ISS से विज्ञान-समृद्ध वापसी

NASA का कहना है कि SpaceX का CRS-34 Dragon International Space Station से अब तक की सबसे विज्ञान-समृद्ध कार्गो वापसी में से एक पूरी कर चुका है। यह पृथ्वी पर गहन विश्लेषण के लिए जैविक नमूने, परीक्षण किए गए हार्डवेयर और शोध सामग्री वापस लेकर आया है। प्रशांत महासागर में अंतरिक्षयान की स्प्लैशडाउन के साथ स्टेशन के लिए 34वां वाणिज्यिक पुनःपूर्ति मिशन समाप्त हुआ और कई प्रयोगों का अगला चरण कक्षा से लैब-आधारित फॉलो-अप में स्थानांतरित हो गया।

यह वापसी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ISS की कई जांचें अंतरिक्ष उड़ान के संपर्क के बाद ऐसे विस्तृत पोस्ट-फ्लाइट परीक्षण पर निर्भर करती हैं, जो स्टेशन पर नहीं किए जा सकते। नमूनों को वापस भेजकर शोधकर्ता तुलना कर सकते हैं कि माइक्रोग्रैविटी ने कोशिकाओं, ऊतकों और सामग्रियों को कैसे बदला, और यह आकलन कर सकते हैं कि क्या वे बदलाव चिकित्सा या भविष्य के अन्वेषण के लिए व्यावहारिक मूल्य रखते हैं।

स्टेम सेल और माइक्रोग्रैविटी मैन्युफैक्चरिंग की संभावना

Dragon कार्गो में शामिल प्रमुख जांचों में से एक NASA का Hematopoietic Stem Cell Expansion in Space: Pathfinder Investigation है, जिसे InSPA-StemCellEX-H2 भी कहा जाता है। यह परियोजना इस बात का अध्ययन कर रही है कि क्या माइक्रोग्रैविटी रक्त स्टेम सेल के उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकती है, जबकि उनकी कई प्रकार की कोशिकाओं में विभेदित होने की क्षमता बनी रहे।

पृथ्वी पर यह एक बड़ी चुनौती है। प्रयोगशाला में तैयार किए गए रक्त स्टेम सेल वह लचीलापन खो सकते हैं, जिसकी उन्हें लाल और श्वेत रक्त कोशिकाओं जैसी महत्वपूर्ण वंश-श्रृंखलाएँ बनाने के लिए जरूरत होती है, जिससे कुछ रक्त विकारों और कैंसर के उपचार में उनकी उपयोगिता सीमित हो जाती है। NASA का कहना है कि शोधकर्ताओं का मानना है कि अंतरिक्ष वातावरण इस क्षमता को बनाए रखने में मदद कर सकता है, साथ ही अधिक संख्या में कोशिकाएँ उगाने की अनुमति भी दे सकता है। अब वापस लाए गए नमूनों की जांच की जाएगी ताकि यह तय किया जा सके कि क्या अंतरिक्ष-आधारित उत्पादन ने ऐसे उन्नत स्टेम सेल बनाए जो भविष्य में चिकित्सीय उपयोग के लिए उपयुक्त हों।

रोग-तंत्रों को उभारने के लिए अंतरिक्ष का उपयोग

CRS-34 पर लौट रहा एक और प्रयोग हृदय ऊतक में Streptococcus pneumoniae संक्रमण पर केंद्रित है। इस जांच में स्टेम-सेल से प्राप्त हृदय ऊतकों को जानबूझकर निमोनिया पैदा करने वाले बैक्टीरिया से संक्रमित किया गया। NASA का कहना है कि इस काम का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि निमोनिया हृदय रोग के जोखिम को क्यों बढ़ाता है, एक ऐसा संबंध जो अभी तक पूरी तरह समझा नहीं गया है।

