तेज़ विकास को अक्सर केवल बहुत लंबे समय में दिखाई देने वाली प्रक्रिया माना जाता है। Fred Hutchinson Cancer Center की Malik Lab में शोधकर्ता इसके तेज़ और अधिक संघर्षपूर्ण रूप पर ध्यान दे रहे हैं: ऐसे आनुवंशिक बदलाव जो प्रतिस्पर्धी जैविक इकाइयों के अपने अस्तित्व और सफलता के लिए संघर्ष करते समय कुछ ही पीढ़ियों में उभर सकते हैं।

HHMI investigator Harmit Malik और उनकी टीम इन आनुवंशिक संघर्षों का अध्ययन करके उन्हें नियंत्रित करने वाले नियमों की पहचान कर रही है। उनका काम वायरस और मेज़बान के बीच संघर्षों सहित विभिन्न विकासवादी प्रतिस्पर्धाओं पर केंद्रित है और अतीत की जैविक हथियार-दौड़ से भविष्य की रोग-उपचार रणनीतियों के लिए संकेत खोजता है।

“ये नियम हमें विकास में पीछे देखकर यह समझने में मदद करते हैं कि ये हथियार-दौड़ कैसे हुईं, और आगे देखकर नई रणनीतियां बनाने में भी मदद करते हैं,” Malik ने कहा।

संघर्ष की गति से विकास

तेज़ विकास का अर्थ है हजारों वर्षों के बजाय अपेक्षाकृत कम पीढ़ियों में होने वाला आनुवंशिक बदलाव। प्रयोगशाला के अनुसार, ऐसा बदलाव अक्सर प्रतिस्पर्धा से प्रेरित होता है: एक आनुवंशिक इकाई को तब लाभ होता है जब दूसरी हारती है।

ये संघर्ष विशेष रूप से जानकारीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि वे संबंधित जीवों और आनुवंशिक तत्वों पर मजबूत दबाव डालते हैं। वायरस को अपने मेज़बान की सुरक्षा के बावजूद प्रजनन और प्रसार करना होता है। दूसरी ओर, मेज़बान संक्रमण को सीमित करने वाले तंत्र विकसित कर सकता है। प्रतिद्वंद्वी पर काबू पाने का लगातार दबाव जीनोम में पहचाने जा सकने वाले संकेत छोड़ सकता है।

शोधकर्ताओं के लिए इसका महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं है। यदि कोई जैविक तंत्र बार-बार संघर्ष के समान समाधान अपनाता है, तो वे समाधान संक्रमण, प्रतिरक्षा से बचने या जीवित रहने के लिए आवश्यक विशेषताओं की ओर संकेत कर सकते हैं।

तापमान-संवेदनशील वायरल संतुलन

अध्ययन में शामिल एक संघर्ष mosquito-borne alphaviruses, जिनमें Sindbis और chikungunya viruses शामिल हैं, तथा उनके संक्रमित किए जाने वाले अलग-अलग मेज़बानों से जुड़ा है। ये वायरस कीटों और मनुष्यों दोनों को सफलतापूर्वक संक्रमित कर सकते हैं, जबकि दोनों मेज़बानों के शरीर का तापमान और प्रतिरक्षा तंत्र अलग होते हैं।

postdoctoral researcher Tamanash Bhattacharya सहित टीम ने हाल में ऐसे तंत्र का अध्ययन किया जो इस cross-host क्षमता को संभव बनाता है। ध्यान viral genome में मौजूद एक विशेष stop codon, opal codon, पर है।

Stop codons सामान्यतः संकेत देते हैं कि protein production रुकनी चाहिए। इस मामले में opal codon एक महत्वपूर्ण viral polyprotein के उत्पादन का सावधानीपूर्वक संतुलित स्तर संभव बनाता है। शोधकर्ताओं ने इसे “kinetic Goldilocks” कहा: वायरस को जीवित रहने के लिए पर्याप्त polyprotein चाहिए, लेकिन बहुत अधिक मात्रा अन्य प्रक्रियाओं को धीमा कर सकती है और viral fitness घटा सकती है।

