IEEE इंजीनियरिंग शिक्षा की ओर एक व्यावहारिक मार्ग का विस्तार कर रहा है

IEEE का TryEngineering OnCampus कार्यक्रम पिछले एक वर्ष में दो विश्वविद्यालयों से बढ़कर सात हो गया है, जो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पहले और अधिक व्यावहारिक पहुंच के प्रति बढ़ती संस्थागत रुचि का संकेत देता है। IEEE Educational Activities द्वारा संचालित यह कार्यक्रम हाई स्कूल छात्रों को विश्वविद्यालय परिसरों में ले जाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सर्किट डिज़ाइन और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसे विषयों से व्यावहारिक रूप से परिचित कराता है।

यह प्रमुख शोध घोषणाओं या औद्योगिक लॉन्च की तुलना में भले ही मामूली लगे, लेकिन यह विस्तार महत्वपूर्ण है क्योंकि इंजीनियरिंग प्रतिभा की पाइपलाइन तब बनती है जब छात्र डिग्री चुनने से काफी पहले होते हैं। ऐसे कार्यक्रम जो किशोरों को वास्तविक शैक्षणिक वातावरण में रखते हैं, जहाँ सिद्धांत और अनुप्रयोग के बीच का संबंध स्पष्ट दिखता है, इस पर प्रभाव डाल सकते हैं कि कौन इंजीनियरिंग को सुलभ, प्रासंगिक और अपनाने योग्य मानता है।

पायलट स्तर से व्यापक दायरे तक

उपलब्ध स्रोत-पाठ एक तथ्य स्पष्ट करता है: TryEngineering OnCampus में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और यह दो विश्वविद्यालयों से बढ़कर सात तक पहुंच गया है। इस तरह की वृद्धि से लगता है कि यह पहल अब केवल अवधारणा-सिद्धि के चरण से निकलकर अधिक दोहराए जा सकने वाले मॉडल की ओर बढ़ रही है। केवल विस्तार प्रभाव को सिद्ध नहीं करता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि IEEE और भाग लेने वाले संस्थान प्रारूप को दोहराने के लिए पर्याप्त मूल्य देखते हैं।

लेख के अंश में इस कार्यक्रम को TryEngineering का हिस्सा बताया गया है और कहा गया है कि यह विश्वविद्यालयों के परिसरों में आयोजित होता है। उपलब्ध पाठ में शामिल एक उदाहरण ओमान के Majan University College में आयोजित एक कार्यक्रम है, जहाँ छात्रों ने सर्किट डिज़ाइन की अवधारणाओं का अध्ययन किया और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स अनुप्रयोगों के बारे में सीखा।

ये विवरण दिखाते हैं कि यह कार्यक्रम केवल निष्क्रिय करियर वार्तालापों तक सीमित नहीं है। यह शैक्षणिक वातावरण में तकनीकी सामग्री के साथ सीधे जुड़ाव पर जोर देता प्रतीत होता है, जो सामान्य STEM संदेशों की तुलना में अधिक प्रभावी हस्तक्षेप है।

इंजीनियरिंग में परिचय क्यों मायने रखता है

इंजीनियरिंग में भर्ती अक्सर एक पुरानी समस्या से जूझती है: कई छात्रों से इस क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्ध होने को तब कहा जाता है जब उन्होंने अभी तक यह नहीं देखा होता कि इंजीनियर वास्तव में क्या करते हैं। इससे भागीदारी सीमित हो सकती है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जिनके परिवार या स्कूल नेटवर्क तकनीकी करियर का रास्ता नियमित रूप से नहीं खोलते।

एक कैंपस-आधारित मॉडल इस अंतर को कई तरह से कम करने में मदद करता है। पहला, यह छात्रों को इंजीनियरिंग को एक जीवित अभ्यास के रूप में अनुभव करने देता है, न कि एक अमूर्त स्कूली विषय के रूप में। दूसरा, यह विश्वविद्यालयों को स्वयं को सुलभ गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर देता है। तीसरा, यह दिखाता है कि एआई और रोबोटिक्स जैसे समकालीन विषय सर्किट, सिस्टम और सेंसिंग जैसी आधारभूत अवधारणाओं से कैसे जुड़े हैं।

स्रोत-पाठ व्यापकता की ओर भी इशारा करता है। AI, रोबोटिक्स, सर्किट डिज़ाइन और IoT समानार्थी विषय नहीं हैं, और इन्हें साथ प्रस्तुत करना इस बात को दर्शाता है कि इंजीनियरिंग शिक्षा किस दिशा में विकसित हो रही है। जो छात्र अब इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, उनके लिए एक ही हार्डवेयर या सॉफ़्टवेयर खांचे में सीमित रहना कम संभावित है। जो कार्यक्रम इस वास्तविकता को प्रतिबिंबित करते हैं, वे अगली पीढ़ी को आकर्षित करने में बेहतर काम कर सकते हैं।

