सेना पहले ही विमान से आगे, उसके पीछे मौजूद सहायता नेटवर्क के बारे में सोच रही है
अमेरिकी सेना की अगली पीढ़ी की टिल्टरोटर योजनाएं केवल एक विमान को बदलने के बारे में नहीं हैं। वे उस संचालन अवधारणा को बनाने के बारे में भी हैं, जो उस विमान को उसकी पूरी रेंज और मिशन क्षमता तक पहुंचने देगी। इसी कारण एक नया विचार, जिस पर अब ध्यान जा रहा है, महत्वपूर्ण है: सेना यह विचार कर रही है कि क्या भविष्य के ड्रोन टैंकर उसके MV-75A Cheyenne II को उड़ान के दौरान ईंधन दे सकते हैं।
प्रदान किए गए स्रोत पाठ के अनुसार, सेना के अधिकारियों और Bell ने एक ऐसे भविष्य की ओर संकेत किया है, जिसमें अमेरिकी नौसेना के MQ-25 Stingray जैसे टैंकर ड्रोन नए टिल्टरोटर बेड़े का समर्थन कर सकते हैं। तात्कालिक संदर्भ सेना की उस रुचि से जुड़ा है, जिसके तहत वह MV-75A बल के कम से कम एक हिस्से को probe-and-drogue हवाई ईंधन भराई के लिए कॉन्फ़िगर करना चाहती है। एक बार जब यह क्षमता विमान में होगी, तब अगला प्रश्न अनिवार्य हो जाता है: टैंकर क्षमता कहां से आएगी?
स्रोत सामग्री उत्तर को काफी स्पष्ट बनाती है। सेना के पास फिलहाल अपनी कोई जैविक टैंकर क्षमता नहीं है, जिससे बिना चालक वाले टैंकर समर्थन का विकल्प आकर्षक बन जाता है। यदि सेवा Cheyenne II की गति और रेंज के लाभों का उपयोग करना चाहती है, तो उसे उन विमानों को दूरी पर बनाए रखने का एक व्यावहारिक तरीका चाहिए, खासकर उन अभियानगत अभियानों में जहां स्थायी ढांचा सीमित हो सकता है।
MQ-25 उदाहरण है, भले ही अवधारणा इससे व्यापक हो
प्रदान की गई रिपोर्टिंग में नौसेना का MQ-25 Stingray नामित संदर्भ बिंदु है। हालांकि इसे विमानवाहक संचालन के लिए बनाया गया है, स्रोत बताता है कि इसकी लंबी endurance इसे भूमि-आधारित अड्डों से भी उपयोगी बना सकती है। यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि सेना को जरूरी नहीं कि ऐसा टैंकर ड्रोन चाहिए जो नौसेना की प्रणाली जैसा बिल्कुल दिखे। उसे इस बात का प्रमाण चाहिए कि बिना चालक वाला ईंधन-भराई समर्थन विश्वसनीय, निरंतर और उन प्रकार के थिएटरों में तैनात किया जा सकता है, जहां सेना की उड्डयन इकाइयों के संचालन की उम्मीद है।
इस अर्थ में MQ-25 एक प्रौद्योगिकी और सिद्धांत का संकेतक है। यह दिखाता है कि बिना चालक वाले विमान अब केवल निगरानी या हमले के समर्थन भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। वे तेजी से ऐसी लॉजिस्टिक्स और sustainment मिशनों के उम्मीदवार बन रहे हैं, जो सीधे मानव-चालित अभियानों को सक्षम बनाते हैं। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। एक टैंकर ड्रोन केवल सूची में एक और मंच नहीं जोड़ता। यह बदल देता है कि एक बल कितनी दूर और कितने लचीले ढंग से वायु शक्ति का प्रक्षेपण कर सकता है।
स्रोत यह भी बताता है कि सेना अपनी H-60 Black Hawk बेड़े के एक बड़े हिस्से को MV-75A से बदलने की योजना बना रही है। यही बदलाव ईंधन भराई को महत्वपूर्ण बनाता है। Cheyenne II का उद्देश्य सेवा की गति और रेंज बढ़ाना है। लेकिन जब विमान मार्ग में ही बनाए रखे जा सकें, बजाय इसके कि वे पूरी तरह अग्रिम तैनाती या छोटी दूरी के संचालन पर निर्भर रहें, तब ये लाभ और आगे तक बढ़ जाते हैं।
