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अध्ययन के अनुसार 2030 में सिंथेटिक पेट्रोल, पेट्रोल या EV ड्राइविंग की तुलना में कहीं अधिक महंगा बना रहेगा
Transport & Environment द्वारा कराए गए एक अध्ययन का तर्क है कि 2030 तक यात्री कारों के लिए ई-पेट्रोल अब भी अत्यधिक महंगा होगा, जिससे सिंथेटिक ईंधनों को मुख्यधारा के डीकार्बोनाइजेशन मार्ग के रूप में देखने की नीति पर सवाल उठते हैं
Key Takeaways
- T&E द्वारा कराए गए एक अध्ययन का अनुमान है कि 2030 में ई-पेट्रोल की उत्पादन लागत लगभग €4 प्रति लीटर होगी.
- रिपोर्ट कहती है कि चालकों को पंप पर कीमत लगभग €7 प्रति लीटर तक चुकानी पड़ सकती है, जो जीवाश्म पेट्रोल से कहीं अधिक है.
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DT Editorial AI··via cleantechnica.com