मीथेन जलवायु बहस के केंद्र में आता है
दिए गए स्रोत पाठ में उजागर एक नया अध्ययन सीधे यह तर्क देता है कि जलवायु रणनीति केवल कार्बन डाइऑक्साइड लक्ष्यों पर निर्भर नहीं रह सकती। शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे महत्वाकांक्षी मौजूदा राष्ट्रीय नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के बावजूद, यदि मीथेन में कटौती नहीं की गई तो चरम गर्मी पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.85 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकती है। उनका निष्कर्ष सीधा है: गर्मी को 2C से बहुत नीचे रखने के लिए नेट-ज़ीरो CO2 प्रतिबद्धताओं के साथ सख्त मीथेन कटौती भी आवश्यक है।
यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मीथेन अक्सर जलवायु नीति में असहज स्थान पर रहती है। इसे व्यापक रूप से एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस माना जाता है, और स्रोत पाठ इसे CO2 के बाद वैश्विक गर्मी में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बताता है। लेकिन मीथेन को अक्सर व्यापक “CO2 समतुल्य” लेखांकन में समाहित कर दिया जाता है, जिससे इसकी अलग नीति-चुनौती को देखना कठिन हो जाता है।
Communications Earth & Environment में प्रकाशित, स्रोत पाठ के अनुसार, यह अध्ययन एक अलग ढांचा सुझाता है। संयुक्त ग्रीनहाउस गैसों की एक टोकरी से शुरू करने के बजाय, लेखक गर्मी की सीमा से शुरुआत करते हैं और फिर तय करते हैं कि मीथेन में कितनी कटौती की आवश्यकता होगी। यह दृष्टिकोण मीथेन के जलवायु प्रभावों को CO2 से अलग करने के लिए बनाया गया है, बजाय इसके कि उन्हें सीधे अदला-बदली योग्य मान लिया जाए।
मीथेन को कार्बन डाइऑक्साइड की तरह क्यों नहीं देखा जा सकता
मुख्य कारण भौतिक है, केवल बयानबाज़ी नहीं। दिए गए पाठ में बताया गया है कि मीथेन CO2 की तुलना में गर्मी को अधिक प्रभावी ढंग से रोकती है, लेकिन वायुमंडल में बहुत कम समय तक रहती है, केवल कुछ दशकों के बाद ही समाप्त हो जाती है। इसके विपरीत CO2 अधिक समय तक बनी रहती है। इन अंतरों का मतलब है कि दोनों गैसें जलवायु प्रणाली में एक जैसा व्यवहार नहीं करतीं, और न ही वे समान नीति-समयरेखाएँ बनाती हैं।
इसीलिए लेख एक यादगार तुलना का उपयोग करता है: एक टन CO2 के बराबर कितनी मीथेन है, यह पूछना स्पैगेटी को एक मुर्गी के बराबर पूछने जैसा बताया गया है। बात यह नहीं कि तुलना असंभव है, बल्कि यह कि उत्तर मापदंड पर निर्भर करता है। भोजन के लिए कैलोरी, प्रोटीन, और लागत अलग-अलग समतुल्य दे सकते हैं; इसी तरह, अलग-अलग मान्यताएँ और समय-क्षितिज अलग-अलग ग्रीनहाउस गैस रूपांतरण पैदा कर सकते हैं।

व्यवहारिक रूप से, इसका मतलब है कि CO2-equivalent लेखांकन पर बहुत अधिक आधारित जलवायु लक्ष्य तात्कालिक समझौतों को धुंधला कर सकते हैं। रूपांतरण जिस तरह से संरचित होता है, उसके अनुसार मीथेन कटौती कभी अत्यंत महत्वपूर्ण तो कभी उससे कम आवश्यक दिखाई दे सकती है जितनी वास्तव में है। लेखक तर्क देते हैं कि ऐसा एकीकरण मीथेन के मजबूत ऊष्मन प्रभाव और अपेक्षाकृत कम जीवनकाल से पैदा होने वाले अवसरों और सीमाओं, दोनों को छिपा देता है।
वही छोटा जीवनकाल मीथेन को निकट-कालिक तापमान प्रबंधन के लिए शक्तिशाली उपकरण बनाता है। मीथेन में कटौती कार्बन डाइऑक्साइड में कमी की आवश्यकता को समाप्त नहीं करती, लेकिन यह प्रभावित कर सकती है कि दीर्घकालिक decarbonization पूरी तरह असर दिखाने से पहले गर्मी कितनी ऊँची चोटी तक पहुंचती है। नीतिनिर्माताओं के लिए, जो इस पर ध्यान दे रहे हैं कि दुनिया महत्वपूर्ण सीमाओं को पार करेगी या नहीं, यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है।
अध्ययन का नीतिगत संदेश
