पार्किंसन का एक करीबी निगरानी में रखा गया कार्यक्रम अपनी विकास यात्रा के एक हिस्से में अचानक रुक गया है
बायोजेन और डेनाली थेराप्यूटिक्स एक मध्य-चरण नैदानिक विफलता के बाद अपने पार्किंसन रोग दवा प्रयास के एक हिस्से से पीछे हट रही हैं। उम्मीदवार स्रोत के अनुसार, कंपनियों का LRRK2 inhibitor प्रारंभिक पार्किंसन रोग में Phase 2b परीक्षण में विफल रहा, जिसके बाद उन्होंने गैर-आनुवंशिक रोग वाले कुछ मरीजों में कार्यक्रम को छोड़ने का फैसला किया।
स्रोत से उपलब्ध संक्षिप्त विवरण में भी अर्थ स्पष्ट है। यह कोई नियमित पोर्टफोलियो फेरबदल या चुपचाप प्राथमिकता घटाना नहीं था। यह एक ऐसे परीक्षण परिणाम के बाद हुआ जो कार्यक्रम को कम-से-कम एक परिभाषित रोगी खंड में आगे बढ़ाने की कोशिश खत्म करने के लिए पर्याप्त मजबूत था।
यह झटका गैर-आनुवंशिक पार्किंसन रोग पर केंद्रित है
लेख का शीर्षक और अंश इस निर्णय को विशेष रूप से गैर-आनुवंशिक पार्किंसन रोग में रखते हैं। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन लोगों की आबादी को सीमित करता है जो कंपनियों के निर्णय से प्रभावित हैं। पार्किंसन शोध में अक्सर व्यापक आबादी के साथ-साथ अधिक लक्षित जैविक उपसमूहों पर भी प्रयास शामिल होते हैं। इस मामले में, स्रोत इस पीछे हटने को आनुवंशिक उपसमूह से बाहर के कुछ रोगियों पर लागू बताता है।
कंपनियों के उम्मीदवार को एक LRRK2 inhibitor, यानी एक छोटी-अणु दवा, के रूप में वर्णित किया गया है। स्रोत अध्ययन से पूरा डेटा उपलब्ध नहीं कराता, न ही यहां दिए गए अंश में विस्तृत प्रभावकारिता या सुरक्षा निष्कर्षों का वर्णन करता है। जो बात वह स्पष्ट करता है, वह परिणाम है: Phase 2b अध्ययन सफल नहीं हुआ, और कंपनियां निर्दिष्ट गैर-आनुवंशिक संदर्भ में कार्यक्रम छोड़कर प्रतिक्रिया दे रही हैं।
Phase 2b की चूक का महत्व क्यों है
Phase 2b अध्ययन विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में होता है। उस समय तक, कोई कार्यक्रम आम तौर पर इतना आगे बढ़ चुका होता है कि विफलता रणनीति में बड़ा बदलाव मजबूर कर सकती है। स्रोत ठीक इसी तरह की प्रतिक्रिया को दर्शाता है। बायोजेन और डेनाली केवल यह नहीं कह रहे कि उन्हें डेटा का विश्लेषण करने के लिए और समय चाहिए। वे कुछ मरीजों में कार्यक्रम को बंद करने की ओर बढ़ रहे हैं।
यह परिणाम दोनों कंपनियों के लिए उल्लेखनीय बन जाता है। बायोजेन लंबे समय से न्यूरोसाइंस और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग कार्य से जुड़ी रही है, जबकि डेनाली ने अपनी पहचान का बड़ा हिस्सा न्यूरोडीजेनेरेशन के इर्द-गिर्द बनाया है। इसलिए प्रारंभिक पार्किंसन में एक विफल मध्य-चरण अध्ययन केवल एक पंक्ति का मामला नहीं है। यह उन क्षेत्रों में से एक को प्रभावित करता है जहां दोनों कंपनियों ने मूल्य और विश्वसनीयता बनाने की कोशिश की है।
सीमित सार्वजनिक विवरण भी एक महत्वपूर्ण कहानी बताते हैं
