NASA अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए अगला SpaceX Cargo Dragon मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। SpX-35 नामक इस उड़ान में ISS Roll Out Solar Arrays, या iROSAs, का अंतिम सेट ले जाने की उम्मीद है। यह हार्डवेयर कक्षा में स्थित प्रयोगशाला की विद्युत आपूर्ति बढ़ाने के लिए है, क्योंकि इसके मूल सौर पैनल अंतरिक्ष में दो दशक से अधिक समय बिताने के बाद पुराने होते जा रहे हैं।
यह आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के निरंतर आधुनिकीकरण में एक व्यावहारिक मील का पत्थर है। स्टेशन अब भी एक सक्रिय अनुसंधान केंद्र है, लेकिन इसकी ऊर्जा प्रणाली को वर्षों तक अंतरिक्ष के वातावरण में काम करना पड़ा है। नए पैनल मूल सौर पंखों को पूरी तरह बदलने के बजाय मौजूदा सौर पैनलों के ऊपर अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने के लिए बनाए गए हैं।
पुरानी होती प्रयोगशाला के लिए ऊर्जा उन्नयन
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अपने जीवन-समर्थन तंत्र, संचार, अनुसंधान उपकरणों, कंप्यूटरों, ताप-नियंत्रण हार्डवेयर और निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थायी मानव उपस्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक कई अन्य प्रणालियों को संचालित करने हेतु सौर ऊर्जा पर निर्भर है। इसके सौर पैनल सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदलते हैं, जबकि बैटरियां उन अवधियों के लिए ऊर्जा संग्रहित करती हैं जब स्टेशन पृथ्वी की छाया से गुजरता है।
मूल पैनल 20 से अधिक वर्षों से कक्षीय वातावरण के संपर्क में हैं। समय के साथ ऐसा संपर्क प्रदर्शन को कम कर सकता है। इसलिए नई सौर क्षमता जोड़ना केवल कार्गो पहुँचाने का काम नहीं, बल्कि एक बुनियादी ढाँचा परियोजना भी है। इससे स्टेशन के लिए उपलब्ध ऊर्जा मार्जिन बनाए रखने में मदद मिलती है और अंतरराष्ट्रीय दलों द्वारा की जाने वाली व्यापक गतिविधियों को समर्थन मिलता है।
स्टेशन पर छह iROSAs पहले ही लगाए जा चुके हैं। मिशन के पूर्वावलोकन के अनुसार, SpX-35 का पेलोड इस श्रृंखला का अंतिम सेट पहुँचाने वाला है, जिससे यह उन्नयन पूरा हो जाएगा। तैनाती के बाद ये पैनल मौजूदा सौर-पैनल प्रणाली की क्षमता बढ़ाएंगे और पुराने हार्डवेयर को हटाए बिना ISS के लिए उपलब्ध विद्युत आपूर्ति में वृद्धि करेंगे।

मौजूदा हार्डवेयर के ऊपर पैनल क्यों लगाए जाते हैं
ISS Roll Out Solar Arrays का डिजाइन कॉम्पैक्ट और लचीला है, जो उन्हें कार्गो अंतरिक्षयान में पहुँचाने और कक्षा में स्थापित करने के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका उद्देश्य स्टेशन की विद्युत संरचना को नए सिरे से बनाना नहीं है। इसके बजाय, उन्हें इस तरह लगाया जाता है कि नई बिजली-उत्पादन प्रणालियां मूल पैनलों के साथ मिलकर काम कर सकें।
यह तरीका दशकों से लगातार आबाद एक जटिल कक्षीय प्लेटफॉर्म को संचालित करने की वास्तविकता को दर्शाता है। स्टेशन की प्रमुख प्रणालियों को बदलना धरती पर उपकरणों की सर्विसिंग जैसा नहीं है। हार्डवेयर को लॉन्च करना, अंतरिक्ष यात्रियों या रोबोटिक प्रणालियों से स्थापित करना और आवश्यक संचालन बाधित किए बिना उसमें समाहित करना पड़ता है। मौजूदा ऊर्जा प्रणाली में अतिरिक्त क्षमता जोड़ना, बड़े व्यवधान वाले बदलावों को न्यूनतम रखते हुए उसकी उपयोगी क्षमता बढ़ाने का एक तरीका है।
यह उन्नयन यह भी दिखाता है कि स्टेशन के संचालन में कार्गो मिशन इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं। कार्गो उड़ानें केवल भोजन, आपूर्ति और वैज्ञानिक प्रयोग नहीं पहुँचातीं। वे स्वयं स्टेशन के रखरखाव और सुधार के लिए आवश्यक घटक भी ला सकती हैं। सौर-पैनल हार्डवेयर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उस विद्युत क्षमता की नींव है जिस पर स्टेशन की हर अन्य गतिविधि निर्भर करती है।
