Juno, Jupiter के लिए बने उपकरण के नए उपयोग खोज रहा है

NASA का Juno मिशन Jupiter का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसके एक उपकरण से अब Solar System के सबसे चरम चंद्रमाओं में से एक का नया दृश्य मिल रहा है। दिसंबर 2023 और फ़रवरी 2024 में Io के फ्लाईबाय के दौरान, Juno ने अपने Microwave Radiometer, या MWR, का उपयोग सतह के कई मीटर नीचे गर्मी मापने के लिए किया, दिए गए स्रोत-पाठ के अनुसार।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि Io सिर्फ एक और चट्टानी चंद्रमा नहीं है। यह ज्ञात सबसे अधिक ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय पिंड है, और स्रोत सामग्री में 400 से अधिक ज्वालामुखियों की पहचान की गई है। इसकी सतह के नीचे गर्मी कैसे संग्रहीत और मुक्त होती है, यह समझना tidal heating, resurfacing, और volcanic behavior के मॉडल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, ऐसे पिंड पर जो लगातार Jupiter के गुरुत्वाकर्षण और पड़ोसी चंद्रमाओं के गुरुत्वीय खिंचाव से मुड़ता रहता है।

ये नए माप Journal of Geophysical Research: Planets में प्रकाशित शोध में वर्णित हैं। यह काम तब एकत्र किए गए डेटा पर आधारित है जब Juno Io की सतह से लगभग 1,500 किलोमीटर ऊपर से गुज़रा था। यह NASA के Galileo अंतरिक्षयान की कुछ ऐतिहासिक उड़ानों जितना नज़दीक नहीं था, लेकिन Juno एक अलग क्षमता लेकर आया: केवल ऊपरी सबसे सतही परत से infrared संकेतों पर ध्यान देने के बजाय, दृश्य सतह परत के नीचे के तापमान को महसूस करने की क्षमता।

Io पर सतह के नीचे की गर्मी क्यों मायने रखती है

Io की भूविज्ञान tidal heating से संचालित होती है। जब Jupiter का गुरुत्वाकर्षण चंद्रमा पर खिंचता है और Europa तथा Ganymede के साथ कक्षीय अंतःक्रियाएँ उसे लगातार तनाव देती रहती हैं, तो Io का भीतरी भाग बार-बार मुड़ता है। यह बार-बार होने वाला विकृति-प्रभाव गर्मी पैदा करता है, जो तीव्र ज्वालामुखीयता और निरंतर resurfacing को आगे बढ़ाता है।

वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि Io भूवैज्ञानिक रूप से अस्थिर है, लेकिन सतह के नीचे के तापमान का डेटा ऐसी चीज़ जोड़ सकता है जो केवल सतही चित्र और infrared मानचित्र अपने दम पर नहीं दे सकते। कुछ मीटर नीचे की गर्मी यह संकेत देती है कि ऊर्जा कैसे बनी रहती है, पदार्थ के गुण जगह-जगह कैसे बदलते हैं, और गहराई में होने वाली गतिविधि की गर्मी ऊपर की ओर कैसे बढ़ती है।

दिए गए स्रोत के अनुसार, Juno का MWR लगभग छह मीटर तक सतह के नीचे देख सकता था। ग्रह-विज्ञान की दृष्टि से यह उथला है, लेकिन एक तापीय ढाल दिखाने के लिए पर्याप्त गहरा है। ऐसे चंद्रमा पर, जिसकी सतह ज्वालामुखीय विस्फोटों, लावा प्रवाह, और volcanic plumes से गिरे पदार्थों द्वारा बार-बार बदल दी जाती है, इतनी सीमित गहराई भी अल्पकालिक सतही प्रभावों और अंतर्निहित भूमि के व्यापक पैटर्नों में भेद करने में मदद कर सकती है।

