गहरे, मलबे से भरपूर हिमखंडों ने वैज्ञानिकों को एक अप्रत्याशित खोज तक पहुंचाया

फ्राम जलडमरूमध्य में असामान्य आर्कटिक हिमखंडों का अध्ययन कर रहे शोधकर्ताओं को प्रमाण मिले हैं कि पिघलते हिमखंड समुद्र तल पर चट्टानें और खनिज मलबा गिरा रहे हैं, जिससे नए कठोर सतह क्षेत्र बन रहे हैं जो हाल ही में पहचाने गए समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों का समर्थन करते हैं।

सप्लाई किए गए स्रोत पाठ में जर्मनी के अल्फ्रेड वेगेनर संस्थान और वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन से जुड़ा बताया गया यह कार्य, प्रभावशाली, मलबा-भरे हिमखंडों के प्रकट होने को समुद्र की सतह के नीचे होने वाले पारिस्थितिक परिणामों की एक श्रृंखला से जोड़ता है। इन परिणामों में सॉफ्ट कोरल, सी स्टार्स, एनेमोन, स्पंज, ब्रायोजोआ और अन्य समुद्री तल जीवन के फलते-फूलते आवास शामिल हैं।

यह खोज 2021 के एक ध्रुवीय अभियान के दौरान की गई एक观察 से शुरू हुई, जब फ्राम जलडमरूमध्य के कुछ हिमखंड बड़ी मात्रा में मलबा लिए होने के कारण असामान्य रूप से गहरे दिख रहे थे। यह दृश्य विचित्रता एक बड़े प्रक्रिया-तंत्र का संकेत निकली, जो ग्लेशियरों, बर्फ के परिवहन, समुद्री तल की भूविज्ञान और समुद्री जैव-विविधता को जोड़ती है।

“ड्रॉपस्टोन” आवास कैसे बनाते हैं

जैसे-जैसे हिमखंड पिघलते हैं, वे भीतर फंसे चट्टानी टुकड़े और खनिज सामग्री छोड़ते हैं, जिन्हें ड्रॉपस्टोन कहा जाता है। ये पत्थर समुद्र तल पर बैठ जाते हैं और ऐसे स्थानों में कठोर आधार प्रदान करते हैं, जहाँ अन्यथा स्थिर जीवों के उपनिवेश बनने के लिए उपयुक्त सतहें नहीं होतीं।

सप्लाई किए गए पाठ के अनुसार, अल्फ्रेड वेगेनर संस्थान के हौसगार्टन वेधशाला नेटवर्क और उपग्रह चित्रों का उपयोग करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले केवल अलग-थलग पत्थरों से चिह्नित क्षेत्र अब बड़े जमावों से भर गए हैं, जो अक्सर छोटे समूहों में होते हैं। हर नया पत्थर-समूह गहरे समुद्र के जीवों के लिए एक बसावट अवसर बनाता है, जो कठोर सतहों पर टिकने के लिए अनुकूलित होते हैं।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आवास की संरचना जैव-विविधता को आकार देती है। नरम तल वाले वातावरणों में कठोर आधार के आने से यह बदल सकता है कि कौन-सी प्रजातियाँ स्थापित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका परिणाम आर्कटिक समुद्री तल पर स्थानीय जैव-विविधता में वृद्धि के रूप में निकलता है।

Marine biologist Kirstin Meyer-Kaiser and her colleagues scaled this large iceberg covered in rocky debris back in June 2021 to collect samples for the new study.
समुद्री जीवविज्ञानी किर्स्टिन मेयर-केसर और उनके सहयोगियों ने जून 2021 में चट्टानी मलबे से ढके इस बड़े हिमखंड पर चढ़कर नए अध्ययन के लिए नमूने एकत्र किए। श्रेय: Mario Hoppman / Woods Hole Oceanographic Institution

जलवायु संकेत के साथ पारिस्थितिक दुष्प्रभाव

अध्ययन इस कहानी को सरल पर्यावरणीय अच्छी खबर के रूप में नहीं पेश करता। व्यापक संदर्भ गर्म होता आर्कटिक और पिघलते ग्लेशियरों से टूटकर बनने वाले बढ़ते हिमखंडों का है। इस अर्थ में, नए आवास क्रायोस्फेरिक व्यवधान का एक दुष्परिणाम हैं, उसका प्रतिकार नहीं।

फिर भी, यह खोज वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक कम स्पष्ट मार्ग दिखाती है जिसके माध्यम से जलवायु-संबंधित परिवर्तन पारिस्थितिक तंत्रों को बदल सकता है। ग्लेशियर केवल समुद्र-स्तर या समुद्री तापमान को प्रभावित नहीं करते। हिमखंड टूटने और मलबा ले जाने की प्रक्रिया के माध्यम से वे उस भौतिक ढाँचे को पुनर्गठित कर सकते हैं जिस पर समुद्री जीवन विकसित होता है।

