डार्क मैटर की खोज अब ब्लैक होल विलयों तक पहुँची
डार्क मैटर का लंबे समय से प्रत्यक्ष अवलोकन के बजाय अनुमान लगाया जाता रहा है। ऐसा माना जाता है कि यह ब्रह्मांड के अधिकांश पदार्थ के लिए जिम्मेदार है, फिर भी यह प्रकाश या विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के बाकी हिस्सों के साथ ऐसी प्रतिक्रिया नहीं करता जिसे वैज्ञानिक आसानी से पकड़ सकें। इसलिए शोधकर्ताओं को इसकी मौजूदगी को परोक्ष रूप से, आमतौर पर आकाशगंगाओं और बड़े पैमाने की संरचना पर इसके गुरुत्वीय प्रभाव के जरिए, खोजने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
अब, उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार, एमआईटी-नेतृत्व वाली एक टीम ने एक अलग रास्ता सुझाया है: ब्लैक होल विलयों से आने वाली गुरुत्वीय तरंगों का विश्लेषण करके डार्क मैटर की तलाश करना। विचार यह है कि पृथ्वी पर किसी डिटेक्टर में कण टकराव खोजने के बजाय, स्वयं अंतरिक्ष-काल की तरंगों में समाया एक पैटर्न देखा जाए।
सुपररेडिएंस तंत्र
प्रस्तावित विधि सुपररेडिएंस नामक प्रक्रिया पर निर्भर करती है। टीम के मॉडल में, डार्क मैटर असाधारण रूप से हल्के कणों से बना है, जो इलेक्ट्रॉन से कई क्रमों कम भारी हैं। जब ये तरंग-जैसे कण तेजी से घूमते ब्लैक होल से टकराते हैं, तो ब्लैक होल अपनी घूर्णन ऊर्जा का कुछ हिस्सा उन्हें दे सकता है, जिससे डार्क मैटर क्षेत्र बहुत अधिक घनत्व तक बढ़ जाता है।
स्रोत इसे क्रीम को मथकर मक्खन बनाने जैसी प्रक्रिया के रूप में वर्णित करता है: जो पहले फैला हुआ था, वह कहीं अधिक सघन और संरचित हो जाता है। परिणामस्वरूप, घूमते ब्लैक होल के चारों ओर डार्क मैटर का एक घना बादल बनता है।
गुरुत्वीय तरंगें कहानी में कहाँ आती हैं
यदि दूसरा ब्लैक होल अंदर की ओर सर्पिल करते हुए पहले से विलय करता है, तो उसे उस डार्क मैटर बादल से होकर अंदर जाना पड़ेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अंतःक्रिया विलय से उत्पन्न गुरुत्वीय तरंगों पर एक सूक्ष्म लेकिन पहचाने जाने योग्य छाप छोड़ेगी, जिससे संकेत वैसा नहीं होगा जैसा लगभग खाली अंतरिक्ष में ब्लैक होल विलय के लिए अपेक्षित होता।
यही इस विधि का केंद्रीय दावा है। डार्क मैटर को सीधे देखने की कोशिश करने के बजाय, वैज्ञानिक वास्तविक विलय संकेतों की तुलना उन मॉडलों से कर सकते हैं जो बताते हैं कि आसपास का बादल वेवफॉर्म को कैसे बदल देगा।
वास्तविक डेटा के साथ विचार की जाँच
एमआईटी पोस्टडॉक्टरल भौतिकशास्त्री Josu Aurrekoetxea के नेतृत्व वाली टीम ने यह मॉडल बनाया कि वह छाप कैसी दिखनी चाहिए, और फिर उसे LIGO, Virgo, और KAGRA के सार्वजनिक डेटा पर लागू किया। दिए गए स्रोत के अनुसार, उन्होंने वेधशालाओं के पहले तीन अवलोकन अभियानों से 28 सबसे स्पष्ट गुरुत्वीय-तरंग घटनाओं की स्क्रीनिंग की।
लेख के अनुसार, उन 28 संकेतों में से 27 सामान्य निर्वात-आधारित ब्लैक होल विलयों जैसे दिखे। 28वीं, GW190728 के रूप में सूचीबद्ध, अलग दिखाई दी। दिया गया पाठ पूर्ण व्याख्या का वर्णन करने से पहले ही समाप्त हो जाता है, इसलिए सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यह नहीं है कि डार्क मैटर का पता चल गया है, बल्कि यह कि टीम की स्क्रीनिंग पद्धति के तहत यह घटना बाकी से अलग थी।
यह क्यों मायने रखता है
यह अंतर महत्वपूर्ण है। डार्क मैटर के दावों में सावधानी आवश्यक होती है, और इस कार्य को मौजूदा अवलोकनों पर एक प्रारंभिक परीक्षण से समर्थित पद्धति-प्रस्ताव के रूप में समझना बेहतर है। फिर भी यह एक उल्लेखनीय विकास है, क्योंकि यह खोज के दायरे को व्यावहारिक तरीके से बढ़ाता है। गुरुत्वीय-तरंग खगोलविज्ञान पहले से ही विलय घटनाओं का बढ़ता हुआ अभिलेख तैयार कर रहा है। यदि डार्क मैटर उन संकेतों में अपने निशान छोड़ सकता है, तो हर भविष्य की खोज केवल ब्लैक होल का मापन नहीं होगी। यह मौलिक भौतिकी की संभावित जाँच भी होगी।
स्रोत में Aurrekoetxea का यह कथन उद्धृत है कि डार्क मैटर हमारे आसपास है, लेकिन उसके प्रभाव को देखने के लिए उसे पर्याप्त घना होना चाहिए, और ब्लैक होल उस घनत्व को बढ़ाने का तंत्र प्रदान करते हैं। यह तर्क को साफ़ तरीके से प्रस्तुत करता है। ब्लैक होल सिर्फ गुरुत्वीय तरंगों का स्रोत नहीं है; वह वह इंजन भी है जो डार्क मैटर को देखने योग्य रूप में केंद्रित कर सकता है।
गुरुत्वीय-तरंग खगोलविज्ञान के लिए एक नई परत
- यह विधि ऐसे अति-हल्के डार्क मैटर कणों को लक्षित करती है जो समन्वित तरंगों की तरह व्यवहार करते हैं।
- तेजी से घूमते ब्लैक होल सुपररेडिएंस के जरिए उन तरंगों को बढ़ा सकते हैं।
- ब्लैक होल के चारों ओर घना बादल बाद के विलय से बने वेवफॉर्म को बदल सकता है।
- एमआईटी-नेतृत्व वाली टीम ने 28 सार्वजनिक LIGO, Virgo, और KAGRA संकेतों पर इस विचार की जाँच की।
फिलहाल, मुख्य परिणाम वैचारिक और पद्धतिगत है। यह शोधकर्ताओं को देखने के लिए एक ठोस संकेत देता है और मौजूदा तथा भविष्य के अवलोकनों को डार्क मैटर के दृष्टिकोण से फिर से देखने का कारण देता है। इतना ही एक ऐसे क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, जहाँ सबसे बड़ी बाधा अक्सर यह होती है कि अगला सुराग कहाँ मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं होता।
यदि यह दृष्टिकोण कारगर रहता है, तो गुरुत्वीय-तरंग कैटलॉग एक दूसरा उद्देश्य भी पूरा कर सकते हैं: केवल ब्रह्मांड की हिंसक घटनाओं का मानचित्रण ही नहीं, बल्कि उसमें हावी माने जाने वाले अदृश्य पदार्थ का खुलासा करना भी।
यह लेख Universe Today की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on universetoday.com
