तारा-निर्माण के लंबे सवाल पर नए प्रमाण
लगभग आधे सूर्य-सदृश तारे अकेले नहीं होते। वे द्वितारा या उससे भी अधिक जटिल बहु-तारा प्रणालियों में मौजूद रहते हैं, जिससे हमारा सौरमंडल, लोकप्रिय कल्पना की तुलना में, कम सामान्य लगता है। खगोलशास्त्र के स्थायी सवालों में से एक यह है कि ये निकटवर्ती तारकीय साझेदारियाँ आखिर बनती कैसे हैं। उपलब्ध स्रोत पाठ में वर्णित एक नई प्रीप्रिंट के अनुसार, प्रमुख तंत्र संभवतः डिस्क विखंडन हो सकता है।
स्रोत पाठ के अनुसार, इलिनोइस विश्वविद्यालय के स्नातक छात्र रयान स्पोंज़िल्ली के नेतृत्व वाले इस अध्ययन ने 51 नवजात द्वितारा प्रणालियों की जांच की और यह पाया कि यह व्याख्या, turbulent fragmentation followed by inward migration नामक एक प्रतिस्पर्धी मॉडल की तुलना में अधिक मजबूत है। यदि यह निष्कर्ष कायम रहता है, तो यह इस क्षेत्र की एक प्रमुख बहस को और स्पष्ट करेगा कि तारे और उनके साथी तारकीय नर्सरियों से कैसे निकलते हैं।
दो प्रतिस्पर्धी निर्माण कहानियाँ
दोनों सिद्धांत क्रम और अपेक्षित ज्यामिति, दोनों में अलग हैं। डिस्क-विखंडन परिदृश्य में, नवजात तारे के चारों ओर गैस और धूल की एक बड़ी एकल डिस्क अस्थिर हो जाती है और टूट जाती है, और अंततः एक अन्य निकटवर्ती तारे में परिवर्तित हो जाती है। चूंकि दोनों तारे एक ही घूर्णनशील संरचना से निकलते हैं, इसलिए उनके स्पिन संरेखित होने चाहिए।
वैकल्पिक तस्वीर और अधिक अव्यवस्थित शुरुआत से बनती है। turbulent fragmentation followed by inward migration में, बादल में अस्थिरता दो दूर-दूर फैले गुच्छों को बनाती है, जिनमें से प्रत्येक एक तारा बनाता है। फिर गुरुत्वीय अंतःक्रियाएँ समय के साथ उन तारों को अंदर की ओर खींचती हैं, जब तक कि वे एक निकट द्वितारा जोड़ी न बन जाएँ। क्योंकि वे अलग और अव्यवस्थित परिस्थितियों में बने थे, उनके स्पिन और कक्षीय अभिविन्यास किसी सुसंगत तरीके से मेल नहीं खाने चाहिए।
संरेखण की यह भिन्न भविष्यवाणी खगोलविदों को मॉडल परखने का तरीका देती है। यदि युवा द्वितारे आमतौर पर समकालिक अभिविन्यास दिखाते हैं, तो डिस्क विखंडन को समर्थन मिलता है। यदि उनकी धुरी अनियमित दिखती हैं, तो turbulent परिदृश्य अधिक संभावित हो जाता है।
टीम ने इस विचार को कैसे परखा
बहुत युवा तारों के घूर्णन को सीधे मापना कठिन होता है क्योंकि वे अभी भी गैस और धूल में लिपटे रहते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके बजाय एक प्रॉक्सी का उपयोग किया: तारों के ध्रुवों से निकलने वाली गैस की धाराएँ। उपलब्ध स्रोत पाठ के अनुसार, टीम ने Atacama Large Millimeter Array के डेटा पर भरोसा किया, जिसने इन आउटफ्लो में carbon monoxide का पता लगाया।
ये जेट प्रणाली के कोणीय संवेग के लिए एक उपयोगी प्रतिनिधि हैं। यदि किसी द्वितारा में दोनों तारों से निकलने वाले आउटफ्लो समानांतर हैं और साझा घूर्णन के अनुरूप हैं, तो यह संकेत देता है कि जोड़ी एक ही घूमती हुई डिस्क से बनी। यदि जेट अलग-अलग दिशाओं में हैं, तो प्रणाली अलग, turbulent मूलों का उत्पाद अधिक लगती है।
रिपोर्ट किया गया परिणाम स्पष्ट रूप से पहली व्याख्या की ओर झुकता है। शोधकर्ताओं ने 51 द्वितारा जोड़ों में 42 आउटफ्लो पहचाने, जो 38 प्रणालियों में थे। सांख्यिकीय सिमुलेशन के बाद, स्रोत पाठ कहता है, डेटा ने डिस्क विखंडन को दृढ़ता से समर्थन दिया।
यह क्यों मायने रखता है
