लो-प्रोफाइल टायर वास्तव में क्या बदलते हैं
लो-प्रोफाइल टायर अक्सर स्पोर्टी हैंडलिंग और बड़े पहियों से जोड़े जाते हैं, लेकिन खराब सड़कों पर वे एक व्यावहारिक समझौता भी लाते हैं। दिए गए Jalopnik रिपोर्ट के अनुसार, 50 या उससे कम aspect ratio वाले टायर आम तौर पर लो-प्रोफाइल माने जाते हैं। 225/40 R18 जैसे टायर साइज़ में “40” का मतलब है कि साइडवॉल की ऊंचाई टायर की चौड़ाई का 40 प्रतिशत है। दृश्य रूप से, इससे वह पतला साइडवॉल बनता है जो परफॉर्मेंस-केंद्रित कारों में आम दिखता है।
मुख्य सवाल यह है कि क्या लो-प्रोफाइल टायर आसानी से पंक्चर हो जाते हैं। जवाब साधारण हाँ या नहीं से अधिक जटिल है। रिपोर्ट कहती है कि छोटे साइडवॉल की वजह से ये तेज़ उभारों और गड्ढों से नुकसान के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। गंभीर झटका तुरंत हवा निकलने का कारण बन सकता है या टायर अपनी सीट से उतर सकता है। इससे पहिये को भी नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
इसका मतलब यह नहीं कि लो-प्रोफाइल टायर हर स्थिति में अपने आप ज्यादा बार पंक्चर हो जाते हैं। सड़क की स्थिति टायर प्रोफाइल से अधिक भूमिका निभाती है। चिकनी सड़क पर इस्तेमाल किया गया लो-प्रोफाइल टायर बिना असामान्य परेशानी के काम कर सकता है, जबकि टूटी-फूटी और गड्ढों वाली सड़कों पर वही टायर अधिक जोखिम में रहता है।
साइडवॉल की ऊंचाई क्यों मायने रखती है
साइडवॉल वह रबर हिस्सा है जो पहिये के रिम और ट्रेड के बीच होता है। ऊंचा साइडवॉल गड्ढों, टूटी सड़क और तेज सड़क किनारों से आने वाले झटकों को सोखने के लिए अधिक सामग्री देता है। कम साइडवॉल टायर को विकृत होने के लिए कम जगह देता है, इससे पहले कि बल रिम और टायर संरचना तक पहुंचे।
यही मूल कारण है कि लो-प्रोफाइल टायर कुछ प्रकार के नुकसान के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। 60-सीरीज़ साइडवॉल वाला टायर 40-सीरीज़ टायर की तुलना में गड्ढे के झटके को बेहतर ढंग से सह सकता है। कम साइडवॉल होने पर झटका फैलने के लिए कम दूरी मिलती है। गति, सड़क के आकार, पहिये के आकार और टायर की स्थिति के आधार पर परिणाम ब्लोआउट, बीड के बैठने से उतरने, या पहिये के नुकसान के रूप में हो सकता है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि लो-प्रोफाइल टायर सिर्फ़ कमजोर नहीं होते। उनके छोटे साइडवॉल साइडवॉल फ्लेक्स को कम करते हैं, जिससे सड़क का एहसास, फुर्ती और स्थिरता बेहतर हो सकती है, खासकर मोड़ों में। बड़ा संपर्क क्षेत्र पकड़ को भी बेहतर कर सकता है, जिसका असर ड्राइवरों को त्वरण और ब्रेकिंग में महसूस हो सकता है।



