गतिशीलता-आधारित थेरेपी PTSD इलाज में तेजी पकड़ रही है
आल्बर्टा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, चलने को ट्रॉमा-स्मृतियों पर निर्देशित एक्सपोज़र के साथ जोड़ने वाली एक असामान्य मनोचिकित्सा, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के इलाज के रूप में मजबूत उम्मीद दिखा रही है। मल्टी-मोडल मोशन-असिस्टेड मेमोरी डीसेंसिटाइज़ेशन एंड रीकॉन्सॉलिडेशन, या 3MDR, नाम की यह विधि मरीजों से कहती है कि वे ट्रेडमिल पर चलते हुए अपने पिछले ट्रॉमा से जुड़े, स्वयं चुने हुए चित्रों और संगीत का थोड़े समय के लिए सामना करें।
यह विचार अपरंपरागत लग सकता है, लेकिन शोधकर्ताओं का तर्क है कि गति लोगों के परेशान करने वाली स्मृतियों से जुड़ने के तरीके को बदल देती है। फ्रीज़ प्रतिक्रिया में अटके रहने या अत्यधिक फाइट-ऑर-फ्लाइट स्थिति में रहने के बजाय, चलते हुए मरीज उन स्मृतियों को बेहतर ढंग से संसाधित कर सकते हैं। दिए गए स्रोत पाठ में, आल्बर्टा विश्वविद्यालय के अन्वेषक इस थेरेपी को अपने काम की सबसे आशाजनक हस्तक्षेपों में से एक बताते हैं और कहते हैं कि यह कुछ ही हफ्तों में ऐसे लाभ दे सकती है, जिनमें अन्यथा वर्षों लग सकते थे।
ऐसे दावे को सावधानी से परखना चाहिए, खासकर मानसिक स्वास्थ्य में, जहां शुरुआती उत्साह टिकाऊ सबूतों से आगे निकल सकता है। फिर भी यह रिपोर्ट उल्लेखनीय है, क्योंकि यह Brain and Behavior जर्नल में प्रकाशित एक पियर-रिव्यूड अध्ययन की ओर इशारा करती है और कनाडा में कई वर्षों से चल रहे एक क्लिनिकल शोध कार्यक्रम का वर्णन करती है, जो ट्रॉमा से गंभीर रूप से प्रभावित आबादी के साथ काम कर रहा है।
3MDR कैसे काम करता है
3MDR सत्रों में, मरीज ट्रेडमिल पर चलते हैं और कुछ समय के लिए उन दृश्य और संगीत संकेतों के संपर्क में आते हैं, जिन्हें उन्होंने इस वजह से चुना होता है क्योंकि वे सीधे उनके ट्रॉमाटिक अनुभवों से जुड़े होते हैं। इस डिजाइन का उद्देश्य एक साथ कई चीजें करना प्रतीत होता है: मरीज को शारीरिक रूप से सक्रिय रखना, पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ना बनाए रखना, और ट्रॉमासंबंधी सामग्री को एक नियंत्रित चिकित्सीय माहौल में जागरूकता में लाना।
यहां गति को केवल एक तिकड़म नहीं माना गया है। स्रोत पाठ में उद्धृत शोधकर्ताओं के अनुसार, चलना divergent thinking यानी भिन्न-भिन्न दिशाओं में सोचने की क्षमता को सहारा दे सकता है। एक ही भावनात्मक अंधी गली के इर्द-गिर्द घूमते रहने के बजाय, मरीज स्मृति को अलग कोण से देख सकते हैं और उसे संसाधित करने की ओर बढ़ सकते हैं। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई ट्रॉमा थेरेपी अंततः मरीजों को दर्दनाक अनुभवों पर लौटने में मदद करने पर निर्भर करती हैं, बिना उनके उनसे अभिभूत हुए।
स्रोत पाठ कहता है कि कुछ ही सत्र अपंग करने वाले ट्रॉमा को अधिक संभालने योग्य स्मृतियों में बदलना शुरू कर सकते हैं। अगर यह परिणाम दोहराया गया, तो यह एक महत्वपूर्ण विकास होगा। PTSD अक्सर बना रहने वाला, इलाज में कठिन, और काम, रिश्तों, नींद, तथा शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालने वाला होता है। प्रभावी लेकिन धीमी या भावनात्मक रूप से असहनीय थेरेपी कई मरीजों को लाभ दिखने से पहले ही इलाज छोड़ने पर मजबूर कर सकती हैं।
