194 वर्षीय कछुआ और उम्र बढ़ने का सवाल
सेंट हेलेना में रहने वाला विशाल कछुआ जोनाथन 194 वर्ष का है। शोधकर्ता उसके जीवविज्ञान का उपयोग यह समझने के लिए कर रहे हैं कि कुछ जीव इतने लंबे समय तक स्वास्थ्य कैसे बनाए रखते हैं।
Vanderbilt Health के न्यूरोलॉजिस्ट और उन्नत-जीनोमिक्स विशेषज्ञों के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने जोनाथन का जीनोम तैयार किया। टीम ने माइटोकॉन्ड्रियल ऊर्जा उत्पादन से जुड़े जीन के नियमन में एक उल्लेखनीय विशेषता पाई। निष्कर्ष 7 अक्टूबर को Science Advances में प्रकाशित हुए।
आनुवंशिक नियंत्रण स्विचों में एंट्रॉपी
शोधकर्ताओं ने promoters का अध्ययन किया—ये जीनों की गतिविधि को नियंत्रित करने वाले आनुवंशिक on-and-off switches हैं। उम्र बढ़ने के साथ इनमें अव्यवस्था बढ़ सकती है, जिससे माइटोकॉन्ड्रिया की दक्षता प्रभावित होती है।
जोनाथन में माइटोकॉन्ड्रियल ऊर्जा उत्पादन से जुड़े promoters अपेक्षाकृत युवा और व्यवस्थित दिखाई दिए। इसका अर्थ यह नहीं कि उसकी उम्र बढ़ना रुक गया है या मनुष्यों के लिए उपचार मिल गया है; यह केवल लंबे समय तक जीवित रहने वाले एक असाधारण जीव से मिला जैविक संकेत है।

माइटोकॉन्ड्रियल कार्य क्यों महत्वपूर्ण है
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं को ऊर्जा देते हैं और शरीर की अनेक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। अध्ययन बताता है कि उम्र बढ़ना केवल क्षतिग्रस्त घटकों का परिणाम नहीं, बल्कि उन निर्देशों में अव्यवस्था का भी परिणाम हो सकता है जो कोशिकीय प्रणालियों को नियंत्रित करते हैं।
पशु निष्कर्ष से मानव स्वास्थ्य-अवधि अनुसंधान तक
शोधकर्ताओं के अनुसार, जीन अभिव्यक्ति की अव्यवस्था से माइटोकॉन्ड्रिया को बचाना संभव हो सकता है। लक्ष्य केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि अधिक वर्षों तक अपेक्षाकृत अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखना है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक Stephen “Wes” Clark ने rapamycin जैसी सामान्य दवाओं के संभावित anti-aging प्रभावों की ओर भी संकेत किया। पेटेंट सुरक्षा समाप्त हो चुकी दवाओं पर क्लिनिकल परीक्षण के लिए कंपनियों का व्यावसायिक प्रोत्साहन सीमित हो सकता है।

निष्कर्ष क्या दिखाता है और क्या नहीं
यह अध्ययन एक असाधारण जीव में पाए गए संबंध और जांच योग्य जैविक प्रक्रिया की पहचान करता है। यह सिद्ध नहीं करता कि मनुष्यों में promoter की व्यवस्था बदलने से कछुए जैसी दीर्घायु मिलेगी या कोई विशेष दवा मानव healthspan बढ़ा सकती है। इसके लिए सावधानीपूर्वक मानव क्लिनिकल परीक्षण आवश्यक होंगे।
असाधारण रूप से उपयोगी पशु मॉडल
जोनाथन का महत्व इस बात में है कि उसकी कालानुक्रमिक उम्र और माइटोकॉन्ड्रियल जीन promoters की युवा जैसी व्यवस्था के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। यदि भविष्य के शोध यह बताएँ कि यह व्यवस्था कैसे बनी रही और मनुष्यों में इसका समर्थन किया जा सकता है या नहीं, तो जोनाथन स्वस्थ उम्र बढ़ने की समझ में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
Originally published on medicalxpress.com








