रोग-प्रसार का दस्तावेजीकरण करने के बजाय, शोधकर्ताओं और मंत्रालयों ने एक राष्ट्रीय हस्तक्षेप किया और वास्तविक आबादियों में उसके परिणाम को मापा। 25 लाख से अधिक इवर्मेक्टिन खुराकों की आपूर्ति सहित इस प्रयास का पैमाना बताता है कि अध्ययन को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में क्यों देखा जा रहा है।

व्यापक औषधि प्रशासन कोई मामूली काम नहीं है। इसके लिए ऐसा उपचार चाहिए जिसे व्यापक उपयोग के लिए सुरक्षित और उपयुक्त माना गया हो, पर्याप्त जन-जागरूकता चाहिए ताकि लोग इसे अपनाएं, और ऐसी स्वास्थ्य संरचना चाहिए जो पूरे देश के समुदायों तक पहुंच सके। स्रोत में इवर्मेक्टिन को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए एक सुरक्षित और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला परजीवीनाशक उपचार बताया गया है, जिससे इस प्रकार के अभियान में इसका उपयोग संभव हुआ होगा।

फिर भी, कार्यक्रम का महत्व केवल दवा के चयन में नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित रूप से लागू करने की क्षमता में निहित है। सोलोमन द्वीप और फिजी से मिलने वाला सबक केवल यह नहीं है कि इवर्मेक्टिन काम करता है, बल्कि यह है कि राष्ट्रीय प्रणालियों के माध्यम से संगठित वितरण उपेक्षित बीमारी के खिलाफ मापनीय जनसंख्या-स्तरीय प्रभाव पैदा कर सकता है।

अन्य स्थानिक क्षेत्रों के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है

यह अध्ययन दीर्घकालिक खुजली नियंत्रण से जुड़े हर प्रश्न का समाधान होने का दावा नहीं करता, और स्रोत पाठ में रिपोर्ट किए गए सर्वेक्षण विंडो से आगे के अनुवर्ती का वर्णन नहीं है। लेकिन दिशा स्पष्ट है। कमी बड़ी थी, सभी आयु समूहों में देखी गई थी, और इसमें खुजली तथा इम्पेटिगो, दोनों शामिल थे। यह संयोजन परिणामों को किसी संकीर्ण या अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के रूप में खारिज करना कठिन बनाता है।

जहां खुजली स्थानिक है, खासकर उष्णकटिबंधीय और संसाधन-संकटग्रस्त क्षेत्रों में, ये निष्कर्ष राष्ट्रीय अभियानों के लिए एक मजबूत साक्ष्य आधार देते हैं। वे खुजली को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता के रूप में देखने की दलील को भी मजबूत करते हैं, न कि कम-स्तरीय स्थिति के रूप में। “उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग” वाक्यांश अक्सर इसी समस्या का संकेतक होता है: बीमारियां व्यापक और हानिकारक हो सकती हैं, फिर भी उन्हें उनके बोझ के अनुरूप नीति-ध्यान नहीं मिलता।

सोलोमन द्वीप और फिजी में जो हुआ, उससे पता चलता है कि उपेक्षा अनिवार्य नहीं है। जब स्वास्थ्य मंत्रालय, शोध संस्थान और कार्यान्वयन कार्यक्रम एक साथ आते हैं, तो बड़े जनसमूहों को प्रभावित करने वाली बीमारियों को भी तेजी से कम किया जा सकता है। ये नतीजे यह भी दिखाते हैं कि राष्ट्रीय डेटा क्यों महत्वपूर्ण हैं। सोलोमन द्वीप में 23.2% से 3.9% और फिजी में 6.2% से 3.4% तक की गिरावट एक अमूर्त सार्वजनिक स्वास्थ्य आकांक्षा को कुछ ठोस और मापनीय में बदल देती है।

अध्ययन का व्यापक महत्व यह है कि यह खुजली नियंत्रण को सिद्धांत से निकालकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित व्यवहार में बदल देता है। लगातार प्रसार के साथ जी रहे समुदायों के लिए, यह शायद सबसे महत्वपूर्ण विकास है। यह खुजली को एक स्थायी पृष्ठभूमि स्थिति के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी समस्या के रूप में प्रस्तुत करता है जिसे व्यापक, दोहराए गए और सरकारी समर्थन के साथ उपचार देकर वास्तविक रूप से कम किया जा सकता है।

यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on medicalxpress.com