पारदर्शिता का एक बुनियादी नियम अभी भी लगातार पूरा नहीं हो रहा है

एक नए विश्लेषण में पाया गया है कि एक महत्वपूर्ण यूरोपीय डेटाबेस में पंजीकृत नैदानिक अध्ययनों में से आधे से भी कम ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने परिणामों की रिपोर्ट की। एक अर्थ में यह एक सीमित निष्कर्ष है, लेकिन यह चिकित्सा अनुसंधान प्रशासन में एक व्यापक और लगातार बनी रहने वाली समस्या की ओर इशारा करता है: अध्ययन दर्ज तो किए जा रहे हैं, लेकिन समय पर सार्वजनिक रिपोर्टिंग अभी भी कम पड़ रही है।

यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रायल रजिस्ट्रियों का उद्देश्य नैदानिक शोध को अधिक जवाबदेह बनाना है। वे नियामकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, मरीजों और नीति-निर्माताओं को यह देखने की जगह देती हैं कि कौन से अध्ययन चल रहे हैं और उन्होंने क्या पाया। जब परिणाम देर से आते हैं या अधूरे रहते हैं, तो वह पारदर्शिता प्रणाली कमजोर पड़ जाती है।

समयबद्धता क्यों मायने रखती है

रिपोर्टिंग में देरी केवल प्रशासनिक विफलताएं नहीं हैं। वे प्रभावित करती हैं कि सबूत सार्वजनिक रिकॉर्ड में कितनी जल्दी प्रवेश करता है और बाहरी पर्यवेक्षक किसी उपचार क्षेत्र का कितना भरोसेमंद आकलन कर पाते हैं। यदि किसी रजिस्ट्री में समय-सीमा पार कर चुके या गायब परिणामों वाले अध्ययन हों, तो यह पूरी तस्वीर बनाना कठिन हो जाता है कि क्या काम आया, क्या विफल हुआ, और सुरक्षा से जुड़े कौन से सवाल अभी भी बने हुए हो सकते हैं।

प्रदत्त विश्लेषण विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित है कि परिणाम आवश्यक समय-सीमा के भीतर पोस्ट किए गए थे या नहीं, केवल इस पर नहीं कि वे अंततः दिखाई दिए या नहीं। यह अंतर महत्वपूर्ण है। समय पर खुलासा भी रजिस्ट्री के मूल्य का हिस्सा है। देर से किया गया खुलासा शोधकर्ताओं और निर्णयकर्ताओं को उस अवधि में अधूरे साक्ष्य-आधार के साथ काम करने के लिए छोड़ सकता है जब जानकारी सबसे अधिक आवश्यक थी।

यह निष्कर्ष अनुपालन के बारे में क्या बताता है

रिपोर्टिंग की समय-सीमा को आधे से भी कम अध्ययन पूरा कर पाए, यह संकेत देता है कि औपचारिक आवश्यकताएं स्थापित होने के बाद भी अनुपालन असंगत बना हुआ है। केवल नियमों का होना स्पष्ट रूप से त्वरित खुलासे की गारंटी नहीं देता।

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं: कमजोर प्रवर्तन, संस्थागत क्षमता में असमानता, पर्याप्त प्रोत्साहनों की कमी, या ऐसी संस्कृति जिसमें रजिस्ट्री रिपोर्टिंग अभी भी जर्नल प्रकाशन और वाणिज्यिक प्राथमिकताओं के मुकाबले गौण मानी जाती है। प्रदत्त स्रोत सामग्री किसी एक कारण का निर्धारण नहीं करती, लेकिन परिणाम इतना मजबूत है कि यह सवाल उठता है कि जवाबदेही की निगरानी कैसे की जा रही है।

एक रजिस्ट्री तभी अपने उद्देश्य की सेवा कर सकती है जब प्रायोजक और अन्वेषक परिणाम जमा करने को वैकल्पिक अंतिम चरण के बजाय एक मूल दायित्व मानें। जब ऐसा नहीं होता, तो सार्वजनिक डेटाबेस के शोध परिदृश्य का अधूरा नक्शा बन जाने का जोखिम रहता है।

