सिंगापुर ने हाइड्रोजन-रेडीनेस को बोली की शर्त बना दिया

सिंगापुर ने हाइड्रोजन को लंबी अवधि की आकांक्षा से निकालकर एक सख्त खरीद नियम में बदल दिया है। कम से कम 600 MW गैस-आधारित उत्पादन क्षमता के लिए नए प्रस्ताव-आह्वान में, Energy Market Authority ने हाइड्रोजन-रेडीनेस को वैकल्पिक विशेषता के बजाय अनिवार्य शर्त बना दिया है।

यह टेंडर निजी क्षेत्र से 2031 के अंत तक कम से कम 600 MW की एक combined cycle gas turbine इकाई बनाने, स्वामित्व रखने और संचालित करने को कहता है। ढांचे में 2032 की शुरुआत तक दो अतिरिक्त इकाइयों का विकल्प भी शामिल है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात संयंत्र का आकार नहीं, बल्कि उससे जुड़ी ईंधन शर्त है: नई इकाइयाँ आयतन के हिसाब से कम से कम 30% हाइड्रोजन के साथ काम करने में सक्षम होनी चाहिए।

स्रोत पाठ के अनुसार, जो प्रस्ताव टेंडर की मूल शर्तें पूरी नहीं करते, उन्हें मूल्यांकन से बाहर कर दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि हाइड्रोजन-रेडीनेस अब प्रतिस्पर्धा में प्रवेश की न्यूनतम कसौटी है, न कि सिर्फ समीक्षा प्रक्रिया के भीतर अंक दिलाने वाला गुण।

बुनियादी ढांचे की योजना के रूप में छिपा नीति-संकेत

एक स्तर पर यह कदम एक पारंपरिक क्षमता खरीद है। सिंगापुर को उम्मीद है कि सिस्टम पीक डिमांड 2034 तक 2.4% से 4.8% की मिश्रित वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगी, जिसमें सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे ऊर्जा-गहन उद्योग प्रमुख चालक होंगे। उस लोड को सहारा देने के लिए नई उत्पादन क्षमता की जरूरत होगी।

लेकिन दूसरे स्तर पर यह टेंडर इस बात का नीति-घोषणापत्र है कि सिंगापुर किस तरह की थर्मल क्षमता जोड़ना चाहता है। निकट अवधि की पावर मिक्स में गैस केंद्रीय बनी हुई है, लेकिन नई संपत्तियों को शुरुआत से ही कम-कार्बन ईंधन मार्ग के लिए तैयार होना होगा। यह शर्त इस जोखिम को कम करती है कि 2030 के दशक में विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बने संयंत्र, उत्सर्जन मानक सख्त होने या ईंधन रणनीतियाँ बदलने पर, अनुकूलित करना कठिन हो जाएँ।

टेंडर 75% plant load factor पर net electricity output के लिए 0.355 metric tons of CO2-equivalent per MWh की उत्सर्जन तीव्रता सीमा भी तय करता है। Energy Market Authority ने प्रस्तावित उत्सर्जन मानकों पर अलग से परामर्श भी प्रकाशित किया है। दोनों को मिलाकर देखें तो यह स्पष्ट होता है कि नियामक क्षमता विस्तार और उत्सर्जन अनुशासन को साथ-साथ आगे बढ़ाना चाहता है, उन्हें अलग-अलग रास्ते नहीं मानता।

यहाँ हाइड्रोजन-रेडीनेस क्यों महत्वपूर्ण है

हाइड्रोजन-रेडी गैस संयंत्र ऊर्जा योजना में बार-बार सामने आने वाली अवधारणा बन गए हैं, लेकिन विभिन्न बाज़ारों में खरीद भाषा बहुत अलग होती है। कुछ ढांचे भविष्य में वैकल्पिक रूपांतरण को प्रोत्साहित करते हैं। सिंगापुर का दृष्टिकोण स्रोत पाठ में अधिक ठोस है: बोलीदाताओं को आयतन के हिसाब से कम से कम 30% हाइड्रोजन-रेडी होने की क्षमता दिखानी होगी।

इसका अर्थ यह नहीं कि संयंत्र तुरंत हाइड्रोजन पर चलेगा, और न ही यह कि जब इकाइयाँ चालू होंगी तब हाइड्रोजन आपूर्ति की अर्थव्यवस्था अनुकूल होगी। इसका अर्थ यह है कि इंजीनियरिंग, उपकरण चयन, और परियोजना डिज़ाइन में पहले दिन से ही संक्रमण मार्ग को ध्यान में रखना होगा। व्यावहारिक रूप से, इससे टर्बाइन कॉन्फ़िगरेशन, दहन रणनीति, और दीर्घकालिक retrofit योजना तय होती है।