माइक्रोग्रैविटी बैक्टीरिया को अधिक सक्रिय और अधिक विषाणुशील बना सकती है, जिससे ऐसे प्रभाव बढ़ सकते हैं जिन्हें पृथ्वी-आधारित प्रयोगों में पकड़ना कठिन होता है। यदि यह वृद्धि कोशिकीय प्रतिक्रियाओं को अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करती है, तो अंतरिक्ष स्टेशन पर किया गया शोध उन रोग-मार्गों को उजागर करने में मदद कर सकता है जो पारंपरिक प्रयोगशालाओं में छिपे रहते हैं। इससे ISS केवल अंतरिक्ष के अनुकूलन के अध्ययन का मंच नहीं रहेगा, बल्कि पृथ्वी पर जैव-चिकित्सीय समझ को और बेहतर करने का भी उपकरण बनेगा।

रक्त का थक्का, प्रतिरक्षा और मिशन की तैयारी

Dragon NASA के Megakaryocyte Flying-One investigation के नमूने भी वापस ला रहा है, जो यह जांचता है कि megakaryocytes और उनके द्वारा बनाए गए प्लेटलेट्स अंतरिक्ष उड़ान के साथ कैसे अनुकूलित होते हैं। ये कोशिकाएँ रक्त के थक्के बनने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के लिए केंद्रीय हैं। NASA का कहना है कि वापस लाए गए नमूने, जिनमें अंतरिक्षयात्री-व्युत्पन्न सामग्री भी शामिल है, यह दिखा सकते हैं कि लंबी अवधि के मिशनों के दौरान मानव प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे व्यवहार करती है।

इसके सीधे निहितार्थ अन्वेषण योजना पर पड़ते हैं। यदि अंतरिक्ष उड़ान थक्का बनने या प्रतिरक्षा कार्य को ऐसे तरीकों से बदलती है जो चिकित्सीय जोखिम बढ़ाते हैं, तो एजेंसियों को पृथ्वी से और दूर, लंबे समय तक चालक दल भेजने से पहले बेहतर प्रतिकार उपायों की आवश्यकता होगी। यहां स्टेशन का मूल्य यह है कि यह निरंतर भारहीनता में मानव जैविकी का बार-बार और नियंत्रित अवलोकन संभव बनाता है।

लो अर्थ ऑर्बिट से आगे

NASA CRS-34 कार्गो वापसी को ISS विज्ञान के लिए अपनी दोहरे-उपयोग रणनीति का हिस्सा मानता है: पृथ्वी पर लाभ देना और साथ ही मनुष्यों को लो अर्थ ऑर्बिट से आगे के मिशनों के लिए तैयार करना। यही तर्क मिशन के जीवविज्ञान पोर्टफोलियो में दिखाई देता है। बेहतर स्टेम-सेल उत्पादन चिकित्सा में मदद कर सकता है। बेहतर संक्रमण मॉडल रोग-शोध को सूचना दे सकते हैं। रक्त और प्रतिरक्षा से जुड़े निष्कर्ष चंद्र और मंगल मिशनों के डिजाइन को आकार दे सकते हैं।

वापस लाए गए हार्डवेयर और पदार्थ-विज्ञान संबंधी पेलोड भी इसी पैटर्न में फिट बैठते हैं, हालांकि उपलब्ध स्रोत पाठ में जीवविज्ञान पक्ष पर अधिक जोर दिया गया है। मिलकर, ये नमूने दिखाते हैं कि स्टेशन एक कक्षीय चौकी से एक ऐसे शोध मंच में विकसित हो गया है, जहां माइक्रोग्रैविटी स्वयं एक प्रयोगात्मक चर बन जाती है।

पृथ्वी पर प्रतीक्षा कर रही टीमों के लिए, स्प्लैशडाउन मिशन का अंत नहीं है। यह सबसे अधिक विश्लेषणात्मक रूप से तीव्र चरण की शुरुआत है। अब सवाल यह है कि क्या कक्षा में उत्पन्न परिवर्तन इतने मजबूत निष्कर्षों में बदलते हैं कि वे उपचार-मार्गों, जैव-चिकित्सीय निर्माण या मानव अंतरिक्ष उड़ान के डिजाइन को प्रभावित कर सकें। CRS-34 सामग्री घर ले आया। इसकी महत्ता सिद्ध करने का कठिन काम अब शुरू होता है।

यह लेख NASA की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on nasa.gov