सहायक प्रजनन के लिए एक नया दृष्टिकोण
शोधकर्ताओं ने छोटे-छोटे मोतियों की मदद से शुक्राणु को चुंबकीय बनाकर भ्रूण बनाए हैं, जिससे प्रयोगशाला की डिश के बजाय शरीर के अंदर ही इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन के अधिक चरणों को करने की एक संभावित राह खुलती है। यह काम, जिसके बारे में New Scientist ने स्पेन के CIC nanoGUNE में Mariana Medina-Sánchez के नेतृत्व वाले शोध के आधार पर बताया, वर्तमान IVF प्रक्रियाओं में शामिल कुछ आक्रामक चरणों को कम करने के उद्देश्य से किया गया है।
यह विचार सरल है, लेकिन तकनीकी रूप से असामान्य। शुक्राणु से सूक्ष्म चुंबकीय मोतियों को जोड़कर, वैज्ञानिक उम्मीद करते हैं कि वे कमजोर बाहरी चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से इन कोशिकाओं को महिला प्रजनन पथ से होकर निर्देशित कर सकेंगे, ताकि वे फैलोपियन ट्यूब में अंडाणु तक पहुंचें और अधिक प्राकृतिक परिस्थितियों में उसे निषेचित करें।
शरीर के भीतर की विधि क्यों चाहते हैं शोधकर्ता
पारंपरिक IVF ने कई लोगों को गर्भधारण में मदद की है, लेकिन इसकी अपनी कठिनाइयां हैं। हार्मोन उत्तेजना, अंडाणु निकासी और भ्रूण स्थानांतरण आक्रामक प्रक्रियाएं हैं और इनमें अप्रिय दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सफलता दर भी सीमित है, आंशिक रूप से इसलिए कि निषेचन और शुरुआती विकास कृत्रिम वातावरण में होते हैं और इनमें कई हैंडलिंग चरण शामिल होते हैं, जो भ्रूण की जीवित रहने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
Medina-Sánchez और उनकी टीम शरीर को ही, जैसा कि उन्होंने कहा, एक प्राकृतिक इनक्यूबेटर के रूप में इस्तेमाल करना चाहती हैं। विचार सहायक प्रजनन को समाप्त करने का नहीं, बल्कि उसे इस तरह से फिर से डिजाइन करने का है कि कम चरण शरीर के बाहर हों। अगर यह सुरक्षित और प्रभावी तरीके से किया जा सके, तो IVF शारीरिक रूप से कम कठिन हो सकता है और साथ ही प्राकृतिक निषेचन की परिस्थितियों के कुछ जैविक लाभों को भी बेहतर ढंग से संरक्षित कर सकता है।
प्रयोग कैसे किया गया
इस दृष्टिकोण को परखने के लिए शोधकर्ताओं ने गाय के शुक्राणु को लोहे के ऑक्साइड और पॉलीस्टाइरीन से बने छोटे चुंबकीय मोतियों के साथ इनक्यूबेट किया। लगभग 30 मोती प्रत्येक शुक्राणु के सिर से जुड़ गए, जिससे कोशिकाएं चुंबकीय मार्गदर्शन के प्रति संवेदनशील हो गईं, जबकि पूंछ स्वतंत्र रूप से चलती रही। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, परीक्षणों से पता चला कि इन मोतियों ने शुक्राणु की तैरने की गति या समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं किया।
इसके बाद टीम ने चुंबकीय गाय के शुक्राणु को डिश में अंडाणुओं के साथ मिलाया। परिणाम उत्साहजनक रहा: स्वस्थ भ्रूण उतनी ही दर से बने जितनी गैर-चुंबकीय शुक्राणु के साथ बनते हैं। जैसे ही शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश करता है, मोती अलग हो गए। यह परिणाम महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि अतिरिक्त चुंबकीय नियंत्रण ने निषेचन की मूल जैविक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया।
परिणाम का अर्थ और उसका दायरा
यह अभी भी शुरुआती चरण का परिणाम है, और यहां उपलब्ध साक्ष्य सीमित हैं। प्रयोग गाय के शुक्राणु और अंडाणुओं के साथ डिश में किए गए थे, मनुष्यों के साथ नहीं और जीवित प्रजनन तंत्र के भीतर भी नहीं। इसलिए यह काम यह नहीं दिखाता कि चुंबकीय शुक्राणु अभी नैदानिक IVF को कम आक्रामक बना सकते हैं।
लेकिन यह जरूर दिखाता है कि एक महत्वपूर्ण शुरुआती पड़ाव पर यह अवधारणा संभव है। शुक्राणु को चुंबकीय बनाया जा सकता है, वे गतिशील और जीवित रहते हैं, और वे फिर भी इन विट्रो स्वस्थ भ्रूण बना सकते हैं। यह संयोजन शोध के अगले चरण का समर्थन करने के लिए पर्याप्त है, जिसमें यह जांचना होगा कि क्या बाहरी क्षेत्र शुक्राणु को अधिक वास्तविक वातावरणों के भीतर निर्देशित कर सकते हैं, बिना प्रजनन ऊतकों को नुकसान पहुंचाए या सफलता दर घटाए।
यदि यह काम करता है, तो एक प्लेटफ़ॉर्म तकनीक
यदि यह अवधारणा अंततः नैदानिक उपयोग तक पहुंचती है, तो इसके प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्रजनन चिकित्सा लंबे समय से सफलता दर बढ़ाने और रोगी पर बोझ कम करने के तरीके खोज रही है। शरीर के भीतर निषेचन की रणनीति आवश्यक प्रक्रियाओं की संख्या घटा सकती है और संभवतः उन परिस्थितियों को बेहतर ढंग से बनाए रख सकती है जिनमें भ्रूण का विकास शुरू होता है।
फिर भी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और नियामकीय स्तर पर बड़े अवरोध बने रहेंगे। शोधकर्ताओं को सटीक नियंत्रण, सुरक्षा, पुनरुत्पादकता और स्थापित IVF प्रक्रियाओं की तुलना में वास्तविक लाभ साबित करना होगा। लेकिन यह अध्ययन इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि यह सहायक प्रजनन अनुसंधान को एक अधिक कम-हस्तक्षेप वाले मॉडल की ओर मोड़ता है। जीवविज्ञान की जगह मशीनरी रखने के बजाय, यह जीवविज्ञान को बाहर से अधिक कोमलता से निर्देशित करने की कोशिश करता है। एक ऐसे क्षेत्र के लिए, जो तकनीकी महत्वाकांक्षा और भावनात्मक दांव दोनों से परिभाषित होता है, यह अन्वेषण के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा है।
यह लेख New Scientist की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on newscientist.com




