एक परिचित नींद-सहायक को दर्द के लिए फिर से परखा जा रहा है

मेलाटोनिन को आमतौर पर लोग घर में अनिद्रा या बाधित नींद के लिए रखे जाने वाले सप्लिमेंट के रूप में जानते हैं। सिडनी विश्वविद्यालय के नए शोध से संकेत मिलता है कि इसका एक और उपयोग भी हो सकता है: दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल दर्द।

In a study published in PAIN, शोधकर्ताओं ने 2,028 वयस्कों से जुड़े 23 यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों के साक्ष्यों का विश्लेषण किया और पाया कि मेलाटोनिन ने 0 से 100 के पैमाने पर औसतन लगभग 9 अंकों तक दर्द कम किया। सबसे कठोर परीक्षणों में यह कमी लगभग 10 अंकों के करीब थी। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, यह प्रभाव-आकार ओपिओइड्स, नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाओं और पैरासिटामोल जैसी आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दर्द की दवाओं के समान दायरे में आता है।

इस निष्कर्ष का अर्थ यह नहीं है कि मेलाटोनिन अचानक मानक दर्द उपचार का सीधा विकल्प बन गया है। लेकिन यह अवश्य संकेत देता है कि पहले से व्यापक रूप से उपलब्ध, अपेक्षाकृत सस्ता, और मरीजों के लिए परिचित यह सप्लिमेंट, खासकर जहां नींद की समस्याएँ और दीर्घकालिक दर्द साथ-साथ हों, दर्द के बोझ को कम करने में व्यावहारिक भूमिका निभा सकता है।

अध्ययन ने क्या देखा

यह विश्लेषण अमेरिका, रूस, ब्राज़ील, मिस्र और चीन सहित कई देशों में किए गए परीक्षणों पर आधारित था। प्रतिभागियों में कमर दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, और फाइब्रोमायल्जिया जैसी स्थितियों से जीने वाले लोग, साथ ही संयुक्त प्रतिस्थापन और रीढ़ संबंधी प्रक्रियाओं सहित सर्जरी से उबर रहे मरीज भी शामिल थे।

यह व्यापक मिश्रण महत्वपूर्ण है। दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल दर्द एक ही बीमारी नहीं है, और रिकवरी से जुड़ा दर्द लंबे समय के दर्द सिंड्रोम जैसा नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों के साक्ष्यों को मिलाकर शोधकर्ता एक समग्र संकेत खोज रहे थे: क्या मेलाटोनिन विविध दर्द आबादियों में बार-बार दिखने वाला दर्द-राहत प्रभाव दिखाता है?

दिए गए सारांश के आधार पर उत्तर हाँ था। परीक्षणों ने संकेत दिया कि मेलाटोनिन कम दर्द स्कोर और बेहतर नींद की गुणवत्ता से जुड़ा था। दूसरा बिंदु विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दर्द और नींद अक्सर एक-दूसरे को बढ़ाते हैं। खराब नींद दर्द की अनुभूति को तीव्र कर सकती है, जबकि दर्द पुनर्स्थापनात्मक नींद हासिल करना कठिन बना सकता है।

यह फीडबैक लूप ही इस परिणाम को खास बनाता है। ऐसा उपचार जो एक साथ दोनों लक्षणों को बेहतर करता दिखे, दर्द पर उसके प्रभाव के मध्यम होने पर भी उपयोगी हो सकता है।

शोधकर्ता इसमें संभावना क्यों देख रहे हैं

अध्ययन के लेखक मेलाटोनिन को व्यापक ड्रग-रीपर्पजिंग अवसर का हिस्सा मानते हैं। बिल्कुल नई दवा को शुरू से विकसित करने के बजाय, रीपर्पजिंग यह पूछता है कि क्या पहले से किसी एक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हो रहा उपचार दूसरे उद्देश्य के लिए सुरक्षित और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। जब उपचार की सुरक्षा-प्रोफाइल पहले से अच्छी तरह समझी गई हो, तो यह तरीका समय घटा सकता है और अपनाने की बाधाएं कम कर सकता है।

इस मामले में आकर्षण स्पष्ट है। मेलाटोनिन पहले से कई घरों में मौजूद है, अपेक्षाकृत सस्ता है, और चिकित्सकों तथा मरीजों दोनों के लिए परिचित है। साथ ही, दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल दर्द व्यापक है, और स्रोत पाठ के अनुसार यह दुनिया भर में 47% तक लोगों को प्रभावित करता है। उच्च-जोखिम वाली दवाओं पर निर्भरता को सुरक्षित रूप से कम करने वाली कोई भी चीज ध्यान आकर्षित करेगी।

जोखिम-लाभ का यह संदर्भ महत्वपूर्ण है। कई मानक दर्द की दवाएं प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन उनके साथ समझौते भी होते हैं। ओपिओइड्स में निर्भरता और ओवरडोज के सुविदित जोखिम होते हैं। NSAIDs कुछ मरीजों में, खासकर लंबे उपयोग में, जठरांत्र, गुर्दे, और हृदय-वाहिकीय समस्याएं पैदा कर सकते हैं। यहां तक कि जिन्हें नियमित माना जाता है, वे भी तब समस्याग्रस्त हो सकते हैं जब दीर्घकालिक दर्द प्रबंधन महीनों या वर्षों तक चलता है।