स्रोत पाठ के अनुसार शोधकर्ताओं ने CO2 और मीथेन कमी को “decouple” किया और वैश्विक गर्मी की सीमाओं को शुरुआती बिंदु बनाया। उस दृष्टिकोण से, net-zero CO2 लक्ष्य आवश्यक तो हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। यदि मीथेन ऊँची बनी रहती है, तो अध्ययन सुझाव देता है कि जलवायु प्रणाली अभी भी ऐसा चरम गर्मी स्तर देख सकती है जो देशों के महत्वाकांक्षी कार्बन लक्ष्यों का पीछा करते हुए भी खतरनाक रूप से प्रमुख सीमाओं के करीब या उनसे आगे निकल जाए।
यह उन रणनीतियों के लिए एक तीखी चुनौती है जो मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड पर राजनीतिक और वित्तीय ध्यान केंद्रित करती हैं। कृषि, जीवाश्म ईंधन, और कचरा प्रबंधन को स्रोत पाठ में मीथेन के प्रमुख स्रोत बताया गया है, जिसका अर्थ है कि नीति-भार ऊर्जा अर्थव्यवस्था के केवल एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। इसलिए मीथेन-केंद्रित रणनीति को बिजली या उद्योग के केवल decarbonization के लिए इस्तेमाल होने वाले साधनों से अलग उपकरणों की आवश्यकता होती है।
यह तर्क अनुक्रमण का प्रश्न भी उठाता है। चूँकि मीथेन में कटौती से निकट अवधि में अधिक तापमान लाभ मिल सकता है, उन्हें टालना जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना और कठिन बना सकता है, भले ही दीर्घकालिक कार्बन कटौतियाँ जारी रहें। अध्ययन का ढांचा बताता है कि कुछ जलवायु मार्ग कागज़ पर तब भी विश्वसनीय दिख सकते हैं जब गैसों को एक साथ जोड़ दिया जाए, लेकिन फिर भी वे चरम गर्मी को उस तरह नियंत्रित करने में विफल रह सकते हैं जैसा नीति-निर्माता चाहते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि लेखक CO2 लक्ष्यों को खारिज कर रहे हैं। इसके विपरीत, स्रोत पाठ के अनुसार उनका कहना है कि कार्बन और मीथेन को एक साथ संभालना होगा, लेकिन उन्हें अवधारणात्मक रूप से एक ही नीति उपकरण में नहीं मिलाना चाहिए। net-zero CO2 केंद्रीय बना रहता है, लेकिन यदि उद्देश्य गर्मी को 2C से बहुत नीचे रखना है, तो इसे स्पष्ट मीथेन कटौती से पूरक करना होगा।
जलवायु योजना में व्यापक बदलाव
इस अध्ययन का महत्व इस बात में है कि यह जलवायु महत्वाकांक्षा को फिर से कैसे परिभाषित करता है। वर्षों से, “net zero” राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं और कॉर्पोरेट वादों के लिए प्रमुख संगठक अवधारणा रही है। अध्ययन इस ढांचे को अस्वीकार नहीं करता, लेकिन संकेत देता है कि यदि यह नीतिनिर्माताओं को विशिष्ट गैसों के भिन्न व्यवहार की बजाय केवल कुल उत्सर्जन के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करे, तो यह शब्द भ्रामक हो सकता है।
मीथेन की स्वतंत्र भूमिका पर ज़ोर देकर, शोध खेती, जीवाश्म-ईंधन प्रणालियों, और कचरे में लक्षित उपायों के पक्ष को मजबूत करता है। यह सरकारों को यह आँकने का अधिक प्रत्यक्ष तरीका भी देता है कि मौजूदा वादे तापमान लक्ष्यों के अनुरूप हैं या सिर्फ लेखांकन ढाँचों के।
दिए गए पाठ में निष्कर्ष को कठोर शब्दों में रखा गया है: मीथेन में कटौती के बिना, सबसे महत्वाकांक्षी मौजूदा राष्ट्रीय net-zero लक्ष्य भी चरम गर्मी को 1.85C से ऊपर जाने दे सकते हैं। इसका अभी यह अर्थ नहीं कि सभी जलवायु लक्ष्य हासिल करना असंभव हैं, लेकिन यह ज़रूर संकेत देता है कि सफलता की गुंजाइश carbon-only कथाओं की तुलना में संकरी है।
जलवायु नीति के लिए यह संदेश अनदेखा करना मुश्किल है। मीथेन कोई गौण मुद्दा नहीं है जिसे किसी सामान्य उत्सर्जन कुल में मिला दिया जाए। यह एक तेज़-प्रभाव वाला जलवायु चालक है, जो आने वाले दशकों में यह तय कर सकता है कि दुनिया महत्वपूर्ण गर्मी सीमाओं के भीतर रहती है या नहीं। यदि अध्ययन का यह ढाँचा प्रभावी होता है, तो भविष्य की जलवायु बहसों में “well below 2C” को केवल नारा नहीं, बल्कि वास्तविक लक्ष्य बनाने के लिए मीथेन-विशिष्ट कार्रवाई पर कहीं अधिक ज़ोर हो सकता है।
यह लेख CleanTechnica की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on cleantechnica.com





