जीनोमिक साक्ष्य फिजी की मधुमक्खी में तेज गिरावट की ओर संकेत देते हैं

फिजी की एक देशज मधुमक्खी पर किए गए नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि लगभग पिछले 150 वर्षों में उसकी effective population size में भारी कमी आई है। यह निष्कर्ष Hylaeus navai से संबंधित है, जो हाल में Fiji के लिए endemic पहचानी गई कई छोटी, canopy-dwelling Hylaeus मधुमक्खियों में से एक है।

Ecology and Evolution में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानित गिरावट द्वीपों के European colonization के बाद की अवधि से मेल खाती है। शोध में Fiji में पाई जाने वाली छह Hylaeus species के demographic history, genetic health, population structure और distribution का अध्ययन किया गया।

एक ऐसी मधुमक्खी जिस पर बहुत कम ध्यान गया

Researchers ने 2024 में छह endemic Fijian Hylaeus species की खोज की। इन मधुमक्खियों पर पहले कम ध्यान गया, क्योंकि वे नियमित रूप से नमूना लिए जाने वाले निचले वनस्पति क्षेत्र के बजाय पेड़ों की चोटियों में रहने, भोजन करने और प्रजनन करने की प्रवृत्ति रखती हैं।

Fijian bee genomics show 99% decline in population since Europeans colonized Fiji
Hylaeus navai Dorey, Davies, and Parslow sp. Nov. Female lateral habitus (A), face (B), dorsal mesosoma (C), and lateral head (D) (scale bar = 0.50 mm). Credit: Frontiers in Ecology and Evolution (2024). DOI: 10.3389/fevo.2024.1339446

ये मधुमक्खियां छोटी भी हैं: रिपोर्ट में उनकी औसत लंबाई लगभग 3.9 मिलीमीटर बताई गई है। उनका छोटा आकार और canopy habitat उन्हें नजरों से दूर रख सकता है, साथ ही वन आवास में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है।

Researchers के अनुसार Fijian Hylaeus पराग को शरीर के भीतर ले जाती हैं और red-flowering canopy plants पर विशेष रूप से निर्भर दिखाई देती हैं। यह पुरानी धारणा को चुनौती देता है कि मधुमक्खियां लाल रंग नहीं देख सकतीं। वन canopy environments पर उनकी संभावित निर्भरता और सीमित foraging ranges अध्ययन में उठाई गई conservation चिंता के केंद्र में हैं।

Effective population decline का अर्थ

अध्ययन का अनुमान effective population size से संबंधित है, जो एक genomic measure है और पीढ़ियों के दौरान आबादी के बनाए रखे गए genetic contribution का अनुमान लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह जीवित मधुमक्खियों की केवल गिनती नहीं है। फिर भी इस माप में तेज कमी genetic diversity और resilience के गंभीर नुकसान का संकेत दे सकती है।

Fijian bee genomics show 99% decline in population since Europeans colonized Fiji
Demographic history of H. navai in Fiji in relation to human settlement and environmental change. Credit: Ecology and Evolution (2026). DOI: 10.1002/ece3.74366

रिपोर्ट इस परिणाम को pollinator decline का एक extreme example बताती है। Pollinators जंगली पौधों और कृषि उत्पादन का सहारा हैं, जबकि habitat loss और pesticide use ने दुनिया भर में bees और butterflies की स्थिति को लेकर व्यापक चिंता बढ़ाई है।

यह निष्कर्ष क्यों महत्वपूर्ण है

  • यह प्रजाति forest-canopy specialist और संभवतः सीमित range वाली दिखाई देती है।
  • इसकी गिरावट का अनुमान लंबे ऐतिहासिक काल के genomic data से लगाया गया है।
  • यह काम दिखाता है कि कम नमूना लिए गए habitats कमजोर pollinator species को छिपा सकते हैं।
  • यह Fiji की endemic bee diversity और उन species पर निर्भर habitats को समझने की तात्कालिकता बढ़ाता है।

नया परिणाम अनुमानित गिरावट का कोई एक प्रमाणित कारण नहीं बताता। इसके बजाय यह demographic shift को उस समय-रेखा में रखता है जो European colonization के बाद Fiji में हुए बड़े मानवीय और पर्यावरणीय बदलावों से मेल खाती है। Authors के ecological observations बताते हैं कि इन छोटी, canopy-associated मधुमक्खियों का अध्ययन जारी रखना क्यों जरूरी है: जिन species को देखना कठिन होता है, वे conservation planning में आसानी से छूट भी सकती हैं।

Fijian Hylaeus group के लिए treetops का नियमित sampling शुरुआत में पहचान के लिए महत्वपूर्ण था। अब genomic evidence संकेत देता है कि इन मधुमक्खियों का वितरण, उनकी populations की संरचना और उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले forest plants दर्ज करना उनके भविष्य का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह लेख Phys.org की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें।

Originally published on phys.org