AI उछाल को निशाना बनाती जलवायु मांग

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियों से अपने संचालन की पर्यावरणीय लागतें सार्वजनिक करने की अपील की है। उन्होंने इसे AI डेटा सेंटर्स के तेज विस्तार के प्रति एक आवश्यक पारदर्शिता प्रतिक्रिया बताया। लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में दिए गए वक्तव्य में गुटेरेस ने जिसे उन्होंने “AI Environmental Transparency Initiative” कहा, उसका प्रस्ताव रखा और कंपनियों से अपने सिस्टमों से जुड़े कार्बन प्रदूषण, पानी की खपत और भूमि उपयोग को मापकर प्रकाशित करने का आग्रह किया।

यह हस्तक्षेप AI अवसंरचना को लेकर वैश्विक चर्चा में एक अधिक तीखे मोड़ को दर्शाता है। पिछले दो वर्षों में सार्वजनिक बहस का अधिकांश हिस्सा मॉडल क्षमताओं, चिप आपूर्ति, निवेश प्रवाह और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित रहा है। इसके बजाय, गुटेरेस एक अधिक भौतिक प्रश्न पर जोर दे रहे हैं: AI प्रणालियों को प्रशिक्षित और चलाने के लिए जिन सुविधाओं की जरूरत है, वे कितना भौतिक बोझ पैदा कर रही हैं, और जब कंपनियां उसे स्पष्ट रूप से नहीं बतातीं, तो उस बोझ को कौन उठाता है?

उनका संदेश सीधा था। उन्होंने कहा कि डेटा-सेंटर विस्तार की मेजबानी करने वाले समुदायों को अक्सर उनके आसपास बन रही अवसंरचना के पर्यावरणीय प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर नहीं दी जाती। बिजली मांग, पानी के दबाव, भूमि उपयोग और उत्सर्जन लेखांकन पर सरकारों और स्थानीय प्राधिकरणों पर बढ़ते दबाव के बीच, पारदर्शिता की इस कमी का बचाव करना कठिन होता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र क्या मांग रहा है

स्रोत रिपोर्ट में वर्णित प्रस्ताव का केंद्र पहले खुलासा है। गुटेरेस ने कहा कि AI कंपनियों को अपने संचालन से उत्पन्न प्रदूषण के साथ-साथ उन्हें सहारा देने के लिए आवश्यक पानी और भूमि के बारे में जानकारी का आकलन कर उसे जारी करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों को 2030 तक पवन और सौर जैसी नवीकरणीय तकनीकों से उत्पादित बिजली पर अपनी सुविधाएं चलाने की प्रतिबद्धता लेनी चाहिए।

यह संयोजन महत्वपूर्ण है। केवल उत्सर्जन के आंकड़े स्थानीय समझौतों को छिपा सकते हैं। कोई कंपनी जलवायु प्रभाव की एक श्रेणी को कम करते हुए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पानी सीमित है या भूमि उपयोग राजनीतिक रूप से विवादास्पद है, दूसरे तरह के दबाव को तेजी से बढ़ा सकती है। एक व्यापक रिपोर्टिंग ढांचा इन समझौतों को चुने हुए मीट्रिक के पीछे छिपाना कठिन बना देगा।

यह पहल मानकीकरण की ओर भी इशारा करती है। स्रोत सामग्री के अनुसार, राष्ट्रीय सरकारें और स्थानीय प्राधिकरण पहले से ही पूरे उद्योग में अधिक पारदर्शिता और अधिक सुसंगत रिपोर्टिंग के लिए दबाव डाल रहे हैं। व्यवहार में, इसका मतलब है कि अगली नीतिगत लड़ाई सिर्फ इस पर नहीं होगी कि कंपनियां प्रभावों का खुलासा करें या नहीं, बल्कि इस पर भी होगी कि वे उन्हें कैसे मापती हैं और क्या उनके तरीके अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों में तुलनीय हैं।

AI के पदचिह्न पर जांच क्यों बढ़ रही है

समय संयोग नहीं है। AI की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है, और ये मांगें कंप्यूटिंग वृद्धि के बारे में बिल्कुल अलग धारणाओं पर किए गए कॉर्पोरेट जलवायु वादों से टकरा रही हैं। कई बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने दशक के अंत तक स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से अपने संचालन को चलाने का वादा किया है। लेकिन AI प्रणालियों को तेजी से तैनात करने की दौड़ ने उन वादों को जटिल बना दिया है और, स्रोत रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी बढ़ाया है।

यह दबाव आंशिक रूप से संरचनात्मक है। नए स्वच्छ उत्पादन और ट्रांसमिशन को बनाना समय लेता है, नियामकीय बाधाओं का सामना करता है, और अक्सर स्थानीय विरोध में फंसता है। इसके विपरीत, डेटा-सेंटर की मांग जल्दी और बड़े पैमाने पर आ सकती है। यदि इन सुविधाओं के ऑनलाइन आने तक नवीकरणीय क्षमता तैयार नहीं है, तो संचालक अक्सर अब भी जीवाश्म ईंधनों पर भारी निर्भर ग्रिड मिश्रण की ओर लौटते हैं।

स्रोत में उद्धृत अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़े इस वास्तविकता का उपयोगी चित्र देते हैं। वैश्विक स्तर पर, डेटा सेंटर्स द्वारा खपत की जाने वाली बिजली का लगभग 30 प्रतिशत कोयला देता है, लगभग 27 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा, लगभग 26 प्रतिशत प्राकृतिक गैस, और लगभग 15 प्रतिशत परमाणु ऊर्जा देती है। भले ही नवीकरणीय विस्तार जारी है, रिपोर्ट कहती है कि आने वाले पांच वर्षों में मांग वृद्धि का केवल आधा हिस्सा ही नवीकरणीय ऊर्जा पूरा कर पाएगी।