पहुंच बढ़ाना समाधान नहीं, लेकिन शुरुआत है

यह अतिशयोक्ति होगी कि एक आउटरीच कार्यक्रम कितना कर सकता है, इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाए। दो से सात विश्वविद्यालयों तक विस्तार अपने आप में इंजीनियरिंग शिक्षा की संरचनात्मक समस्याओं को हल नहीं करता, जिनमें स्कूल स्तर की असमान तैयारी, लागत संबंधी बाधाएँ या भागीदारी में जनसांख्यिकीय असंतुलन शामिल हैं। उपलब्ध स्रोत-पाठ में नामांकन, निरंतरता या दीर्घकालिक करियर परिणामों पर कोई डेटा नहीं दिया गया है, इसलिए ऐसे दावे यहाँ नहीं किए जा सकते।

फिर भी, प्रतीकात्मक आउटरीच और परिचालन आउटरीच में अंतर होता है। जब कोई कार्यक्रम कई परिसरों में चलता है, तो सामग्री को मानकीकृत करना, संचालनकर्ताओं को प्रशिक्षित करना, प्रारूपों को परिष्कृत करना और अलग-अलग संदर्भों में क्या काम करता है, इसकी तुलना करना आसान हो जाता है। उस अर्थ में, पैमाना स्वयं में एक नवाचार हो सकता है, इसलिए नहीं कि वह सफलता की गारंटी देता है, बल्कि इसलिए कि वह व्यवस्थित रूप से सीखने की परिस्थितियाँ बनाता है।

यह विशेष रूप से तब प्रासंगिक है जब इंजीनियरिंग क्षेत्र ऐसे प्रतिभा भंडार को फिर से भरने के दबाव में है, जिनमें बढ़ती हुई परस्पर निर्भरता है। AI हार्डवेयर पर निर्भर है, एम्बेडेड सिस्टम सॉफ़्टवेयर पर निर्भर हैं, और आधुनिक अवसंरचना दोनों पर निर्भर करती है। ऐसे परिचय कार्यक्रम, जो इन संबंधों को दिखाते हैं, छात्रों को इंजीनियरिंग को एक संकीर्ण साइलो के बजाय वास्तविक प्रणालियों पर काम करने के लिए उपकरणों के एक सेट के रूप में देखने में मदद कर सकते हैं।

विस्तार क्या संकेत देता है

TryEngineering OnCampus की वृद्धि से संकेत मिलता है कि पेशेवर समाज अभी भी इस बात को आकार देने में व्यावहारिक भूमिका निभाते हैं कि तकनीकी क्षेत्रों में कौन प्रवेश करता है। IEEE केवल एक प्रकाशक और मानक-निर्धारण निकाय नहीं है; शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह स्कूलों, विश्वविद्यालयों और उद्योग-उन्मुख अनुशासनों के बीच एक सेतु के रूप में भी काम कर रहा है।

यदि यह विस्तार जारी रहता है, तो अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह होगा कि क्या यह कार्यक्रम स्थायी परिणाम दिखा सकता है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जिनका इंजीनियरिंग मार्गों से अन्यथा सीमित संपर्क हो सकता है। फिलहाल, इस विकास को सबसे अच्छा एक अवसंरचना कहानी के रूप में समझा जा सकता है: एक मान्यता प्राप्त तकनीकी संगठन माध्यमिक शिक्षा और विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग वातावरण के बीच एक चौड़ा पुल बना रहा है।

  • IEEE का TryEngineering OnCampus कार्यक्रम दो विश्वविद्यालयों से बढ़कर सात तक पहुंच गया।
  • यह पहल हाई स्कूल छात्रों को AI, रोबोटिक्स, सर्किट डिज़ाइन और IoT का व्यावहारिक अनुभव देती है।
  • उपलब्ध स्रोत-पाठ में एक उदाहरण में ओमान के Majan University College में छात्रों द्वारा सर्किट और IoT अनुप्रयोगों की खोज दिखाई गई।
  • यह विस्तार प्रारंभिक इंजीनियरिंग आउटरीच के लिए व्यापक संस्थागत समर्थन का संकेत देता है, हालांकि परिणामों से संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया।

प्रतिभा की कमी, बहुविषयक तकनीक और तकनीकी साक्षरता की बढ़ती मांग के इस दौर में, इस तरह का सेतु-निर्माण पहली नज़र में जितना दिखता है, उससे अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

यह लेख IEEE Spectrum की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on spectrum.ieee.org