शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने शुरुआती मैक्युलर डिजनरेशन का तेज़ मॉडल बनाया है
Utah State University की एक टीम ने एक लैब-आधारित मॉडल विकसित किया है जिसने उम्र-संबंधी मैक्युलर डिजनरेशन, या AMD, की शुरुआती शुरुआत को इस तरह दोहराया जैसा शोधकर्ताओं के अनुसार मानव आंख में बीमारी विकसित होती है। दिए गए Medical Xpress स्रोत पाठ के अनुसार, इस मॉडल ने वसा जमाव और प्रोटीन मार्कर उत्पन्न किए जो AMD के शुरुआती चरणों से जुड़े हैं, जिससे दृष्टिहीनता के प्रमुख कारणों में से एक का अध्ययन करने का संभावित रूप से तेज़ तरीका मिल सकता है।
यह काम एक लंबे समय से मौजूद शोध समस्या का समाधान करता है। लैब में AMD का अध्ययन करना कठिन है क्योंकि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित, जैविक रूप से प्रासंगिक तरीके से दोहराना मुश्किल है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि AMD केवल अलग-अलग कोशिकाओं की बीमारी नहीं है। यह पर्यावरणीय, आनुवंशिक, और उम्र-संबंधी तनाव के संचय से उभरती है, जो retinal pigment epithelium कोशिकाओं के कार्य को बिगाड़ता है, और यही कोशिकाएँ rods और cones को सहारा देती हैं जो दृष्टि के लिए ज़रूरी हैं।
Utah State समूह, जिसका नेतृत्व associate professor Elizabeth Vargis, doctoral student Dillon Weatherston, और associate professor Justin Jones कर रहे थे, ने केवल अंतिम चरण की बीमारी को मॉडल करने के बजाय उस aging environment को दोबारा बनाने पर ध्यान दिया। उनका तरीका महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि मौजूदा उपचार विकल्प सीमित हैं और अक्सर मरीजों के लिए बोझिल होते हैं।
हैगफ़िश प्रोटीन से बनी एक समायोज्य झिल्ली
स्रोत पाठ के अनुसार, यह सफलता तब मिली जब शोधकर्ताओं ने पाया कि hagfish proteins से बनी एक झिल्ली को प्राकृतिक उम्र बढ़ने की नकल करने के लिए समायोजित किया जा सकता है। फिर उन्होंने देखा कि pig eyes से ली गई retinal pigment epithelium कोशिकाएं बदलती हुई झिल्ली पर कैसे प्रतिक्रिया करती हैं।
इस काम की महत्ता में यह विवरण केंद्रीय है। कोशिकाओं के आसपास के भौतिक वातावरण को इस तरह बदलकर जो उम्र बढ़ने जैसा लगे, मॉडल बीमारी की प्रक्रिया को जन्म देने का लक्ष्य रखता है, न कि केवल कृत्रिम चोट पहुंचाने का। व्यावहारिक रूप से, इससे वैज्ञानिकों को शुरुआती जीवविज्ञान को देखने और वे संकेत पहचानने का तरीका मिलता है जो बड़ी दृष्टि हानि से पहले दिखाई देते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मॉडल ने AMD की शुरुआत को उसी तरह सफलतापूर्वक दोहराया जैसे यह मानव आंख में विकसित होती है। प्राकृतिक रूप से होने वाले AMD की तरह, इसमें वसा जमाव और प्रोटीन मार्कर बने जो बीमारी के शुरुआती चरणों का संकेत देते हैं। ये नतीजे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे बताते हैं कि सिस्टम केवल कोशिकाओं पर सामान्य तनाव नहीं डाल रहा, बल्कि पहचानने योग्य रोग-चिह्न दोहरा रहा है।
ये निष्कर्ष GeroScience में प्रकाशित हुए, जिसे स्रोत उम्र और उम्र-संबंधी बीमारियों पर केंद्रित एक प्रमुख जर्नल बताता है। वहां प्रकाशन clinical सवालों को अंतिम रूप नहीं देता, लेकिन यह दिखाता है कि काम को tissues में उम्र बढ़ने के रोग पर व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
AMD के लिए बेहतर शोध उपकरण क्यों ज़रूरी हैं