Failure to report clinical trial data can affect future research strategies and patient safety.
APStock

जोखिम शोधकर्ताओं से आगे तक जाता है

अधूरी या विलंबित ट्रायल रिपोर्टिंग के प्रभाव अकादमिक कठोरता से आगे जाते हैं। मरीज इस अपेक्षा के साथ अध्ययन में भाग लेते हैं कि उनका योगदान चिकित्सा ज्ञान में मदद करेगा। स्वास्थ्य प्रणालियां और चिकित्सक उपचार साक्ष्य का आकलन करते समय एक यथोचित पूर्ण रिकॉर्ड पर निर्भर करते हैं। नियामक और निगरानी समूह रजिस्ट्रियों का उपयोग पैटर्न पहचानने, वादों की परिणामों से तुलना करने और यह पता लगाने के लिए करते हैं कि खुलासा कहां गायब है।

उस अर्थ में, रिपोर्टिंग अनुपालन कोई तकनीकी रखरखाव का मुद्दा नहीं है। यह नैदानिक अनुसंधान के सामाजिक अनुबंध का हिस्सा है। यदि अध्ययन किए जाते हैं लेकिन उनके परिणाम आवश्यक सार्वजनिक प्रणालियों में समय पर दिखाई नहीं देते, तो उस अनुबंध में विश्वास कमजोर पड़ सकता है।

अनुसंधान निगरानी में बार-बार सामने आने वाली समस्या

यह विश्लेषण बायोमेडिकल शासन में एक परिचित तनाव को भी उजागर करता है। पिछले दो दशकों में, चयनात्मक रिपोर्टिंग को चिकित्सा में एक संरचनात्मक कमजोरी माना गया, इसलिए ट्रायल पंजीकरण और सार्वजनिक प्रकटीकरण के नियमों का विस्तार हुआ। फिर भी, अनुपालन में अंतर दिखाने वाली हर नई समीक्षा यह संकेत देती है कि रिपोर्टिंग ढांचा बनाना उसे नियमित बनाना से आसान है।

यूरोपीय रजिस्ट्री का यह निष्कर्ष इसलिए एक बड़े पैटर्न में फिट बैठता है। पारदर्शिता तंत्र मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अभी भी मजबूत अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता है। उसके बिना, अच्छी तरह से डिजाइन किए गए डेटाबेस भी वह दृश्यता देने में विफल हो सकते हैं जिसके लिए उन्हें बनाया गया था।

आगे क्या देखना चाहिए

सबसे महत्वपूर्ण अनुत्तरित सवाल यह है कि संस्थान कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। इस तरह के स्पष्ट निष्कर्ष से यह जांच होनी चाहिए कि कौन से प्रकार के अध्ययन सबसे अधिक समय-सीमा चूकते हैं, कौन से प्रायोजक अधिक पीछे हैं, और गैर-अनुपालन पर क्या व्यावहारिक परिणाम सामने आते हैं।

प्रदत्त स्रोत सामग्री वे विभाजन नहीं देती, इसलिए शीर्ष-पंक्ति निष्कर्ष से आगे सामान्यीकरण करना जल्दबाजी होगी। लेकिन शीर्ष-पंक्ति ही करीब से ध्यान देने के लिए पर्याप्त है। यदि आधे से भी कम अध्ययन समय पर रिपोर्ट कर रहे हैं, तो समस्या मामूली नहीं है।

साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण पर तेजी से ध्यान देने वाली स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए यह असहज होना चाहिए। नैदानिक ट्रायल रजिस्ट्रियों का उद्देश्य सूचना की खाइयों को कम करना है। यह विश्लेषण बताता है कि यूरोप के एक महत्वपूर्ण डेटाबेस में अभी भी ऐसी खाइयां बहुत अधिक हैं।

यह लेख STAT News की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on statnews.com