इसलिए मेलाटोनिन के विकल्प के बजाय सहायक के रूप में काम करने की संभावना इस खोज का सबसे प्रासंगिक निहितार्थों में से एक है। यदि कुछ मरीज अधिक खतरनाक दवाओं पर अपनी निर्भरता थोड़ी कम कर सकें और साथ ही बेहतर सो भी सकें, तो यह उपचार-संयोजनों के बारे में चिकित्सकों की सोच बदल सकता है।

परिणाम क्या कहते हैं और क्या नहीं

अध्ययन-सारांश कई ठोस निष्कर्षों का समर्थन करता है। पहला, संयुक्त परीक्षण डेटा में मेलाटोनिन दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल दर्द में मापनीय कमी से जुड़ा था। दूसरा, इसने नींद की गुणवत्ता में सुधार किया। तीसरा, रिपोर्ट की गई दर्द-राहत की मात्रा कुछ व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली दर्द दवाओं के समान दायरे में थी।

उसी समय, स्रोत पाठ यह दावा नहीं करता कि मेलाटोनिन एक इलाज है, और न ही यह दिखाता है कि हर मरीज समूह को समान लाभ मिलता है। मेटा-विश्लेषण एक समग्र पैटर्न पहचान सकते हैं, लेकिन वे खुराक, अवधि, किन मरीजों में प्रतिक्रिया की अधिक संभावना है, और वास्तविक दुनिया की देखभाल में अन्य उपचारों के साथ यह सप्लिमेंट कैसे काम करता है, जैसे प्रश्न खुले छोड़ देते हैं।

सांख्यिकीय महत्व और नैदानिक निर्णय लेने में फर्क होता है। 100-अंकीय दर्द पैमाने पर 9 से 10 अंकों का सुधार कुछ मरीजों के लिए सार्थक हो सकता है और कुछ के लिए कम, यह आधारभूत दर्द, कार्यक्षमता, और लक्ष्यों पर निर्भर करता है। यही कारण है कि मेलाटोनिन के आशाजनक साक्ष्य से मानक दर्द-देखभाल मार्गदर्शन तक पहुंचने से पहले और शोध तथा स्पष्ट उपचार प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण होंगे।

फिर भी, दिया गया अध्ययन-सारांश अगला कदम उचित ठहराने के लिए पर्याप्त मजबूत संकेत का भरोसेमंद मामला बनाता है। साक्ष्य-आधार 2,000 से अधिक वयस्कों और 23 यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों तक फैला है, जो रीपर्पजिंग के तर्क के लिए ठोस आधार है।

यह रोज़मर्रा की देखभाल में क्यों मायने रखता है

दीर्घकालिक दर्द का प्रबंधन अक्सर फिजिकल थेरेपी, व्यायाम, व्यवहार-आधारित तरीकों, और दवाओं के संयोजन से किया जाता है। लेकिन व्यवहार में, दवा के विकल्प अभी भी जीवन-गुणवत्ता, साइड-इफेक्ट बोझ, और दीर्घकालिक सुरक्षा को आकार देते हैं। कम लागत वाला ऐसा विकल्प जो दर्द कम करने के साथ नींद में भी मदद करे, व्यापक, बहु-आयामी देखभाल मॉडल में स्वाभाविक रूप से फिट बैठता है।

यह उन मरीजों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हो सकता है जिनका दर्द अनिद्रा या टूटी हुई नींद से गहराई से जुड़ा होता है। चिकित्सक लंबे समय से जानते हैं कि दर्द अलग-थलग नहीं होता; यह ऊर्जा, मूड, गतिशीलता, और रिकवरी को प्रभावित करता है। दर्द और नींद के बीच का संबंध मेलाटोनिन के दोहरे संकेत को केवल एक संकीर्ण दर्द स्कोर की तुलना में अधिक प्रभावशाली बनाता है।

यह अध्ययन चिकित्सा में एक व्यापक बदलाव को भी दर्शाता है: पूरी तरह नई दवाओं का इंतजार करने के बजाय मौजूदा उपचारों के व्यावहारिक उपयोग खोजना। इससे वैज्ञानिक मानक कम नहीं होते। यह केवल साक्ष्य से प्रभाव तक पहुंचने का रास्ता बदलता है।

अभी के लिए, मुख्य निष्कर्ष संतुलित लेकिन महत्वपूर्ण है। मेलाटोनिन, जो आम तौर पर सोने की दिनचर्या से जुड़ा रहता है, दीर्घकालिक दर्द प्रबंधन में व्यापक नैदानिक भविष्य रख सकता है। यदि आगे का काम इन निष्कर्षों की पुष्टि करता है और यह पहचानता है कि लाभ कहां सबसे मजबूत है, तो कई दवा-अलमारियों की सबसे साधारण चीज़ों में से एक रोज़मर्रा की देखभाल में अधिक गंभीर भूमिका निभा सकती है।

यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on medicalxpress.com