सेना को ऐसे मालवाहक वाहन चाहिए जो ट्रकों जैसे न दिखें
U.S. Army और व्यापक Department of Defense स्वायत्त रसद में और गहराई से उतर रहे हैं, ताकि ऐसे रोबोटिक कार्गो वाहन विकसित किए जा सकें जो मानव चालक के बिना आपूर्ति को युद्धक्षेत्र के और करीब ले जा सकें।
दिए गए New Atlas स्रोत पाठ के अनुसार, American Rheinmetall और Harbinger को नई पीढ़ी के ऐसे स्टील्थी, सस्ते और त्याग्य रोबोटिक ट्रकों पर काम करने के लिए चुना गया है। लक्ष्य किसी पारंपरिक ट्रक के केबिन को स्वचालित करना नहीं है। लक्ष्य है संघर्षपूर्ण वातावरण की मांगों के अनुरूप विशेष रूप से बने एक ऐसे attritable cargo platform का परिवार तैयार करना।
यह बदलाव एक कड़ी सैन्य सच्चाई को दर्शाता है। आधुनिक रसद नेटवर्क चाहे कितने भी उन्नत हों, एक बिंदु ऐसा आता ही है जब आपूर्ति को खतरे के बीच टूटी-फूटी ज़मीन पर ढोना पड़ता है। मोर्चे के जितना करीब माल जाता है, उसे ले जाने वाले लोगों की सुरक्षा उतनी ही कठिन हो जाती है।
यह नया कार्यक्रम इसी अंतर को कम करने के लिए है।
कंपनियाँ क्या ला रही हैं
स्रोत पाठ में वर्णित आधुनिकीकरण अनुबंध के तहत, American Rheinmetall combat vehicle integration, modular architecture, adaptable mission-kit interfaces और mission systems engineering संभालेगा। Harbinger commercially derived drive-by-wire hybrid-electric chassis और electrification technologies प्रदान करेगा।
यह जोड़ी बहुत कुछ बताती है। Rheinmetall को सैन्य वाहन एकीकरण का अनुभव है, जबकि Harbinger electrified drive-by-wire systems पर आधारित एक ऑटोमोटिव-शैली का प्लेटफ़ॉर्म दृष्टिकोण लाता है। इसलिए यह कार्यक्रम रक्षा आधुनिकीकरण और वाणिज्यिक वाहन प्रौद्योगिकी के संगम पर खड़ा है।
स्रोत पाठ कहता है कि प्रारंभिक ध्यान ऐसे autonomous tactical wheeled vehicles पर होगा जो युद्ध क्षेत्रों में काम कर सकें। लंबे समय में, यह प्रयास manned-unmanned teaming के लिए अनुकूलित robotic platforms तक विस्तार करेगा।
केबिन न होना क्यों महत्वपूर्ण है
स्रोत की सबसे उल्लेखनीय बातों में से एक यह है कि इन वाहनों में मानव चालक के लिए कोई जगह नहीं होगी। यह सिर्फ़ डिज़ाइन की नवीनता नहीं है। केबिन हटाने से वाहन के आकार, प्रोफ़ाइल, टिकाऊपन और लागत से जुड़े समझौते बदल जाते हैं।
यदि वाहन को चालक की सुरक्षा और सुविधा के इर्द-गिर्द नहीं बनाया गया है, तो उसे payload, profile और expendability के हिसाब से अधिक आक्रामक रूप से अनुकूलित किया जा सकता है। सैन्य संदर्भ में, यह attritable system की अवधारणा को मजबूत करता है: इतना उपयोगी कि बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सके, लेकिन इतना सस्ता भी कि contested environment में कुछ वाहनों का खो जाना स्वीकार्य हो।
यह दर्शन ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों में पहले से अधिक आम हो गया है। इसे ज़मीनी रसद पर लागू करना युद्ध के सबसे कम आकर्षक, लेकिन सबसे लगातार बने रहने वाले bottlenecks में से एक तक उसी तर्क को बढ़ाएगा।
स्टील्थ और हाइब्रिड प्रोपल्शन परिचालन विशेषताएँ हैं
स्रोत पाठ इस बात पर ज़ोर देता है कि ट्रक हाइब्रिड प्रोपल्शन का उपयोग करेंगे और इलेक्ट्रिक मोड में स्विच कर सकेंगे। इसे पर्यावरणीय विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक सामरिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इलेक्ट्रिक ड्राइव ध्वनिक और तापीय संकेतों को कम कर सकता है, जो उन क्षेत्रों में आपूर्ति मिशनों के लिए उपयोगी है जहाँ पहचान से बचना महत्वपूर्ण है। एक शांत, कम-संकेत वाला वाहन, जो गोला-बारूद, भोजन या उपकरण ले जा रहा हो, कुछ परिस्थितियों में पारंपरिक कार्गो ट्रक की तुलना में निशाना बनाना कहीं कठिन हो सकता है।