विशेष अभियान की ज़रूरतें शुरुआती उपयोग-केस को आकार दे सकती हैं
लेख विशेष रूप से 160th Special Operations Aviation Regiment, यानी Night Stalkers, को एक संभावित शुरुआती प्राप्तकर्ता के रूप में उजागर करता है, जिसे ईंधन भराई-सक्षम संस्करण मिल सकता है। यह विवरण महत्वपूर्ण है क्योंकि विशेष अभियान इकाइयां अक्सर नए विमानन विचारों को पहले अपनाती हैं, खासकर जब वे विचार लंबी दूरी के प्रवेश, निकासी और समय-संवेदनशील मिशनों का समर्थन करते हैं।
यदि MV-75A का विशेष अभियान संस्करण उड़ान में ईंधन भराई क्षमता प्राप्त करता है, तो ड्रोन टैंकर ठीक उन्हीं मिशन-सेटों में विशेष रूप से प्रासंगिक हो सकते हैं जहां लचीलापन और दूरी सबसे अधिक मायने रखते हैं। उन परिदृश्यों में, बिना चालक वाले टैंकरों का मूल्य केवल दक्षता नहीं है। यह कमजोर मध्यवर्ती अड्डों पर निर्भरता कम करने और अधिक वितरित पैटर्न में विमानों का समर्थन करने की क्षमता है।
यहीं पर बिना चालक वाला समर्थन संचालन के लिहाज़ से अधिक elegant दिखने लगता है। हर समर्थन भूमिका के लिए सीमित चालक-चालित परिसंपत्तियों का उपयोग करने के बजाय, एक टैंकर ड्रोन अतिरिक्त क्रू जोड़े बिना रेंज बढ़ा सकता है। इससे जनशक्ति की मांग सरल हो सकती है और योजना के विकल्प व्यापक हो सकते हैं।
अवधारणा अभी भी भविष्यवादी है, लेकिन तर्क मजबूत है
प्रदान की गई सामग्री में ऐसा कुछ नहीं है जिससे लगे कि सेना के ड्रोन टैंकर तुरंत एक fielded program के रूप में आने वाले हैं। रिपोर्टिंग इस विचार को एक खोजे जा रहे भविष्य के रूप में प्रस्तुत करती है, न कि एक पूर्ण खरीद के रूप में। लेकिन तर्क पहले से ही स्पष्ट है। एक नया लंबी दूरी वाला टिल्टरोटर प्लेटफ़ॉर्म हवाई ईंधन भराई की मांग पैदा करता है। सेना के पास अपने जैविक टैंकर नहीं हैं। मौजूदा बिना चालक वाले टैंकर उदाहरण दिखाते हैं कि यह श्रेणी संभव है। संस्थागत हिस्से मेल खाते दिखते हैं।
यही कारण है कि यह कहानी अभी उल्लेखनीय है। यह दिखाती है कि सेना सिस्टम के बारे में सोच रही है, सिर्फ प्लेटफ़ॉर्म के बारे में नहीं। एक तेज़, अधिक लंबी-टांगों वाला विमान खरीदना पहला कदम है। उस समर्थन संरचना को बनाना, जो उस विमान को वास्तविक रणनीतिक पहुंच के साथ संचालित होने दे, दूसरा कदम है। ड्रोन टैंकर उस दूसरी समस्या पर सटीक बैठते हैं।
यदि यह अवधारणा परिपक्व होती है, तो यह सेना की विमानन सिद्धांत में एक महत्वपूर्ण विकास का संकेत दे सकती है: मिशन के लिए मानव-चालित विमान, और उस सक्षम परत के लिए बिना चालक वाले विमान, जो मिशन को आगे बढ़ाए रखती है। एक ऐसे बल के लिए, जो अधिक दूर, अधिक तेज़ और अधिक अभियानगत स्वतंत्रता के साथ काम करना चाहता है, यह कोई गौण विचार नहीं है। यह भविष्य के एयर-असॉल्ट इकोसिस्टम की एक गंभीर झलक है।
- सेना यह जांच रही है कि क्या ड्रोन टैंकर MV-75A Cheyenne II को उड़ान में ईंधन दे सकते हैं।
- अधिकारियों और Bell ने नौसेना के MQ-25 Stingray को संभावित रूप से क्या संभव हो सकता है, इसके उदाहरण के रूप में पेश किया है।
- यह अवधारणा सेना की जैविक टैंकर क्षमता की कमी को दूर कर सकती है और भविष्य के टिल्टरोटर संचालन की पहुंच बढ़ा सकती है।
यह लेख twz.com की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