स्रोत पाठ कहता है कि उपग्रह पुनर्निर्माणों ने मलबे से भरपूर कई हिमखंडों को उत्तर-पूर्वी ग्रीनलैंड और रूसी उच्च आर्कटिक के कुछ हिस्सों के ग्लेशियरों तक वापस ट्रेस किया। शोधकर्ता हिमखंड निर्माण में वृद्धि को हर स्रोत क्षेत्र में सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के मामले में अधिक सावधान थे, क्योंकि रूसी ग्लेशियरों पर उपग्रह कवरेज अधूरी थी।

यह सावधानी महत्वपूर्ण है। पर्यावरणीय तंत्र तो अच्छे से समर्थित दिखता है, लेकिन हिमखंड उत्पादन में बदलाव को जलवायु परिवर्तन से जोड़ना अभी भी अधिक सीमित है।

पारिस्थितिकी से परे यह खोज क्यों उपयोगी है

यह शोध नौवहन के लिए भी व्यावहारिक हो सकता है। स्रोत पाठ में उल्लेख है कि बढ़ती संख्या में हिमखंड और उनसे निकले ड्रॉपस्टोन इन जलक्षेत्रों में चलने वाले जहाजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, खासकर उथले क्षेत्रों में जहां अनमैप्ड मलबा खतरा पैदा करता है।

इससे समुद्री जीवविज्ञान और नौवहन संचालन के बीच एक असामान्य ओवरलैप बनता है। हिमखंड कहाँ जाते हैं, कहाँ पिघलते हैं, और कहाँ अपना चट्टानी भार छोड़ते हैं, इसे बेहतर समझना पारिस्थितिक मानचित्रण और समुद्री सुरक्षा योजना दोनों में मदद कर सकता है।

आर्कटिक में मानव गतिविधि बढ़ने के साथ, इस तरह का दोहरे उपयोग वाला ज्ञान और भी मूल्यवान हो जाता है। शिपिंग, अनुसंधान, और संसाधन-संबंधित यातायात सभी सटीक खतरा-जागरूकता पर निर्भर करते हैं, और पानी के नीचे के मलबे के क्षेत्र सतह से हमेशा दिखाई नहीं देते।

Deep Sea New Arctic Ecosystem
श्रेय: Alfred Wegener Institute

ग्रह-स्तरीय आपसी जुड़ाव का उदाहरण

इस खोज का सबसे आकर्षक पहलू इसका जुड़ाव का पैमाना है। भूमि से घिसकर निकली सामग्री ग्लेशियल बर्फ में फँसती है, हिमखंडों के साथ समुद्र के पार ले जाई जाती है, समुद्र तल पर गिरती है, और फिर समुद्री जीवों द्वारा नई बस्तियों की नींव के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यह प्रक्रिया स्थलीय भूविज्ञान, क्रायोस्फियर की गतिशीलता, समुद्री गति और गहरे समुद्री पारिस्थितिकी को एक ही श्रृंखला में जोड़ती है।

यही कारण है कि स्रोत पाठ में उद्धृत बाहरी विशेषज्ञों ने परिणामों को पृथ्वी प्रणालियों के परस्पर जुड़े होने का एक चौंकाने वाला उदाहरण बताया। खोज केवल यह नहीं है कि चट्टानों पर नए जानवर मिले। बात यह है कि वे चट्टानें स्वयं एक जलवायु-संवेदनशील परिवहन तंत्र से आईं, जो समय के साथ समुद्री तल के आवासों को नया रूप दे सकता है।

आर्कटिक विज्ञान के लिए यह पर्यावरणीय परिवर्तन की कहानी में एक महत्वपूर्ण जोड़ है। यह सुझाव देता है कि गर्म होती दुनिया में होने वाले बदलाव केवल नुकसान और जोखिम ही नहीं, बल्कि नए आवास पैटर्न भी पैदा कर सकते हैं, जिनके दीर्घकालिक पारिस्थितिक परिणाम अभी अच्छी तरह समझे नहीं गए हैं।

यह शोध क्या जोड़ता है

इस शोध का मूल योगदान प्रेक्षणात्मक है: शोधकर्ताओं ने गहरे, मलबे से भरे हिमखंडों को समुद्र तल पर पत्थर जमावों और फिर उनसे जुड़ी समुद्री जीवन की फलती-फूलती बस्तियों से जोड़ा। इससे वह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हो जाती है।

बड़ा निष्कर्ष यह है कि जलवायु परिवर्तन एकल, अलग-थलग परिणामों के माध्यम से काम नहीं करता। यह परिवहन मार्गों, आधार उपलब्धता, प्रजाति-संयोजन और नौवहन स्थितियों को एक साथ बदल देता है। आर्कटिक अक्सर इन अंतर्संबंधों को पहले उजागर करता है, क्योंकि वहाँ के भौतिक बदलाव तेज़ और स्पष्ट रूप से हो रहे हैं।

इस मामले में, हिमखंड का एक अजीब रूप अधिक गहरी समझ तक ले गया: जैसे-जैसे ग्लेशियर टूटते और पिघलते हैं, वे केवल तटरेखाओं और महासागरों को ही नहीं बदल रहे। वे पत्थर-दर-पत्थर समुद्र तल पर पूरी तरह नए आवास बनाने में भी मदद कर रहे हैं।

यह लेख Gizmodo की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on gizmodo.com