यूके किशोरों के लिए व्यापक सोशल मीडिया प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है
यूके सरकार अपने अब तक के सबसे व्यापक इंटरनेट-सुरक्षा हस्तक्षेपों में से एक की तैयारी कर रही है। योजना के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से रोका जाएगा और बड़े किशोरों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। स्रोत रिपोर्टिंग में इसे “Australia plus” दृष्टिकोण बताया गया है, जो केवल प्रमुख प्रतिबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि युवा उपयोगकर्ता सोशल ऐप्स, गेमिंग सेवाओं और AI चैट उत्पादों के साथ कैसे बातचीत करेंगे।
यह योजना सरकार के रुख में एक महत्वपूर्ण सख्ती को दर्शाती है। स्वैच्छिक प्लेटफॉर्म बदलावों या क्रमिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहने के बजाय, मंत्री TikTok, Instagram और X जैसी प्रमुख सेवाओं तक पहुंच पर सीधे उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह कदम यूके को बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर ऑस्ट्रेलिया के हालिया देशव्यापी प्रतिबंधों के अधिक करीब लाएगा, और कुछ क्षेत्रों में उससे भी आगे जाएगा।
नीति क्या करेगी
प्रदान की गई रिपोर्टिंग के आधार पर, मुख्य उपाय 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का उपयोग करने से रोकेगा। सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि यूके का प्रतिबंध संभवतः उन सेवाओं की समान श्रेणी पर लागू होगा, जिन पर ऑस्ट्रेलिया में प्रतिबंध लगाया गया है, जहां बड़े सोशल और वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्मों पर यह रोक लागू की गई थी।
यूके की योजना यहीं नहीं रुकेगी। मुख्य सोशल मीडिया प्रतिबंध के बाहर के उत्पाद, जिनमें गेमिंग ऐप्स भी शामिल हैं, पर जोखिम कम करने के लिए कड़े नियम लागू होंगे, ताकि अजनबियों से संपर्क का खतरा घटे। स्रोत पाठ में बताए गए विशिष्ट बदलावों में से एक यह है कि प्राथमिक प्रतिबंध के दायरे में न आने वाले ऐप्स पर छोटे उपयोगकर्ताओं के लिए stranger-chat सुविधा हटाई जाएगी।
सरकार 18 साल तक के बड़े किशोरों के लिए भी नियमों पर विचार कर रही है। ये उपाय बाध्यकारी उपयोग के पैटर्न को लक्षित करेंगे, जिनमें देर रात “scrolling” को रोकने के लिए बनाई गई सीमाएं शामिल हैं। इसके अलावा, 18 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को रोमांटिक या यौन AI chatbots तक पहुंच से रोका जाएगा, जिससे ऑनलाइन सुरक्षा की परिभाषा व्यापक हो रही है और उसमें पारंपरिक सोशल फीड के साथ-साथ सिंथेटिक और संवादात्मक प्रणालियां भी शामिल हो रही हैं।
सरकार अभी क्यों कदम उठा रही है
स्रोत रिपोर्टिंग इस नीति को मंत्रियों पर पड़े उस निरंतर दबाव की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें addictive content, algorithmic recommendation loops, और ऑनलाइन असुरक्षित संपर्कों के प्रभावों से निपटने की मांग की गई थी। किशोरों को हानिकारक सामग्री और अजनबियों के साथ बातचीत से बचाना इस सख्त रुख के प्रमुख कारण बताए गए।
राजनीतिक रूप से, यह कदम इस बढ़ते दबाव को भी दर्शाता है कि सरकारें दिखाएं कि बच्चों की ऑनलाइन-सुरक्षा के नियम सिर्फ सिद्धांत में नहीं, व्यवहार में भी लागू किए जा सकते हैं। यूके पहले से यह बहस कर रहा है कि उपयोगकर्ता के कल्याण के लिए प्लेटफॉर्मों को कितनी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, खासकर तब जब उत्पाद डिज़ाइन लंबे समय तक उपयोग को प्रोत्साहित करता हो। केवल पहुंच ही नहीं, बल्कि endless scrolling और direct messaging जैसी डिज़ाइन सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करके, नया पैकेज व्यापक नियामकीय महत्वाकांक्षा का संकेत देता है।
