सेना का लेज़र कार्यक्रम प्रोटोटाइप से उत्पादन तक पहुंचा

अमेरिकी सेना ने directed-energy हथियारों में एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए AeroVironment को Enduring-High Energy Laser कार्यक्रम, या E-HEL, के लिए $464.8 मिलियन का उत्पादन अनुबंध दिया है. Defense News के उपलब्ध स्रोत पाठ के अनुसार, कंपनी ने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास का पहला production contract for a directed energy system बताया. यह घोषणा counter-drone रक्षा में सिर्फ एक और विकास चरण नहीं है. यह संकेत देती है कि कम-से-कम एक वर्ग का सैन्य लेज़र प्रयोग से आगे बढ़कर योजनाबद्ध बड़े पैमाने की तैनाती की ओर जा चुका है.

यह अनुबंध इस सप्ताह Other Transaction Agreement के तहत दिया गया और इसमें दर्जनों 30-kilowatt LOCUST laser weapons की आपूर्ति शामिल है. ये प्रणालियां छोटे मानवरहित विमानों को निष्क्रिय करने के लिए बनाई गई हैं, विशेषकर Defense Department की class one से class three श्रेणियों में आने वाले लक्ष्यों के लिए. स्रोत पाठ के अनुसार, यह दायरा Air Force के Wasp III जैसे miniature systems से लेकर Army के RQ-7B Shadow जैसे बड़े ड्रोन तक फैला है.

जब सेनाएं कम लागत वाले ड्रोन की बड़ी संख्या से निपटने के लिए सस्ते और अधिक टिकाऊ तरीकों की तलाश में हैं, तब यह उत्पादन निर्णय अलग दिखता है. मिसाइलों से मानवरहित विमानों को रोकने के बजाय, E-HEL एक laser beam का उपयोग करता है और अपनी magazine को प्रभावी रूप से सिस्टम की power supply से पुनः भर सकता है. यही directed energy का वर्षों से मुख्य आकर्षण रहा है: प्रति शॉट कम लागत, power द्वारा सीमित गहरी magazine, और महंगे interceptors को जल्दी खत्म किए बिना बार-बार आने वाले drone threats से निपटने की क्षमता.

यह अभी क्यों महत्वपूर्ण है

ड्रोन खतरों के युद्धक्षेत्रों और airspace security environments में बढ़ने के साथ lasers के लिए सैन्य तर्क और अधिक तात्कालिक हो गया है. छोटे और मध्यम मानवरहित विमान अनदेखा करना कठिन हैं, क्योंकि वे अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, समूह में आ सकते हैं, और अधिक महंगी मिसाइलों पर आधारित पारंपरिक air defense systems पर दबाव डाल सकते हैं. सेना का उत्पादन की ओर बढ़ना बताता है कि वह मानती है कि कम-से-कम एक laser configuration operational counter-drone defense में योगदान देने के लिए तैयार है, न कि केवल प्रौद्योगिकी प्रदर्शन तक सीमित है.

स्रोत पाठ में Army Vice Chief of Staff Gen. Christopher LaNeve का बयान शामिल है, जिन्होंने कार्यक्रम को operational terms में रखकर कहा कि यह formations को unmanned systems हराने और adversaries पर बढ़त बनाए रखने में मदद करेगा. यह सेना की व्यापक चुनौती को दर्शाता है: तेज़ी से बदलते drone threats के विरुद्ध नई रक्षा प्रणालियों को इस तरह जोड़ना कि वे वास्तविक deployments में चल सकें.

E-HEL प्रणाली इसी व्यावहारिक आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाई गई लगती है. कुछ पहले के laser प्रयासों के विपरीत, जो किसी एक vehicle से काफ़ी जुड़े थे, AeroVironment का LOCUST X3 platform-agnostic बताया गया है और इसे Army के Joint Light Tactical Vehicle, या JLTV, पर लगाया जा सकता है. यह लचीलापन महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि सेवा layered air defense में lasers की भूमिका तय कर रही है और उन्हें frontline units के साथ कैसे चलाया जाए, यह देख रही है.

पहले की निराशा के बाद एक ज़रूरी जीत

यह उत्पादन स्वीकृति ऐसे कार्यक्रम क्षेत्र में आई है जिसे सफलता के लिए आसान रास्ता नहीं मिला. Defense News के अनुसार, यह घोषणा Middle East में Army के Directed Energy Maneuver Short-Range Air Defense, या DE M-SHORAD, के प्रदर्शन पर सैनिकों की निराशाजनक प्रतिक्रिया के बाद एक बहुत आवश्यक जीत है. वह पिछला प्रयास Stryker combat vehicle के लिए बनाया गया था, और उसकी मिश्रित प्रतिक्रिया ने तैयारियों, परिचालन अनुकूलता, और यह कि क्या सेना directed-energy promise को भरोसेमंद field capability में बदल सकती है, इस पर सवाल उठाए थे.

