एक बड़ी विरासत के भीतर परिवहन की एक निजी कहानी
87 वर्ष की आयु में टेड टर्नर के निधन ने एक बड़े सार्वजनिक जीवन पर फिर से विचार करने को प्रेरित किया है, जो मीडिया, खेल, भूमि-स्वामित्व, परोपकार और पर्यावरणीय वकालत तक फैला हुआ था। उस विरासत का एक छोटा लेकिन अर्थपूर्ण पहलू यह है कि वे किस तरह की कार चलाना चुनते थे। उपलब्ध स्रोत-पाठ के अनुसार, टर्नर हाल के वर्षों में टोयोटा प्रियस चलाने के लिए जाने जाते थे, और ईंधन-किफायती कारों के प्रति उनकी पसंद दशकों पुरानी थी।
यह विवरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टर्नर की सार्वजनिक पहचान केवल पैमाने और महत्वाकांक्षा पर नहीं, बल्कि ऐसे प्रतीकात्मक विकल्पों को सामने रखने की इच्छा पर भी आधारित थी। उन्होंने CNN की स्थापना की, बड़े मीडिया संस्थान खड़े किए, और अपार संपत्ति अर्जित की, लेकिन स्रोत में वर्णित उनकी कारों का इतिहास यह संकेत देता है कि उन्होंने निजी परिवहन को मुख्यतः प्रदर्शन का मंच नहीं माना।
तेल प्रतिबंध के बाद कैडिलैक से कोरोला तक
स्रोत के अनुसार, टर्नर की अपनी वेबसाइट के मुताबिक, 1973 में तेल प्रतिबंध के बाद उन्होंने अपनी कैडिलैक बदलकर टोयोटा कोरोला ले ली। यह एक प्रभावशाली छवि है, क्योंकि यह उस सामान्य धारणा के उलट जाती है कि उस दौर का कोई तेज़ी से उभरता मीडिया दिग्गज सफलता का संकेत कैसे देता। खासकर 1970 और 1980 के दशक में, बड़ी अमेरिकी लग्ज़री कारें और प्रतिष्ठा-वाहन संपन्नता के आम प्रतीक थे। यहाँ प्रस्तुत विवरण के अनुसार, टर्नर की पसंद उस दिशा के उलट थी।
यह उस मूल्यों-समूह से भी गहराई से मेल खाती है, जिसके लिए वे आगे चलकर व्यापक रूप से जाने गए। पर्यावरणवाद टर्नर के सार्वजनिक जीवन का कोई अतिरिक्त तत्व नहीं था; यह उसकी बार-बार लौटने वाली थीमों में से एक था। स्रोत-पाठ इसे उनकी सबसे बड़ी रुचियों में से एक बताता है, और उनकी ड्राइविंग-इतिहास को उस प्रतिबद्धता की एक अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है।
तेल प्रतिबंध के जवाब में छोटी और अधिक ईंधन-कुशल कार चुनना अपने-आप में व्यावहारिक था, लेकिन पीछे मुड़कर देखें तो यह एक लंबे समय तक चलने वाले पैटर्न का शुरुआती संकेत भी लगता है। टर्नर ने ईंधन-किफायत को अस्थायी समझौता नहीं, बल्कि एक स्थायी सिद्धांत की तरह अपनाया।
क्रेसिडा वाला विवरण व्यक्तित्व जोड़ता है
दिए गए सामग्री में एक यादगार विवरण यह है कि टर्नर 1988 में टोयोटा क्रेसिडा चलाते थे, जैसा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया। यह चुनाव इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि क्रेसिडा कोई साधारण कम-खर्चीला वाहन नहीं था। वह एक रियर-व्हील-ड्राइव लग्ज़री सेडान थी, जिसके प्रशंसक भी थे, लेकिन फिर भी यह उन कई अरबपतियों की कारों की तुलना में संयम की व्यापक परंपरा में फिट बैठती थी, जो अपने वाहनों के ज़रिए अपनी छवि बनाते हैं।
स्रोत इसे एक ऐसी विडंबना के रूप में रखता है जिसे ऑटोमोटिव उत्साही सराहेंगे: टर्नर ने ऐसी मॉडल चलाई, जिसे बाद में कार-प्रेमियों के बीच एक विशिष्ट प्रतिष्ठा मिली, जबकि उनकी व्यापक परिवहन-पहचान मितव्ययिता और दक्षता पर टिकी रही। यही तनाव इस कहानी को अधिक मानवीय बनाता है। उन्हें ऐसा व्यक्ति नहीं बताया गया जो कारों को पूरी तरह नकारता हो या किसी एक सख्त ढांचे को अपनाता हो। उनके पास फेरारी सहित अलग-अलग वाहन थे, लेकिन प्रमुख धागा भोग-विलास नहीं, बल्कि संयम था।