यह संतुलन तापमान और replication speed के साथ बदलता है। मनुष्यों में, जहां शरीर का तापमान अधिक और वायरल replication तेज़ है, वायरस उत्पादन संतुलन बनाए रखने के लिए opal codon पर निर्भर करता है। मच्छरों में, जहां परिस्थितियां ठंडी और replication धीमी है, वही तंत्र उसी तरह आवश्यक नहीं होता।

Surveying the genetic battlefield to uncover the rules of rapid evolution
HHMI investigator Harmit Malik उन विकासवादी नियमों का पता लगा रहे हैं जो आनुवंशिक संघर्षों का मार्गदर्शन करते हैं। Credit: Robert Hood

मेज़बान बदलना कठिन परीक्षा क्यों है

मच्छर और मानव मेज़बानों के बीच बदलना वायरस के लिए केवल तापमान में बदलाव नहीं है। उसे अलग-अलग प्रतिरक्षा वातावरण और कोशिकीय परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। एक ही genome को दोनों स्थितियों में कार्यशील रहना होता है।

Opal-codon की खोज दिखाती है कि विकासवादी अनुकूलन किसी एक गतिविधि को अधिकतम करने के बजाय उसे ठीक स्तर पर समायोजित करने के बारे में भी हो सकता है। किसी महत्वपूर्ण viral component का अधिक उत्पादन लाभदायक लग सकता है, लेकिन परिणाम बताते हैं कि अतिरिक्त उत्पादन लागत पैदा कर सकता है। Fitness कई प्रक्रियाओं के सही दर पर समन्वय पर निर्भर करती है।

विकासवादी रिकॉर्ड से उपचार के विचारों तक

तत्काल शोध लक्ष्य आनुवंशिक संघर्षों के नियमों को समझना है, किसी पूर्ण चिकित्सकीय अनुप्रयोग का दावा करना नहीं। फिर भी Malik का समूह यह जानने में व्यावहारिक मूल्य देखता है कि कौन-सी विकासवादी रणनीतियां टिकती रही हैं और क्यों।

जब वायरस और मेज़बान हथियार-दौड़ में बंधे होते हैं, तो हर अनुकूलन प्रतिअनुकूलन को जन्म दे सकता है। समय के साथ, यह संघर्ष दिखा सकता है कि कौन-सी आणविक अंतःक्रियाएं सबसे महत्वपूर्ण हैं। स्रोत के अनुसार, Malik की टीम इन जानकारियों का उपयोग बेहतर रोग उपचारों में योगदान देने वाले नए तरीकों के लिए कर रही है।

निष्कर्ष क्या दिखाते हैं और क्या नहीं

उपलब्ध रिपोर्ट दो मेज़बान वातावरणों में alphavirus fitness से जुड़े एक तंत्र का वर्णन करती है। यह chikungunya, Sindbis या किसी अन्य संक्रमण का नया उपचार स्थापित नहीं करती और न ही opal codon में बदलाव को clinical use के लिए तैयार बताती है।

इसका महत्व वैचारिक और यांत्रिक समझ में है। अध्ययन बताता है कि एक असामान्य stop codon मच्छरों और मनुष्यों में अलग-अलग replication conditions से निपटने में वायरस की मदद करने वाले regulator के रूप में काम कर सकता है।

Malik की lab का व्यापक उद्देश्य ऐसे मामलों से विकासवादी नियमों का उपयोगी समूह बनाना है। आनुवंशिक battlefield का सर्वेक्षण करके शोधकर्ता यह समझना चाहते हैं कि हथियार-दौड़ कैसे हुईं और रोग के विरुद्ध अगली उपयोगी रणनीति कहां उभर सकती है।

यह लेख Phys.org की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।

Originally published on phys.org