शोधकर्ताओं को क्यों लगता है कि गति महत्वपूर्ण है
यह थेरेपी एक आम अवलोकन पर आधारित है: शारीरिक गति मानसिक प्रक्रिया को बदल सकती है। बहुत से लोग अनौपचारिक रूप से बताते हैं कि चलने से उन्हें शोक, गुस्सा, चिंता या दर्दनाक स्मृतियों पर सोचने में मदद मिलती है। 3MDR इसी अंतर्ज्ञान को एक संरचित क्लिनिकल विधि में बदलने की कोशिश करता है। शरीर और मन को अलग रखने के बजाय, यह गति को चिकित्सीय तंत्र का हिस्सा बनाता है।
यह दृष्टिकोण ट्रॉमा के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हो सकता है, क्योंकि ट्रॉमा अक्सर केवल एक कथात्मक स्मृति नहीं, बल्कि एक शारीरिक अवस्था के रूप में भी अनुभव किया जाता है। मूल खतरा बीत जाने के बाद भी पीड़ित व्यक्ति सतर्कता, बचाव, या शारीरिक तनाव में फंसे हुए महसूस कर सकते हैं। भावनात्मक रूप से भारी सामग्री का सामना करते हुए लगातार आगे बढ़ने की आवश्यकता वाली थेरेपी उस चक्र को तोड़ने में मदद कर सकती है।
आल्बर्टा विश्वविद्यालय की टीम का कहना है कि यह हस्तक्षेप मरीजों को उनकी प्रोसेसिंग यात्रा पर उच्च स्तर का नियंत्रण देता है। यह विवरण नज़रअंदाज़ नहीं होना चाहिए। ट्रॉमा उपचार में नियंत्रण एक केंद्रीय मुद्दा है। PTSD आंशिक रूप से असहायता, घुसपैठ, और नियंत्रण-व्यवस्था के बाधित होने का विकार है। जो थेरेपी एजेंसी की भावना लौटाती हैं, वे लक्षणों में कमी जितनी ही सहनशीलता और इलाज के पालन को भी बेहतर बना सकती हैं।

फिर भी, मौजूदा रिपोर्ट ने वास्तव में क्या स्थापित किया है, उसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं कहना चाहिए। दिए गए स्रोत पाठ में अध्ययन के आकार, प्रभाव के आकार, तुलना समूहों, या ड्रॉपआउट दरों की विस्तृत जानकारी नहीं है। ये विवरण यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि निष्कर्षों को कितनी व्यापकता से लागू किया जा सकता है। किसी विशेष शोध कार्यक्रम में मिले आशाजनक परिणाम अपने आप इस बात का मतलब नहीं कि थेरेपी सार्वभौमिक रूप से लागू करने के लिए तैयार है।
किसे यह थेरेपी मिल रही है
स्रोत पाठ के अनुसार, आल्बर्टा विश्वविद्यालय में क्लिनिकल शोध कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में Heroes in Mind, Advocacy & Research Consortium, या HiMARC, के माध्यम से हुई थी। शुरुआत में इसका ध्यान उन समूहों पर था जिन्हें ट्रॉमा का विशेष रूप से अधिक सामना करना पड़ता है, जिनमें सैन्य सदस्य, वेटरन, फर्स्ट रिस्पॉन्डर, सार्वजनिक सुरक्षा कर्मी, और स्वास्थ्य देखभाल कर्मी शामिल थे। बाद में यह कार्यक्रम नागरिक आबादी तक भी फैल गया।
यह दिशा समझ में आती है। इन समूहों को अक्सर बार-बार ट्रॉमाटिक घटनाओं का सामना करना पड़ता है, और पारंपरिक इलाज तक पहुंच में बाधाएं भी मिल सकती हैं, चाहे वह कलंक हो, समय-सारिणी, पेशागत संस्कृति, या लक्षणों की तीव्रता। अगर 3MDR उन लोगों को जोड़ पाता है जिन्होंने अधिक स्थापित तरीकों पर अच्छा जवाब नहीं दिया है, तो यह मुख्यधारा की पहली-पंक्ति थेरेपी बनने से पहले भी एक महत्वपूर्ण खालीपन भर सकता है।