यही अंतर समस्या का मूल है। AI कंपनियां भविष्य में स्वच्छ संचालन का वादा कर सकती हैं, लेकिन निकट अवधि का विस्तार अब भी कार्बन-गहन ऊर्जा प्रणालियों पर निर्भर रह सकता है। इसका नतीजा AI को एक दक्षता इंजन के रूप में देखने वाली छवि और आज उसे संभव बनाने वाली भौतिक प्रणालियों के बीच बढ़ता हुआ अंतर है।

अनुमानित वृद्धि का पैमाना

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के पीछे एक बड़ा रुझान है। स्रोत रिपोर्ट के अनुसार, AI को चलाने के लिए आवश्यक डेटा सेंटर्स ने 2025 में वैश्विक बिजली खपत का लगभग 1.5 प्रतिशत हिस्सा लिया और 2030 तक अनुमानित बिजली उपयोग के लगभग 3 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं। पांच वर्षों में हिस्से का दोगुना होना केवल एक सीमित अवसंरचना मुद्दा नहीं होगा। यह AI-संबंधित कंप्यूटिंग को राष्ट्रीय ऊर्जा योजना, क्षेत्रीय ग्रिड स्थिरता और जलवायु लेखांकन में एक बड़ा कारक बना देगा।

स्रोत में संदर्भित संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट ने यह भी कहा कि AI से जुड़ा पानी और ऊर्जा उपयोग तथा प्रदूषण सिर्फ चार वर्षों में दोगुना होगा। दिए गए पाठ में अतिरिक्त विवरण न होने के बावजूद, यह अनुमान समझाता है कि डेटा-सेंटर का स्थान तय करना क्यों अधिक विवादास्पद हो गया है। बिजली की मांग केवल बोझ का एक हिस्सा है। बड़े केंद्र शीतलन जल पर प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकते हैं, सबस्टेशन और ट्रांसमिशन अपग्रेड को प्रेरित कर सकते हैं, और उन समुदायों में भूमि-उपयोग संबंधी फैसलों को बदल सकते हैं जो सीधे आर्थिक लाभ साझा नहीं करते।

ये तनाव पहले ही AI की राजनीति बदलना शुरू कर चुके हैं। स्थानीय अधिकारी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले स्पष्ट रिपोर्टिंग चाहते हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय सरकारों पर AI वृद्धि को प्राथमिकता देने वाली औद्योगिक नीति और उत्सर्जन घटाने की मांग करने वाली जलवायु नीति के बीच संतुलन बनाने का दबाव है। गुटेरेस का प्रस्ताव दरअसल इन दोनों एजेंडाओं को एक ही फ्रेम में लाने की कोशिश करता है।

अवसर और सीमा

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की टिप्पणियों ने AI को केवल एक समस्या के रूप में पेश नहीं किया। स्रोत पाठ में कहा गया है कि गुटेरेस और अन्य लोगों ने जलवायु समाधानों को तेज करने, ऊर्जा दक्षता सुधारने और प्रदूषण तथा उत्सर्जन घटाने में AI की क्षमता पर भी जोर दिया है। यह निरंतर विस्तार के पक्ष में नीति तर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

लेकिन नया जोर यह है कि अवसंरचना लागतें अस्पष्ट रहने पर जलवायु लाभ का विश्वसनीय आकलन नहीं किया जा सकता। यह दावा कि AI ग्रिड को अनुकूलित करेगा, सामग्री खोज को तेज करेगा, या औद्योगिक दक्षता सुधार देगा, उन बिजलीघरों, पानी की निकासी और भूमि पदचिह्नों की गणना की जरूरत को समाप्त नहीं करता जिनकी मॉडल चलाने के लिए शुरुआत में आवश्यकता होती है।

इससे पारदर्शिता सिर्फ खुलासा का मुद्दा नहीं रह जाती। यह AI उद्योग के लिए वैधता का मुद्दा बनती जा रही है। अगर कंपनियां तेजी से विस्तार के लिए सार्वजनिक समर्थन चाहती हैं, तो उन्हें न सिर्फ यह दिखाना होगा कि उनके सिस्टम क्या कर सकते हैं, बल्कि यह भी कि वे पर्यावरण के लिहाज से कितनी लागत रखते हैं और समय के साथ उन लागतों को कैसे घटाया जा रहा है।

नीतिगत संकेत, अभी नियम नहीं

गुटेरेस का प्रस्ताव स्वयं कोई नया कानूनी दायित्व नहीं लगाता। लेकिन AI के भौतिक पदचिह्न को नियंत्रित करने के लिए भाषा और मानक तलाश रही सरकारों के समय में यह संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की ओर से एक मजबूत राजनीतिक संकेत है। निकट भविष्य का महत्व तात्कालिक अनुपालन से कम और इस बात को तय करने में अधिक हो सकता है कि भविष्य की अनुमति प्रक्रियाएं, रिपोर्टिंग नियम और खरीद मानक किस दिशा में जाएंगे।

AI क्षेत्र के लिए इसका मतलब है कि पर्यावरणीय प्रदर्शन नीति एजेंडा के केंद्र के और करीब आ रहा है। वह दौर, जब डेटा-सेंटर वृद्धि को मुख्य रूप से डिजिटल या नवाचार कहानी के रूप में पेश किया जा सकता था, सिमट रहा है। अब यह तेजी से ऊर्जा, पानी, भूमि और जलवायु की कहानी भी बन रहा है, और कठिन आंकड़ों की मांग अब केवल किनारे के आलोचकों से नहीं आ रही।

यह लेख Fast Company की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on fastcompany.com