यह प्रश्न कोई संकीर्ण तकनीकी विवाद नहीं है। द्वितारा प्रणालियाँ कैसे बनती हैं, इसका असर इस बात पर पड़ता है कि खगोलविद सामान्यतः तारा-निर्माण को कैसे समझते हैं, जिसमें डिस्क का विकास, कोणीय संवेग का संचरण, और वे वातावरण शामिल हैं जिनमें बाद में ग्रह बनते हैं। यदि निकट द्वितारे अक्सर डिस्क विखंडन से बनते हैं, तो विशाल circumstellar disks केवल एक केंद्रीय तारे को भोजन नहीं दे रहे होते। उचित परिस्थितियों में, वे सीधे तारकीय साथी भी बना सकते हैं।
इसके परिणाम यह तय करते हैं कि कुछ संरचनाएँ कितनी सामान्य होनी चाहिए, और किस प्रकार की डिस्क ग्रह बनाने के लिए पर्याप्त समय तक बची रह सकती है। एक निकट साथी आसपास की सामग्री को बहुत बदल सकता है, जिससे ग्रह कहाँ बन सकते हैं और क्या स्थिर ग्रह प्रणालियाँ बनी रह सकती हैं, यह प्रभावित होता है। इस अर्थ में, द्वितारा निर्माण को समझना यह समझने का हिस्सा है कि हमारा अपना सौर इतिहास कितना सामान्य या असामान्य हो सकता है।
यह परिणाम आधुनिक खगोलशास्त्र की एक व्यापक प्रवृत्ति को भी मजबूत करता है: ज्यामिति मायने रखती है। कई खगोलीय बहसें जो कभी अमूर्त लगती थीं, अब अभिविन्यास, गति, और संरचना के सावधानीपूर्वक माप से परखी जा रही हैं। यहाँ alignment सिर्फ वर्णनात्मक विशेषता नहीं है। यह ऐसा प्रमाण है जो प्रतिस्पर्धी भौतिक इतिहासों के बीच अंतर कर सकता है।
सावधानी और महत्व
उभरते खगोलशास्त्रीय परिणामों की तरह, कुछ सावधानी उचित है। यह पेपर preprint में उपलब्ध है, यानी इसने अभी peer review पूरी नहीं की है। स्रोत सामग्री यह नहीं कहती कि सवाल पूरी तरह सुलझ गया है, केवल इतना बताती है कि इस नमूने के प्रमाण एक सिद्धांत को दूसरे की तुलना में काफी मजबूती से समर्थन करते हैं।
फिर भी, अध्ययन इसलिए खास है क्योंकि यह लंबे समय से चल रही बहस को बहुत युवा प्रणालियों के अवलोकनीय परिणामों के आधार पर रखता है। परिपक्व द्वितारों से केवल निर्माण-पथों का अनुमान लगाने के बजाय, जिनका शुरुआती इतिहास पुनर्निर्मित करना कठिन होता है, टीम ने प्रक्रिया के करीब मौजूद नवजात प्रणालियों को देखा। यही कारण है कि यह परिणाम प्रभावशाली है।
यह सूर्य के बारे में क्या कहता है
यह अध्ययन सौरमंडल के इतिहास को भी और स्पष्ट करता है। यदि सूर्य-सदृश आधे तारे साथी के साथ मौजूद हैं और निकट द्वितारों के लिए डिस्क विखंडन एक सामान्य मार्ग है, तो सूर्य की अकेलापन वाली स्थिति और दिलचस्प हो जाती है, कम नहीं। अकेले तारे अपनी अलग व्याख्या मांग सकते हैं, या कम से कम अलग प्रारंभिक परिस्थितियाँ, ऐसे ब्रह्मांड में जहाँ तारकीय जन्म में साथ होना अक्सर शामिल होता है।
इससे सूर्य किसी दार्शनिक अर्थ में असाधारण नहीं हो जाता, लेकिन यह याद दिलाता है कि तारे को एक अकेली वस्तु मानने वाली मूल तस्वीर अधूरी है। बहुत-से मामलों में, तारे संबंध में पैदा होते दिखते हैं। यह प्रीप्रिंट इस दावे को मजबूत करता है कि ये संबंध अक्सर बाद में दूर-दूर से आए टुकड़ों के मिलने से नहीं, बल्कि एक अस्थिर डिस्क के दो भविष्य पैदा करने से शुरू होते हैं।
यदि आगे का अध्ययन इस निष्कर्ष की पुष्टि करता है, तो डिस्क विखंडन निकट द्वितारा निर्माण की व्याख्या के केंद्र के और करीब आ जाएगा। यह क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा, जहाँ तारकीय जीवन के सबसे शुरुआती क्षणों को पुनर्निर्मित करना सबसे कठिन है, और उसके बाद आने वाली हर चीज़ के लिए सबसे महत्वपूर्ण भी।
यह लेख Universe Today की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on universetoday.com