एक अरबपति, जिसने अपनी इच्छा से प्रियस चलाई
दिए गए स्रोत के अनुसार, 2010 में कैलिफ़ोर्निया में टोयोटा द्वारा आयोजित 20वें एनवायरनमेंटल मीडिया अवॉर्ड्स में टर्नर को सम्मानित किया गया था, और उसी साल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने खुले तौर पर प्रियस रखने की बात की। इस प्रसंग का महत्व कार के मॉडल में नहीं, बल्कि इस बात में है कि टर्नर इसे इस संदेश के रूप में इस्तेमाल करते दिखे कि संपन्नता किसी व्यक्ति को सामान्य व्यावहारिक विकल्पों से स्वचालित रूप से अलग नहीं कर देती।
सार्वजनिक जीवन में अक्सर वकालत और आदत के बीच दूरी होती है। टर्नर की बताई गई टिप्पणियाँ और वाहन-पसंदें संकेत देती हैं कि वे इन दोनों को अधिक करीब लाना चाहते थे। एक अरबपति के रूप में प्रियस चलाना अपने-आप में कोई महान कार्य नहीं है, लेकिन यह उच्च-खपत जीवनशैली को अपरिहार्य या वांछनीय मानने से इनकार का संकेत देता है, सिर्फ इसलिए कि वह उपलब्ध है।
शायद यही कारण है कि उनके निधन के बाद यह परिवहन-संबंधी विवरण प्रभाव छोड़ता है। यह इस बात का ठोस उदाहरण देता है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के मूल्य केवल भाषणों, दानों या संस्थानों में ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदतों में भी दिख सकते हैं।
यह कहानी क्यों बनी रहती है
टर्नर की विरासत निश्चित रूप से उन्होंने क्या चलाया, इससे कहीं बड़ी है। स्रोत-पाठ में उनकी उपलब्धियों की एक प्रभावशाली सूची दी गई है, जिसमें इतिहास के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्यों में से एक का निर्माण, कार्टून नेटवर्क की स्थापना, एक समय अटलांटा ब्रेव्स का स्वामित्व और प्रबंधन, तथा अमेरिका के सबसे बड़े निजी भू-स्वामियों में से एक बनना शामिल है। उस संदर्भ में कारों की कहानी छोटी है।
लेकिन यही छोटी-सी बात इसे असरदार बनाती है। बड़े सार्वजनिक उत्तराधिकार अक्सर अत्यधिक दिखाई देने वाले कार्यों से बनते हैं। छोटी आदतें यह बताती हैं कि क्या वे सार्वजनिक रुख निजी स्तर पर भी मूल प्रवृत्ति थे। कैडिलैक से कोरोला तक उनकी बताई गई यात्रा, ईंधन-किफायती टोयोटाओं के साथ उनके वर्षों, और बाद में प्रियस का स्वामित्व, इन सब से एक ही निष्कर्ष निकलता है: उन्होंने मितव्ययिता और पर्यावरण-संबंधी चिंता को निजी व्यवहार के रूप में अपनाया, केवल सार्वजनिक बयानबाज़ी के रूप में नहीं।
परिवहन संस्कृति के लिए, यह कहानी सेलिब्रिटी-ट्रिविया से आगे की प्रासंगिकता रखती है। कारें उन सबसे तात्कालिक उपभोक्ता-चयनों में से हैं, जिनके ज़रिए लोग अपनी हैसियत, प्राथमिकताएँ और पहचान प्रकट करते हैं। टर्नर की पसंदें इस मानक का एक असामान्य उलट प्रस्तुत करती हैं। उनके पास कारों को संपन्नता के प्रदर्शनात्मक प्रतीक बनाने के पूरे साधन थे, फिर भी अधिकांश समय उन्होंने उन्हें मितव्ययिता, संयम और अपने पर्यावरणीय दृष्टिकोण के अनुरूपता व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया।
यह एक छोटा, लेकिन स्थायी सबक है। टर्नर को याद करते हुए सुर्खियाँ स्वाभाविक रूप से उन बड़ी उपलब्धियों पर ध्यान देंगी जिन्हें उन्होंने बनाया। उनकी रोज़ाना चलाई जाने वाली कारों का इतिहास याद दिलाता है कि निजी नैतिकता भी उन साधारण मशीनों में दिखाई दे सकती है, जिनके साथ लोग जीना चुनते हैं।
यह लेख Jalopnik की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
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