कनाडाई संदर्भ भी प्रासंगिक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह देश में अपनी तरह का एकमात्र क्लिनिकल शोध कार्यक्रम है। व्यवहार में इसका मतलब है कि थेरेपी अभी भी अपेक्षाकृत शुरुआती संस्थागत चरण में है। इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों, उपयुक्त सुविधाओं, और इस बारे में अधिक स्पष्ट साक्ष्य-आधार की जरूरत होगी कि किन मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलता है, लाभ कितने समय तक रहता है, और यह मौजूदा मानक देखभाल की तुलना में कैसा है।
PTSD देखभाल के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है
अगर बताए गए लाभ व्यापक अध्ययन में टिके रहते हैं, तो 3MDR मानसिक स्वास्थ्य उपचार में एक बढ़ते रुझान को मजबूत कर सकता है: ऐसे हस्तक्षेप जो संज्ञान, भावना, और शारीरिक अवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों के बजाय परस्पर-निर्भर मानते हैं। इससे ट्रॉमा देखभाल उस चीज़ के और करीब आ जाएगी जिसे चिकित्सक लंबे समय से व्यवहार में देखते आए हैं, यानी PTSD केवल अतीत को याद करने के बारे में नहीं, बल्कि वर्तमान में शरीर उसकी प्रतिक्रिया कैसे देता है, यह भी है।
यह उपचार समयसीमा को लेकर अपेक्षाएं भी बदल सकता है। दिए गए पाठ में एक उल्लेखनीय दावा यह है कि मरीज वर्षों के बजाय हफ्तों में सुधार कर सकते हैं और कम से कम एक साल तक बेहतर बने रह सकते हैं। यह एक ऐसे क्षेत्र में बहुत मूल्यवान परिणाम हैं, जहां पुरानी समस्याएं अक्सर लंबे सामाजिक और आर्थिक खर्च पैदा करती हैं। तेज सुधार न सिर्फ मरीजों के लिए, बल्कि परिवारों, कार्यस्थलों, और लंबे ट्रॉमा-संबंधी विकलांगता से जूझ रही स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए भी मायने रखेगा।
फिर भी, जिम्मेदार व्याख्या संतुलित होनी चाहिए। यह किसी इलाज की घोषणा नहीं है। यह एक पियर-रिव्यूड अध्ययन और सक्रिय शोध कार्यक्रम से मजबूत संभावनाओं की रिपोर्ट है, जिसे उन चिकित्सकों का समर्थन मिला है जो कहते हैं कि यह हस्तक्षेप उनके मरीजों में टिकाऊ सुधार ला रहा है। ध्यान आकर्षित करने के लिए इतना काफी है, लेकिन शुरुआती साक्ष्य, पुनरावृत्ति, और मानक अभ्यास के बीच सामान्य अंतर मिटाने के लिए नहीं।
अभी के लिए, 3MDR इसलिए अलग दिखता है क्योंकि यह अवधारणात्मक रूप से सरल और चिकित्सीय रूप से महत्वाकांक्षी दोनों है। यह आगे बढ़ने के एक परिचित कार्य को लेकर उसे ऐसी थेरेपी का हिस्सा बनाता है, जिसका लक्ष्य मरीजों को ट्रॉमा के आसपास नहीं, बल्कि उसके माध्यम से आगे बढ़ने में मदद करना है। ऐसे क्षेत्र में, जहां बहुत से मरीज अभी भी प्रभावी, सहनशील, और समय पर मिलने वाले उपचार खोजने में संघर्ष कर रहे हैं, यह एक ऐसा विकास है जिस पर करीब से नज़र रखना चाहिए।
यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
Originally published on medicalxpress.com