हाइब्रिड सिस्टम पूरी तरह इलेक्ट्रिक सैन्य रसद प्लेटफार्मों की तुलना में अधिक रेंज और परिचालन लचीलापन भी देते हैं, जिन्हें कठोर परिस्थितियों में अभी भी संघर्ष करना पड़ सकता है। यही संतुलन - स्टील्थी मूवमेंट और व्यावहारिक सहनशक्ति के बीच - शायद हाइब्रिड आर्किटेक्चर चुनने का एक प्रमुख कारण है।
यहाँ असली युद्धभूमि रसद है
सैन्य तकनीक की रिपोर्टिंग अक्सर मिसाइलों, विमानों और फ्रंटलाइन रोबोटिक्स की ओर आकर्षित होती है। लेकिन रसद ही तय करती है कि लड़ाकू इकाइयाँ लगातार कितने समय तक लड़ सकती हैं। स्रोत पाठ इसे स्पष्ट रूप से दिखाता है, यह नोट करते हुए कि विशाल राष्ट्रीय आपूर्ति प्रणालियों के बावजूद, अभी भी एक अंतिम-चरण समस्या बनी रहती है, जहाँ सैनिकों को अंततः भार हाथ से उठाना पड़ता है।
उस बोझ को कम करना तत्काल सामरिक मूल्य दे सकता है। इससे सैनिक कम थकेंगे, खतरनाक आपूर्ति मार्गों पर जोखिम कम होगा, और जटिल भूभाग में इकाइयों को बनाए रखने की गति बेहतर हो सकती है।
स्वायत्त ट्रक अपने आप में कोई नई अवधारणा नहीं हैं। स्रोत बताता है कि self-driving trucks 20 वर्षों से अधिक समय से मौजूद हैं, लेकिन आमतौर पर मानव-नियंत्रित convoy roles में। यहाँ जो बदल रहा है, वह परिचालन उद्देश्य है। पारंपरिक परिवहन को स्वचालित करने के बजाय, Pentagon ऐसा प्लेटफ़ॉर्म खोज रहा है जो शुरू से ही battlefield conditions के लिए autonomous military logistics को ध्यान में रखकर बनाया गया हो।
सफलता कैसी दिखेगी
यदि यह परियोजना अपने उद्देश्य के अनुसार काम करती है, तो सेना के पास युद्ध, sustainment और support missions के लिए एक scalable logistics tool हो सकता है। स्रोत पाठ इस लक्ष्य को ऐसे mass-producible, affordable robotic platforms के रूप में वर्णित करता है जिन्हें combat और logistics operations में इस्तेमाल किया जा सके।
उस विवरण में mass production एक महत्वपूर्ण शब्द है। robotic logistics vehicle का मूल्य तभी बहुत बढ़ता है जब उसे पर्याप्त मात्रा में तैनात किया जा सके और ज़रूरत पड़ने पर उसे expendable माना जाए। कुछ गिने-चुने, अत्यधिक जटिल autonomous cargo systems सेना की व्यापक supply समस्या हल नहीं कर पाएंगे।
modular architecture और mission-kit interfaces पर दिया गया ज़ोर भी दिखाता है कि Army एक ही तय ट्रक स्वरूप से आगे सोच रही है। एक प्लेटफ़ॉर्म परिवार अलग-अलग payloads या mission profiles को साझा autonomous और electrified base के साथ समर्थन दे सकता है।
बड़ा रुझान
यह कार्यक्रम एक व्यापक रक्षा प्रवृत्ति में फिट बैठता है: autonomy का उपयोग केवल sensing और strike के लिए नहीं, बल्कि उस मटेरियल की नियमित आवाजाही के लिए भी जो सैन्य अभियानों को संभव बनाती है। यह armed drones जितना नाटकीय न लगे, लेकिन यदि यह युद्ध की सबसे पुरानी कमजोरियों में से एक को कम करता है, तो उतना ही निर्णायक साबित हो सकता है।
निकट अवधि का परिणाम अभी विकास चरण में है, तैनाती में नहीं। लेकिन विचार साफ़ है। Army ऐसे robotic cargo vehicles का समर्थन कर रही है जो पारंपरिक truck cab को autonomy, hybrid-electric drive और battlefield survivability logic के लिए छोड़ देते हैं। इसका परिणाम एक ऐसा logistics platform हो सकता है जो कम दिखे, कम खर्चीला हो और जब रास्ता खतरनाक हो जाए, तब सैनिकों को steering wheel के पीछे बैठाने पर कम निर्भर हो।
यह लेख New Atlas की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on newatlas.com