वायुमंडलीय उपकरण को चंद्रमा जांच में बदला गया

Microwave Radiometer मूल रूप से बहुत अलग काम के लिए बनाया गया था। इसका प्राथमिक मिशन Jupiter के वायुमंडल में गहराई तक जांच करना था। स्रोत-पाठ कहता है कि यह उपकरण 600 MHz से 22 GHz तक की frequencies को छह अलग-अलग antennae के माध्यम से कवर करता है, जिनमें से प्रत्येक microwave spectrum के किसी विशिष्ट भाग के लिए tuned है।

उस डिजाइन ने Juno टीम को मिशन के extended phase के दौरान एक अवसर दिया। यदि radiometer Jupiter की cloud layers में सैकड़ों मील तक प्रवेश कर सकता था, तो शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह Io की चट्टानी सतह में भी कई मीटर तक प्रवेश कर सकता है। extended mission ने उस विचार को एक व्यावहारिक प्रयोग में बदल दिया।

यह परिपक्व अंतरिक्षयान संचालन के अधिक दिलचस्प पहलुओं में से एक है: किसी एक वैज्ञानिक समस्या के लिए बनाए गए उपकरण, अपनी सीमाएँ अच्छी तरह समझ लेने के बाद, कहीं और अप्रत्याशित रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं। Juno के मामले में, गैस दानव की meteorology के लिए अनुकूलित एक उपकरण अब एक ज्वालामुखीय चंद्रमा की निकट-सतही परत की जांच करने का माध्यम बन गया है।

Galileo के साथ Juno कैसे पूरक है

NASA का Galileo मिशन Io की आधुनिक समझ की नींव रखने में बहुत महत्वपूर्ण था। दिए गए स्रोत-पाठ के अनुसार, Galileo लगभग 100 किलोमीटर तक नीचे उड़ान भरी, और उसने अत्यंत गर्म लावा, सक्रिय plumes, तीव्र resurfacing, और एक विभेदित धातु core के प्रमाण पाए। इन अवलोकनों ने Io को tidal heating और पृथ्वी से परे ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए एक प्रमुख प्रयोगशाला के रूप में स्थापित किया।

Juno उस पुराने काम की जगह नहीं लेता। वह उसे एक अलग दिशा में आगे बढ़ाता है। स्रोत सामग्री Galileo के सतह-केन्द्रित infrared अवलोकनों की तुलना Juno के सतह के नीचे देखने वाले microwave मापों से करती है। यह अंतर महत्वपूर्ण है। Infrared hot spots की पहचान और सतह के तापमान मानचित्रण के लिए बहुत प्रभावी है, लेकिन microwaves ऊपरी परत के नीचे के पदार्थ का नमूना ले सकते हैं, जहाँ सतह ठंडी हो जाने या बदल जाने के बाद भी गर्मी बनी रह सकती है।

दूसरे शब्दों में, Juno तस्वीर में गहराई जोड़ रहा है, भले ही केवल कुछ मीटर ही क्यों न हो। ऐसे संसार पर, जहाँ सतह और उप-सतह की सीमा बार-बार होने वाले विस्फोटों से फिर से आकार ले सकती है, वह अतिरिक्त गहराई यह समझने में सुधार कर सकती है कि गर्मी कहाँ केंद्रित है और ज्वालामुखीय भूभाग समय के साथ कैसे विकसित होता है।

नया अध्ययन किन सवालों में मदद कर सकता है

स्रोत-पाठ में पेपर के पूर्ण मात्रात्मक निष्कर्ष नहीं दिए गए हैं, इसलिए उससे आगे की कोई विस्तृत व्याख्या उपलब्ध साक्ष्य से बाहर होगी। फिर भी, वर्णित माप उन कई वैज्ञानिक प्रश्नों की ओर संकेत करते हैं जिनमें ऐसा डेटा मददगार हो सकता है।

  • Io की सतह के नीचे गर्मी कितनी असमान रूप से वितरित है।
  • क्या कुछ क्षेत्र सतही अवलोकनों से अपेक्षा से अधिक समय तक गर्मी बनाए रखते हैं।
  • निकट-सतह तापमान स्थानीय भूविज्ञान या ज्वालामुखीय इतिहास के साथ कितना बदलता है।
  • क्या tidal heating के संकेत सतह के पास तापीय पैटर्नों से अप्रत्यक्ष रूप से निकाले जा सकते हैं।