यह प्रस्ताव ऐसे वैश्विक संदर्भ में सामने आ रहा है, जहां नीति-निर्माता नाबालिगों के लिए सख्त डिजिटल-आयु सीमाएं आजमाने को अधिक इच्छुक हैं। ऑस्ट्रेलिया का 2025 सोशल मीडिया प्रतिबंध एक हाई-प्रोफाइल मिसाल बना। अब यूके उस मॉडल को अपनाने के साथ-साथ उसे अन्य ऐप श्रेणियों और AI-संचालित सेवाओं तक विस्तारित करने की तैयारी में दिख रहा है।

कार्यान्वयन को लेकर सवाल बने हुए हैं
दिशा अब अधिक स्पष्ट होने के बावजूद, प्रदान की गई रिपोर्टिंग में कई संचालन संबंधी बड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं। प्रमुख प्लेटफॉर्मों पर किसी भी तरह के 16-से-नीचे प्रतिबंध के लिए भरोसेमंद आयु-प्रमाणन की जरूरत होगी, और इससे तुरंत सत्यापन विधियों, गोपनीयता, अनुपालन लागत और प्रवर्तन जैसे सवाल उठते हैं।
प्लेटफॉर्मों को ऐसे मिश्रित-उपयोग उत्पादों का वर्गीकरण भी तय करना होगा, जिनमें messaging, video, gaming और creator tools सब शामिल हों। स्रोत पाठ के अनुसार गेमिंग ऐप्स शायद पूर्ण प्रतिबंध से बच जाएं, लेकिन छोटे उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ संचार सुविधाएं खो सकते हैं। फिर भी, सोशल प्लेटफॉर्म और गेमिंग प्लेटफॉर्म के बीच रेखा तेजी से धुंधली हो रही है। इसका मतलब है कि कार्यान्वयन का विवरण, सुर्खी वाली नीति जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है।
एक और खुला मुद्दा यह है कि 16 से 17 साल के उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध व्यवहार में कैसे लागू होंगे। देर रात scrolling पर रोक नीति-लक्ष्य के रूप में सरल लगती है, लेकिन इसका अर्थ device-level controls, account-based usage rules, या platform-specific curfews में से किसी एक या अधिक का इस्तेमाल हो सकता है। हर विकल्प अलग तकनीकी बोझ और अलग राजनीतिक आपत्तियां लाएगा।
युवा ऑनलाइन सुरक्षा की व्यापक पुनर्परिभाषा
AI chatbot प्रतिबंधों को शामिल किया जाना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह संकेत देता है कि सरकार अब ऑनलाइन सुरक्षा को केवल पारंपरिक सोशल मीडिया फीड तक सीमित समस्या नहीं मान रही। इसके बजाय, वह recommendation engines, multiplayer chat, या synthetic companions के जरिए दिए जाने वाले डिजिटल अनुभवों को व्यवहारिक और भावनात्मक जोखिम के आधार पर विनियमित करना शुरू कर रही है।
इससे नीति का दायरा काफी बढ़ जाता है। जो कानून शुरू में सोशल मीडिया को केंद्र में रखकर बनाया गया था, वह मनोरंजन, संचार और AI उत्पादों में youth access के डिज़ाइन को प्रभावित कर सकता है। डेवलपर्स और प्लेटफॉर्मों के लिए इसका संभावित परिणाम एक अधिक fragmented youth internet होगा, जहां उम्र-आधारित स्तर तय करेंगे कि कौन-सी सुविधाएं कब और किसके साथ इस्तेमाल की जा सकती हैं।
कई दिशाओं से आलोचना की संभावना है। नागरिक-स्वतंत्रता समूह और कुछ सांसद यह सवाल उठा सकते हैं कि क्या प्रतिबंध अनुपातिक हैं या लागू किए जा सकते हैं। प्लेटफॉर्म तकनीकी व्यवहार्यता और कानूनी जोखिम की जांच करेंगे। लेकिन स्रोत रिपोर्टिंग स्पष्ट करती है कि सरकार ने तय कर लिया है कि मौजूदा स्थिति अब स्वीकार्य नहीं है।
यदि इसे बताए गए रूप में लागू किया गया, तो यूके content moderation बहसों से आगे बढ़कर नाबालिगों के लिए सीधे product regulation की ओर जाएगा। यह इसे सिर्फ एक सोशल मीडिया कहानी से अधिक बना देगा। यह इस बात में एक संरचनात्मक बदलाव होगा कि एक बड़ा बाजार डिजिटल प्लेटफॉर्मों की बच्चों और किशोरों के प्रति जिम्मेदारियों को कैसे परिभाषित करता है।
यह लेख The Guardian की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on theguardian.com



