स्व-स्थायी संलयन की ओर संशोधित मार्ग
U.S. Department of Energy के Princeton Plasma Physics Laboratory के शोधकर्ताओं ने प्लाज़्मा को गर्म और संपीड़ित करने का क्रम बदलकर संलयन प्रज्वलन का संभावित रूप से अधिक कुशल मार्ग खोजा है।
उनके अनुसार पहले प्लाज़्मा गर्म करने और फिर उसका घनत्व बढ़ाने से स्व-स्थायी संलयन प्रतिक्रिया तक पहुंचने के लिए आवश्यक ऊर्जा घट सकती है।
निष्कर्ष Physical Review Letters में प्रकाशित हुए।
प्रज्वलन की चुनौती
संलयन परमाणु नाभिकों को मिलाकर ऊर्जा उत्पन्न करने का प्रयास है। इसके लिए अत्यधिक ऊर्जावान पदार्थ, यानी प्लाज़्मा, को लंबे समय तक गर्म और सघन रखना पड़ता है।
Lawson criterion दशकों से प्रज्वलन की आवश्यक स्थितियों का वर्णन करता है, लेकिन उन स्थितियों तक पहुंचने का सबसे कुशल मार्ग नहीं बताता।
PPPL विश्लेषण ने चार अतिरिक्त कारकों को शामिल कर इस ढांचे का विस्तार किया है।
क्रम क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है
मुख्य विचार यह है कि लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग लक्ष्य जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है। तापमान बढ़ाने के बाद घनत्व बढ़ाने से आवश्यक ऊर्जा काफी घट सकती है।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि कुशल प्रज्वलन संलयन ऊर्जा अनुसंधान की प्रमुख चुनौतियों में है।
शोधकर्ता इसे तैयार रिएक्टर डिजाइन नहीं, बल्कि गणनाओं पर आधारित संभावित अधिक कुशल मार्ग बताते हैं।
विस्तृत Lawson criterion
मानदंड का विस्तार उन प्रभावों को शामिल करता है जिन्हें सरल सीमा-आधारित दृष्टिकोण छोड़ सकता है। इससे प्लाज़्मा तैयार करने के विभिन्न तरीकों की तुलना की जा सकती है।
यह विश्लेषण Lawson criterion को हटाता नहीं, बल्कि उसमें अधिक प्रभावकारी कारक जोड़ता है।
लक्ष्य burning plasma है, जिसमें संलयन से उत्पन्न ऊष्मा आगे की प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक स्थितियां बनाए रखती है।
संलयन विकास पर संभावित प्रभाव
यह कार्य दिखाता है कि संलयन में प्रगति केवल अधिक शक्ति या बेहतर सामग्री से नहीं, बल्कि प्लाज़्मा को प्रज्वलन तक ले जाने वाली भौतिकी की बेहतर समझ से भी हो सकती है।
यदि आगे के शोध में heating-first, compression-second मार्ग सफल रहता है, तो कम ऊर्जा के साथ प्रज्वलन का नया तरीका मिल सकता है।
यह परिणाम वाणिज्यिक ऊर्जा की समयसीमा तय नहीं करता, लेकिन सतत बाहरी गर्मी के बिना प्रतिक्रिया बनाए रखने की दिशा में एक सैद्धांतिक मार्ग देता है।
यह लेख Science Daily की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।
Originally published on sciencedaily.com