AMD बहुत से लोगों को प्रभावित करता है और इसे संभालना निराशाजनक रूप से कठिन बना हुआ है। दिए गए पाठ में Vargis के हवाले से कहा गया है कि मौजूदा उपचार विकल्प मूलतः विटामिन या आंख में मासिक इंजेक्शन तक सीमित हैं, और फ़ील्ड को अब तक बेहतर उपकरण मिल जाने चाहिए थे। यही असंतोष बताता है कि मॉडल सिस्टम यहाँ इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।
विटामिन उपचार AMD के विकसित होने की संभावना कम कर सकते हैं, लेकिन एक बार बढ़ती हुई दृष्टि हानि शुरू हो जाए तो वे विशेष मददगार नहीं होते। उन्नत बीमारी कुछ मामलों में संभाली जा सकती है, लेकिन ठीक नहीं की जा सकती। इसलिए जल्दी पहचान और शुरुआती हस्तक्षेप खासतौर पर महत्वपूर्ण हो जाते हैं, और दोनों इस बात पर निर्भर हैं कि बीमारी की शुरुआत में कौन से परिवर्तन होते हैं।
एक तेज़ और अधिक विश्वसनीय मॉडल कई मोर्चों पर मदद कर सकता है। यह दवा-उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग, अलग-अलग तनावों का degeneration पर प्रभाव की तुलना, और ऐसे biomarkers की पहचान आसान बना सकता है जो अपरिवर्तनीय नुकसान दिखने से पहले उभरते हैं। यह शोधकर्ताओं को यह भी परखने दे सकता है कि हस्तक्षेप बीमारी के अलग-अलग चरणों में अलग तरह से काम करते हैं या नहीं।
आंख से आगे भी संभावित उपयोगिता
स्रोत पाठ में कहा गया है कि टीम का मानना है कि यह मॉडल Alzheimer’s सहित अन्य उम्र-संबंधी बीमारियों पर शोध को भी आगे बढ़ा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि eye model सीधे brain disease पर लागू हो जाता है, लेकिन यह इस बात की ओर इशारा करता है कि जैविक उम्र बढ़ने के कुछ पहलुओं को दोहराने वाले tunable systems बनाने का व्यापक वैज्ञानिक मूल्य है।
उम्र बढ़ने का अध्ययन कठिन है क्योंकि यह लंबे समय तक चलता है और कई cell types तथा environmental conditions से जुड़ता है। जो उपकरण इस प्रक्रिया के कुछ हिस्से को प्रयोगशाला समय-सीमा में समेट देते हैं, वे age-related disease research को कहीं अधिक व्यावहारिक बना सकते हैं। उस अर्थ में, AMD project ophthalmology से आगे भी महत्वपूर्ण हो सकता है यदि इसकी मूल पद्धति अनुकूलित की जा सके।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह काम अभी क्या दावा नहीं करता। यह मॉडल एक research platform है, उपचार नहीं। यह मरीजों में AMD का निदान नहीं करता, और न ही यह साबित करता है कि कोई नई therapy तैयार है। इसकी तत्काल उपयोगिता प्रयोगात्मक है: बीमारी के शुरुआती चरणों को देखने का तेज़ और संभवतः अधिक यथार्थवादी तरीका।
आगे क्या
अगले सवाल सीधे हैं। क्या मॉडल लगातार अतिरिक्त प्रयोगों में early AMD features दोहरा सकता है? क्या इसे interventions का परीक्षण करने में उपयोग किया जा सकता है, इस तरह कि यह मरीजों में आगे क्या होता है इसकी भविष्यवाणी कर सके? और क्या शोधकर्ता इससे biomarkers निकाल सकते हैं जो अंततः screening या पहले clinical निर्णय में मदद करें?
इन सवालों के जवाब समय लेंगे, लेकिन इस प्रगति का महत्व पहले से स्पष्ट है। AMD research लंबे समय से आंख में उम्र बढ़ने को मॉडल करने की कठिनाई से सीमित रहा है। एक ऐसा सिस्टम जो सप्ताहों में शुरुआती चेतावनी संकेत दोहरा दे, वर्षों की निगरानी की बजाय, क्षेत्र को रोकथाम अध्ययन, mechanism discovery, और बेहतर उपचार विचारों के लिए अधिक व्यावहारिक रास्ता दे सकता है।
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on medicalxpress.com