उस पृष्ठभूमि में, E-HEL का महत्व उसके अनुबंध मूल्य से कहीं आगे जाता है. यह इस बात की परीक्षा है कि क्या सेना prototype-era सीमाओं से सीखकर अधिक उपयोगी प्रणाली की ओर बढ़ सकती है. स्रोत पाठ नए कार्यक्रम को Army Multi-Purpose High Energy Laser prototypes से जोड़ता है, जो अभी अमेरिकी सैनिकों द्वारा उपयोग में हैं, जिससे लगता है कि E-HEL कोई पूरी तरह नया छलांग नहीं, बल्कि iterative development path का हिस्सा है.

यह निरंतरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य प्रौद्योगिकी कार्यक्रम अक्सर इसलिए नहीं विफल होते कि भौतिकी असंभव है, बल्कि इसलिए कि वास्तविक वातावरण, mobility आवश्यकताएं, रसद मांगें, और operator expectations शुरुआती demos में छिपी खामियों को उजागर कर देते हैं. उत्पादन अनुबंध पर सेना की सहमति दिखाती है कि उसने इस कार्यक्रम को पहले के प्रयोगों से ऊपर का भरोसा दिया है.

परीक्षण और घरेलू airspace validation

इस घोषणा का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे संभव किसने बनाया. स्रोत पाठ कहता है कि यह अनुबंध White Sands Missile Range में सफल LOCUST testing के बाद आया, जिसका नेतृत्व Joint Interagency Task Force 401 और PAE Fires ने किया. उन परीक्षणों ने कथित तौर पर अमेरिकी airspace में सुरक्षित और प्रभावी counter-drone operations दिखाईं और सीधे एक Department of Defense तथा Federal Aviation Administration सुरक्षा समझौते को सक्षम किया, जिसने प्रणाली को घरेलू उपयोग के लिए मान्य किया.

यह विवरण आसानी से छूट सकता है, लेकिन इसका महत्व है. Counter-drone हथियारों को सिर्फ target hit करने की क्षमता से नहीं आंका जाता. उन्हें नियंत्रित वातावरणों में और airspace नियमों के भीतर सुरक्षित रूप से काम करना भी चाहिए, विशेषकर संयुक्त राज्य के भीतर. रक्षा और विमानन प्राधिकरणों दोनों को शामिल करने वाला validation pathway दिखाता है कि सेना और उसके भागीदार नई air defense systems की सबसे कठिन transition समस्याओं में से एक को हल कर रहे थे: यह साबित करना कि वे नियमन वाले वातावरण में बिना अस्वीकार्य खतरे पैदा किए काम कर सकती हैं.

Directed-energy प्रणालियों के लिए, ऐसा validation raw power output जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है. जो हथियार रेंज पर काम करता है लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग के लिए clear नहीं हो सकता, वह परिचालन रूप से सीमित रहता है. White Sands परीक्षण और उसके बाद का सुरक्षा समझौता इसलिए एक promising prototype को producible program में बदलने के प्रमुख चरण लगते हैं.

उत्पादन क्या साबित करता है और क्या नहीं

सेना का निर्णय महत्वपूर्ण है, लेकिन combat lasers के भविष्य के बारे में हर सवाल हल नहीं करता. उत्पादन का मतलब है कि सेवा को पर्याप्त मूल्य दिखा कि वह दर्जनों प्रणालियां खरीदे और तैनात करे. इसका मतलब यह नहीं कि lasers पारंपरिक air defense की जगह ले लेंगे, और न ही यह गारंटी है कि सभी deployment चुनौतियां हल हो चुकी हैं. स्रोत पाठ एक संकीर्ण निष्कर्ष का समर्थन करता है: सेना ने counter-drone मिशन के लिए ऐसा 30-kilowatt laser पहचाना है जो procurement के लायक maturity तक पहुंच गया है.

यह भी काफी महत्वपूर्ण है. रक्षा प्रौद्योगिकी अक्सर व्यापक विस्तार से पहले mission-specific adoption के माध्यम से आगे बढ़ती है. यदि E-HEL अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन करता है, तो यह और अधिक directed-energy भूमिकाओं के लिए तर्क को मजबूत कर सकता है. यदि यह कमज़ोर पड़ता है, तो यह इस धारणा को मज़बूत करेगा कि lasers अभी भी niche और operationalize करने में कठिन हैं. किसी भी स्थिति में, उत्पादन अनुबंध बहस को सिद्धांत से fielded evidence की ओर ले आता है.

AeroVironment के लिए यह एक बड़ा औद्योगिक मील का पत्थर है. सेना के लिए यह एक रणनीतिक दांव है कि counter-drone युद्ध को केवल missile-based defenses के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. और व्यापक रक्षा क्षेत्र के लिए यह अब तक के सबसे साफ संकेतों में से एक है कि directed energy एक अधिक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है: सिर्फ शोध एजेंडा नहीं, बल्कि near-term operational demand से जुड़ा acquisition program.

यह बदलाव वर्षों से अपेक्षित था. E-HEL के साथ, सेना अब वास्तविक उत्पादन धन लगा रही है ताकि यह परखा जा सके कि lasers आधुनिक air defense का टिकाऊ हिस्सा बन सकती हैं या नहीं.

यह लेख Defense News की रिपोर्टिंग पर आधारित है. मूल लेख पढ़ें.

Originally published on defensenews.com