यह डेवलपर्स के लिए बोली जोखिम का आकलन भी बदल देता है। जो परियोजना साधारण गैस संपत्ति के रूप में वित्तपोषित हो सकती थी, उसे अब तकनीकी तैयारी की शर्तों और उत्सर्जन सीमाओं को एक साथ पूरा करना होगा। नियामक मूलतः ऐसी dispatchable क्षमता मांग रहा है जो मौजूदा जरूरतों के लिए विश्वसनीय हो, लेकिन भविष्य में एकल-ईंधन पर इतनी निर्भर न रहे।

कोई राजस्व समर्थन नहीं, और वित्तपोषण महत्वपूर्ण है

Energy Market Authority केवल तकनीकी अनुपालन नहीं मांग रही। स्रोत पाठ के अनुसार, प्रतिभागियों को प्रस्तावित उत्पादन व्यवसाय को वित्तपोषित करने की क्षमता दिखानी होगी, और कोई revenue support प्रदान नहीं किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक शर्त है।

Revenue support के बिना, बोलीदाताओं को बिजली बाज़ार और दीर्घकालिक संयंत्र अर्थशास्त्र की विश्वसनीयता के आधार पर अपना मामला बनाना होगा। इसलिए हाइड्रोजन-रेडीनेस की शर्त एक ऐसे बाज़ार ढाँचे में आती है जहाँ निजी क्षेत्र से अभी भी पर्याप्त वाणिज्यिक जिम्मेदारी उठाने की अपेक्षा की जाती है। डेवलपर्स के लिए चुनौती केवल अनुपालन तकनीक पेश करने की नहीं, बल्कि यह दिखाने की भी है कि संपत्ति वित्तीय रूप से खुद खड़ी हो सकती है।

यह संयोजन संभवतः उन्हीं बोलीदाताओं को लाभ दे सकता है जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है, पूंजी तक बेहतर पहुंच है, या थर्मल उत्पादन का अधिक स्थापित अनुभव है। यह उन बोलीदाताओं को भी तरजीह दे सकता है जो यह भरोसेमंद रोडमैप दिखा सकें कि हाइड्रोजन-सक्षम डिज़ाइन विकल्प bankability को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे संभाले जाएंगे।

क्षेत्रीय ऊर्जा रणनीति के बारे में यह टेंडर क्या कहता है

सिंगापुर का यह कदम कई बिजली प्रणालियों में दिखाई देने वाले व्यापक तनाव को दर्शाता है: ऐसी क्षमता जोड़ने की आवश्यकता जो दशकों तक सबसे अधिक उत्सर्जन वाली क्षमता में लॉक-इन न कर दे। तेज़ी से बढ़ती, भूमि-सीमित, उद्योग-प्रधान अर्थव्यवस्था में विश्वसनीयता की जरूरतें सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जातीं कि decarbonization लक्ष्य और सख्त हो जाते हैं। नीति की चुनौती ऐसी परियोजनाएँ खरीदने की है जो विकास को सहारा दें और बाद में स्वच्छ ईंधनों के लिए विकल्प भी बचाए रखें।

स्रोत पाठ यह दावा नहीं करता कि हाइड्रोजन इस समीकरण के हर हिस्से को हल कर देगा, और यह भी नहीं बताता कि बड़े पैमाने पर ईंधन परिवर्तन कब या कैसे होगा। लेकिन यह दिखाता है कि सिंगापुर भविष्य की retrofit बहसों पर छोड़ने के बजाय हाइड्रोजन अनुकूलता को सीधे एक सक्रिय खरीद निर्णय में शामिल कर रहा है। यही बात इस टेंडर को उसके megawatts से आगे उल्लेखनीय बनाती है।

यदि योजना के अनुसार लागू किया गया, तो यह परियोजना 2031 के अंत तक कम से कम 600 MW नई गैस-आधारित क्षमता जोड़ेगी, और 2032 की शुरुआत तक अतिरिक्त इकाइयों की संभावना भी होगी। अधिक महत्वपूर्ण यह कि यह एक मिसाल कायम करेगी: सिंगापुर के अगले generation buildout में ईंधन लचीलापन और उत्सर्जन प्रदर्शन अब परिधीय विचार नहीं हैं। वे मूल प्रवेश शर्तें हैं।

मुख्य बिंदु

  • सिंगापुर की नई पावर टेंडर में 2031 के अंत तक कम से कम 600 MW की एक combined cycle gas turbine इकाई आवश्यक है।
  • नई इकाइयों को आयतन के हिसाब से कम से कम 30% हाइड्रोजन-रेडी होना चाहिए, और जो बोलियाँ मूल शर्तें पूरी नहीं करेंगी, उन्हें बाहर कर दिया जाएगा।
  • टेंडर में सख्त उत्सर्जन-तीव्रता सीमा और कोई revenue support नहीं शामिल है।
  • 2034 तक पीक डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, जिसका एक कारण सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर हैं।

यह लेख PV Magazine की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on pv-magazine.com