इस कार्य के लिए उपलब्ध स्रोत पाठ संक्षिप्त है, लेकिन शीर्षक, अंश और दिखाई देने वाले स्टोरी टेक्स्ट में रिपोर्ट किए गए मुख्य तथ्य एक जैसे हैं। दवा अपने Phase 2b परीक्षण में विफल रही। शामिल रोगी आबादी प्रारंभिक पार्किंसन रोग थी। कंपनियां कुछ गैर-आनुवंशिक मरीजों में कार्यक्रम को छोड़ देंगी।
केवल ये तथ्य ही एक सतर्क लेकिन महत्वपूर्ण निष्कर्ष का समर्थन करते हैं: इस थेरेपी के लिए बायोजेन और डेनाली जिस विकास पथ पर आगे बढ़ रही थीं, वह उस खंड में इस अध्ययन के आधार पर अब व्यवहार्य नहीं रहा। दवा विकास में, यही एक बड़े झटके की व्यावहारिक परिभाषा है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि उपलब्ध सामग्री क्या स्थापित नहीं करती। यह नहीं कहती कि पूरा वैज्ञानिक विचार समाप्त हो गया है। यह हर उपसमूह के परिणामों का वर्णन नहीं करती। यह विस्तृत संख्यात्मक नतीजे नहीं देती या यह नहीं बताती कि क्या कोई संकीर्ण रास्ता अभी भी विचाराधीन है। क्योंकि ये विवरण दिए गए पाठ में मौजूद नहीं हैं, उन्हें मान लेना उचित नहीं होगा।
कंपनियों का यह कदम अब क्या संकेत देता है
जब कंपनियां एक परिभाषित आबादी में, एक विफल मध्य-चरण परीक्षण के तुरंत बाद, किसी कार्यक्रम को छोड़ देती हैं, तो आमतौर पर यह उस उच्च मानक को दर्शाता है जो उस रास्ते में निवेश जारी रखने के लिए जरूरी होता है। पार्किंसन रोग में नैदानिक विकास महंगा, लंबा और अनिश्चित होता है। विफल Phase 2b परिणाम के बाद आगे बढ़ने के लिए इतना मजबूत कारण चाहिए होता कि और समय और पूंजी उचित ठहराई जा सके। स्रोत बताता है कि बायोजेन और डेनाली ने इसके बजाय पीछे हटना चुना।
पार्किंसन पाइपलाइन पर नजर रखने वालों के लिए तात्कालिक महत्व इसी दिशा-परिवर्तन में है। कहानी सिर्फ यह नहीं है कि एक अध्ययन चूक गया। यह है कि दो महत्वपूर्ण जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों ने उस चूक को स्पष्ट पोर्टफोलियो परिणामों वाले विकास निर्णय में बदल दिया है।
मुख्य निष्कर्ष
प्रदान की गई सामग्री के आधार पर, शीर्षक सीधा है: बायोजेन और डेनाली का LRRK2 inhibitor प्रारंभिक पार्किंसन रोग में Phase 2b परीक्षण में सफल नहीं हुआ, और कंपनियां गैर-आनुवंशिक रोग वाले कुछ मरीजों में इस कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएंगी। जब तक पूर्ण परीक्षण डेटा सार्वजनिक नहीं किए जाते, यही वह सबसे मजबूत निष्कर्ष है जो उपलब्ध रिकॉर्ड समर्थित करता है।
ऐसे उद्योग में जहां कई कार्यक्रम चुपचाप विफल हो जाते हैं, यह मामला विकास के चरण, शामिल कंपनियों, और प्रतिक्रिया की सीधाई के कारण अलग दिखता है। पार्किंसन में एक मध्य-चरण चूक अब एक ठोस रणनीतिक पीछे हटने में बदल गई है।
यह लेख endpoints.news की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.
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