ये प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि Io का उपयोग अक्सर चरम गुरुत्वीय तनाव के तहत भूगर्भीय गतिविधि समझने के लिए एक मानक के रूप में किया जाता है। Io से मिलने वाले परिणाम न केवल बाहरी Solar System के अन्य चंद्रमाओं के मॉडलों को, बल्कि यह समझने के व्यापक विचारों को भी सूचित कर सकते हैं कि समय के साथ गर्मी और आंतरिक ऊर्जा ग्रह पिंडों को कैसे आकार देती है।

एक उत्पादक extended mission

इस परिणाम में एक कार्यक्रमगत सबक भी है। Juno 2016 में Jovian system में Jupiter का अध्ययन करने के लिए पहुँचा था, लेकिन mission का extended phase Galilean moons पर मूल्यवान विज्ञान देता रहा है। Io, Europa, और Ganymede सभी वैज्ञानिक रूप से आकर्षक हैं, लेकिन Io इसलिए अलग दिखता है क्योंकि वह ग्रह स्तर पर स्पष्ट रूप से सक्रिय है।

मौजूदा hardware का नए तरीकों से उपयोग करना अक्सर extended missions को इतना मूल्यवान बनाता है। जो spacecraft अपनी prime mission से बच जाते हैं, वे केवल एक-उद्देश्यीय probes से अधिक बन सकते हैं। वे opportunistic science के लिए अनुकूलनीय मंच बन जाते हैं, खासकर जब mission teams ऐसे targets के विरुद्ध instruments आज़माने को तैयार हों, जिन्हें वे मूल रूप से अध्ययन करने के लिए नहीं बनाए गए थे।

इसी ढांचे में Io के इन मापों को समझना चाहिए। Juno को एक समर्पित Io geophysics mission के रूप में लॉन्च नहीं किया गया था। फिर भी, Microwave Radiometer क्या कर सकता है, इसे नए सिरे से सोचकर शोधकर्ताओं ने ऐसे चंद्रमा पर एक नया अवलोकनात्मक window खोला, जो Solar System की सबसे गतिशील वस्तुओं में से एक बना हुआ है।

Io अब भी ध्यान क्यों खींचता है

ग्रह-विज्ञान के लिए Io का महत्व केवल यह नहीं है कि वह शानदार है। यह इसलिए भी है कि वह ऐसे तरीकों से सक्रिय है जिन्हें वैज्ञानिक लगभग real time में माप सकते हैं। लावा, plumes, और निरंतर resurfacing orbital mechanics, आंतरिक गर्मी, और crustal change के बीच संबंध के लिए एक प्राकृतिक प्रयोगशाला बनाते हैं। हर नया instrument perspective उस संबंध को और मजबूत करता है।

दिए गए सामग्री के अनुसार, Juno का योगदान बातचीत के एक हिस्से को तुरंत सतह के नीचे ले जाना है। यह Io के गहरे आंतरिक भाग को सीधे नहीं दिखाता, लेकिन दृश्य सतह व्यवहार और नीचे के छिपे तापीय इंजन के बीच एक पुल बनाता है। ऐसे चंद्रमा के लिए, जिसकी पहचान relentless geological motion है, कुछ मीटर की अतिरिक्त जानकारी भी वैज्ञानिक रूप से अर्थपूर्ण हो सकती है।

जैसे-जैसे नया शोध समाहित किया जा रहा है, व्यापक महत्व शायद एक headline number से कम और method से अधिक जुड़ा हो सकता है। Jupiter के लिए बना एक spacecraft दिखा चुका है कि microwave sounding, volcanic moon की उथली उपसतह को चिह्नित करने में मदद कर सकता है। इससे Io को आज समझने और Solar System के अन्य सक्रिय worlds के भविष्य के अवलोकनों को डिजाइन करने के लिए उपकरणों का दायरा बढ़ता है।

This article is based on reporting by Universe Today. Read the original article.

Originally published on universetoday.com