मानव अंतरिक्ष उड़ान के व्यस्त सप्ताह का हिस्सा
नियोजित कार्गो लॉन्च Crew-12 मिशन की वापसी के बाद होगा, जिसके सदस्यों ने अंतरिक्ष में लगभग आठ महीने बिताए। NASA के अंतरिक्ष यात्री Jessica Meir और Jack Hathaway, European Space Agency की अंतरिक्ष यात्री Sophie Adenot तथा Roscosmos के कॉस्मोनॉट Andrey Fedyaev 8 अक्टूबर को 237 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद, जिनमें 235 दिन ISS पर शामिल थे, पृथ्वी पर लौटे।
SpaceX Crew Dragon Grace में ऑक्सीडाइज़र रिसाव की समस्या को Crew-13 के लॉन्च से पहले ठीक करना पड़ा, जिसके कारण मिशन को कई सप्ताह बढ़ाया गया था। Crew-12 की विदाई के बाद स्टेशन पर फिर से सामान्य रूप से सात लोग मौजूद हैं। वर्तमान दल में NASA के अंतरिक्ष यात्री Jessica Watkins, Luke Delaney और Anil Menon; Canadian Space Agency के अंतरिक्ष यात्री Josh Kutryk; तथा Roscosmos के कॉस्मोनॉट Sergey Teteryatnikov, Pyotr Dubrov और Anna Kikina शामिल हैं।
Crew-12 के मिशन में कई स्पेसवॉक भी शामिल थे। Meir ने इस उड़ान के दौरान चार स्पेसवॉक पूरे किए, जिससे उनके करियर की कुल संख्या सात हो गई। Adenot ने तीन स्पेसवॉक पूरे किए, जिनमें से एक Meir के साथ था। ये अभियान उस नियमित विज्ञान, दल परिवर्तन, रखरखाव और उन्नयन कार्यों के मेल को रेखांकित करते हैं, जो ISS को कार्यशील बनाए रखते हैं।

स्टेशन के अगले चरण की तैयारी
अंतिम iROSA आपूर्ति ऐसे समय पहुँच रही है जब ISS अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंच के रूप में काम करना जारी रखता है, जबकि एजेंसियां और कंपनियां निम्न पृथ्वी कक्षा में भविष्य की गतिविधियों की योजना भी बना रही हैं। विश्वसनीय ऊर्जा बनाए रखना स्टेशन के मौजूदा कार्यों और नए उपकरणों व प्रयोगों को समर्थन देने की उसकी क्षमता, दोनों के लिए आवश्यक है।
सौर उन्नयन यह भी याद दिलाता है कि स्टेशन कोई स्थिर वस्तु नहीं है। इसके मॉड्यूल, प्रणालियां, दल और कार्गो प्रवाह लगातार प्रबंधित किए जाने चाहिए। प्रयोगशाला की दीर्घायु उन फैसलों पर निर्भर करती है जो इसके प्रारंभिक संयोजन के वर्षों बाद लिए जाते हैं, जिनमें उन प्रणालियों में लक्षित सुधार भी शामिल हैं जो महत्वपूर्ण बनी हुई हैं, लेकिन कक्षा की कठोर परिस्थितियों के संपर्क में हैं।
NASA और उसके साझेदारों के लिए इस तरह के रखरखाव मिशन का महत्व एकल उड़ान से कहीं अधिक है। यह अंतरिक्ष यात्रियों, विज्ञान टीमों और वाणिज्यिक तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक कार्यशील गंतव्य बनाए रखता है। साथ ही, यह मिलन, कार्गो स्थानांतरण, रोबोटिक संचालन और कक्षा में संयोजन जैसे कठिन कार्यों में परिचालन अनुभव को भी बनाए रखता है।
अब आगे क्या
निकट अवधि की प्रमुख घटना Cargo Dragon मिशन का लॉन्च और आगमन है, जिसके बाद अंतिम पैनल सेट की स्थापना और तैनाती होगी। स्रोत सामग्री iROSAs को मौजूदा क्षमता-वृद्धि प्रयास के लिए नियोजित अंतिम इकाइयों के रूप में पहचानती है। उनकी स्थापना स्टेशन की ऊर्जा प्रणाली को मजबूत करने के लिए किए गए कई आपूर्ति अभियानों के प्रयास को पूरा करेगी।
इससे ISS के संचालन का व्यापक काम समाप्त नहीं होगा। दल अनुसंधान जारी रखेंगे, रखरखाव करेंगे और आने वाले अंतरिक्षयानों को समर्थन देंगे। लेकिन iROSA अभियान का पूरा होना स्टेशन के आधुनिकीकरण के एक महत्वपूर्ण अध्याय को बंद करेगा: एक पुरानी, लेकिन अब भी सक्रिय कक्षीय प्रयोगशाला को काम जारी रखने के लिए आवश्यक बिजली का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराना।
यह लेख spacepolicyonline.com की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
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